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ड्रग रेसिसटेंट टीबी से लड़ाई में दक्षिण अफ्रीका की सफलताओं से क्या-क्या सीख सकता है भारत

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जोहान्सबर्ग, केपटाउन, खायेलित्शा (दक्षिण अफ्रीका): जुलाई 2017 में, दो बच्चों की मां, 40 वर्षीय नोलुदे मबांडेला घर पर बेहोश हो गई। एम्बुलेंस बुलाया गया और मबांडेला को निकटतम सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया, जहां उसे मल्टी-ड्रग प्रतिरोधी टीबी (एमडीआर-टीबी) का पता चला। सामान्य दवा-संवेदनशील टीबी के इलाज के लिए जैसे कि राइफैम्पिसिन एमडीआर-टीबी पर काम नहीं करता है, जिससे मरीजों को मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है, जिससे पारंपरिक टीबी को जहां छह महीने लगते हैं ठीक होने में, उन्हें दो साल लगते हैं।

 

चालीस वर्षीय नोलुदवे मबांडेला, ने मल्टी-ड्रग रेसिसटेंस टीबी के लिए नई टीबी ड्रग्स बेडैक्लाइन और डेलमनिड प्राप्त की और एक साल बाद, अब उन्हें उम्मीद है कि वह पूरी तरह से ठीक हो जाएंगी। यहां, वह खुद एमडीआर-टीबी का पता चलने से पहले की एक तस्वीर दिखा रही है।.

 

पहले बीमार मबांडेला ( जो दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े टाउनशिप ख्यालीतशा या अनौपचारिक बस्ती, केप टाउन से 30 किमी दक्षिण-पूर्व में रहती है, ) एक निजी अस्पताल जाती थी, जहां उन्होंने टीबी का परीक्षण नहीं कराया गया था। सरकारी स्वास्थ्य कर्मचारियों ने मबांडेला पर एमडीआर-टीबी उपचार शुरु किया, जिसमें छह महीने तक इंजेक्शन लगाने वाली दवाएं शामिल थीं। दवाओं से उन्हें साइड-इफेक्ट हुए, जिसमें उसके पैरों में सुन्नता, सुनने में कमी और गुर्दे की क्षति शामिल है।

 

मबांडेला को तब दक्षिण अफ्रीकी स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) के माध्यम से बेडक्वीलाइन पर रखा गया था, जो लगभग 40 वर्षों में विकसित पहली नई टीबी दवा है।

 

2015 से, दक्षिण अफ्रीका ने बड़े पैमाने पर दवा प्रतिरोधी टीबी (एक्सडीआर-टीबी) के रोगियों  ( एमडीआर-टीबी का सबसे गंभीर रूप )  और  मबांडेला जैसे रोगियों के लिए, जिन्होंने एमडीआर-टीबी दवाओं से गंभीर दुष्प्रभाव विकसित किए के लिए उनके लिए एनटीसीपी में दवा उपलब्ध कराना शुरू कर दिया था।

 

मबांडेला ने नवंबर 2017 में अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता संगठन मेडीसिन सैन्स फ्रॉन्टिअर्स ( एमएसएफ ) से एक और नई टीबी ड्रग डेलामनिड प्राप्त की। ये नई दवाएं अभी भी आम तौर पर सुलभ नहीं हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो दुनिया के 558,000 एमडीआर-टीबी रोगियों में से करीब 24,000 ने अगस्त 2018 तक बेडक्वीलाइन प्राप्त की हैं, जबकि केवल 2,020 ने डेलामनिड प्राप्त किया है।

 

एचआईवी पॉजिटिव और कैंसर को मात देने वाली मबांडेला ने लगभग एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उम्मीद छोड़ दी थी। अब, इलाज शुरु हुए एक साल होने के बाद, वह पूरी तरह से ठीक होने की उम्मीद करती है। उनकी कहानी विश्व स्तर पर एमडीआर-टीबी रोगियों के लिए आशा की किरण है।

 

 2014 तक, दक्षिण अफ्रीका में दो एमडीआर-टीबी रोगियों में से लगभग एक का इलाज सफलतापूर्वक नहीं किया गया था, जैसा कि जुलाई 2018 में द लांसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित 19,000 रोगियों के पूर्वव्यापी अध्ययन से पता चलता है। अध्ययन के अनुसार 18 से 24 महीने के लंबे उपचार के दौरान, देश में 10 में से दो एमडीआर-टीबी रोगियों की मृत्यु हो गई है। यह स्थिति बदली, क्योंकि दक्षिण अफ्रीका ने कई रोगी-केंद्रित पहलों को विकसित और कार्यान्वित किया, जिन्होंने दवा प्रतिरोधी टीबी के लिए उपचार को आसान बनाया और दक्षिण अफ्रीका को सफल दवा प्रतिरोधी टीबी देखभाल का एक प्रमुख उदाहरण बनाया।

