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ग्रामीण परिवारों के पास हर महीने एक पंखा खरीदने लायक अतिरिक्त पैसा

श्रीहरि पलियथ,
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मुंबई: 1,413 रुपये! यह ग्रामीण परिवारों में औसत मासिक अधिशेष राशि है। फिर चाहे वो एक खेती करने वाला परिवार हो या फिर गैर-कृषि परिवार। यह राशि एक पंखा खरीदने के लिए पर्याप्त है। लेकिन इस पैसे का इस्तेमाल ऋण चुकाने के लिए भी किया जाना चाहिए, जैसा कि नए सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है।  
 

इस माप में सबसे गरीब राज्य आंध्र प्रदेश, झारखंड और बिहार थे। आंध्र ( जो प्रति व्यक्ति आय अनुसार 29 भारतीय राज्यों में से 15वें स्थान पर है ) ने 95 रुपये की मासिक अधिशेष की सूचना दी है, जो राष्ट्रीय औसत का 1/15 वां और केवल एक लीटर रिफाइंड तेल खरीदने के लिए पर्याप्त है। अगस्त 2018 में ‘नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट’ (नाबार्ड) द्वारा जारी ‘अखिल भारतीय ग्रामीण वित्तीय समावेशन सर्वेक्षण 2016-17’ (एनएएफआईएस) से मिले ये आंकड़े कृषि परिवारों में स्थायी गरीबी, राज्यों के बीच अंतर और भारत में बढ़ती असमानताओं की पुष्टि करते हैं (दस्तावेज यहां और यहां देखे जा सकते हैं)। ग्रामीण भारतीय परिवारों की औसत मासिक व्यय ( कृषि और गैर कृषि ) 2015-16 में 6,646 रुपये (कृषि वर्ष 1 जुलाई, 2015 से जून 30, 2016 के बीच) था, जबकि औसत मासिक आय़ 8,059 रुपये थी।

 

इससे 1,413 रुपये मासिक अधिशेष बचता है, जिसकी हम बात कर रहे थे।

 

 2013 में हर ऋणधारक ग्रामीण परिवार का औसत ऋण 103,000 रुपये का था, जो कि रॉयल एनफील्ड बुलेट 350 की कीमत के बराबर है, जैसा कि इंडियास्पेन्ड ने 4 जनवरी, 2018 की रिपोर्ट में बताया है। यह शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में असमानता का संकेत है,  जहां 833 मिलियन या 68.8 फीसदी भारतीय रहते हैं, जिनमें से अधिकांश गरीब हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2016-17 में लॉन्च किए गए एनएएफआईएस में 29 राज्यों में 245 जिलों को कवर किया गया है, जिनमें ग्रामीण वित्तीय परिदृश्य के समग्र दृष्टिकोण को पाने के लिए “टायर -3 से टायर -6 शहरों (50,000 से कम आबादी) में 40,327 परिवार शामिल हैं। जबकि ग्रामीण भारत के सभी परिवारों के लिए औसत मासिक व्यय 6,646 रुपये, कृषि परिवार ( वे परिवार जो कृषि गतिविधियों से 5000 रुपये से अधिक अर्जित करते हैं ) गैर-कृषि घरों (6,187 रुपये) की तुलना में 15 फीसदी अधिक खर्च करते हैं ।

 

ग्रामीण परिवार में औसत मासिक आय और व्यय


 
पंजाब और केरल के परिवारों के व्यय सबसे ज्यादा
 

पंजाब में प्रति परिवार औसत मासिक व्यय (11,707 रुपये) भारत में सबसे ज्यादा था, जो 6,646 रुपये के राष्ट्रीय औसत से दोगुना था।  इसके बाद केरल (11,156 रुपये) का स्थान रहा है।

 

पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के परिवारों ने राष्ट्रीय औसत की तुलना में कम खर्च की सूचना दी है।

 

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कृषि परिवारों के लिए औसत मासिक प्रति व्यक्ति व्यय 1,375 रुपये था, जो दर्शाता है कि 50 फीसदी परिवारों ने प्रति माह, प्रति व्यक्ति 1,375 रुपये से कम मासिक खर्च की सूचना दी है।

 

