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‘न्यू एज स्किल’से पूरे होंगे भारतीय किशोर लड़कियों के सपने !

देवयानी क्षेत्री,
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मुंबई: हर पांचवीं किशोर भारतीय लड़की वर्तमान में अध्ययन नहीं कर रही हैं। उम्र में वृद्धि के साथ ड्रॉपआउट में वृद्धि हुई है।  लगभग हर दूसरी किशोरी का मानना ​​है कि लड़कों के पास शिक्षा और काम में आगे बढ़ाने के बेहतर अवसर हैं और पांच में से केवल एक का मानना ​​है कि लड़के भी उनती तरह ही घरेलू काम कर सकते हैं।  यह नंदी फाउंडेशन की एक परियोजना ‘ नन्ही कली’ द्वारा जारी एक रिपोर्ट, द टीन एज गर्ल्स रिपोर्ट ( या टैग रिपोर्ट ) के कुछ निष्कर्ष हैं। नंदी फाउंडेशन किशोर लड़कियों के साथ काम करती है।  हालांकि किशोर लड़कियों की आकांक्षाएं बढ़ रही हैं ( 10 किशोर भारतीय लड़कियों में से सात स्नातक स्तर की पढ़ाई खत्म करना चाहती हैं, चार में से तीन के पास विशिष्ट करियर योजना है, और लगभग चार में से तीन 21 की उम्र से पहले शादी नहीं करना चाहती हैं, जैसा कि हमने इस श्रृंखला के पहले भाग में बताया था ) लेकिन समाज में और घर पर उनकी वर्तमान स्थिति में काफी बदलाव नहीं आया है । सर्वेक्षण कहता है,  ‘न्यू एज स्किल’ जैसे कि कई अकेले यात्रा करना,  स्मार्टफोन का उपयोग करना, अंग्रेजी में कंप्यूटर पर कोई दस्तावेज़ लिखना और दिशा पूछने के लिए अब भी उन्हें संघर्ष करना पड़ता है। सर्वेक्षण में 13-19 साल की उम्र की लड़कियों से नौ विषयों पर प्रश्न पूछे गए, जिनमें  शैक्षिक और स्वास्थ्य की स्थिति, बुनियादी जीवन कौशल, एजेंसी और घर के अंदर और बाहर सशक्तिकरण और अकांक्षाएं शामिल हैं।  इस तीन लेखों की श्रृंखला के दूसरे भाग में, हम पता लगाने की कोशिश करेंगे कि कैसे उनकी शैक्षिक स्थिति, सशक्तिकरण और लिंग मानदंडों और ,  ‘न्यू एज स्किल’ पर दृष्टिकोण इन आकांक्षाओं के खिलाफ काम करते हैं। यह ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2019 में 63.2 मिलियन लोग पहली बार मतदाता बनने के लिए तैयार हैं। तीसरे आलेख में देखेंगे कि देश में स्वास्थ्य देखभाल और स्वच्छता तक उनकी पहुंच कैसे महत्वपूर्ण है, जहां हर दूसरी किशोर लड़की एनीमिक है।

 
5 किशोर भारतीय लड़कियों में से 1 वर्तमान में अध्ययन नहीं कर रही हैं
 

किशोर लड़कियां भारत की जनसंख्या का 6.6 फीसदी (80 मिलियन) बनाती हैं ( तुर्की की आबादी के बराबर ) और शिक्षा उन्हें रोजगार खोजने, आकांक्षाओं को प्राप्त करने, स्वस्थ होने और गरीबी को कम करने में मदद करती है।

 

फिर भी, जैसे ही अधिक लड़कियां बेहतर अवसरों के लिए प्रयास करती हैं, उन्हें लैंगिक समानता और माध्यमिक शिक्षा को पूरा करने में असमर्थता से चुनौती मिलती है।

 

जैसा कि हमने कहा, पांच किशोर भारतीय लड़कियों में से एक, वर्तमान में अध्ययन नहीं कर रहा है। आंकड़े भी यही कहते हैं।

 

13 से 19 वर्ष की लड़कियों के लिए वर्तमान शैक्षिक स्थिति


 

वर्तमान में आंध्र प्रदेश, केरल, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में पढ़ने वाली लड़कियों का सबसे ज्यादा प्रतिशत है। करीब 100 फीसदी। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में वर्तमान में केवल 64 फीसदी लड़कियां पढ़ रही हैं। इन दोनों राज्यों ने सबसे खराब प्रदर्शन किया है।

 

सर्वेक्षण में दिखाया गया है कि 13 वर्ष की 92.3 फीसदी लड़कियां वर्तमान में पढ़ाई कर रही हैं, जबकि यह 19 साल की उम्र में 65.5 फीसदी हो गई है।

 

भारतीय किशोर लड़कियों की शैक्षिक स्थिति

Source: Teen Age Girls Report, Naandi Foundation

 
लड़कियों पर निवेश – समाज आधारित समाधान

 