 

दवा प्रतिरोधी टीबी से लड़ने में दक्षिण अफ्रीका की सफलताओं को समझने के लिए, इंडियास्पेंड ने दक्षिण अफ्रीका में सरकारी अधिकारियों, चिकित्सकों, दवा प्रतिरोधी टीबी रोगियों और इससे लड़ने में वैचारिक माहौल बनाने वाले वकालत समूहों का साक्षात्कार किया। हमने पाया कि साक्ष्य-आधारित नीतियों के साथ राजनीतिक प्रतिबद्धता के समर्थन ने दक्षिण अफ्रीका ने रोगियों में मृत्यु को कम करने और भारत जैसे अन्य उच्च दवा प्रतिरोधी टीबी बोझ देशों के लिए एक रोल-मॉडल बनने में मदद की है।

 

इस श्रृंखला के पहले आलेख में, इंडियास्पेंड ने बताया है कि कैसे नवंबर 2018 तक भारत के 2.2 फीसदी से अधिक ड्रग-प्रतिरोधी टीबी रोगियों को बेडकॉलाइन प्राप्त नहीं हुई थी, हालांकि भारत में दुनिया में सबसे अधिक ड्रग-प्रतिरोधी टीबी रोगी हैं। इस दूसरे आलेख में, हम भारत के साथ दक्षिण अफ्रीका की नीतियों की तुलना करेंगे।

 

मरीजों में दवा प्रतिरोधी टीबी दवाओं के दुष्प्रभाव विकसित होते हैं

 

 

फुमेजा टिसील एक और एमडीआर-टीबी रोगी है, जिन्होंने मबांडेला की तरह, इंजेक्शन वाली दवाओं से हुए दुष्प्रभाव का सामना किया। टिसील केप टाउन विश्वविद्यालय में एक छात्रा थीं, जब 2010 में उन्हें टीबी का पता चला था। चूंकि दवा प्रतिरोधी टीबी का पता लगाने के लिए तेजी से निदान उपलब्ध नहीं थे, इसलिए उन्हें पारंपरिक टीबी उपचार के बाद ही एमडीआर-टीबी का पता चला था। फिर उन्हें छह महीने के लिए एक इंजेक्शन सहित एक दिन में 20 दवाओं के साथ परहेज पर रखा गया था। उपचार के दौरान एक रात, टिसील जाग गई और उन्हें एहसास हुआ कि वह सुन नहीं सकती है। इंजेक्शन एमडीआर-टीबी दवा केनामाइसिन के साइड इफेक्ट से उनके दोनों कानों की सुनने की क्षमता खत्म हो गई थी। इंडियास्पेंड से बात करते हुए उन्होंने बताया कि, “इससे पहले, मुझे किसी भी दुष्प्रभाव के बारे में सलाह नहीं दी गई थी। मुझे नहीं पता था कि टीबी का इलाज आपको बहरा बना सकता है। जब मैंने अपनी इस क्षति की सूचना दी, तो नर्स ने कहा कि उसे बहुत दुख है, लेकिन अब कुछ नहीं किया जा सकता है। ” इससे भी बुरी बात यह है कि आगे के परीक्षणों से पता चला है कि टिसील में एक्सडीआर-टीबी था और यह कैनामाइसिन के लिए प्रतिरोधी था, इसलिए वह दवा उनकी मदद नहीं कर रहा था। उसे लेते हुए उन्होंने सुनने की क्षमता खो दी।

 

छात्र फुमेजा तिसील ने एमडीआर-टीबी के लिए ली जाने वाली इंजेक्शन वाली दवा के साइड-इफ़ेक्ट से अपनी सुनने की क्षमता खो दी। ठीक होने के बाद, टिसील टीबी के मरीजों पारंपरिक एमडीआर-टीबी दवाओं के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं।

 

उस समय, 2010 में, दक्षिण अफ्रीका में एक्सडीआर-टीबी का उपचार केवल अस्पतालों में उपलब्ध था और इसका उद्देश्य संचरण को नियंत्रित करना था, जो रोगियों को काम और व्यक्तिगत जीवन से दूर, अस्पताल में लगभग पूरे दो साल के उपचार के लिए रखता था।

 

 टिसील ने केप टाउन के ब्रुकलिन चेस्ट हॉस्पिटल सहित तीन अस्पतालों में लगभग एक साल बिताया, लेकिन उनके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ।

 

