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आंकड़ों के दृश्यावलोकन बताते हैं ग्लोबल वार्मिंग का फैलाव

जीबीएसएनपी वर्मा,
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हाल ही में जारी की गई दो वैश्विक वार्मिंग डेटा की सर्पिल मानसदर्शन से पता चलता है कि किस प्रकार मानव गतिविधियां, बढ़ती कार्बन डाइऑक्साइड सांद्रता (सीओ 2) और बढ़ते तापमान से जुड़ी हैं।

 

पॉट्सडैम इन्स्टटूट  फॉर क्लाईमेट इंपैक्ट रिसर्च के रॉबर्ट गिएसक एवं मेलबर्न विश्वविद्यालय, एनिमेटेड GIFs (ग्राफिक आदान प्रारूप) और इंटरैक्टिव वर्ज़न के माल्ते मेनशाऊसेन के चित्रण से पता चलता है कि किस प्रकार 1850 से  वायुमंडलीय सीओ 2 एकाग्रता में 40 फीसदी की वृद्धि हुई है एवं कार्बन बजट का दो तिहाई जो 2 डिग्री सेल्सियस तक ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करने के लिए विश्व उपयोग कर सकती है, उसका पहले ही सेवन कर लिया गया है।

 

सर्पिल का इस्तेमाल एंटोनियो गबैगलियो, एक इतालवी सांख्यिकी प्रोफेसर द्वारा 1880 के दशक में किया गया था। एडवर्ड टफ्ट, एक अमेरिकी सांख्यिकीविद् और येल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमेरिटस, जो डाटा चित्रण के प्रथम अन्वेषक हैं, उन्होंने इसे “पूरी दुनिया को एक साथ लाने और देखने और किस प्रकार देखने और सोचने” के रुप में वर्णित किया है।

 

अपने मौजूदा काम के बारे में इंडियास्पेंड से बात करते हुए गिएसक ने बताया कि, “जटिल और बड़े डेटा समझ बनाने एवं प्रवृति चिन्हित करने में सक्षम होने के लिए चित्रण हमेशा से एक महत्वपूर्ण उपकरण रहा है – यहाँ हमने (ग्लोबल वार्मिंग) श्रृंखला दिखाई देने और दर्शकों के लिए लुभावना बनाने की कोशिश की है।”

 

तापमान सर्पिल

The Temperature Spiral

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Global-mean temperatures since 1850. Redrawing the original spirals by Ed Hawkins.

 

एकाग्रता सर्पिल

The Concentration Spiral

ConcentrationSpiral_small2

Global-mean CO2 concentrations since 1850.

 

कार्बन बजट सर्पिल

The Carbon Budget Spiral

CarbonBudgetSpiral_small2

The use of the global carbon budget—- a visualisation of the carbon space being used up.

Source: Australian-German Climate and Energy College

 

वर्तमान चित्रण, जलवायु वैज्ञानिक एड हॉकिन्स , ब्रिटेन विश्वविद्यालय में एक एसोसिएट प्रोफेसर, द्वारा बनाई गई  लोकप्रिय एनिमेटेड ग्राफिक, 1850 से 2016 सर्पिल वैश्विक तापमान, का विस्तार है।  हॉकिन्स ने सर्पिल शैली का इस्तेमाल किया है जो पत्थर की एक शांत झील में पटक कर पैदा की गई  चौड़े हलकों को दिखाता है।

 

गेएसक उनके प्रयास के बारे में कहते हैं, “जब हमने एड हॉकिन्स द्वारा मूल सर्पिल देखा, तब हम एकाग्रता और उत्सर्जन डेटा के साथ नए डेटासेट पर काम कर रहे थे, इसलिए हमने उन्हें सर्पिल शैली में चित्रण किया और उन्हें एक साथ देखा।”

 

इस बीच, हॉकिन्स, जो तापमान चित्रण में दिलचस्पी से प्रोत्साहित थे, ने  इस आर्कटिक समुद्र में बर्फ की मात्रा को जोड़ा वैश्विक तापमान सर्पिल अद्यतन किया। उनका काम क्लाईमेट लैब बुक विस्तृत है।

 

जब तीन दृश्यावलोकन – तापमान, एकाग्रता, और कार्बन बजट तापमान, एकाग्रता, और कार्बन बजट – को एकसाथ रखकर, एक साथ देखा जाता है, मानव प्रेरित उत्सर्जन के बीच संबंध, कार्बन डाइऑक्साइड सांद्रता – “कार्बन स्पेस” के रूप में प्रतिनिधित्व और वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि के स्पष्ट हो जाता है।

 

पेरिस, 2015 में संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन सम्मेलन ने 2 डिग्री सेल्सियस वैश्विक तापमान में वृद्धि को सीमित करने का लक्ष्य की पुष्टि की है जबकि 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि को सीमित करने के प्रयासों के आग्रह किया है।

 

1 दिसंबर, 2015 को इंडियास्पेंड ने बताया है कि किस प्रकार विश्व ने 2 डिग्री सेल्सियस तापमान – वृद्धि के लिए अपने कार्बन बजट का दो-तिहाई तक का इस्तेमाल किया था और 29 जून, 2016 को बताया है कि सीओ 2 एकाग्रता का स्तर 400 पीपीएम के पार हुआ है, एक स्तर जो हमारे जीवन भर के लिए सहना होगा।

 

गिएसक और मेनशाऊसेन ने वेब संस्करण में सर्पिल इंटरैक्टिव बना दिया है : आप रोक सकते हैं, तल पर लाइन चार्ट पर अपने माउस को ले जाकर विशिष्ट साल पर जा सकते हैं और एकाग्रता और तापमान में परिवर्तन को अवलोकन कर सकते हैं।

 

Chain link from emissions to carbon dioxide concentrations to global warming.

Source: openclimatedata.net

 

उदाहरण के लिए, इंटरैक्टिव कार्बन बजट – कार्बन बजट कुछ बी नहीं बल्कि कार्बन की मात्रा आप अभी भी जलाते हैं, और 2 डिग्री- सेल्सियससे  नीचे तापमान वृद्धि रखते हैं – गति को दिखाता है जिसके साथ बजट खर्च किया जाता है।

 

गेएसक कहते हैं, “सौ वर्षों के दौरान, 1850 से 1950 तक सीओ 2 उत्सर्जन प्रति वर्ष 2 जी.टी. (गीगा टन) से सीओ 2 के 10 जी.टी. के लिए सीओ 2 के लिए बढ़ा है।” 50 वर्षों के भीतर, वार्षिक उत्सर्जन, 2000 में, प्रति वर्ष तिगुना होते हुए CO2 के 30 जी.टी तक पहुंचा है। यह आंकड़ा अब प्रति वर्ष CO2 के 40 जी.टी. है।

 

वातावरण पर स्पष्ट मानव प्रभाव के बावजूद, गिएसक आशावादी है। “जीवाश्म ईंधन से हमारे उत्सर्जन जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण होते हैं, लेकिन अगर हम जल्दी से कार्य करें तो सर्पिल में दिखाई देने वाल प्रवृतियों को रोक सकते हैं।”

 

(वर्मा आंध्र प्रदेश स्थित एक स्वतंत्र पत्रकार हैं। वर्मा विज्ञान संबंधित विषय पर लिखते हैं एवं इनकी जलवायु विज्ञान, पर्यावरण और पारिस्थितिकी में विशेष रुचि है।)

 
यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 11 अगस्त 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।
 

Image Credit: Flickr

 

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