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योजनाओं पर क्यों नहीं खर्च कर पा रही है दिल्ली की आप सरकार ?

मनप्रीत सिंह,
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AAP

 

मुंबई: दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पिछले तीन वित्तीय वर्षों में औसतन 85 फीसदी राज्य बजट खर्च करने में सक्षम रही है, जैसा कि दिल्ली की 6 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था पर आप सरकार और लेफ्टिनेंट गवर्नर अनिल बैजल के बीच मतभेद की लगातार खबर आ रही है। ये आंकड़े इंडियास्पेंड द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आए हैं।

 

शीला दीक्षित के नेतृत्व में दिल्ली में पिछली कांग्रेस सरकार में 2008 और 2013 के बीच औसतन 98 फीसदी का औसत उपयोग था। खर्च में कमी और मतभेद उस समय शुरु हुआ है, जब 2013 के बाद से दिल्ली राज्य के बजट में 29.3 फीसदी की वृद्धि हुई है।

 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सलाहकार (मीडिया मामलों में) नागेंद्र शर्मा ने इंडियास्पेंड को बताया, “एलजी के फैसले नियोजित खर्चों को प्रभावित करते हैं। 1,000 मोहल्ला (पड़ोस) क्लीनिक और सीसीटीवी जैसी देरी से होने वाली परियोजनाएं बजट व्यय को प्रभावित करती हैं।  “

 

आप सरकार और एलजी के बीच मतभेद के कारण 350 करोड़ रुपये की लागत से दिल्ली में 140,000 सीसीटीवी स्थापित करने की योजना में देरी हुई है, जैसा कि टाइम्स ऑफ इंडिया ने 6 मई, 2018 की रिपोर्ट में बताया है। दिसंबर 2017 के अंत में नियोजित 1,000 मोहल्ला क्लीनिकों में से केवल 160 ही कार्यरत थे, जैसा कि डीएनए ने 24 अप्रैल, 2018 की रिपोर्ट में बताया है।

 

2015 में आप के सत्ता में आने का बाद से एलजी ने 32 प्रस्तावों को खारिज कर दिया है या उसमें देरी हुई है, जैसा कि 4 अप्रैल, 2018 को दिल्ली विधानसभा में वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा प्रस्तुत एक सरकारी रिपोर्ट से पता चलता है।

 

बदले में, एलजी ने राज्य सरकार पर ‘जानबूझकर’ और ‘लगातार” राजधानी के शासन की योजनाओं की अवहेलना का आरोप लगाया है।

 

बैजल ने 5 अप्रैल, 2018 को लिखा, “यह ध्यान दिया जा सकता है कि संवैधानिक शासन की यह योजना 1993 से दिल्ली में अस्तित्व में रही है और पिछली सरकारों ने लेफ्टिनेंट गवर्नर के कार्यालय के साथ सामंजस्यपूर्ण संबंध साझा किया है। हालांकि, वर्तमान निर्वाचित सरकार दिल्ली एनसीटी के शासन की योजना का उल्लंघन लगातार जानबूझकर कर रही है।”

 

दिल्ली राज्य विधानसभा द्वारा उठाए गए निर्णयों की समीक्षा गृह मंत्रालय की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त दिल्ली के एलजी द्वारा की जाती है। एलजी के संविधान के अनुच्छेद 239एए और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली अधिनियम, 1991 (जीएनसीटीडी अधिनियम) के तहत प्रशासनिक शक्तियां हैं।

 

संविधान कहता है कि एलजी की प्रशासनिक शक्तियों ने सार्वजनिक आदेश, पुलिस और भूमि के मामलों में दिल्ली सरकार को जीएनसीटीडी अधिनियम, 1991 के साथ मजबूत किया है।

 

दिल्ली सरकार के बजट आवंटन, व्यय और उपयोग

Source: Delhi State Budget reports for the years 2008-09 to 2018-19.
Note: *Revised estimate. The AAP presented the budget in 2013-14. AAP and Congress ran the government in coalition for 49 days in 2013-14. The AAP has been in power since 2015-16.

 

कहां है आप का घोषणापत्र ?

 

आप के 2015 के घोषणापत्र में तीन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया था: शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना। वर्ष 2015-16 के लिए 25 जून, 2015 को प्रस्तुत बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए 26 फीसदी और 9.5 फीसदी आवंटित किया गया जो भारत के किसी भी राज्य द्वारा शिक्षा क्षेत्र के लिए उच्चतम आवंटन में से एक है।

 

शिक्षा पर, 2014-15 में उपयोग दर 62 फीसदी थी और 2015-16 में 57 फीसदी थी, लेकिन 2016-17 में यह गति 79 फीसदी तक पहुंच गई।

 

स्वास्थ्य पर, उपयोग दर 83 फीसदी और 79 फीसदी के बीच थी। पिछली कांग्रेस सरकार के तहत शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में औसत उपयोग दर 100.5 फीसदी और 79.6 फीसदी थी।

 

बजट के कम उपयोग के हिस्से को केंद्र, राज्य और दिल्ली के तीन नगर निगमों (एमसीडी) के ओवरलैपिंग क्षेत्राधिकारों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

 

नियंत्रण पर विभिन्न पार्टियों के साथ ( राज्य में आप और केंद्र में भारतीय जनता पार्टी और तीन एमसीडी ) आप और भाजपा के बीच लगातार मतभेद की सूचना मिली है।

 

5 जून, 2018 को एक ट्वीट में केजरीवाल ने दिल्ली के विकास में बाधा उत्पन्न करने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और लेफ्टिनेंट गवर्नर अनिल बैजल पर आरोप लगाया था।

 

 

एलजी आउटकम रिपोर्ट पेश करते हुए सिसोदिया ने 4 अप्रैल, 2018 को बताया, ” इससे (अस्वीकृति या देरी) साफ है कि एक निर्वाचित सरकार की की नीतियों को लगातार पटरी से उतारने की कोशिश हो रही है। “

 

(सिंह पुणे के सिम्बायोसिस स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एमएससी छात्र हैं और इंडियास्पेंड के साथ इंटर्न हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 8 जून, 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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