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क्या ऑटो- डिसेबल सिरिंज से पंजाब में नशे पर लगेगा लगाम?

तिष संघेरा,
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अमृतसर में नशे के खिलाफ एक जागरूकता रैली

 

मुंबई: स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बिना किसी पर्चे के सिरिंजों की बिक्री पर हालिया प्रतिबंध को हटाने के पंजाब सरकार के फैसले का स्वागत किया है। प्रतिबंध अत्यधिक नशीली दवाओं के दुरुपयोग को नियंत्रित करने का एक प्रयास था, लेकिन लोगों और जानकारों का तर्क था कि प्रतिबंध नशे के आदि लोगों को इसका पुन: उपयोग और साझा करने के लिए मजबूर करेगा, जिससे हेपेटाइटि- बी और सी और एचआईवी संक्रमण में वृद्धि हो सकती है, जो आमतौर पर सिरिंज से दवा लेने वालों के बीच फैलता है।

 

सार्वजनिक स्वास्थ्य समर्थक अब राज्य को यह सुनिश्चित करने पर जोर दे रहे हैं कि सभी निजी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को ऑटो- डिसेबल (एडी) सिरिंज को अपनाना होगा, जो सुरक्षा चक्र के साथ है। यह एक ही उपयोग के बाद टूट जाता है, जिससे यह साफ हो जाता है कि इसका कोई पुन: उपयोग नहीं कर सकता है।

 

5 जुलाई, 2018 को पंजाब के छह जिलों के डिप्टी कमिश्नरों ने हेमिन और अन्य इंजेक्शन योग्य नशीले पदार्थों के उपयोग पर राज्य सरकार के नवीनीकृत क्रैकडाउन के हिस्से के रूप में केमिस्ट की दुकानों और फार्मेसियों में सिरिंजों की ओवर-द-काउंटर बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था।

 

जून, 2018 में, मीडिया ने पंजाब में नशीली दवाओं के अत्यधिक मात्रा में सेवन के कारण 23 मौतों की सूचना दी थी, और कांग्रेस की अगुवाई वाली राज्य सरकार पर नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के दबाव डाला था, जो कि इसके मुख्य चुनाव वादे में से एक था।

 

मार्च 2017 में राज्य विधानसभा चुनाव जीतने पर मुख्यमंत्री के लिए नामित कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दावा किया था कि वह पंजाब की ड्रग की समस्या को ‘चार सप्ताह के भीतर’ मिटा देंगे। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के तहत काम करने के लिए एक टास्क फोर्स स्थापित करने का संकल्प किया था। “एसटीएफ ड्रग तस्करों और छोटे समय के आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ एक क्रैकडाउन लॉन्च करेगा। नशे की लत के इलाज के लिए मनोचिकित्सकों को दवा पुनर्वास केंद्रों में नियुक्त किया जाएगा,” जैसा कि  12 मार्च, 2018 को हिंदुस्तान टाइम्स में उन्हें यह कहते हुए उद्धृत किया गया था।

 

जानलेवा लत

 

पंजाब में 860,000 ओपियोड उपयोगकर्ता हैं, जिसमें 230,000 निर्भर है, यानी कि सामान्य रुप से काम करने के लिए भी उन्हें ड्रग्स की जरुरत है, जैसा कि सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण और पंजाब सरकार के केंद्रीय मंत्रालय द्वारा 2015 के अध्ययन में बताया गया है। अध्ययन में पाया गया है कि, पंजाब में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला ड्रग हेरोइन है ( 53 फीसदी )। इसके बाद, सबसे कम प्रचलित फार्मास्यूटिकल ओपियोड ( 14 फीसदी ) के बाद अफीम ( 33 फीसदी )  का इस्तेमाल किया जाता है।

 

नशे की लत मुख्य रुप से पुरुषों में पाया गया है, करीब 99 फीसदी। इनमें से 76 फीसदी 18 से 35 आयु वर्ग के बीच के थे और 89 फीसदी ने औपचारिक शिक्षा ली थी।

 