नंदी फाउंडेशन के मुख्य नीति अधिकारी रोहिणी मुखर्जी कहती हैं, “हम इस तथ्य के आसपास काम कर रहे हैं कि लड़कियों पर निवेश करना एक अच्छा विचार है।”

 

अच्छी शिक्षा की प्राप्ति और ‘नए आयु कौशल’ के विकास में निवेश का( जो सर्वेक्षण एक गहन प्रौद्योगिकी उन्मुख और तेजी से विकसित परिदृश्य में कुशल कामकाज के लिए महत्वपूर्ण कौशल के रूप में परिभाषित करता है ) दूरगामी और दीर्घकालिक लाभ है, जैसा कि रिपोर्ट में कहा गया है।

 

इस आयु वर्ग में लड़कियों पर ध्यान दो बातों पर आधारित है: श्रम बल में योगदान देने वाली किसी भी लड़की द्वारा उत्पादकता की क्षमता, और जन्म देने वाले बच्चों का विकास।

 

18 साल की उम्र तक 12 वर्ष या उससे अधिक वर्षों तक पढ़ाई करने वाली लड़कियों में किशोर गर्भावस्था होने की संभावना कम होती हैं, बच्चों के बीच एक कम अंतराल होने की संभावना कम होती है और उनके जीवनकाल के दौरान दो से अधिक बच्चों की संभावना कम है, जैसा कि इंडियास्पेन्ड ने 22 जनवरी, 2018 की रिपोर्ट में बताया था। बच्चे को जन्म देने में देरी, भारत की 2050 1.7 बिलियन की अनुमानित आबादी को एक-तिहाई से कम कर सकती है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने 12 जनवरी, 2018 की रिपोर्ट में बताया है।  

 

अमेरिका के गैर-लाभकारी संगठन, ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन विमेन’ (आईसीआरडब्लू) द्वारा 2017 के एक अध्ययन से पता चलता है कि बच्चे को जन्म देना, जल्दी विवाह के साथ समानांतर रुप से चलता है ( जो लड़कियों को अपने स्कूलों से बाहर निकलने के प्रमुख कारणों में से एक के रूप में देखा गया है।)  सर्वेक्षण में दिखाया गया है कि, 96 फीसदी किशोर भारतीय लड़कियां अविवाहित हैं। लगभग 73 फीसदी लड़कियां ने कहा कि वे 21 साल की उम्र में या उसके बाद शादी करना पसंद करेंगी जो 70 फीसदी ऐसी लड़कियों का पूरक है, जो प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए ग्रैजुएट होना चाहती हैं।

 

टैग की रिपोर्ट में कहा गया है, “स्कूल में बिताए गए प्रत्येक अतिरिक्त वर्ष से लड़की द्वारा अर्जित आय में कम से कम 10 फीसदी से 20 फीसदी की वृद्धि होती है। माध्यमिक शिक्षा पर 15 फीसदी -25 फीसदी तक रिटर्न अधिक है। “

 

महिलाओं को अपने परिवारों में 90 फीसदी आय का पुनर्निवेश करने के लिए भी देखा जाता था। इसलिए, महिलाओं की बढ़ती आय ने पूरे परिवारों और समुदायों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद की है, जैसा कि रिपोर्ट में कहा गया है।

 

 शिक्षा के उच्च स्तर भी जीवन स्तर के मानकों की उच्च उम्मीदों को बढ़ावा देते हैं। आत्मनिर्भरता, या स्वयं को प्रदान करने की क्षमता, माध्यमिक या तृतीयक स्तर (कॉलेज) के बाद अधिक है क्योंकि अर्जित आय बढ़ जाती है।

 

खाद्य सुरक्षा तब खुद को एक ‘ऑफशूट’ के रूप में मानती है क्योंकि माध्यमिक और तृतीयक स्तर की शिक्षा वाली महिलाओं की ओर से यह कहने की संभावना कम है कि उनके पास प्राथमिक शिक्षा वाली महिलाओं के साथ भोजन खरीदने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है या कम पैसा है, जैसा कि जुलाई 2018 की विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है।  इसी रिपोर्ट में एड्स और एचआईवी संबंधित ज्ञान और वार्तालाप में वृद्धि और राष्ट्रीय स्तर पर एक-पांचवें तक स्वयं की स्वास्थ्य देखभाल के बारे में निर्णय लेने की क्षमता के बारे में भी बात कही गई है।  राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-2015-16 के आंकड़ों के मुताबिक, बिना स्कूली शिक्षा के एचआईवी / एड्स के संबंध में महिलाओं का ज्ञान बढ़ कर बारह या अधिक वर्षों के स्कूली शिक्षा के साथ महिलाओं में 39 फीसदी हुआ है।

 
45 फीसदी किशोर भारतीय लड़कियों ने कहा कि लड़कों के पास बेहतर अवसर
 

लिंग मानदंड ‘ड्रॉपआउट’ में भूमिका निभाते हैं। लगभग 45 फीसदी किशोर भारतीय लड़कियों ने कहा कि उनका मानना ​​है कि उनके समुदाय के लड़कों को शिक्षा और रोजगार में आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं। केवल 20 फीसदी ने सोचा है कि उनके समुदाय में पुरुष / लड़के उतना ही काम कर सकते हैं जितना वे करती हैं, जैसा कि आंकड़ों से पता चलता है।

