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केरल में बाढ़ से क्षतिग्रस्त घरों को बड़ी जल्दी कैसे मिली बिजली ?

श्रीहरि पलियथ,
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( करीब 850 करोड़ रुपये के नुकसान और क्षतिग्रस्त सबस्टेशन और कार्यालयों के बावजूद, केरल राज्य बिजली बोर्ड ने दो सप्ताह से भी कम समय में लगभग 2.56 मिलियन उपभोक्ताओं के लिए बिजली बहाल कर दी। ) 

 

तिरुवनंतपुरम, पठानमथिट्टा, आलप्पुजा और एर्नाकुलम (केरल): अगस्त 2018 में केरल आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित केंद्रीय केरल के चेंगानूर तालुक में कालीसरी में निलेना और चेरियन जचरिया का घर कई पड़ोसियों के लिए आश्रय स्थल बन गया। यह राहत कार्य के लिए एक केंद्र भी था। चेरियन बताते हैं, “हम भाग्यशाली थे कि हमारा घर क्षतिग्रस्त नहीं हुआ था।”  चेरियन 20 वर्ष कुवैत में रहने के बाद 2014 में केरल वापस आए थे। लेकिन बाढ़ के कारण चेंगानूर में बिजली नहीं थी। 16 अगस्त, 2018 तक, विद्युत उप-स्टेशनों को बंद कर दिया गया था। जचरिया अपने घर पर सोने वाले दर्जनों लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। नीलिना बताती है, “बिजली नहीं होने से खाना पकाने और शौचालयों के उपयोग में बड़ी मुश्किलें आती थीं।” आपदा के कारण करीब 2.56 मिलियन घर बिना बिजली के हो गए थे। सेवानिवृत्त केएसईबी कर्मचारियों, इंजीनियरिंग छात्रों और निजी बिजली मिस्तियों सहित, हर मानव संसाधन को संगठित और तैनात करके कैसे केरल राज्य बिजली बोर्ड (केएसईबी) ने एक पखवाड़े में अंधेरे में डूबे उन घरों में बिजली बहाल किया, इसे देखना दिलचस्प तो है ही, यह ऐसी ही समस्या के साथ जूझ रहे हर आपदाग्रस्त राज्य के लिए एक मॉडल हो सकता है। केएसईबी ने अपनी योजना को मिशन रिकनेक्ट का नाम दिया था।

 


 

केएसईबी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) एनएस पिल्लई ने इंडियास्पेंड को बताया, “स्थिति अभूतपूर्व थी। हमें यह सुनिश्चित करना था कि सरकारी प्रक्रिया में होने वाली सामान्य देरी के बिना चीजों को पटरी पर कैसे लाया जाए।”

 

केएसईबी आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ के पानी ने लगभग 16,158 वितरण ट्रांसफार्मर, 50 उप-स्टेशन, 15 बड़े और छोटे स्टेशनों को क्षतिग्रस्त कर दिया था। 

 

इंडियास्पेन्ड ने चार जिलों – आलप्पुजा, पठानमथिट्टा, एर्नाकुलम और तिरुवनंतपुरम का दौरा किया और यह समझने की कोशिश की कि केएसईबी ने अपने मिशन को कैसे पूरा किया।

 

तैरकर, जमीन के रास्ते, नाव की सवारी कर: कैसे वायरमैन काम पर पहुंचे?
 

 केएसईबी ने तिरुवनंतपुरम में मुख्यालय में एक राज्य स्तरीय टास्क फोर्स (एसएलटीएफ) की स्थापना की, जिसमें 24×7 नियंत्रण कक्ष शामिल था। एसएलटीएफ की अगुवाई में डिप्टी चीफ इंजीनियर सुरेश कुमार सी ने कहा, “हमारी प्राथमिक भूमिका जिला स्तर के अधिकारियों से संचार सुनिश्चित करना था।”

 

चुनौती मानव संसाधन और सामग्री को अपने कामकाज के सभी स्तरों पर उपलब्ध कराने ( राज्य की राजधानी के नियंत्रण कक्ष से अनुभाग कार्यालयों तक ) और बोर्ड के विभिन्न विभागों और बोर्ड और बाहरी एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना था।

 

 

यह सुनिश्चित करना  जरूरी था कि कर्मियों को बिजली बहाली के लिए सामग्री अविलंब मिले: केएसईबी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एनएस पिल्लई लेकिन मिशन की सफलता का श्रेय मजदूरों और स्वयंसेवकों को जाता है, जो जोखिम लेकर डूबे हुए गांवों मे क्षतिग्रस्त घरों तक पहुंचे।

 

