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कचरे में लगी आग से मुंबई की हवा अशुद्ध: दिल्ली से 95% बेहतर

इंडियास्पेंड टीम,
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मुंबई के पूर्वी छोर पर कचरे के ढेर में आग लगाने से कई स्कूलों को बंद कराने के लिए मजबूर होना पड़ा।  नासा से मिली तस्वीरों में मुंबई के एक बड़े हिस्से पर धुंध का असर दिख रहा है।  लेकिन इंडियास्पेंड के वायु गुणवत्ता सेंसर, #Breathe से प्राप्त डेटा के अनुसार मुंबई शहर की वायु – प्रदूषण का स्तर दिल्ली की तुलना में दोगुना बेहतर है।

 

दोनों शहरों की यह तुलना चार दिनों के पूरे मुंबई में लगे पांच #Breathe उपकरणों (बांद्रा, लोअर परेल, सांताक्रूज, चेंबूर और तारदेव) एवं दिल्ली के (निजामुद्दीन ईस्ट, सिविल लाइंस, सुखदेव विहार, छतरपुर और आउटरम लाइन्स) के उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित है।

 

28 जनवरी और 1 फ़रवरी 2016 के बीच, दिल्ली का औसत पीएम 2.5 का स्तर 293.3 μg/m3 (हवा की माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर) दर्ज किया गया है जोकि मुंबई की 150.5 μg/m3 से 95 फीसदी अधिक है।

 

दिल्ली का औसत पीएम 2.5 स्तर ‘बुरे’ श्रेणी में पाया गया था जिसमें अधिक समय तक रहने से लोगों को सांस से जुड़ी कई बिमारियां हो सकती हैं।

 

मुंबई में ‘मध्यम’ स्तर दर्ज किया गया है जिससे संवेदनशील फेफड़े, अस्थमा और/या दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों को सांस से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं।

 

वायु में पाए जाने वाले 2.5 माइक्रोमीटर के व्यास के कणिका तत्व को पीएम 2.5 कहा जाता है एवं इसे मनुष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा पैदा करने के रुप में जाना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार पीएम 2.5 का माप से वायु प्रदूषण से स्वास्थ्य जोखिम के स्तर बेहतर तरीके से जाना जा सकता है।

 

      28 जनवरी के बाद दिल्ली एवं मुबंई का औसत पीएम 2.5 स्तर             28 जनवरी के बाद दिल्ली एवं मुबंई का औसत पीएम 10 स्तर

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दिल्ली में पीएम 10 (2.5 से 10 µm व्यास वाले कण) का स्तर  (495.7 μg/m3) मुंबई (183.8 μg/m3) की तुलना में ढाई गुना (170 फीसदी अधिक) अधिक दर्ज किया गया है।

 

दिल्ली में औसत 10 PM  स्तर ‘ गंभीर ‘ श्रेणी में दर्ज़ किया गया था, जिससे स्वस्थ लोगों पर प्रभाव पड़ता है एवं बिमारियों से जूझ रहे लोगों पर अधिक प्रभाव डालता है। मुंबई में औसत पीएम 10 का स्तर ‘ मध्यम ‘  श्रेणी में दर्ज किया गया था।

 

आग लगने से एक सप्ताह पहले, 21 जनवरी से 25 जनवरी के बीच, चेंबूर में, जिस क्षेत्र में आग लगी थी, औसत पीएम 2.5 का स्तर 116.9 μg/m3 दर्ज किया गया है। जनवरी 28 से फरवरी 1, 2016 के बीच, पीएम 2.5 के स्तर में 49 फीसदी बढ़ कर 174.5 μg/m3 तक पहुंचा है, जोकि मध्यम श्रेणी में आता है।

 

इसी तरह, औसत पीएम 10 का स्तर 150.6μg/m3 (21 जनवरी से 25 जनवरी) से 30 फीसदी बढ़कर 203.1 μg/m3 तक पहुंचा है (28 जनवरी से 1 फ़रवरी 2016) जो कि ‘बुरे’ श्रेणी में आता है।

 

  चेंबूर में औसत पीएम 2.5 का स्तर, 28 जनवरी से पहले और बाद में      चेंबूर में औसत पीएम 10 का स्तर, 28 जनवरी से पहले और बाद में

