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कल्पना की कहानी में भारतीय महिलाओं का दर्द

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Woman in meditation, Varanasi Benares India
 

मुंबई: 33 वर्षों तक, कल्पना मिश्रा (बदला हुआ नाम) खुद से पूछती रही कि आखिर उसका कसूर क्या है? जिस पति को वो बहुत प्यार करती थी, वही उसे अब क्यों मारता है? उसके पति के कई महिलाओं के साथ रिश्ते थे और आखिर क्यों उनके मित्र या परिवार को यह गलत नहीं लगता था? उसकी तरह एक स्मार्ट, और शिक्षित महिला कैसे चुप रह कर पीड़ित हो सकती है? कल्पना के सामने सवाल और भी थे।

 

कल्पना ने ज्योतिष और  पिछले जीवन के परावर्तन पर किताबें पढ़ी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। विवाहित जीवन के 33 वर्षों में, वह चोटों के इलाज के लिए कई बार अस्पताल गई और दो बार अपनी जिंदगी समाप्त करने की भी कोशिश की। आखिरी बार उसने खुद की जान लेने की जब कोशिश की तो वह तीन दिनों के लिए कोमा में चली गई थी। तब उसे गुस्सा आया और उसने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2015-16) के अनुसार, भारत भर में, 15-49 साल की उम्र की तीन विवाहित महिला में से एक (33.3 फीसदी) ने शारीरिक, भावनात्मक या यौन उत्पीड़न हिंसा का अनुभव किया है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने अक्टूबर 2018 की रिपोर्ट में बताया है।

 

इसके अलावा, वैश्विक दर की तुलना में भारतीय महिलाओं द्वारा आत्महत्या करने की दर दोगुनी है। 2016 में भारत की  दुनिया में आत्महत्या की छठी उच्चतम दर (प्रति 100,000 पर 15) रही है। अध्ययनों से पता चलता है कि दुनिया भर में महिलाओं में आत्महत्या के विचार से घरेलू हिंसा का सीधा संबंध है। भारत में महिलाओं में आत्महत्या की उच्च दर के लिए व्यवस्थित विवाह, कम उम्र में विवाह, युवा मातृत्व, निम्न स्तर, घरेलू हिंसा और आर्थिक आजादी की कमी जिम्मेदार हो सकती है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने अक्टूबर 2018 की रिपोर्ट में बताया है।

 

कल्पना इंडियास्पेंड के साथ अपना दर्द साझा करना चाहती थी। उन्होंने कहा, “मैं नहीं चाहती कि किसी और को पीड़ित होना पड़े।”

 

अब कल्पना अपने पति से अलग हो गई हैं, और वह एक प्रशिक्षित परामर्शदाता है और अपनी तरह की स्थितियों में रह रही अन्य महिलाओं की मदद करती है।  उन्होंने विकास प्रबंधन में डिप्लोमा पूरा करने और गैर लाभ के लिए काम करने के बाद अपने करियर को फिर से शुरू कर दिया है।

 

उनसे टेलीफोनिक साक्षात्कार के कुछ अंश यहां दिए गए हैं:

 

आपका बचपन कैसा था?

 

मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर में हुआ था। हम एक संयुक्त परिवार में रहते थे। मेरे पिता, एक इंजीनियर थे और बहुत ही प्रसिद्ध कंपनी में काम करते थे। उन्होंने अपने पूरे परिवार ( सात भाइयों और दो बहनों ) का ख्याल रखा। हम एक सम्मानित लेकिन अत्यधिक पितृसत्तात्मक परिवार से थे। अपनी पूरी जिंदगी में मैंने देखा कि मेरी मां दिन-रात काम कर रही है और अपने परिवार द्वारा दुर्व्यवहार का सामना कर रही है। मेरे पिता सभी के लिए अच्छे थे, लेकिन मेरी मां के साथ उनका व्यवहार आक्रामक था। वे हमेशा हावी होने की कोशिश करते थे। उसकी दुर्दशा को देखते हुए, मैंने फैसला किया था कि मैं कभी शादी नहीं करुंगी।

 

मेरे तीन भाई बहन हैं – एक बड़ा भाई और बहन, और एक छोटा भाई। मेरे पिता शिक्षित थे, लेकिन उन्होंने केवल भाइयों को ही इंजीनियर बनाने के बारे में बात की थी। उसने कभी मेरी उपलब्धियों का जश्न नहीं मनाया । मैं पढ़ाई और खेल में अच्छी थी। जब मैं स्कूल में थी तब मुझे राष्ट्रीय स्तर पर बास्केटबाल और कबड्डी खेलने के लिए चुना गया था। मैं दसवीं परीक्षा में अपने जिले में प्रथम आई थी और इसे समाचार पत्र में प्रकाशित किया गया था,  लेकिन इस बात की किसी को को परवाह नहीं थी। मैंने बिना किसी शिकायत के अध्ययन करना और कड़ी मेहनत करना जारी रखा।

 

मेरे भाई के दोस्त को एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए एक अतिरिक्त आवेदन पत्र मिला और मैंने इसे भर दिया। आश्चर्य रुप से इसमें मेरा चयन हो गया। मेरे पिता ने मुझे एक महीने तक कोर्स में दाखिले की इजाजत नहीं दी। उन्होंने सोचा था कि मैं दिलचस्पी खो दूंगी और इसके बारे में भूल जाऊंगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और मैंनें कोर्स में दाखिला लिया। मैंने अपनी पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन किया और मास्टर कोर्स के लिए चुनी गई थी। लेकिन फिर मुझे प्यार हो गया और मैंने शादी करने का फैसला किया। हमारी शादी हमारे परिवारों द्वारा स्वीकृत की गई थी।

 

आपकी शादी के बाद आपका जीवन कैसे बदल गया?
 