चेंगन्नूर डिवीजन कार्यालय में केएसईबी के एक उप-अभियंता माणिकुटन कहते हैं, “मैं जल्द ही सेवानिवृत्त हो जाउंगा, लेकिन इतने दिनों में ऐसा कुछ भी नहीं देखा है।” जिस दिन माणिकुटन से हमारी मुलाकात हुई, उस दिन उनकी छुट्टी थी, फिर भी वह एक सफेद मुंडू (सरंग) और भूरे रंग की शर्ट में ही अपने कार्यालय में थे। 55 वर्ष की उम्र में भी उनका जोश देखते बनता है।

 

15 अगस्त, 2018 के बाद तीन दिनों में, वह 5 किमी दूर अपने घर से दूधवाले की नाव में काम करने के लिए यात्रा करते थे। उन्होंने कहा, “हालांकि मेरा घर प्रभावित नहीं हुआ था, फिर भी मुझे वहां तक जाने के लिए तैरना पड़ा। कुछ दिनों के लिए हम विभिन्न हिस्सों में बिजली बहाल करने के लिए कार्यालय में रहे।”

 

सेवा कनेक्शन बहाली की स्थिति

Source: Kerala State Electricity Board (As of September 3, 2018)

 

एक सहायक कार्यकारी अभियंता श्याम कुमार हरिपद सर्कल में परियोजना प्रबंधन इकाई (पीएमयू) का हिस्सा हैं। घर पर या राहत शिविरों में फंसे वरिष्ठ अधिकारियों के साथ, उन्हें और उनके सहयोगियों को हरिपद में 120,000 उपभोक्ताओं को बुनियादी ढांचे की बहाली और आपूर्ति को समन्वयित करना था। श्याम कुमार ने कहा, “हमने परिस्थितियों को देखते हुए चार्ज संभाला।”

 

कुशल समन्वय और संचार सुनिश्चित करने के लिए, पीएमयू ने फैसला किया कि प्रत्येक अनुभाग कार्यालय के प्रभारी सात नोडल अधिकारी प्रभारी होंगे और स्थानीय विद्युत प्रतिष्ठान उनके ज्ञान के बिना सक्रिय नहीं होंगे। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि उप-स्टेशनों को फिर से शुरू करने और सक्रिय करने के बाद कोई संचरण समस्या नहीं होगी।

 

लाइन कर्मचारियों की टीम और पर्यवेक्षक 11-केवी उच्च संचरण वाले लाइनों को देखेंगे और नोडल अधिकारियों को उनकी स्थिति और मरम्मत आवश्यकताओं के बारे में सूचित करेंगे। अधिकारी तब सूचना सर्कल और नियंत्रण कक्ष से संवाद करेंगे और आवश्यक निर्देश देंगे।

 

सेवानिवृत्त वायरमेन, इलेक्ट्रीशियन और  इंजीनियरिंग छात्रों की भागीदारी
 

 इंजीनियरिंग कॉलेजों से स्वयंसेवकों, सेवानिवृत्त केएसईबी कर्मचारियों और वायरमैन तारों ने मीटर और तारों जैसे प्रतिष्ठानों की जांच के लिए व्यक्तिगत घरों का दौरा किया। कुमार ने कहा, “ओनम पास था और  हम प्रतिष्ठानों को बंद करने की सोच रहे थे। हमने यह सुनिश्चित किया कि विद्युत आपूर्ति, लाइन सामग्री, ट्रांसफॉर्मर और अन्य को यहां से कङीं दूसरे सर्किल में स्थानांतरित किया जाए।”

 

अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, जल पंपिंग स्टेशन और चेंगानूर में टेलीफोन विभाग को विद्युत बहाली में प्राथमिकता दी गई थी।

 

 चेंगानूर उप-डिवीजन कार्यालय के सहायक कार्यकारी अभियंता लैला एनजी, 22 अगस्त, 2018 को ही काम पर  शामिल हो सकी थी। उनका घर, बाढ़ पीड़ित पड़ोसियों के लिए आश्रय था। लैला बताती हैं, “जब मैं काम पर आई तो मुझे एहसास हुआ कि यह मानव और भौतिक दोनों संसाधनों के प्रबंधन का मामला था।”

 

बाढ़ से ठीक पहले, 11 लाइन कर्मचारियों को नए स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया था। इसका मतलब था कि नए लोग जो शामिल हुए थे, क्षेत्र और वितरण नेटवर्क के बारे में बहुत कम जानते थे।

 

 लैला कहती हैं, “एक बैठक के दौरान, हमने अनुरोध किया कि पर्यवेक्षकों और लाइन कर्मचारियों को अस्थायी रूप से वापस बुलाया जाए ताकि वे बहाली कार्यों को जल्दी से पूरा करने में मदद कर सकें।” आदेश तिरुवनंतपुरम में बोर्ड द्वारा तुरंत पारित किए गए थे।

