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पशुओं से जुड़ी हिंसा के मामले में साल 2017 बंगाल के लिए सबसे घातक

विवेक विपुल और एलिसन सलदानहा,
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06 जुलाई,  2017। कोलकाता में भीड़ के हाथों हत्या के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एक पोस्टर। यह पोस्टर भीड़ के हाथों होने वाली हत्या के खिलाफ एक साथ खड़े होने का संदेश दे रहा है।

 

कुछ दिन पहले गाय चोरी के संदेह में बंगाल में दो लोगों की भीड़ द्वारा हत्या के बाद राज्य में इस तरह की हत्याओं की संख्या पांच तक पहुंच गई है। इस तरह के हिंसा का रिकॉर्ड रखने वाले इंडियास्पेंड के डेटाबेस से पता चलता है कि वर्ष 2017 में, पशुओं से जुड़ी हिंसा के संबंध में पश्चिम बंगाल सबसे घातक राज्य रहा है।

 

31 अगस्त, 2017 तक, देश भर में हुए पशु से संबंधित हिंसा में से 55 फीसदी ( नौ में से पांच ) बंगाल में हुई है, जैसा कि हमारे डेटाबेस से पता चलता है। वर्ष 2010 से छह मौत के आंकड़ों के साथ बंगाल उत्तर प्रदेश के बराबर है, जहां पिछले आठ वर्षों में हुए 12 मामलों में इतनी ही मौतें हुई हैं। इसी अवधि के दौरान बंगाल में ऐसी तीन घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन सभी घटनाओं में मौत हुई है।

 

27 अगस्त, 2017 के शुरुआती घंटों में, नज़रूल इस्लाम (25), अनवर हुसैन (19) और हाफिजुल शेख (19) धूपगुरी पशु बाजार से उत्तर-पूर्व बंगाल के कूच बेहार जिले के तूफानगंज तक पशुओं को सड़क मार्ग से लेकर जा रहे थे, जब उन्हें जलपाईगुड़ी में बारहियाला गांव के पास भीड़ ने घेर लिया, जैसा कि नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इंडियास्पेंड को बताया है। घूपगुड़ी पुलिस के अनुसार, शेख पूर्वी असम के धुबरी शहर से थे, जबकि इस्लाम और हुसैन कूच बिहर के पुंडिबारी गांव के रहने वाले थे।

 

पुलिस अधिकारी ने इंडियास्पेंड को बताया, ” उन लोगों ने बाजार से सात मवेशी खरीदे थे। आधी रात को तूफानगंज की ओर रास्ता भटक गए थे। तभी लोगों के एक समूह को उन पर मवेशी चोर होने का संदेह हुआ और उन पर हमला किया गया।”

 

यह देखकर कि वे लोग मवेशियों के साथ यात्रा कर रहे हैं, भीड़ ने उन्हें रास्ता पार करने के लिए 50,000 रुपए की मांग की। अनवर के पिता महमदुल हुसैन ने कहा कि जब उन्होंने ये कहा कि उनके पास देने के लिए पैसे नहीं है तब भीड़ ने उन्हें इतना पीटा कि उनकी मौत हो गई, जैसा कि ‘द हिंदू’ ने 28 अगस्त, 2017 की रिपोर्ट में बताया है।

 

पशुओं को ढोने वाले वाहन के चालक नज़रूल इस्लाम बच निकले, लेकिन 19 वर्षीय युवा शेख भीड़ का शिकार बनने से बच न पाए। एक स्थानीय संवाददाता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “27 अगस्त, 2017 को भीड़ ने दो लोगों को पकड़ा और उन्हें लगभग 3 बजे तक मारते रहे। एक साल से वहां के निवासी गायों की चोरी की शिकायत कर रहे थे। “

 

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28 अगस्त, 2017 को उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के धूपगुरी शहर के धुप्पुरी ग्रामीण अस्पताल में 19 वर्षीय अनवर हुसैन और 19 वर्ष के ही हाफिजुल शेख के शव

 

पुलिस अधिकारी ने बताया कि, “अब तक हमने बारहियाला के तीन ग्रामीणों दिलीप मोंडोल, समीर रहमान और मनोहर सरकार को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। हम पहले ही मैजिस्ट्रेट के सामने उन्हें पेश कर चुके हैं और अब अदालत उनके न्याय का फैसला करेगी। “

 

अधिकारी ने आगे बताया कि, “हमें उन लोगों की तलाश है जिन्होंने भीड़ को जुटाया। गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ चल रही है। “

 

स्थानीय संवाददाता ने बताया कि, “गिरफ्तारी के बाद से, बारहियावासी निवासियों का कहना है कि वे नहीं जानते कि दो किशोर लड़कों की हत्या किसने की है। यह हिंसात्मक प्रतिक्रिया पिछले एक साल से हो रही गाय चोरी की घटनाओं के कारण हो सकती है, क्योंकि तीन लोगों को रात में मवेशियों का ले जाते देखा गया था। “

 

पुंडिबारी पुलिस के मुताबिक, इस रिपोर्ट को दाखिल करने के समय, हुसैन के परिवार ने ग्रामीणों के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं की थी। इंडियास्पेंड सत्यापित नहीं कर सका कि शेख के परिवार ने शिकायत दर्ज की है या नहीं?

