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बिहार में अपराधियों को सज़ा मिलने की दर में 68% गिरावट, पिछले छह वर्षों में अपराध दर में 42% वृद्धि

देवानिक साहा,
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18 वर्षीय छात्र आदित्य सचदेवा – कथित तौर पर एक जनता दल (यूनाइटेड) के नेता के बेटे की कार ओवरटेक करने पर गोली मारी गई है – और पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या जैसी घटनाएं, पिछले छह वर्षों में बिहार में कानून और व्यवस्था में आई गिरावट की सार्वजनिक रुप से कहानी बता रहे हैं।

 

बिहार में, अपराधियों को सज़ा मिलने के दर में 68 फीसदी , 2010 में 14,311 से 2015 में 4513, की गिरावट दर्ज की गई है। इसी अवधि के दौरान, संज्ञेय अपराधों – जो मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना पुलिस जांच कर सकती है – में 42 फीसदी की वृद्धि दर्ज कि गई है। यह आंकड़े, बिहार पुलिस के डेटा पर इंडियास्पेंड द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आए हैं।

 

 

बिहार में पिछले दस वर्षों से जनता दल (यू) का शासन चल रहा है –  8 वर्ष भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में रहा है – जिसके नेता नीतिश कुमार सबसे पहले 2005 में राज्य के मुख्यमंत्री बने थे एवं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ गठबंधन में नवंबर 2015 में पिछला चुनाव जीत कर फिर से राज्य की सत्ता पर बैठे हैं।

 

बिहार : अपराध एवं सज़ा, 2006-2015

Source: Bihar Police

 

अपहरण के मामले में 98 फीसदी वृद्धि, लोग होते हैं पकड़वा शादी के शिकार

 

2010 में 3,602  मामलों की तुलना में वर्ष 2015 में कम से कम 7,127 अपहरण के मामले दर्ज किए गए हैं, जो कि करीब 98 फीसदी की वृद्धि है।

 

अपहरण के अधिकतर मामले जबरन विवाह के लिए किए गए हैं: 2015 में 3,001 अपहरण के मामले (42 फीसदी) जबरन विवाह के इरादे से किए गए हैं। यह आंकड़े पिछले छह वर्षों में सबसे अधिक हैं। गौर हो कि 2012 में 63 फीसदी अपहरण, जबरन विवाह के इरादे से की गई थी।

 

विवाह के इरादे से की गई अपहरण, बिहार में चिंता का विषय बना हुआ है। राज्य में इसे पकड़वा शादी कहा जाता है जहां युवा लड़कों को अगवा कर, बंदूक की नोक पर जबरन लड़कियों से शादी करवाया जाता है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि दूल्हों को अगवा करने के मामलों में गिरावट हुई है लेकिन पिछले दशक की तुलना में रिपोर्ट दर्ज करने की संख्या में वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण बढ़ती जागरुकता एवं अधिक रिपोर्टिंग है।

 

एक दशक पहले पकड़वा शादी, विशेष रुप से भूमिहार जाति में, अत्यधिक कराई जाती थी। सत्ता बदलने के साथ, कुछ चीज़ों में बेहतर बदलाव हुई है। शईबल गुप्ता, पटना स्थित एक समाजशास्त्री, ने अल – जजीरा से बात करते हुए बताया कि, चूंकी सरकारी मशीनरी ने कामकाज शुरू कर दिया, अधिक से अधिक लोग दूल्हों के अगवा होने के मामले दर्ज करा रहे हैं।

 

बिहार में अपहरण के मामले, 2005-20015

Source: Bihar Police

 

बिहार में विवाह के इरादे से किया गया अपहरण, 2009-2015

Source: Bihar Police

 

तीन वर्षों में हत्या के मामलों में 11 फीसदी गिरावट

 

बिहार में हत्या के मामलों में 11 फीसदी की गिरावाट हुई है। 2012 में जहां यह आंकड़े 3,566 थे वहीं 2015 में 3,178 दर्ज की गई है। 2005 से 2015 के दौरान सालाना 3,000-3,400 के बीच मामले दर्ज किए गए हैं जो एक स्थिर दर का संकेत है।

 

2005 से 2015 के दौरान, 2010 में 795 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए थे जो कि इस अवधि के दौरान सबसे कम हैं। अन्य वर्षों में बलात्कार की संख्या अधिकतर 1,000-1,100 के बीच रही है।

 

बिहार में हत्या एवं बलात्कार के मामले, 2005-2015

Source: Bihar Police

 

दस वर्षों में चोरी के मामलों में 90 फीसदी वृद्धि, दंगों में 73 फीसदी की वृद्धि

 

चोरी के मामलों में 90 फीसदी की वृद्धि हुई है। 2005 में जहां चारी के 11,809 मामले दर्ज की गई थी वहीं 2015 में यह आंकड़े 22,461 दर्ज किए गए हैं जबकि दंगों के मामले में 73 फीसदी की वृद्धि हुई है, 2005 में 7,704 मामलों से बढ़ कर 2015 में 13,311 मामले दर्ज किए गए हैं।

 

बिहार में चोरी एवं दंगों के मामले

Source: Bihar Police

 

(साहा नई दिल्ली स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 18 मई 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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