उन्होंने बताया, “हर दिन मैंने अपने आसपास के रोगियों को मरते देखा। यहां तक ​​कि शवों को निकालने के लिए एक अलग रास्ता भी था।” उसके बाद उन्हें कहा गया कि उन पर इलाज काम नहीं कर रही थी और उन्हें एमएसएफ भेजा गया, जिसने उसे लाइनजोलिड प्रदान किया। यह एंटी-बैक्टीरियल दवा एमडीआर-टीबी और एक्सडीआर-टीबी रोगियों के लिए अंतिम उपाय की दवा के रूप में उपयोग की जाती है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के एनटीसीपी में उपलब्ध नहीं थी। जबकि लाइनजोलिड के गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जिसमें धुंधली दृष्टि, पैरों में सुन्नता और एनीमिया शामिल हैं। टिसील के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हुआ और उन्हें 2013 में ठीक किया गया।

 

जब उनका इलाज चल रहा था, तब उन्होंने 2013 में एमएसएफ की वेबसाइट पर ब्लॉगिंग शुरू की, जो कि इंजेक्शन करने योग्य टीबी दवाओं के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाती है और मीडिया और अन्य रोगियों का ध्यान आकर्षित करती है। उन्होंने कहा “मुझे यह कहते हुए रोगियों से संदेश मिला कि वे आत्महत्या करना चाहते थे। उनमें कोई उम्मीद नहीं थी। मैंने उन्हें बताया कि यह काम करेगा और वे बेहतर हो जाएंगे।” टिसील ने दोनों कानों में कर्णावत प्रत्यारोपण प्राप्त करने के लिए संसाधन जुटाने में कामयाबी हासिल की और अपने सुनने की क्षमता फिर से हासिल की। उसने अपनी पढ़ाई भी फिर से शुरू कर दी।

 

2013 तक खराब उपचार सफलता दर के साथ, दक्षिण अफ्रीका ने बेडक्वीलाइन शुरु किया

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ग्लोबल टबर्क्यलोसिस रिपोर्ट (जीटीआर ) 2018 के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका में 322,000 टीबी रोगी हैं, जिनमें से 14,000 रिफैम्पिसिन-प्रतिरोधी (आरआर) / एमडीआर-टीबी के मामले हैं, और 192,000 (59 फीसदी) में ह्यूमन इम्यूनो डेफिसिएन्सी वायरस (एचआईवी +) भी है। दक्षिण अफ्रीका में सभी दवा प्रतिरोधी टीबी रोगियों का 2.5 फीसदी (14,000) है। लैंसेट अध्ययन के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका में एमडीआर-टीबी उपचार की सफलता दर 54 फीसदी थी और मृत्यु दर 20 फीसदी थी। एक्सडीआर-टीबी रोगियों के लिए, सफलता दर 15 फीसदी थी और मृत्यु दर 42 फीसदी थी।

 

दक्षिण अफ्रीका में टीबी के मामले, 2009-17

उपचार पर शुरु की गई एमडीआर टीबी के मामलों और एमडीआर टीबी के मामलों की पुष्टि,2009-2017


 

जीटीआर 2018 के अनुसार, जबकि रोगियों की पूर्ण संख्या उच्च नहीं है, टीबी के मामलों के लिए प्रति 100,000 पर दक्षिण अफ्रीका की 567 की घटनाओं की दर ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के बीच सबसे अधिक है,पांचों उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं जिन्हें सामूहिक रूप से संक्षिप्त ब्रिक्स के रुप में माना जाता है। आरआर / एमडीआर-टीबी की घटनाओं के मामले में, दक्षिण अफ्रीका, प्रति 100,000 पर 25 के आंकड़ों के साथ रुस के बाद केवल दूसरे स्थान पर है। दक्षिण अफ्रीका में एचआईवी + टीबी रोगियों के लिए घटना दर प्रति 100,000 पर 345 है।

 

ब्रिक्स देशों में टीबी घटना, 2017

TB Incidence In BRICS Countries, 2017
Country TB cases RR/MDR TB cases TB deaths TB incidence (TB patients per 100,000) RR/MDR TB incidence
India 27,40,000 1,35,000 4,21,000 204 10
South Africa 3,22,000 14,000 78,000 567 25
China 8,89,000 73,000 38,800 63 5.2
Brazil 91,000 2400 7000 44 1.2
Russia 86,000 56,000 11,700 60 39

Source:World Health Organization, Global Tuberculosis report 2018

 

पारंपरिक उपचार से इस तरह के खराब परिणामों का सामना करते हुए, दक्षिण अफ्रीका ने 2013 में एक बेडक्वीलाइन एक्सेस कार्यक्रम के तहत पूर्व-एक्सडीआर और एक्सडीआर-टीबी रोगियों के लिए एनटीसीपी उपचार के लिए नए ड्रग बेडैक्लाइन को शामिल किया। इस कार्यक्रम में बेडकॉइलाइन के 200 कोर्स का उपयोग किया गया था, जो दक्षिण अफ्रीका को दान में मिला था।

 

