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गाँव में ई- गवर्नेंस उपयोग में रिकॉर्ड 35% की वृद्धि

गंगाधर एस पाटिल,
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Source: mKisan.gov.in

 

भारत सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया के अंतर्गत किये गए कार्यों में से ग्रामीण भारत में किसानों के लाभ के लिए ई- सूचना कार्यक्रमों में उतरोत्तर वृद्धि से सम्पूर्ण भारत विशेष कर गुजरात के किसानों ने इस्तेमाल कर लाभ उठाया | हाल के वर्षों में कंप्यूटर आधारित मोबाइल से सूचना प्राप्त करने में ग्रामीण भारत में 35% की वृद्धि दर्ज हुई | उपरोक्त संकेत सरकार और किसानों के बीच एक सकारात्मक संवाद और भविष्य में ई- सूचना से भारतीय किसानों को होने वाले लाभ को भी दर्शाते हैं|

 

भारत सरकार ने ग्रामीण भारत के किसानो को एक वेब-आधारित पोर्टल mKisan – मोबाइल पर उपलब्ध कराया है- जो की भारत भर में फैले 80 मिलियन ग्रामीण परिवार से संपर्क कर मोबाइल संदेशों / वीडियो के जरिये सरकार के विभिन्न संगठनों / कार्यालयों से प्राप्त कर सुन/पढ़/देख- बातचीत कर सकते हैं | उपरोक्त विडियो में बात करता एक भारतीय किसान निरंतर इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों की बढती मौजूदगी, विशेषकर मोबाइल पर उसका सरकार से सीधा संपर्क है|

 

3.5 बिलियन इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन – ई – व्यवहार, वर्ष 2014 में किये गए उसमें से आधे ग्रामीण इलाकों से आये जब कि इसके पिछले वर्ष केवल 20 % ही ई- व्यवहार पारस्परिक रूप से, किसान और सरकार के बीच, सम्पादित हुए, ये आंकडे इंडियास्पेंड ने भारत सरकार द्वारा बनाये गए ई- गवर्नेंस डैशबोर्ड,e-taal(Electronic Transaction Aggregate And Analysis Layer) से प्राप्त किये हैं |

 

वास्तविक जगत समय में हुए कुल e-taal संगणक आधारित व्यवहारों ई-ट्रांजेक्शनस, जो की भारतीयों और केन्द्रीय और राज्य सरकारों के 2,848 संगठनों और विभागों के बीच हुए | उक्त 29 सेवा क्षेत्र हैं जिनमें प्रमुख भूमि दस्तावेज, कृषि, सूचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिलों के और बिजली पेमेंट आदि शामिल हैं |

 

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ई- सेवाओं के इस्तेमाल का यह मतलब नहीं है कि उनकी वर्तमान गुणवत्ता वही है जो कि वास्तव में होना चाहिए, लेकिन कंप्यूटर और मोबाइल सहाए आधारित आंकड़े भारतीय किसानों और विभिन्न सरकारों के बीच हुए संदेशों के आदान प्रदान के अभिनव रिकार्ड्स हैं |

 

एक ई- ट्रांजेक्शन एक सरकारी प्रेषण सेवा है जो कि कंप्यूटर के माध्यम से दी जाती है|

 

उदहारण स्वरुप एक RT-Query यानी की सूचना के अधिकार के नियम के अंतर्गत किया गया कोई प्रश्न, कार्मिक और ट्रेनिंग विभाग (डी०ओ०पी०टी०) की वेबसाइट www.rtionline.gov.in या कोई किसान मौसम सम्बन्धी जानकारी अगर मोबाइल सन्देश(एस०एम०एस०) के जरिये वेबसाइट से प्राप्त करता है तो उसके इस सन्देश ग्रहण करने के कार्य को , एक ई- ट्रांजेक्शन कहा जाता है |

 

हमारे विश्लेषण से पता चला है कि भारतीय किसान ई- सेवाओं के द्वारा ज्यादातर जानकारियां मौसम सम्बन्धी, लैंड रिकार्ड्स की फोटोकॉपी या फसलों की वर्तमान कीमतों और पी०डी०एस० द्वारा जारी किये गए छूट प्रदत्त खाद्य कूपन प्राप्त करने के लिए करते हैं |