शादी के बाद, मैं दिल्ली चली गई। शारीरिक और मानसिक दुर्व्यवहार जल्द ही शुरू हुआ। मैंने अपने घर में कभी गालियां (दुर्व्यवहार) नहीं सुनी, लेकिन वहां मुझसे मौखिक रूप से दुर्व्यवहार किया गया था और नियमित रूप से पीटा गया था। प्रारंभ में, वो कहता था कि वह मुझसे प्यार करता है और शराब की वजह से मार-पीट किया।

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मैं 22 साल की थी, मेरे माता-पिता की मृत्यु हो गई थी और मेरी बहन विदेश में रहती थी इसलिए मेरे पास बात करने के लिए कोई नहीं था। मैं एक अजीब परिस्थिति में फंस गई थी, मुझे नहीं पता था कि मैं कैसे बाहर निकल सकती हूं। लेकिन मैंने विश्वास खुद पर विश्वास किया।

 

मेरे पति ने हर बात के लिए मुझे ही दोषी ठहराया – व्यापार में उसकी विफलता, उसके नुकसान-सबके लिए। उसने खुद को हमेशा पीड़ित बताया।

 

हमारी शादी के तीन साल बाद, मैंने अपने बेटे को जन्म दिया। तब तक उस लड़की में, जिसमें आत्मविश्वास था, एक प्राकृतिक सार्वजनिक वक्ता  और एक गायक थी वह शांत हो चुकी थी। मेरे ससुराल वालों ने मुझे अपना काम छोड़ने के लिए कहा था: “अच्छे घर की बहुएं काम नही करती।” फिर भी, मैंने बिना किसी को बताए सिविल सेवा परीक्षा के लिए तैयारी की, लेकिन मैं परीक्षा नहीं दे सकी।

 

इस बीच, मैंने सब कुछ समझने की कोशिश की कि मेरी गृहस्थी अच्छी तरह से क्यों नहीं चल पा रही थी। मैंने हर जगह जवाब मांगा – किताबें, धर्म और दर्शन से। मैंने खुद से पूछा, कि  मैं एक अच्छी पत्नी, बहू और एक मां थी; तो ऐसा मेरे साथ ही क्यों हो रहा है?

 

वह पॉर्न और अलग-अलग महिलाओं के शौकीन थे। घरेलू सहायिका ने मुझे बताया कि उसने उससे भी छेड़छाड़ करने की कोशिश की थी। मैंने हस्तक्षेप करने की कोशिश की लेकिन मेरी ससुरालवालों ने कहा कि वो झूठ बोल रही है। जब मेरे पति मुझे मारते थे तो मेरे पास कोई समर्थन नहीं था और फिर मैं अवसाद में डूब गई।

 

पहली बार मैंने आत्महत्या करने की कोशिश की, मैंने कीटनाशक पी लिया क्योंकि मेरे पति ने एक दिन पहले मुझे बुरी तरह मारा था। मेरे ससुराल वालों ने मुझे अस्पताल पहुंचाया जरूर लेकिन बाद में मुझसे अपने पति से क्षमा मांगने के लिए कहा।

 

अगली बार मुझे फिर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब मैं गर्भवती थी उसने मुझे लात मारा था और मेरा गर्भपात हो गया।

 

बाद में, जब हम मुंबई चले गए, तो मेरे पति ने मेरे हाथ पर दरवाजा बंद कर दिया और मेरी हड्डी टूट गई। मेरे पति के कार्यालय में एक युवा सहयोगी थी, जिससे उसके रिश्ते थे। धीरे-धीरे उसने उसे घर लाने पर जोर देना शुरू कर दिया। जब मैंने विरोध किया, तो उसने मुझे परेशान करना शुरू कर दिया। वह अब मुझे अपने घर से बाहर निकाल देना चाहता था।

 

उसने मुझे मुझे अश्लील वीडियो दिखाए और मुझे मरने के लिए कहा। उसने मुझे एक मनोचिकित्सक के पास भी ले गया और कहा कि मैं पागल हूं। एक दिन, मैंने यह सब खत्म करने के लिए नींद की गोलियां निगल ली। मुझे अस्पताल ले जाया गया और मैं तीन दिनों तक कोमा में थी। मेरा बेटा मेरे पास खड़ा था, सोच रहा था कि मैं जीवित रहूंगी या मर जाऊंगी। वापस आने के बाद, मैंने सोचा कि बहुत हुआ और उसके खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया गया है। उसके बाद उसने तलाक के लिए केस दायर किया।

 

क्या आपको तलाक मिला?
 