पारंपरिक उपचार से इस तरह के खराब परिणामों का सामना करते हुए, दक्षिण अफ्रीका ने 2013 में एक बेडक्वीलाइन एक्सेस कार्यक्रम के तहत पूर्व-एक्सडीआर और एक्सडीआर-टीबी रोगियों के लिए एनटीसीपी उपचार के लिए नए ड्रग बेडैक्लाइन को शामिल किया। इस कार्यक्रम में बेडकॉइलाइन के 200 कोर्स का उपयोग किया गया था, जो दक्षिण अफ्रीका को दान में मिला था।

 

एनटीपीसी के निदेशक नोर्बर्ट नेडजेका ने इंडियास्पेंड को बताया, “हमने बेडक्वीलाइन का इस्तेमाल किया, क्योंकि इलाज के परिणाम बहुत खराब थे (पहले एमडीआर-टीबी और एक्सडीआर-टीबी उपचार के साथ) और हमने इसे नियंत्रित तरीके से इस्तेमाल किया, धीरे-धीरे बढ़ाया (रोगियों की संख्या)। हमने देखा कि यह हमारे लिए काम करता है।”

 

दक्षिण अफ्रीका ने बाजी मारी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 2012 से 2015 तक दवा देने वाले पहले 200 रोगियों के परिणाम उत्साहजनक थे, मृत्यु दर 50 फीसदी से 12.5 फीसदी ​​तक गिर गई थी।

 

दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के निदेशक नोरबर्ट नेडजेका ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका ने बेडक्वीलाइन की कोशिश की, जब पारंपरिक एमडीआर-टीबी उपचार ने खराब परिणाम दिखाए, और पाया कि दवा काम करती है। उन्होंने कहा कि “अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों को भी इसे मौका (बेडक्वीलाइन को) मिलना चाहिए। “

 

नेडजेका ने कहा, मरीजों और वकालत समूहों ने यह पूछना शुरू कर दिया कि दवा (बेडक्वीलाइन) जिसने एक्सडीआर-टीबी रोगियों के लिए मृत्यु दर में सुधार किया है, उन्हें एमडीआर-टीबी रोगियों से क्यों वंचित किया जा रहा था और यह मानवाधिकार का मामला बन गया।

 

परिणामों ने दक्षिण अफ्रीका को बड़े पैमाने पर भरोसा दिया। मार्च 2015 के बाद से, एनटीसीपी में बेडक्वीलाइन का उपयोग दूसरी पंक्ति के टीबी दवाओं या मानक शासन के लिए विषाक्तता के प्रतिरोध वाले सभी रोगियों के लिए किया गया है।

 

दक्षिण अफ्रीका एक्सडीआर और एमडीआर- दोनों तरह के टीबी के लिए बेडक्वीलाइन का करता है उपयोग
 

 जुलाई 2018 में लैंसेट में प्रकाशित, 2014 से 2016 तक 19,000 रोगियों के उपचार के पूर्वव्यापी अध्ययन में यह भी पाया गया कि बेडक्वीलाइन उपचार के दौर से गुजर रहे ड्रग-प्रतिरोधी टीबी रोगियों में मानक आहार लेने वालों की तुलना में मृत्यु का जोखिम बहुत कम था। यह स्पष्ट हो गया जब उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के इलेक्ट्रॉनिक ड्रग रेसिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस रजिस्टर (EDRweb) से राइफैम्पिसिन-प्रतिरोध वाले रोगियों के डेटा और राष्ट्रीय महत्वपूर्ण आँकड़ों के रजिस्टर से मृत्यु दर के आंकड़ों का मिलान किया। अध्ययन में बेडक्वीलाइन प्राप्त करने वाले रोगियों की मृत्यु दर (13 फीसदी) को भी दिखाया गया, जो कि मानक एमडीआर-टीबी देखभाल में हुई लोगों की मृत्यु दर (25 फीसदी) की तुलना में आधी थी। बेडक्वीलाइन समूह के रोगियों में एक्सडीआर-टीबी के लिए, मृत्यु दर लगभग एक तिहाई (15 फीसदी) और मानक आहार समूह में 40 फीसदी थी। जून 2018 में, दक्षिण अफ्रीका एमडीआर-टीबी और एक्सडीआर-टीबी दोनों रोगियों के लिए अपने उपचार के हिस्से के रुप में बेडक्वीलाइन बनाने वाला पहला देश बन गया। नई और पूरी तरह से मौखिक दवा ने गंभीर दुष्प्रभाव के साथ विषाक्त इंजेक्शन वाली दवाओं को बदल दिया। दुष्प्रभावों में सुनने की क्षमता पर असर, गुर्दे की विफलता और मनोविकृति शामिल हैं, जैसा कि अगस्त 2018 में इंडियास्पेंड ने अपनी रिपोर्ट में बताया है।

 