 

आलंगंद में भी, एर्नाकुलम के बाढ़ प्रभावित खंड, लाइन स्टाफ और पर्यवेक्षकों को, जो स्थानांतरित होकर कहीं और चले गए थे, वापस बुलाया गया,जिससे विद्युत बहाली के काम में तेजी हो सके।

 

क्षतिग्रस्त हुए या चेंगन्नूर उप-प्रभाग में बदले गए बिजली मीटर । यह इलाका  जो अगस्त 2018 की बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था।

 

चेंगानूर और अलंगद के कुछ क्षेत्रों में, बिजली के खंबे और लाइनें पानी भरे खेतों में गिर गए थे और तार खराब हो रहे थे। पानी के जमाव वाले क्षेत्रों में काम करने के अनुभव के साथ आठ केएसईबी कर्मचारियों की एक टीम ने प्रतिष्ठानों को पुनर्जीवित करने और तारों को खींचने में मदद की।

 

ट्रांसफॉर्मर जो क्षतिग्रस्त नहीं थे, उनका तेल बदल दिया गया था, और संचरण को बहाल करने के लिए फ्यूज हटा दिया गया था। केएसईबी के आंकड़ों के अनुसार 3 सितंबर, 2018 तक 16,158 प्रभावित ट्रांसफार्मरों में से 99 फीसदी को बहाल कर दिया गया था।

 

अलंगंद खंड के सहायक अभियंता अनिल कुमार ने कहा, “यह हमारे स्वयं के कर्मचारियों, स्वयंसेवकोंका प्रयास था कि  बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुए हमारे 33 केवी सबस्टेशन कुछ दिनों के भीतर काम करने लगे। घरों में जहां संरचनात्मक क्षति के कारण तत्काल बिजली की आपूर्ति संभव नहीं थी, वहां सरल कनेक्शन प्रदान किए गए थे, जिसमें शॉक को रोकने के लिए सुरक्षा उपकरण, सफाई या अन्य उद्देश्यों के लिए मोटर्स का उपयोग करने के लिए एक पावर सॉकेट, और एक बल्ब होल्डर शामिल था। लगभग 700 ऐसे उपकरण प्रदान किए गए थे।

 

विद्युत श्रमिकों का एक निजी ग्रुप, ‘केरल इलेक्ट्रिकल वायरमेन एंड सुपरवाइजर्स एसोसिएशन’, यह सुनिश्चित करने में लगा रहा कि घर बिजली बहाली के लिए सुरक्षित थे या नहीं।

 

 चेंगानूर में एसोसिएशन के एक सदस्य जोस डैनियल ने कहा, “3-4 लोगों का एक समूह आदर्श रूप से मकान मालिक की उपस्थिति में रोजाना 150 घरों की तारों की जांच कर रहा था । वे दुर्घटनाग्रस्त घरों में कीचड़ और मिट्टी में घूम रहे थे, अक्सर देर रात तक काम करते थे।”

 

जोस डैनियल जैसे वायरमेन बिजली बहाली से पहले सुरक्षित वायरिंग के लिए एक दिन में लगभग 150 घरों की जांच करते थे। उन्हें अक्सर घरों तक पहुंचने के लिए मिट्टी और गंदगी से गुजरना पड़ता था।

 

कुट्टानाद जैसे नीचे के इलाके, जो नियमित रूप से बारिश के दौरान बाढ़ का अनुभव करते हैं, बिजली बहाल करने के लिए भी कठिन इलाके थे।

 

बैकवाटर में बिजली बहाल करना 

 

बैकवाटर से कुछ मीटर दूर, कुट्टानाद में केएसईबी के केनाकरी कार्यालय के बाहर फाइलें और कागजात बिखरे थे। औसत समुद्र तल से 1 मीटर की औसत ऊंचाई के साथ, यह भारत में सबसे कम ऊंचाई है। स्थानीय लोगों ने कहा कि मानसून के दौरान कुट्टानाद में हर साल जलजमाव होता है, लेकिन इस बार यह अभूतपूर्व और त्रासद था।

 

कैनकरी के विद्युत अभियंता सहायक सहायक एनएन आनंदन एनके ने कहा कि जुलाई 2018 के बाढ़ के दौरान, कैनकरी समेत आलप्पुजा के कुछ हिस्सों में बाधा आई थी, नुकसान गंभीर नहीं था। उन्होंने बताया, “जुलाई में कार्यालय के अंदर पैरों तक पानी आ गया था। लेकिन अगस्त बाढ़ में, कार्यालय के अंदर पानी पांच फीट बढ़ गया और प्रतिष्ठान क्षतिग्रस्त हो गया।”

 