अपनी नशे की लत को पूरी करने के लिए हेरोईन ड्रग्स का आदी व्यक्ति औसतन प्रतिदिन 1,400 रुपए खर्च करता है। यह आंकड़ा राज्य के रोजाना 392 रुपए के प्रति व्यक्ति आय ( या 2017-18 में 142,958 सालाना ) से 3.5 गुना ज्यादा है। अफीन उपभोगकर्ता के लिए यह आंकड़ा प्रतिदिन 340 रुपए का है और फार्मास्यूटिकल ओपियोड के लिए यह आंकड़े 265 प्रतिदिन का है, जैसा कि अध्ययन में बताया गया है।

 

पंजाब के कुछ जिलों में 67 फीसदी परिवारों पर इस महामारी का प्रभाव है और यह प्रमुख सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

 

पंजाब में लंबे समय से चली आ रही नशीली दवाओं की दुर्व्यवहार की समस्या के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं। जिनमें से प्रमुख पाकिस्तान के साथ लगी सीमा, जो स्वयं स्वर्ण क्रिसेंट (एक क्षेत्र जो ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान को कवर करता है, एशिया के सबसे बड़े अफीम उत्पादक क्षेत्रों में से एक है) से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, जो नारकोटिक्स को भारत के अन्य हिस्सों की तुलना में पंजाब में आसानी से प्रवेश करने में सक्षम बनाता है।

 

व्यापार को सुविधाजनक बनाने में आधिकारियों पर भी आरोप हैं, खासतौर से पुलिस पर, जिसने पिछले शिरोमणि अकाली दल की अगुवाई वाली सरकार के तहत एक मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया सहित शक्तिशाली राजनेताओं के साथ-साथ कई गिरफ्तारियां भी की हैं।

 

पंजाब की उच्च युवा बेरोजगारी दर के लिए युवा पुरुषों के बीच ड्रग की त्वरित वृद्धि को दोषी ठहराया गया है। 18 से 29 वर्ष के बीच के 16.6 फीसदी लोग बेरोजगार हैं, जबकि इस संबंध में राष्ट्रीय औसत 10.2 फीसदी है। इस 2017 शोध पत्र के अनुसार, सेवाओं या विनिर्माण क्षेत्रों में काम करने के लिए कौशल की कमी और तेजी से मशीनीकृत का सामना करने वाला कृषि उद्योग ने कई ग्रामीण, शिक्षित युवाओं को मझधार में छोड़ दिया है।

 

समस्या से लड़ने का हालिया प्रयास

 

पिछले हफ्ते पंजाब मंत्रिमंडल ने केंद्र सरकार को सिफारिश करने का फैसला किया कि नशीली दवाओं के तस्करों को पहली बार पकड़े जाने पर मौत की सजा दी जाए। ‘नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सबस्टेंस’ (एनडीपीएस) अधिनियम वर्तमान में केवल दोहराने वाले अपराधियों के लिए मृत्युदंड निर्धारित करता है।

 

5 जुलाई, 2018 को ड्रग नेटवर्क में पुलिस भागीदारी के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य वार्षिक ड्रग जांच का आदेश दिया है।

 

साथ ही, कुछ जिला प्रशासकों ने बिना किसी पर्चे के सिरिंजों की बिक्री पर रोक लगाने के आदेश जारी किए, लेकिन राज्य सरकार ने आलोचना के बाद इसे हटा दिया, जिससे कहा गया कि इससे विकृत सिरिंजों में वृद्धि और दोबारा उपयोग में वृद्धि हो सकती है और संक्रामक रोगों के प्रसार को बढ़ावा मिल सकता है।

 

‘हिंदुस्तान सिरिंज एंड मेडिकल डिवाइसेस लिमिटेड’ के संयुक्त प्रबंध निदेशक राजीव नाथ ने प्रतिबंध की घोषणा के बाद इंडियास्पेंड को बताया था, “इस समस्या को हल करने का इरादा सही हो सकता है, लेकिन यह नशे की लत से पुन: उपयोग किए जाने वाले सिरिंज की समस्या को बढ़ाएगा और पंजाब में हेपेटाइटिस सी के फैलाव को तेज करेगा, जो पहले से ही चुनौतीपूर्ण हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर वाला क्षेत्र है।  “

 