इस निर्णय तुरंत विशेषज्ञों और नागरिक समाज द्वारा स्वागत किया गया था। जुलाई 2018 में द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन में खलीलित्शा में एमएसएफ के एमडीआर-टीबी क्लिनिक के प्रमुख और दक्षिण अफ्रीका की राष्ट्रीय नैदानिक ​​सलाहकार समिति के सदस्य अंजा रॉयटर ने लिखा, “नए टीबी उपचार में दक्षिण अफ्रीका का नेतृत्व उन सभी के लिए एक प्रेरणा है, जो टीबी को समाप्त करने का लक्ष्य रखते हैं। ऐसा तभी संभव होगा, जब लोग नई चीजों को गले लगाएंगे।”

 

ग्लोबल ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी पहल के अनुसार, अगस्त 2018 तक, दक्षिण अफ्रीका में 16,800 एमडीआर-टीबी और एक्सडीआर-टीबी रोगियों को बेडक्वीलाइन मिला था, जो दवा के वैश्विक स्तर के दो तिहाई हिस्से में था। रॉयटर ने इंडियास्पेंड को बताया कि “दक्षिण अफ्रीका ने जिस दृष्टिकोण का इस्तेमाल किया, वह सबसे मजबूत दवाओं को बाहर करने के लिए था, ताकि ट्रांसमिशन पहले कम हो, फिर घटना, मृत्यु दर और रुग्णता कम हो।”

 

खलीलशा में एमएसएफ के एमडीआर-टीबी क्लिनिक के प्रमुख अंजा रॉयटर ने कहा, “दक्षिण अफ्रीका ने जिस दृष्टिकोण का इस्तेमाल किया, वह सबसे मजबूत दवाओं को बाहर करने के लिए किया गया था, जिससे ट्रांसमिशन, घटना, मृत्यु दर और रुग्णता कम हो जाए।”

 

दक्षिण अफ्रीका के दो महीने बाद, अगस्त 2018 में, डब्ल्यूएचओ ने सभी दवा-प्रतिरोधी टीबी रोगियों के लिए एक फ्रंट-लाइन दवा के रूप में बेडक्वीलाइन की सिफारिश की, और पूरी तरह से मौखिक आहार को प्राथमिकता देने के लिए कहा। डब्ल्यूएचओ ने 21 दिसंबर, 2018 को दक्षिण अफ्रीका के अनुभव सहित कई शोध अध्ययनों के आधार पर, इन दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप दिया।

 

 दुनिया के बाकी हिस्सों को शुरुआत से शुरू नहीं करना है और दक्षिण अफ्रीका से मिले इन सबक को लागू कर सकते हैं। डब्ल्यूएचओ द्वारा ड्रग-प्रतिरोधी टीबी के खिलाफ फ्रंट-लाइन दवा के रूप में बेडक्वीलाइन की हालिया सिफारिशों के साथ, सुरक्षा और प्रभावकारिता संबंधी चिंताओं को पहले से ही दूर किया गया है। “हम भारत, चीन, रूस, ब्राजील और किसी भी देश को दवा की शुरुआत करने के लिए उच्च एमडीआर-टीबी बोझ के साथ बुला रहे हैं,” जैसा कि नेडजेका ने कहा। उन्होंने कहा कि इनमें से किसी भी देश में 80-90 फीसदी सफलता दर नहीं है और यह हासिल करने में दवा मदद कर सकती है।

 

भारत वर्तमान में बेडक्वीलाइन और डेलमनीड को केवल सीमित एक्सडीआर और एक्सडीआर-टीबी रोगियों के लिए सरकार द्वारा संचालित केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराता है जो सख्त पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं। दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने वाले मरीजों की आशंकाओं के बीच सरकार इन दवाओं तक सख्ती से पहुंच को नियंत्रित करती है। इंडियास्पेंड की एक जांच में यह भी पाया गया कि भारत में शायद दवाओं का पर्याप्त स्टॉक नहीं है।

 

रॉयटर ने कहा, “हर साल पांच लाख लोगों को दवा प्रतिरोधी टीबी का पता चलता है। अभी स्पष्ट रूप से एक संकट है और एक अज्ञात भविष्य की आबादी के लिए संकट का सामना करने में एक बहुत प्रभावी दवा को रोकना नैतिक रूप से बहुत ही आपत्तिजनक है।”

 

एचआईवी के खिलाफ लड़ाई से सबक ने दक्षिण अफ्रीका को एक सक्रिय टीबी नीति का मसौदा तैयार करने में मदद की
 