बैकवाटर से कुछ मीटर दूर, निम्नस्थ केनकरी में केएसईबी कार्यालय बाढ़ आ गई थी। सबस्टेशन लगभग चार दिनों के लिए बंद था।

 

कुट्टानाद में 98 ट्रांसफार्मर में से छह डूब गए और कई अन्य प्रभावित हुए। सबस्टेशन लगभग चार दिनों के लिए बंद कर दिया गया था।

 

लाइन कर्मचारियों और ठेकेदारों की टीमों के साथ छोटी मोटर नौकाओं ने बढ़ते पानी के कारण घरों में आपूर्ति में कटौती की।

 

 24 वर्षों से केएसईबी के ठेकेदार और केनकरी के बाढ़ से कुप्रभावित अशोक कुमार ने कहा, “इस क्षेत्र से लगभग सभी निवासियों को बाहर भेज दिया गया था। रात के अंधेरे में गश्त करना मुश्किल और खतरनाक था। “

 

केनकरी विद्युत कार्यालय के कर्मचारी जिन्होंने केनकेरी में बिजली बहाल करने में मदद की।

 

जिन जिलों का इंडियास्पेंड ने दौरा किया, क्षेत्र की नई टीमों को सड़कों और मार्गों की पहचान करने के लिए विद्युत लाइनों का इस्तेमाल कर रहे थे  स्वयंसेवकों ने क्षतिग्रस्त मीटर या तारों वाले असुरक्षित घरों की पहचान करने में मदद की। जहां भी संभव हो, उन्होंने स्टिकर का उपयोग करके मीटर चिह्नित किए ( क्षतिग्रस्त के लिए लाल और बिना क्षति वाले के लिए हरे ) और संदर्भ के लिए एक चेकलिस्ट बनाई। कुट्टानाद में 11 केवी लाइनों के पूरे 58 किलोमीटर की खिंचाव (  जिनमें से 86 फीसदी धान क्षेत्र पर हैं और समुद्र तल से कुछ मीटर नीचे स्थित है ) को पांच दिनों में बहाल किया गया था।

 

एकल बिंदु कनेक्शन उन घरों को प्रदान किए गए थे जहां वायरिंग क्षतिग्रस्त हो गई थी या संरचनात्मक समस्या थी।

आनंदन कहते हैं, “आम तौर पर, मॉनसून जल-जमाव से निपटने के लिए धान के खेतों में मोटर पंप का उपयोग किया जाता है लेकिन उनमें से अधिकतर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।” नौकाओं की कमी से भी काम रूका। अब भी, पानी में स्थित करीब 200 घरों में बिजली नहीं है।” पठानमथिट्टा और एर्नाकुलम ने इसी तरह के मुद्दों का अनुभव किया गया।

 
पड़ोसी राज्यों ने लोगों ने सामग्री के साथ मदद की
 

पिल्लई बताते हैं, “कर्मचारियों ने एक अनुकरणीय काम किया। हमें दक्षिण में अन्य राज्य सरकारों के स्वयंसेवकों के कर्मचारियों और बिजली कर्मचारियों से बहुत अधिक समर्थन मिला।” आंध्र प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड बोर्ड के लगभग 120 कर्मचारी मिशन रिकनेक्ट में शामिल होने के लिए अपने-अपने उपकरण के साथ पहुंचे थे।

 

केएसईबी को तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक से 20,000 से अधिक बिजली मीटर और ट्रांसफार्मर प्राप्त हुए। चूंकि बोर्ड एकीकृत विद्युत विकास योजना और दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना पर काम कर रहा था ( बिजली वितरण और आपूर्ति में सुधार के लिए केंद्रीय योजनाएं ) तो बिजली के खंबे, मीटर और ट्रांसफार्मर का भंडार था। जिसे विद्युत बहाली के काम में इस्तेमाल कर सकता था।

 

पठानमथिट्टा के कार्यकारी अभियंता संतोष के ने इंडियास्पेंड को बताया, “हमें तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन से करीब 125 ट्रांसफार्मर मिले। 220 से अधिक ट्रांसफार्मर यहां डूबे हुए थे, लेकिन हम प्रतिस्थापन की उपलब्धता के कारण पांच दिनों के भीतर या तो उन्हें बदलने या ठीक करने में सक्षम थे।”

 

जिले में बुनियादी ढांचे का नुकसान 33 करोड़ रुपये था। केएसईबी ने बाढ़ के कारण होने वाले वित्तीय संकट से जूझने के लिए लोगों को समय देने के लिए 31 जनवरी, 2019 तक बकाया बिजली बिल की राशि को इकट्ठा नहीं करने का फैसला किया है।

 
( पलियथ विश्लेषक हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़े हैं। )

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 12 नवंबर, 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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