नहीं, मैं उसे तलाक नहीं देना चाहती थी, क्योंकि उसे यूं ही नहीं छोड़ना चाहती थी। मैंने कानून पढ़ा, वकील से बात की और महसूस किया कि न्याय प्रणाली पुरुषों के प्रति झुका हुआ है। एक महिला जो गृहस्थ है, उसके पास पैसा नहीं है, कोई वित्तीय सहायता नहीं है और कोई सुरक्षा नहीं है। आज तक, मुझे उससे एक पैसा नहीं मिला है। मैंने सुप्रीम कोर्ट की याचिका के समर्थन में पॉर्न वेबसाइट पर प्रतिबंध लगाने के लिए याचिका दायर की है।पिछले पांच सालों से, मैंने इन मुद्दों पर बड़े पैमाने पर पढ़ा और शोध किया है और प्रमुख व्यक्तित्वों से लेकर मंत्रियों तक को पत्र लिखा है।

 

आपके बच्चे इस सब पर कैसे प्रतिक्रिया करते थे?
 

पहले हिंसा बेडरूम तक ही सीमित थी और मैंने बच्चों को इससे दूर रखने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में, उन्होंने मुझे बताया कि वे दरवाजे के बाहर खड़े थे और रोया करते थे।

 

अदालत के मामलों के बाद से मेरे बेटे ने मुझसे बात करना बंद कर दिया है। इस बीच मेरी बेटी इन वर्षों में मेरे समर्थन में रही है। वह वह थी जिसने मुझे महसूस कराया कि मुझे कुछ करना है।

 

आप कब और कैसे बाहर निकली और वित्तीय आजादी हासिल की?
 

मैंने मुंबई स्थित संस्थान से विकास प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया था। घर पर रहने के 30 वर्षों के बाद, मुझे एक नए आयु वर्ग के साथ एडजस्ट करना पड़ा, जहां मुझसे ईमेल पर असाइनमेंट जमा करने और पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन करने की उम्मीद थी। मुझे तेजी से सीखना पड़ा, और कक्षा में सबसे ज्यादा उम्र की छात्र होने के बावजूद, मैंने 56 साल में पूरी कक्षा में दूसरा स्थान प्राप्त किया। मुझे महसूस हुआ कि मैं अपने जीवन में कुछ कर सकती हूं।

 

तब मुझे मातृ स्वास्थ्य पर एक गैर-लाभकारी काम में नौकरी मिली और मैं अलग-अलग राज्यों में कार्यक्रम को लागू करने के लिए केंद्र सरकार के साथ समन्वय करने की प्रभारी हूं।

 

इसके अलावा, मैंने खुद को एक परामर्शदाता के रूप में प्रशिक्षित किया, और सही सलाह के माध्यम से पास आने वाली अन्य महिलाओं का समर्थन किया। मैंने महसूस किया है कि चार महिलाओं में से तीन महिलाओं को घर पर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। ज्यादातर कभी बात नहीं करते, क्योंकि उनके पास कोई समर्थन नहीं होता है।

 

आप अपनी कहानी क्यों कह रही हैं?

 

मैं नहीं चाहती कि किसी और को वो भुगतना पड़े जो मैंने भुगता है। मैं गृहस्थी के उन मुद्दों के बारे में लोगों को जागरूक करना चाहता हूं, जहां कामकाजी महिलाओं के कोई विशेषाधिकार नहीं हैं जैसे कि काम के लिए कोई माप या भुगतान नहीं, कोई भुगतान छुट्टी नहीं है और यौन उत्पीड़न के लिए कोई आंतरिक शिकायत समिति नहीं है। विवाह के टूटने के बाद, रखरखाव के लिए लड़ने में सालों लगते हैं, यही कारण है कि महिलाएं इस मुद्दे पर बात नहीं करती हैं।

 

इसके अलावा, कोई लड़की अकेले शिक्षा समस्या को हल नहीं कर सकती है। मैं एक जिला टॉपर थी, एक इंजीनियर थी और फिर भी मुझे पितृसत्तात्मक मूल्यों के कारण तीन दशकों तक मौन का सामना करना पड़ा। मैं चुप रहने या इसे सहन करने के लिए महिलाओं की निंदा नहीं करती हूं। मैं देखती हूं कि मेरी कहानी उन महिलाओं की कहानियों में दोहराई जा रही है। मैं चाहती हूं कि महिलाओं से बात की जाए कि उनके साथ क्या हो रहा है?  मैं यहां माया एंजेलो को उद्धृत करना चाहती हूं, “हर बार जब एक महिला खुद के लिए खड़ी होती है, तब वह सभी महिलाओं के लिए भी खड़ी होती है।”

 
( यदवार प्रमुख संवाददाता हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़ी हैं। )
 

यह साक्षात्कार मूलत: अंग्रेजी में 4 नवंबर, 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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