 

उक्त वीडियो भारत के सबसे घनी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में साफ़ तौर पर दर्शाता है कि ग्रामीण भारत के किसान किस तरह ई- सेवाओं से कैसे लाभान्वित हो रहे हैं |

 


Source: mKisan.gov.in

 

वर्ष 2013 में सम्पूर्ण देश में 2.4 बिलियन ई- ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड किये गए जिसमें से 480 मिलियन ग्रामीण भारत के ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट से सम्बंधित, ये आंकडे वर्ष 2014 में बढकर 1.7 बिलियन हो गए जो कि लगभग कुल हुआ ई- ट्रांजेक्शन 3.5 बिलियन ई- ट्रांजेक्शन का 50% है |

 

 

भारत में कृषि क्षेत्र में सबसे ज्यादा 980 मिलियन ट्रांजेक्शन ई सेवा क्षेत्र में हुआ वर्ष 2014 | वर्तमान वर्ष में बे मौसम बरसात और ओला बारिश के कारण उत्पन्न हुई ग्रामीण किसानों की मुसीबतों के चलते इंडियास्पेंड नें देखा कि ग्रामीण इलाकों में ई- ट्रांजेक्शन काफी बढ़ गया तब यह अहसास हुआ की किसानों का दुःख दूर करने में ई-टेक्नोलॉजी काफी मददगार है|सेल्युलर ऑपरेटरस एसोसिएशनस ऑफ़ इंडिया (सी०ओ०ए०आई०) के अनुसार भारत में कुल 687 मिलियन जीएसएम मोबाइल की संख्या में से 330 मिलियन मोबाइल ग्रामीण भारत में है| इस तरह किसानों का ई – ट्रांजेक्शन सरकार के साथ काफी बढ़ने की उम्मीद है, उपरोक्त विश्लेषण देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय किसान मोबाइल टेक्नोलॉजी के जरिये अपने समाधानों को पाने के लिए उत्साहित और प्रयत्नशील है| 

 

भारत में गुजराती सबसे ज्यादा ई-गवर्नेंस का इस्तेमाल करते हैं – लेकिन ई- सेवाओं को ज्यादा संख्या में प्रदान करने वाले राज्य मध्य प्रदेश और तमिलनाडु हैं | 

 

 

 

भारत में आंध्र प्रदेश ने सबसे ज्यादा ई- गवर्नेंस की संख्या में विस्तार किया गया है – जिसमें उसने 224 ई-सेवाएँ , उसके बाद तेलंगाना 186 और गुजरात ने 181 ई- सेवाओं का विस्तार किया |

 

ग्रामीण ई-प्रबंधन और सेवा के क्षेत्रों में उक्त ज्यादा सेवाएँ होने का मतलब है कि किसी स्तर पर ई- सेवा क्षेत्र में ज्ञान की कमी है- परिणाम स्वरुप बहुत सी ई-गवर्नेंस योजनायें असफल हो गयी |

 

सुनील अब्राहम, जो कि बैंगलोर स्थित- एक एडवोकेसी ग्रुप , सेण्टर फॉर इन्टरनेट सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक हैं उन्होंने बताया कि सरकारी ई-गवर्नेंस के प्रोजेक्ट्स असफल होने के प्रमुख कारणों में से एक है कि उनको बिना समुचित , “बेक-एंड सपोर्ट” के बिना ही बनाया गया , जिसके कारण ग्रामीण उपभोक्ताओं को काफी निराशा का सामना करना पड़ता है| सुनील अब्राहम ने आगे स्पष्ट किया कि ई- ट्रांजेक्शन की संख्या ३.५ बिलियन होने का यह मतलब नहीं की ई- गवर्नेंस के सभी मानक सही ढंग से काम कर रहे हैं| हमको प्रत्येक किसान द्वारा पूछे गए या बताये गए प्रश्नों/समाधानों के प्रश्नकाल के समय और जब किसानों को उनके उत्तर/समाधान मिले – उस समय अंतराल को परखना होगा – तभी हम एक सुगठित और योग्य ई- गवर्नेंस के उच्च मानदंडों पर खरे उतर सकते हैं |