2017 विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमानों के अनुसार, भारत में लगभग 40 मिलियन लोग हैपेटाइटिस बी से संक्रमित हैं और हेपेटाइटिस सी के साथ कम से कम 6 मिलियन लोग हैं। हालांकि, पंजाब के लिए राज्यव्यापी आंकड़े सामने आने कठिन हैं। हेपेटाइटिस सी (एचसीवी) से निपटने के लिए एक राज्य टास्क फोर्स 3.29 फीसदी या लगभग 650,000 रोगियों के प्रसार को रिकॉर्ड करता है।

 

पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी (पीएसएसीएस) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2017 में पंजाब में एचआईवी के 56, 975 सकारात्मक मामले दर्ज किए गए थे, जो 1.33 फीसदी की सकारात्मक दर थी। अमृतसर में 14,309 (2.58 फीसदी सकारात्मक दर) पर सबसे ज्यादा सकारात्मक मामले थे।

 

कुछ लोगों का मानना ​​था कि सिरिंजों पर प्रतिबंध केमिस्टों और फार्मेसी मालिकों को बड़े रूप से प्रभावित करेगा, जो ‘ड्रग्स के खिलाफ युद्ध’ में पुलिस से अतिरिक्त उत्पीड़न का सामना कर सकते हैं।

 

टिप्पणीकारों का यह भी मानना है कि आसपास के इलाकों में प्रतिबंध लगाना तो आसान है, लेकिन उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन सिरिंज खरीदने से रोकने के लिए कुछ भी नहीं है और वहां से वे सस्ती कीमत पर सिरिंज प्राप्त कर सकते हैं।

 

“यहां यह भी याद रखना जरूरी है कि पंजाब चंडीगढ़ और हरियाणा से बहुत करीब राज्य है, इसलिए कोई भी सीमा पार कर सकता है और सिरिंज खरीद सकता है।”

 

अन्य उपाय

 

मुख्यमंत्री कार्यालय ने प्रतिबंध वापस लेते हुए, राज्य भर में डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिया कि केमिस्टों को सिरिंज की सूची तैयार करने के लिए आदेश जारी करे और खरीदारों के विवरण सहित उनकी बिक्री का रिकॉर्ड रखे।

 

एक नई तकनीक का उपयोग करने का एक समाधान भी सुझाया गया है। वह है, ऑटो-अक्षम (एडी) सिरिंज, जो सुरक्षा प्लंगर्स के साथ होते हैं, जो एक ही उपयोग के बाद टूट जाते हैं। सभी नुस्खे में एडी सिरिंजों के उपयोग को निर्दिष्ट करना होगा और निजी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं दोनों को इसके इस्तेमाल में तेजी लाने की जरूरत है, जैसा कि पंजाब स्वास्थ्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर ‘इंडियन मेडिकल डिवाइस फाउंडेशन’ ने 7 जुलाई, 2018 में सुझाव दिया था।

 

सालाना दुनिया भर में 16 बिलियन इंजेक्शन लाए जाते हैं, जिनमें से 25-30 फीसदी भारत में होते हैं और केवल 37 फीसदी को सुरक्षित और आवश्यक समझा जाता है।

 

आर्थिक विकास और स्वास्थ्य देखभाल में सुधार के बावजूद भारत में इंजेक्शन को लेकर चिंताएं बनी रहती हैं। एनडीटीवी ने फरवरी 2018 में रिपोर्ट की थी कि इस साल की शुरुआत में स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा एक ही सिरिंज के इस्तेमाल के कारण  उत्तर प्रदेश में कम से कम 21 लोगों के एचआईवी से संक्रमित होने की सूचना मिली थी।

 

‘पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च’ (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ द्वारा मई 2018 स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी आकलन अध्ययन में सिरिंज के पुन: उपयोग और संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए एडी सिरिंजों के इस्तेमाल और इसे लागत प्रभावी समाधान के रूप में उद्धृत किया गया है।

 

आंध्र प्रदेश सरकार ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की है कि पीजीआईएमईआर रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर राज्य के सभी सार्वजनिक अस्पतालों 28 जून, 2018 तक एडी सिरिंज पर स्विच करेंगे, जो विश्व हेपेटाइटिस दिवस है।

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस तरह का उत्साह वर्धक अनुसरण देश भर में सरकारी नीतियों में देखना चाहते हैं।

 

(संघेरा, लंदन के किंग्स कॉलेज से ग्रैजुएट हैं और  इंडियास्पेंड में इंटर्न हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 11 जुलाई 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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