राज्य अनुसार प्रति परिवार औसत मासिक आय और खपत व्यय

Source: NABARD All India Rural Financial Inclusion Survey 2016-17

 

आंध्र प्रदेश में अधिशेष राशि, करीब 95 रुपये (रिफाइंड तेल के लीटर की कीमत) देश में सबसे कम है, जो 1,413 रुपये के राष्ट्रीय औसत का लगभग 1/15वां हिस्सा है।   0.01 हेक्टेयर ( एक फुटबॉल क्षेत्र की एक चौथाई से भी कम ) से कम भूमि वाले कृषि परिवार की 8,136 रुपये की औसत मासिक आय थी, जो 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि वाले लोगों का लगभग आधा था।

 

भूमि के अनुसार कृषि परिवार के लिए औसत मासिक आय और खपत व्यय


 

रिपोर्ट के अनुसार, “0.01 हेक्टेयर भूमि से कम आकार के वर्गों के परिवारों के अपवाद के साथ, घरों के लिए आय अधिशेष बढ़ रहा है जिसमें जमीन के आकार में वृद्धि हुई है, जो कि 2 हेक्टेयर से अधिक की अंतिम आकार के स्तर में तेज वृद्धि दर्शाती है। ” ‘एम एस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन’ से जुड़े अर्थशास्त्री और अध्यक्ष मधुरा स्वामीनाथन ने 16 सितंबर, 2018 को एक साक्षात्कार में इंडियास्पेंड को बताया, “आय सिंचाई की प्रकृति और फसल के प्रकार जैसे कारकों के आधार पर भिन्न होती है। हमारे शोध में, हमने पाया कि सभी गांवों में लगभग 20 फीसदी -30 फीसदी छोटे किसान, कुछ मामलों में लगभग 50 फीसदी, घाटे में थे या नकारात्मक आय की ओर बढ़ रहे थे।”

 

सबसे गरीब की तुलना में समृद्ध छह गुना अधिक करते हैं खर्च
 

कृषि घरों में, सबसे अमीर परिवारों ने सबसे गरीब के रूप में छह गुना खर्च किया।

 

परिवारों की औसत मासिक खपत डेसील वर्ग (  1 से 10 के पैमाने प सबसे गरीब घर एक पर और सबसे समृद्ध 10 पर होते हैं ) के आधार पर भिन्न होती है ग्रामीण भारत के सभी घरों में, उच्चतम डेसील वर्ग, या सबसे अमीर में घरों की खपत सबसे कम की तुलना में 6.5 गुना अधिक थी, जबकि उनकी आय निम्नतम वर्ग की तुलना में 20 गुना थी।

 

एमपीसीई के डेसिल क्लास के आधार पर कृषि परिवार के लिए औसत मासिक आय और खपत व्यय

Source: NABARD All India Rural Financial Inclusion Survey 2016-17

 

रिपोर्ट के अनुसार, “सभी घरों को संयुक्त रूप से देखते हुए, दूसरे डेसील में घरों का खपत व्यय पहले डेसील के लगभग 1.5 गुना था, और दसवीं डेसील के लिए 9वीं डेसील की लगभग 1.5 गुना थी।”

 

” ऐसी बात कृषि और गैर-कृषि दोनों परिवारों के लिए आम थी¸ और सबसे अमीर परिवारों की तुलना में सबसे गरीब की स्थिति में व्यापक असमानता को दिखाता है। “

 

2 हेक्टेयर भूमि से अधिक के साथ कृषि परिवार गैर-खाद्य वस्तुओं पर मासिक व्यय का 52 फीसदी खर्च करते हैं, जबकि  0.01 हेक्टेयर भूमि से कम स्वामित्व वाले 46 फीसदी खर्च करते हैं।

 

सबसे अमीर परिवारों ने अपनी आय का 54 फीसदी गैर-खाद्य वस्तुओं पर खर्च किया, जबकि सबसे गरीब घरों का खर्च नौ प्रतिशत अंक कम था। इससे पता चलता है कि गरीबों ने अधिकांश आय को भोजन पर खर्च किया था।

 
( पलियथ विश्लेषक हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़े हैं। )
 
यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 24 सितंबर 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।
 

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