 

राज्य सरकारों की ई- गवर्नेंस परियोजनों को छोडकर लगभग 20 मिशन परियोजनाएं हैं जो कि राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्लान के तहत पहली बार वर्ष 2004-5 में बने, उनमे से एक प्रोजेक्ट एमसीए21 है यह ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जिस पर वैधानिक तौर पर सभी सार्वजनिक और निजी कम्पनियों को अपने वित्तीय और शेयर धारकों से सम्बंधित सूचना अपलोड कर सकते हैं और दूसरी है पासपोर्ट सेवा जिसमें जाकर कोई भी भारतीय नागरिक पासपोर्ट के लिए एप्लाई कर सकता है|

 

ई-गवर्नेंस : एक सरकारी वेबसाइट के अलावा बहुत कुछ

 

ई-गवर्नेंस विभिन्न सेवाओ को प्राप्त करने में अधिक सहायक, सेवाओं की पारदर्शिता को बढाता है और वापस जवाब पाने के अंतराल को कम करता है|

 

अब आगे हम देखते हैं कि किस तरह भारत की तीन बड़ी ई-सेवाएँ किस तरीके से उपभोक्ताओं को लाभ पहुचाती हैं, यह ई-सेवाएँ हैं –कृषि, पीडीएस और बिल पेमेंट और अन्य उपयोगी सेवाएँ भी हैं |

 

जैसा कि हमने पहले लिखा है की भारत के सम्पूर्ण ई- ट्रांजेक्शन का 30% जो की 980 मिलियन केवल कृषि क्षेत्र में दर्ज किये गए | उपरोक्त सभी ई- ट्रांजेक्शन ऐसे हैं जिनके माध्यम से किसानों ने निम्न क्षेत्रो में जानकारी प्राप्त करने की कोशिश किया है , ये हैं मौसम, मृदा – परीक्षण, नए रजिस्ट्रेशन, नित्य के बाजार भाव और जिन्स की बाजार में आवक जो कि भारत भर में फैली 3,200 कृषि मंडियों के बारे में रजिस्टर्ड उपभोक्ताओं को एसएमएस और ईमेल के जरिये महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर हो जाती है |

विभिन्न कृषि सलाहकार केन्द्रों में भारतीय किसानों द्वारा पंजीयन कराने वालों की संख्या में उपरोक्त 3 गुना वृद्धि हुई है जो कि वर्ष 2013 में 3.7 मिलियन से बढ़ कर 2014 में 9.3 मिलियन हो गयी|

 

यद्यपि यह सच है कि काफी संख्या में किसान मोबाइल का इस्तेमाल परामर्श मांगने के लिय करते है लेकिन उनको कितना लाभ मिलता है इसके बारे में कोई अधिकारिक आंकड़े नहीं हैं उक्त बातें खाद्य और कृषि नीति विश्लेषण देवेन्द्र शर्मा ने बताया|

 

यह विचार-बोध की किसान नयी तकनीक के प्रति उत्सुक नहीं है और अवैज्ञानिक है एक गलत अवधारणा है शर्मा ने आगे कहा कि किसानों को इसकी बहुत जरुरत है और वो ई-सेवाओं के इस्तेमाल के लिए प्रयत्नशील है|

 

दूसरी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली ई-सेवा पी०डी०एस० है जिसमें ५३० ई- ट्रांजेक्शन दर्ज हुए जो कि मुख्य चार राज्यों से है:गुजरात , मध्य प्रदेश , उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र|

 

गुजरात में कुल पी०डी०एस० सिस्टम को डिजिटाइसड कर दिया है इस सिस्टम में बारकोड रीडर्स और बायोमीट्रिकस के जरिये पहले राशनकार्ड को जांचा जाता है और फिर कूपन को भेजा जाता है और पी०डी०एस० एसएमएस के जरिये कार्ड धारकों को सूचित किया जाता है |

 

