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किसानों, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और मध्यवर्गीय मतदाताओं के बीच का अंतरिम बजट

श्रीहरि पलियथ, तिश संघेरा,
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मुंबई और बेंगलुरु:  2019-20 के बजट के हिस्से के रूप में घोषित प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना छोटे और सीमांत किसानों को आय सहायता के रूप में प्रति वर्ष 6,000 रुपये प्रदान करेगी। एक औसत ग्रामीण परिवार के लिए 500 रुपये प्रति माह पर, यह प्रति व्यक्ति 3.3 रुपये प्रति दिन होगा(परिवार में अगर पांच सदस्य), जो प्रति व्यक्ति गरीबी के लिए ग्रामीण बेंचमार्क 27.2 रुपये  का 1/8 वां है। यह तेलंगाना की रायथु बंधु योजना के तहत मिलने वाले लाभ से कम होगा, जो भूमि शीर्षक वाले सभी किसानों को प्रति फसल सीजन में, प्रति एकड़ 4,000 रुपये प्रदान करता है। दूसरी ओर यह ओडिशा राज्य सरकार के आजीविका और आय संवर्धन के लिए कृषक सहायता योजना के तहत प्रावधानों से भी कम है, जो छोटे और सीमांत किसानों के साथ-साथ भूमिहीन और कमजोर परिवारों को पांच सीजन में 25,000 रुपये प्रदान करेगा। इससे सरकारी खजाने पर 75,000 करोड़ रुपये ( अगले वित्तीय वर्ष के लिए कुल आवंटन का 2.6 फीसदी ) की लागत आने की उम्मीद है। इस योजना का लक्ष्य 2 हेक्टेयर तक के किसानों को लक्षित करना है, जिनकी संख्या देश भर में 12 करोड़ है।

राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को हुए नुकसान के लिए कृषि संकट और ग्रामीण ऋणग्रस्तता का व्यापक रूप से जिम्मेदार माना जा रहा है।

 कार्यवाहक वित्त मंत्री गोयल ने कहा कि, “बीज, उर्वरक, उपकरण, श्रम आदि जैसे इनपुट प्राप्त करने और अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए, ‘पीएम-किसान’ तीन समान किश्तों में प्रति वर्ष 6,000 रुपये देगा।”

 

बजट में राष्ट्रीय आपदा राहत कोष से प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित सभी किसानों के लिए सहायता की भी घोषणा की गई। यह 2 फीसदी का ब्याज वित्तिय सहायता ( अल्पकालिक ऋण पर किसानों को ब्याज सब्सिडी ) और ऋण पुनर्निर्धारण की पूरी अवधि के लिए 3 फीसदी की पुनर्भुगतान प्रोत्साहन प्रदान करेगा।  अंतरिम बजट पेश करने के बावजूद, 1 फरवरी, 2019 को कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने इस वर्ष के आम चुनाव से पहले, ग्रामीण और मध्यम वर्ग के मतदाताओं के लिए कई बड़ी योजनाओं की घोषणा की।

 

एक चुनावी वर्ष में, सत्ताधारी दल आम तौर पर या अंतरिम बजट पेश करते हैं, जो ट्रैन्जिशन पीरियड को कवर करता है, जब तक कि नई सरकार कार्यभार न संभाल ले या वोट ऑन अकाउंट पेश करती है, जोकि आने वाले सरकार द्वारा पूर्ण बजट पारित होने तक सरकार को कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए संसद द्वारा अनुमोदित अनुदान होता है।

 

रिवाज के अनुसार, दूरगामी राजकोषीय निहितार्थ वाली नई योजनाओं की घोषणा नहीं की गई है। फिर भी, पीएम-किसान के अलावा, सरकार ने सालाना 500,000 रुपये तक की आय वालों को कर में छूट की घोषणा की, साथ ही असंगठित क्षेत्र से सेवानिवृत्त श्रमिकों के लिए पेंशन योजना भी शुरू की है।

 