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  मुबंई में औसत पीएम 2.5 का स्तर, 28 जनवरी से पहले और बाद में      मुबंई में औसत पीएम 10 का स्तर, 28 जनवरी से पहले और बाद में

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जनवरी 28 से 1 फरवरी के बीच मुबंई में औसत पीएम 2.5 का स्तर 150.6 μg/m3 दर्ज किया गया है जो कि पिछले सप्ताह की तुलना में (21 जनवरी से 25 जनवरी) 66 फीसदी (90.7 μg/m3) अधिक है।

 

इसी तरह, पीएम 10 के स्तर में 50 फीसदी की वृद्धि हुई है 122.3 μg/m3 (जनवरी 21 से जनवरी 25) से बढ़ कर 183.8 μg/m3 (जनवरी 28 से 1 फरवरी) हुई है।

 

नगर निगम के अधिकारी आग पर नियंत्रण पाने का दावा किया है लेकिन साथ ही यह भी कहते हैं कि आग बुझाने के लिए “कुछ और समय” लगेगा। लगभग 74 स्कूलों को दो दिनों (शुक्रवार और शनिवार) के लिए बंद कर दिया गया था । स्थिति अधिक न बदलने के रुप में कुछ स्कूल सोमवार को भी बंद रहे हैं।

 

 

      मुंबई में औसत पीएम 2.5 स्तर, जनवरी 21 से फरवरी 1, 2016           मुंबई में औसत पीएम 10 स्तर, जनवरी 21 से फरवरी 1, 2016

 

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Note: Figures calculated on 24 hour averages

 

ऊपर दिखाए गए ग्राफ से पता चलता है कि दोपहर 28-29 जनवरी से दोपहर जनवरी 31- 1 फ़रवरी तक , जब इन दिनों में आग पर काबू पाने की कोशिश की गई, हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

 

वायु प्रदूषण: खामोश कातिल

 

2014 के आईआईएम अहमदाबाद के इस रिसर्च पेपर के अनुसार, बाहरी वायु प्रदूषण से भारत में सालाना 670,000 मौतें होती हैं।

 

मुंबई जैसे अशुद्ध हवा के साथ वाले शहरों की तुलना में साफ शहरों जैसे कि शिमला में प्रदूषण कम करने से अधिक स्वास्थ्य लाभ है।

 

अध्ययन में लिए गए पांच शहर – अहमदाबाद, बेंगलूर,  हैदराबाद, मुंबई और शिमला – स्थलाकृतिक और जलवायु क्षेत्रों पर आधारित है।

 

अध्ययन के अनुसार, उच्चतम पीएम 10 स्तर मुंबई में दर्ज किया गया है – (174.4 ± 86.6) – और सबसे न्यूनतम शिमला में दर्ज किया गया – (54.4 ± 25.2)।

 

सबसे कम रोज़ाना मौतें शिमला में दर्ज की गई है (4.2 ± 2.7), और सबसे अधिक मुंबई में दर्ज की गई है, (225.6 ± 30.7)। मौत, जनसंख्या के आकार के जोड़ा गया है।

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार छोटे कण (पीएम 2.5 एवं पीएम 10) के उच्च एकाग्रता के अनावरण एवं मृत्यु दर और अस्वस्थता दर (दैनिक और समय के साथ, दोनों) के बीच करीबी संबंध है।

 

डब्लूएचओ के मुताबिक दुनिया भर में शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में, बाहरी वायु प्रदूषण से अनुमानित तौर पर वर्ष 2012 में 3.7 मिलियन लोगों की समय से पहले मृत्यु हुई है।

 

इन मौतों का ज़िम्मेदार अधिक समय तक पीएम 10 में रहना है जिससे हृदय और सांस से जुड़ी बीमारियां एवं कैंसर होने का खतरा बढ़ता है।

 

वार्षिक औसत पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) को 70 μg/m3, (जोकि विकासशील देशों के कई शहरों में आम है) से डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देश अनुसार 20 μg/m3 स्तर तक कम करने से वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों में 15 फीसदी की कमी हो सकती है। इस लेख को लिखते समय मुंबई का पीएम 10 स्तर (24 घंटे औसत) 145.6 µg/m3 एवं दिल्ली का 293.2 µg/m3 दर्ज किया गया था।

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 04 फरवरी 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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