सार्वजनिक खाद्य वितरण व्यवस्था को डिजिटाइसड करने के कारण ४२% काला बाजारियों के नेटवर्क को नुक्सान हुआ है, ऐसा सरकार ने संसद में स्वीकार किया है इस वर्ष इससे पता चलता है कि पी०डी०एस० में डिजिटाइजेशन से भ्रष्टाचार भी कम होता है गुजरात में पी०डी०एस० में प्रथम चरण से अंतिम चरण तक कंप्यूटराइजेशन के कारण राज्य ने जाली राशनकार्ड की व्यवस्था को ही ख़तम कर दिया जो की पी०डी०एस० में भ्रष्टाचार का एक प्रमुख कारण होता है |

 

भारत को ज्यादातर राज्यों ने पी०डी०एस० को डिजिटाइज करना शुरू कर दिया है लेकिन कुछ बड़े राज्य जैसे पश्चिम बंगाल ओड़िसा और राजस्थान ने अभी तक शुरुवात भी नहीं किया है| पी०डी०एस० से ज्यादातर गरीब भारतीय या आर्थिक रूप से निचले पायदान पर रहने वाले फायदा उठाते हैं|

 

वैसे डिजिटलीकरण के कारण गुजरात का पी०डी०एस० में काफी सुधार हुआ है लेकिन इस क्षेत्र में अभी बहुत कुछ किया जाना चाहिए |

 

अशोक जैन, जो की इंडियन चैप्टर ऑफ़ ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल के निदेशक मंडल में सदस्य हैं, ने कहा कि हालाँकि ई- गवर्नेंस भ्रष्टाचार में कमी लाता हैं, जनता को सूचना के अधिकार से शक्ति संपन्न बनाता है और सरकार से जनता के सम्बन्ध को सुधरता है – लेकिन इसका मतलब यह नहीं की इंटरनेट के जरिये प्रेषित एक प्रार्थना सब कुछ बदल देगी | जैन का संगठन एक स्वायतशासी संस्था है – जो भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम में शामिल है |

 

ई-गवर्नेंस का यह मतलब नहीं है कि इन्टरनेट पर एक वेबसाईट खोल दिया – और प्रार्थना –पत्रों के निवारण के कार्य होने लगे | बल्क़ि सरकार को ई-गवर्नेंस के लिये समुचित समाधान और कुशल और सक्षम अधिकारी नियुक्त करने होगे – जो शिकायती पत्रों पर उचित और शीघ्र क्रार्य कर सके |

 

ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में तीसरा सबसे बड़ा कार्य – क्षेत्र सरकारी – बिलों और अन्य सुविधाओ को इन्टरनेट वेब साईट के माध्यम से भुगतान होता है | इस बिल भुगतान क्षेत्र में भी गुजरात का स्थान प्रथम है – जहाँ कि 60 मिलियन ई- ट्रांजेक्शन हुये हैं – इसके बाद कर्नाटक और आन्ध्रप्रदेश आते हैं |

 

ई- सेवाओं के विस्तार के कारण – बिचौलिओं / दलालों का खात्मा हो जाता है और सरकारी सुविधाओं जल्दी निष्पादित हो जाती है | अब्राहम ने आगे बताया कि भारत की विशालता और हर तरफ की विभिन्नताओं के चलते – मूलभूत सुविधाओं को भारत के सुदूरतम इलाकों तक पहुचाना में केवल एक पारदर्शी ई- गवर्नेंस ही सहायक हो सकता है |

 

हाल में भारत में सम्पादित 3.5 बिलियन ई – ट्रांजेक्शन सामान्य भारतीय नागरिक अपने मूलभूत कार्यो को पूरा करने के लिये – लम्बी और बोझिल कतारों में घंटो खड़ा होने के बजाय – वह आज का एक अच्छा औजार – मोबाइल सेट को इस्तेमाल करना पसंद करेगा |

 

(पाटिल न्यू दिल्ली में एक स्वतंत्र पत्रकार हैं और द इकनोमिक टाइम्स ,डीएनए और न्यू इंडियन एक्सप्रेस के साथ काम कर चुके हैं |)

 

इमेज क्रेडिट :फ्लिकर/क्लाइमेट चेंज,एग्रीकल्चर और फ़ूड सिक्योरिटी

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