  दक्षिण अफ्रीका के 5.77 करोड़ लोगों में से 75 लाख या 13.1 फीसदी एचआईवी पॉजिटिव हैं। दक्षिण अफ्रीका में वर्तमान में सबसे बड़ा राष्ट्रीय एंटी-रेट्रो वायरल उपचार कार्यक्रम (एआरटी; दवाओं का इस्तेमाल एचआईवी का इलाज करने के लिए) है, जिसमें 2018 में 45 लाख अधिक एचआईवी + रोगियों को एआरटी प्रदान किया, लेकिन इसे स्थापित करने के तरीके के साथ कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। देश ऐसे नेताओं से त्रस्त था, जिन्होंने बयानों के साथ जनता को गुमराह करते हुए कहा कि एचआईवी एड्स का कारण नहीं है। और एक राष्ट्रीय नीति बहुत महंगी समझी जाने वाली जीवन रक्षक एआरटी ड्रग्स प्रदान नहीं करती थी। अंत में चीजें 2003 में दिखाई देने लगीं, लेकिन एआरटी का उठाव अब भी धीमा था, जिससे मरीजों और मानवाधिकार समूहों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे।

 

ट्रीटमेंट एक्शन कोलेशन जैसे नागरिक समाज संगठनों ने एचआईवी उपचार के लिए बाधाओं के खिलाफ सार्वजनिक दबाव बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सिविल सोसाइटी गठबंधन द्वारा उठाए गए इस गति ने टीबी उपचार के आसपास के मुद्दों को उजागर करने में मदद की, और दक्षिण अफ्रीका सरकार द्वारा निभाई गई सक्रिय भूमिका के लिए अच्छी तरह से जिम्मेदार हो सकता है।

 

एक व्यक्ति जिसे दक्षिण अफ्रीका की नीतियों में बहुत सारे बदलावों का श्रेय दिया जाता है, वह पाकीशे एरोन मोटोसाल्दी हैं, जो 2009 के बाद से दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री हैं। उनके कार्यकाल के दौरान, बड़े पैमाने पर एचआईवी स्क्रीनिंग और उपचार पूरे देश में उपलब्ध कराया गया और दक्षिण अफ्रीका में एड्स से होने वाली मौतों और मामलों में गिरावट देखी गई।

 

मोटोसाल्दी ने टीबी कार्यक्रमों को लागू करने के लिए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के तहत गठित स्टॉप-टीबी पार्टनरशिप बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। उनके नेतृत्व में, कई टीबी पहलों को लागू किया गया था – जैसे कि कार्ट्रिज आधारित न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (व्यापक रूप से जीन एक्सपर टेस्ट) को रोल-आउट के रूप में, टीबी के लिए प्रारंभिक निदान के रूप में, जल्दी से एचआईवी + स्क्रीन को दिखाने के लिए मूत्र लिपोराबिनोमैनन (एलएएम) परीक्षणों को अपनाना। टीबी के लिए रोगियों, और एक इंजेक्शन मुक्त दवा प्रतिरोधी टीबी आहार की शुरूआत।

 

सितंबर 2018 में न्यूयॉर्क में टीबी पर एक उच्च-स्तरीय बैठक की मेजबानी करने के लिए संयुक्त राष्ट्र से आग्रह करने के लिए, मोटोसाल्दी ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर टीबी पर राजनीतिक दिलचस्पी भी जगाई, ताकि देश के प्रमुखों द्वारा इस बीमारी पर बहस की जा सके। संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में यह केवल पांचवां अवसर था, जब इस तरह की बैठक स्वास्थ्य के मुद्दे पर आयोजित की गई थी।

 

 जुलाई 2018 में, दक्षिण अफ्रीका ने भी एक “साहसी” निर्णय लिया और टीबी पर संयुक्त राष्ट्र की राजनीतिक घोषणा के एक मसौदे के पाठ पर ‘अपनी चुप्पी’ तोड़ दी, जिसने संयुक्त राष्ट्र की घोषणाओं और स्वास्थ्य और दवाओं तक पहुंच के लिए ‘लचीलेपन’ को बहुत कम कर दिया था। लचीलापन उनके अनुसंधान और विकास पर होने वाली लागत से दवाओं की लागत को अलग करने से संबंधित था। यह इन लचीलेपन के कारण था कि 2000 के बाद से एआरटी की कीमतें 96 फीसदी तक गिर गई थीं, जिससे दक्षिण अफ्रीका दुनिया में शायद सबसे बड़ा एआरटी कार्यक्रम बना सका। अंतिम नीति दस्तावेज ने व्यापार के लचीलेपन को कम नहीं किया।

 

बेडक्वीलाइन के लिए शुरुआत में 200 दान किए गए कोर्स का उपयोग करने के बाद, दक्षिण अफ्रीका ने अपने निर्माताओं, जेनसेन फार्मास्यूटिकल्स से सीधे दवा खरीदने का फैसला किया। जबकि कई दूसरे देश दान पर ही निर्भर रहते हैं।

 