पिछले वर्ष की तुलना में 2019-20 के लिए कुल बजट को 14 फीसदी बढ़ाकर 27.8 लाख करोड़ करते हुए,गोयल ने मध्यम वर्ग के मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए आयकर छूट की सीमा ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है, जिससे 3 करोड़ व्यक्तिगत करदाताओं को लाभ होने का अनुमान है। इसके अलावा, सालाना 6.5 लाख रुपये तक की आय वाले लोग निवेश पर कर का भुगतान नहीं करेंगे। अन्य घोषणाओं में, गोयल ने ऐसी योजना की शुरुआत की है, जिसके संबंध में उन्होंने कहा कि वह अगले पांच वर्षों के भीतर “दुनिया की सबसे बड़ी पेंशन योजनाओं में से एक” हो सकता है। प्रधानमंत्री श्रम योगी मंथन 60 वर्ष से अधिक आयु के उन लोगों को 3,000 रुपये की मासिक पेंशन प्रदान करेगा, जो अनौपचारिक (असंगठित) काम में लगे थे। इस योजना में शामिल होने वालों की आयु यदि 29 वर्ष से अधिक है, तो उन्हें 100 रुपये का मासिक योगदान देना होगा और यदि आयु इससे कम है तो कम योगदान देना होगा।

  
 

भारत के 90 फीसदी कार्यबल वर्तमान में अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हैं। उदाहरण के लिए वे घरेलू सहायकों, चालकों या निर्माण श्रमिकों के रूप में कार्यरत हैं  और उनके नियोक्ता के साथ गैर-संविदात्मक संबंध है। इस प्रकार, अब तक उनके पास लगभग कोई सामाजिक सुरक्षा या लाभ नहीं है। गोयल ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि 10 करोड़ श्रमिक इस योजना के लिए साइन अप करेंगे, जिसे चालू वर्ष से लागू किया जाएगा।

 

बजट घोषणा में, गाय के संसाधनों के स्थायी आनुवंशिक उन्नयन में वृद्धि और गायों के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए, “राष्ट्रीय कामधेनु आयोग की स्थापना” शामिल थी और 750 करोड़ रुपये राष्ट्रीय गोकुल मिशन को आवंटित किए गए, जिसका उद्देश्य मवेशियों की देसी नस्लों का विकास और संरक्षण करना है। हालांकि, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लिए आवंटन ( दुनिया का सबसे बड़ा रोजगार-सृजन कार्यक्रम ) 9 फीसदी बढ़कर 60,000 करोड़ रुपये हुआ है, यह 61,084 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान  (अनुमानित वास्तविक आवश्यकता) से 1.8 फीसदी कम रहा है।  रक्षा क्षेत्र को भी बढ़ावा मिला, जिसमें प्रस्तावित आवंटन “पहली बार 3 लाख करोड़ रुपये के पार” था।गोयल ने कहा कि मौजूदा सरकार ने वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) योजना लागू की है, जिसके तहत उन्होंने दावा किया कि 35,000 करोड़ रुपये का वितरण किया गया है।

 

यह दावा करते हुए कि भारत अगले 10 वर्षों के भीतर “दस ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था” बन जाएगा, गोयल ने नेशनल प्रोग्राम ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की घोषणा की, जिसके तहत नौ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को लक्षित किया जाएगा और ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की जाएगी। गोयल ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम ‘गगनयान’ वर्ष 2022 तक एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजेगा।

 

गोयल ने दावा किया कि भारत के युवा ‘नौकरी तलाश  करने वालों ’ की जगह अब ‘नौकरियों के निर्माता’ हैं और भारत “दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ‘स्टार्टअप हब’ है। कार्यवाहक वित्तमंत्री का यह दावा तब सामने आया है, जिसके ठीक कुछ दिन पहले एनएसएसओ की रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि देश में बेरोजगारी दर 2017-18 में 45 साल के उच्च स्तर 6.1 प्रतिशत पर पहुंच गई है और इसका सबसे ज्यादा प्रभाव युवाओं पर हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 17.4 फीसदी ग्रामीण पुरुष युवा बेरोजगार हैं।

 
(पालियथ विश्लेषक हैं और संघेरा लेखक और शोधकर्ता हैं। दोनों इंडियास्पेंड के साथ जुड़े हैं।)
 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 1 फरवरी, 2019 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।
 

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