 
ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में आंकड़े थोड़े बेहतर थे।
 

 ग्रामीण क्षेत्रों में 46.5 फीसदी लड़कियों ने कहा कि उनके समुदाय के लड़कों के पास शिक्षा को आगे बढ़ाने के बेहतर अवसर हैं, शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़े 41.9 फीसदी थे।

 

लड़कियां जिन्होंने कहा कि उनके समुदाय के लड़कों के पास शिक्षा को आगे बढ़ाने के बेहतर अवसर हैं।

Source: Teen Age Girls Report, Naandi Foundation

 

प्रतिक्रियाओं के एक समान पैटर्न देखा गया था। जब ग्रामीण क्षेत्रों में 45.5 फीसदी लड़कियों ने कहा कि लड़कियों की तुलना में लड़कों को नौकरियों के लिए अधिक अवसर मिलते हैं। अपने शहरी समकक्षों में से 43 फीसदी लड़कियों ने यही संकेत दिया।

 

लड़कियां, जिन्होंने कहा कि उनके समुदाय के लड़कों के पास वैतनिक कार्यों के लिए ज्यादा अवसर है।

Source: Teen Age Girls Report, Naandi Foundation

 

ग्रामीण क्षेत्रों में 18.6 फीसदी लड़कियों ने कहा कि उनके समुदाय में लड़के उनके जितना ही घरेलू काम कर सकते हैं, जबकि शहरी लड़कियों के लिए यह आंकड़े  23.8 फीसदी थे।

 

लड़कियां, जिन्होंने कहा कि उनके समुदाय के लड़के उनके जितना ही काम करते हैं

Source: Teen Age Girls Report, Naandi Foundation

 
नए युग की महिला और न्यू एज स्किल

 

विकसित जीवन शैली और कौशल, जो सुरक्षा, आजादी और आत्म-बल से जुड़ा है और पेशेवर और व्यक्तिगत लक्ष्यों को निष्पादित करने में मदद करता है, उनकी मांग को ध्यान में रखते हुए, सर्वेक्षण में 10 ‘न्यू एज स्किल’ की कल्पना की गई है।

 

लड़कियां जिनके पास ‘न्यू एज स्किल’ हैं


 
सर्वेक्षण में पाया गया कि 91 फीसदी लड़कियां मोबाइल फोन का उपयोग करके कॉल सुन सकती हैं और कॉल कर सकती हैं।

 

सर्वेक्षण की गई आधे लड़कियों (48 फीसदी) ने कहा कि वे एक पुलिस स्टेशन जा सकती हैं और शिकायत दर्ज करा सकती हैं, लड़कियों की समान प्रतिशत ( 52 फीसदी ) ने कहा कि वे चार या अधिक घंटों के लिए अकेले यात्रा कर सकती हैं।

 

अंग्रेजी में डिजिटल साक्षरता (लैपटॉप / कंप्यूटर पर दस्तावेज़ बनाने की क्षमता) की दर 10 फीसदी थी। सोशल मीडिया पर गतिविधि की दर 27 फीसदी थी और इंटरनेट तक पहुंच की दर 30 फीसदी थी। दस स्किल के बीच ये तीन कौशल नीचे थे।  यूनिसेफ द्वारा इस 2017 की रिपोर्ट के अनुसार, गरीबी हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए डिजिटल पहुंच और कनेक्टिविटी को ‘गेमचेंजर’ है।

 

हालांकि, डिजिटल पहुंच को विभाजित लाइन माना जाता था, क्योंकि लाखों जरुरतमंद वास्तव में इस तक पहुंने  में असमर्थ हैं। डिजिटल पहुंच में लिंग अंतर की उपस्थिति का संदर्भ देते हुए, यूनिसेफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में एक तिहाई इंटरनेट उपयोगकर्ता महिलाएं हैं।

 

सर्वेक्षण किए गई लड़कियों में से, 13 से 15 साल के बच्चों (66.4 फीसदी) के बीच उच्च प्रतिशत के साथ 59.6 फीसदी ने कहा कि उनके पास पांच तक ‘न्यू एज स्किल’ हैं। 40.4 फीसदी लड़कियों ने कहा कि उनके पास छह या अधिक ‘न्यू एज स्किल’ हैं – हालांकि यह 16 से 19 वर्ष की लड़कियों के बीच ज्यादा 46.9 फीसदी) देखा गया था।

 
यह भारत की किशोर लड़कियों पर तीन लेखों की श्रृंखला का दूसरा भाग है। पहला भाग आप यहां पढ़ सकते हैं।

 

( क्षेत्री श्री राम कॉलेज फॉर वुमन से ग्रैजुएट हैं और इंडियास्पेंड के साथ इंटर्न हैं। )

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 26 अक्टूबर 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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