 

दो महीने पहले, 22 जून, 2017 को उत्तरी बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के चोपड़ा ब्लॉक से गायों को चोरी करने की कथित कोशिश के लिए तीन मुस्लिम पुरूष भीड़ का शिकार बने थे, जैसा कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में बताया गया है।

 

वर्ष 2010 और 2017 के बीच, राज्य में इस तरह की केवल एक घटना दर्ज की गई है। इंडियास्पेंड के पशुओं से संबंधित हिंसा डेटाबेस का आरंभ बिंदू वर्ष 2010 है। 8 मई 2016 को, एक भीड़ ने एक हिंदू युवा को भैंस चोरी के संदेह में जान से मार दिया था, जैसा कि ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ ने 10 मई, 2016 की रिपोर्ट में बताया है।

 

2010 से अब तक 30 मारे गए, कम से कम 210 घायल, 87 फीसदी पीड़ित मुसलमान और 10 में 9 घटनाओं की वजह अफवाह

 

वर्ष 2010 के बाद से भारत भर में, इस तरह की हिंसा में 30 लोगों की जान गई है। इन तरह के 75 हमलों में कम से कम 210 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 14 महिलाएं हैं, जिनमें से दो के साथ सामूहिक बलात्कार की रिपोर्ट भी आई है। आठ साल में हुई 75 घटनाओं में से  94 फीसदी या 71 घटनाएं मवेशियों की चोरी की अफवाहों के कारण हुई हैं, जैसा कि हमारे डेटाबेस से पता चलता है।

 

आंकड़ों से पता चलता है कि, 2010-17 में पशुओं से  संबंधित हिंसा की घटनाओं में 53 फीसदी ( 75 में से 40 ) के निशाने पर मुसलमान थे और 75 घटनाओं में मरने वालों में 87 फीसदी ( 30 में से 26 ) मुस्लमान ही थे, जैसा कि हमारे आंकड़ों से पता चलता है।

 

अंग्रेजी मीडिया में रिपोर्टों के एक संग्रह और सामग्री विश्लेषण के माध्यम से बनाए गए हमारे डेटाबेस से पता चलता है कि मई, 2014 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के सत्ता में आने के बाद ऐसी 97 फीसदी (75 में से 73) घटनाएं दर्ज की गई हैं। पशुवत हिंसा से ,संबंधित 52 फीसदी से ज्यादा घटनाएं ( 75 में से 39 ) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा शासित राज्यों से दर्ज की गई हैं। ऐसा 31 अगस्त 2017 तक दर्ज हिंसा पर हमारे विश्लेषण से पता चलता है।

 

दर्ज की गई 46 फीसदी ( 75 में से 35 ) मामलों में पुलिस ने पीड़ितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, जैसा कि हमारे विश्लेषण से पता चलता है।

 

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 10 अगस्त, 2017 को राज्यसभा टीवी पर अपनी विदाई संभाषण में कहा कि, मुसलमानों में ‘असंतोष और असुरक्षा’ की भावना पनप रही है।

 

राष्ट्रीय या राज्यों के अपराध के आंकड़े पशुओं से जुड़े हमलों और भीड़ द्वारा हत्या और सामान्य हिंसा में अंतर नहीं करते हैं, इसलिए इंडियास्पेंड डेटाबेस इस तरह के हिंसा पर बढ़ती राष्ट्रीय बहस का पहला ऐसा सांख्यिकीय दृष्टिकोण है।

 

पशुओं से जुड़ी हिंसा में वृद्धि के बावजूद, विशेषकर पिछले तीन वर्षों में, गृह मामलों के मंत्रालय ने भीड़ द्वारा हत्या के आंकड़ों को इकट्ठा नहीं किया है, ऐसा 25 जुलाई, 2017 को लोकसभा में दिए एक बयान में कहा गया है।

 

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो, जो पूरे देश के अपराध आंकड़ों को इकट्ठा करता है और उसका विश्लेषण करता है, लिंचिंग यानी भीड़ द्वारा हत्या पर डेटा एकत्र करने की योजना बना रहा है, जैसा कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने 9 जुलाई, 2017 को अपनी रिपोर्ट में बताया है।

 

 

भारत में गाय संबंधित हिंसा की घटनाएं, ( 2010 से 2017 )

भारत में गाय संबंधित हिंसा की घटनाओं का प्रसार. ( 2010  से 2017 )

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NOTE: No data for Arunachal Pradesh, Chhattisgarh, Manipur, Meghalaya, Mizoram, Nagaland, Tripura, Telangana, Sikkim, Uttarakhand

 

(विवेक विश्लेषक हैं और सलदानहा सहायक संपादक हैं। दोनों इंडियास्पेंड के साथ जुड़े हैं।)

 
यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 01 सितंबर, 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।
 

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