Home » Cover Story » मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ चुनाव पर कृषि संकट का असर, लेकिन तेलांगना में यह मुद्दा बेअसर

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ चुनाव पर कृषि संकट का असर, लेकिन तेलांगना में यह मुद्दा बेअसर

इंडियास्पेंड टीम,
Views
1532

Women_at_farmers_620
 

मुंबई: ऐसा लगता है कि व्यापक कृषि संकट ( जिस कारण नवंबर 2018 में 100,000 से अधिक किसान एक साथ नई दिल्ली आए थे ) ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों को प्रभावित किया है।

 

11 दिसंबर, 2018 को शाम को 5.30 बजे तक, मौजूदा भारतीय जनता पार्टी को हराकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) तीन राज्यों में सरकार बनाने के लिए तैयार है।

 

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और देश भर के कई विपक्षी नेताओं ने 30 नवंबर, 2018 को किसान मुक्ति मार्च को समर्थन दिया था, जिसमें कृषि संकट को हल करने के लिए संसद में एक विशेष 21-दिवसीय सत्र आयोजित करने की मांग की गई थी।

 

22 अक्टूबर 2018 को FactChecker.in द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार, 2004 और 2016 के बीच, मध्य प्रदेश में 16,932 किसानों की आत्महत्याएं दर्ज की गई हैं। यह आंकड़ा प्रत्येक दिन 3 आत्महत्या से अधिक और देशभर में चौथी सबसे ज्यादा संख्या है। छत्तीसगढ़ में किसान आत्महत्या की संख्या 12,979 रही है, जो प्रत्येक दिन 3 और देश में पांचवी सबसे ज्यादा है। 5,582 किसान आत्महत्या के साथ, राजस्थान 11वें स्थान पर है।  भारत ने 2017 में, पहले से कहीं ज्यादा अनाज उपजाया है और पिछले चार वर्षों से 2017-18 तक सरकार का कृषि बजट 111 फीसदी बढ़ा है, जैसा कि इंडियास्पेन्ड ने जनवरी 2018 की रिपोर्ट में बताया है। फिर भी, कीमतों में गिरावट हुई है, पिछले एक वर्ष से 2017 तक अवैतनिक कृषि ऋण 20 फीसदी बढ़ा है और और 600 मिलियन भारतीयों ने, जो कृषि पर निर्भर करते हैं, उन्हें पाने के लिए संघर्ष किया है।  हालांकि, कृषि संकट ने ‘तेलंगाना राष्ट्र समिति’ (टीआरएस) को चुनाव जीतने और सत्ता में वापस आने से नहीं रोका है। तेलांगना की 55.5 फीसदी आबादी खेती पर निर्भर है। तेलांगना में किराएदारी बढ़ रही है, जैसा कि छोटे किसान खेती को व्यवहार्य बनाने के लिए और जमीन की खेती करना चाहते हैं। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने 6 दिसंबर 2018 की रिपोर्ट में विस्तार से बताया है। हालांकि, टाइटल के बिना, वे बैंक ऋण और लाभ योजनाओं तक नहीं पहुंच सकते हैं, और उन्हें निजी धन उधारदाताओं की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जैसा कि हमने अपनी रिपोर्ट में बताया है।  हमने तनावग्रस्त ग्रामीण भारत पर इंडियास्पेंड अर्काइव से एक सूची निकाली है:

 


 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 11 दिसंबर, 2018 को indiaspend.com प्रकाशित हुआ है।

 

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। हमसे respond@indiaspend.org पर संपर्क किया जा सकता है। हम भाषा और व्याकरण के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार रखते हैं।

 
“क्या आपको यह लेख पसंद आया ?” Indiaspend.com एक गैर लाभकारी संस्था है, और हम अपने इस जनहित पत्रकारिता प्रयासों की सफलता के लिए आप जैसे पाठकों पर निर्भर करते हैं। कृपया अपना अनुदान दें :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

code