जुलाई 2018 में, दक्षिण अफ्रीका ने जैनसेन के साथ छह महीने के बेडक्वीलाइन कोर्स की कीमत 750 डॉलर (52,550 रुपये) से 400 डॉलर (28,029 रुपये) तक कम करने के लिए बातचीत की। इसने न केवल दक्षिण अफ्रीकी सरकार के लिए $ 36 मिलियन (252 करोड़ रुपये) बचाने में मदद की, बल्कि इसने अन्य देशों के लिए भी दवा को सुलभ बनाया।

 

अक्टूबर 2018 में, “टीबी को समाप्त करने के लिए उत्कृष्ट नेतृत्व” के लिए मोटोसेल्दी को 2018 कोचोन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

 

 जब एक नई दवा को प्रस्तुत किया गया, तो दक्षिण अफ्रीका ने सबूत इकट्ठा किए और फिर इसे अधिक से अधिक दवा प्रतिरोधी टीबी रोगियों को देने के तरीके ढूंढे। उन्होंने 2013 में बेडक्वीलाइन का उपयोग करना शुरू कर दिया और पिछले पांच वर्षों में डॉक्टरों और नर्सों के बीच बेडक्वीलाइन को निर्धारित करने की द्ष्टि विकसित की, क्योंकि यह जीवन बचाता है।

 

नेडजेका ने इंडियास्पेंड को बताया कि, “बेडक्वीलाइन दवा प्रतिरोधी टीबी का इलाज करने वाली दवाओं की तुलना में कहीं अधिक आसान है, और अधिक आसानी से सहन किया जाता है। अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों को इसे  एक मौका देना चाहिए।”

 

ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी से युद्ध: दक्षिण अफ्रीका में साक्ष्य से लेकर कार्यान्वयन तक

कई तरह के पहल ने दक्षिण अफ्रीका को अपनी अभिनव नीतियों को लागू करने और दवा-प्रतिरोधी टीबी से लड़ने में एक विश्व नेता बनने में मदद की।

उपचार का विकेंद्रीकरण: एमडीआर-टीबी रोगियों को उनके उपचार की अवधि के लिए अस्पताल में भर्ती रखने की नीति के खराब परिणाम सामने आने के बाद दवा प्रतिरोधी टीबी चिकित्सा को विकेंद्रीकृत किया गया है।

दक्षिण अफ्रीका के नौ प्रांतों के प्रत्येक जिले में प्रशिक्षित डॉक्टरों, नर्सों और क्लिनिक चिकित्सकों, फार्मेसी और प्रयोगशाला सुविधाओं के साथ एक दवा प्रतिरोधी टीबी उपचार स्थल है। इन केंद्रों में सुनने की जांच करने के लिए ईसीजी परीक्षण और ऑडियोमेट्री की सुविधाएं भी हैं।

एनटीसीपी के निदेशक नेडजेका ने इंडियास्पेंड को बताया कि देश के कुल 253 उप-जिला केंद्रों में से 86 फीसदी में बेडक्वीलाइन उपचार शुरू हो गया है।

इन केंद्रों में डॉक्टरों को नई दवा से परिचित कराने में मदद करने के लिए, डॉक्टरों ने फॉर्म में जिन मरीजों को बेडक्वीलाइन के लिए योग्य पाया और इसे राष्ट्रीय नैदानिक ​​सलाहकार समिति के पास भेज दिया। इन विशेषज्ञों ने उन्हें सलाह दी कि कौन से उपचार का उपयोग करना है। इसने अच्छी तरह से काम किया जैसा कि डॉक्टर देश के अग्रणी विशेषज्ञों के साथ रोगियों पर सीधे चर्चा कर सकते थे। 2015 के बाद, इन केंद्रों को विशेषज्ञों की अधिक आवश्यकता नहीं थी।

प्रत्येक प्रांत जटिल मामलों पर प्रत्यक्ष विशेषज्ञ की राय प्राप्त करने के लिए सोशल मीडिया और प्राथमिक चिकित्सकों और छाती चिकित्सकों के एक व्हाट्सएप समूह का उपयोग करता है। इसने बेडक्वीलाइन के उपयोग को बढ़ाया है, जैसा कि नेडजेका ने बताया है।.

पहचान और उपचार: दक्षिण अफ्रीका ने खनन उद्योग के श्रमिकों, जेलों के कैदियों को भी टीबी की चपेट में आने का पता लगाया, और उन्हें बीमारी के लिए स्क्रीन करने की रणनीति विकसित की। जबकि खनन कंपनियों को अपने श्रमिकों के लिए स्क्रीनिंग आयोजित करने के लिए कहा गया था।

टीबी थिंक टैंक: अपनी खुद की आबादी के लिए तकनीकी सलाह को समयबद्ध तरीके से अनुकूल बनाने के लिए, एनटीसीपी ने 2014 में टीबी थिंक टैंक की स्थापना की। जिसमें शोधकर्ता, सरकारी अधिकारी और नागरिक समाज के सदस्य शामिल थे। इसमें टीबी प्रतिक्रिया, वितरण और कार्यान्वयन और नई दवाओं और निदान को आधुनिक बनाने के लिए तीन कार्य समूह थे।

तब से, थिंक टैंक ने टीबी के इलाज के लिए $ 2.7 करोड़ (189 करोड़ रुपये) की घरेलू फंडिंग हासिल करने के लिए मार्गदर्शन जारी किया है, जिसमें अव्यक्त टीबी के इलाज के लिए नौ महीने के लिए आइसोनियाज़िड का उपयोग करने की निवारक रणनीति की सिफारिश की गई है, और अन्य चीजों के साथ एक अल्पकालिक बेडकॉलाइन उपचार का उपयोग करना है ( एमडीआर-टीबी के लिए 9 महीने बनाम 24 महीने)।

क्लिनिकल परीक्षण: दक्षिण अफ्रीका के मरीज भी कई नैदानिक ​​परीक्षणों का हिस्सा रहे हैं, जिनमें एनआईएक्स ट्रायल शामिल है, जिसमें एक्सडीआर-टीबी रोगियों के लिए 6-9 महीनों के लिए बेडक्वीलाइन, प्रीटोमोनीड और लाइनज़ोल सहित सभी मौखिक दवाएं शामिल हैं; खलीलित्सा में एमएसएफ द्वारा एंड टीबी परीक्षण, जिसमें सभी मौखिक और लघु रेजिमेंस शामिल थे जिसमें बेडक्वीलाइन और डेलमनीड शामिल थे; और स्ट्रीम 2 का परीक्षण, जिसे बंद करना पड़ा क्योंकि इसमें अभी भी इंजेक्शन वाली दवाएं शामिल थीं, जो अब देश में उपयोग नहीं की जाती हैं।

बेडक्वीलाइन प्रतिरोध के लिए परीक्षण: दक्षिण अफ्रीका ने एक बेडक्वीलाइन प्रतिरोध निगरानी कार्यक्रम की शुरुआत में दूरदर्शिता दिखाई है, जो विभिन्न साइटों से बेडक्वीलाइन पर शुरू किए गए रोगियों के नियमित नमूने एकत्र करता है और प्रतिरोध के लिए उनका परीक्षण करता है। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्यूनिकेबल डिसीज (एनआईसीडी) के शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के शोधकर्ताओं द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन ने बेडक्वीलाइन के प्रतिरोध का पता लगाने के लिए निगरानी के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले मानदंडों को परिभाषित किया। ये मानदंड डब्लूएचओ की दुनिया भर की प्रयोगशालाओं के नीति मार्गदर्शन का हिस्सा बन गए हैं।

निगरानी के दौरान पाया गया है कि 1 फीसदी से भी कम रोगियों ने बेडक्वीलाइन के प्रतिरोध के लिए आनुवंशिक मार्कर दिखाए। हालांकि, निगरानी के दौरान देखा गया प्रतिरोध चिंता का कारण है, यह आश्चर्यजनक नहीं है क्योंकि सर्वेक्षण में शामिल मरीज मुख्य रूप से एक्सडीआर-टीबी के रोगी थे, जिनमें कुछ प्रभावी दवाएं उपचार के लिए शेष थीं। एनआईसीडी में टीबी के लिए केंद्र के प्रमुख नजीर इस्माइल ने बताया कि, “आदर्श रूप से, बीमारी से लड़ने और प्रतिरोध को रोकने के लिए आपको 3-5 दवाओं की आवश्यकता होती है। हमने देखा कि बेडक्वीलाइन के साथ केवल 1 या 2 प्रभावी दवाओं के साथ एक उप-इष्टतम परहेज पर मरीजों को बेडक्वीलाइन प्रतिरोध विकसित करने की अधिक संभावना थी।

इस्माइल ने कहा, राष्ट्रीय कार्यक्रम में सभी एमडीआर-टीबी रोगियों के इलाज के लिए बेडक्वीलाइन के व्यापक उपयोग के साथ, जब तक पालन अच्छा होता है, तब तक बेडक्वीलाइन प्रतिरोध का जोखिम कम होगा।

टीबी के इलाज के लिए विभिन्न पक्षों को लेकर दो आलेखों की श्रृंखला का यह दूसरा और अंतिम आलेख है।पहला भाग आप यहां पढ़ सकते हैं।

 

(यदवार प्रमुख संवाददाता हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़ी हैं।)
 

यदवार 2018 में एमएसएफ मीडिया फेलो थीं। रिपोर्ट पर एमएसएफ की कोई निगरानी या संपादकीय नियंत्रण नहीं है।

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 11 जनवरी 2019 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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