Home » Cover Story » राजनीतिक दलों को 4.5 करोड़ नए युवा मतदाताओं के साथ नौकरियों, शिक्षा पर बात करने की जरूरत होगी

राजनीतिक दलों को 4.5 करोड़ नए युवा मतदाताओं के साथ नौकरियों, शिक्षा पर बात करने की जरूरत होगी

सौम्या तिवारी,
Views
1766

Kolkata: Young voters take a selfie after casting their votes at a polling booth during the fifth phase of West Bengal Legislative Assembly polls in Kolkata, on April 30, 2016. (Photo: Kuntal Chakrabarty/IANS)
 

( कोलकाता के एक मतदान केंद्र पर वोट डालने के बाद सेल्फी लेते युवा मतदाता )

 

मुंबई: 2018 में 27.9 वर्ष की औसत आयु के साथ  भारत एक युवा देश है।  2020 तक, देश की 34 फीसदी आबादी युवा होगी। चुनाव आयोग के 2018 के आंकड़ों के अनुसार, 4.5 करोड़ युवा, जो 18 वर्ष की उम्र में मतदान करने के योग्य हो गए हैं, को 2014 से भारत के मतदाता सूची में जोड़ दिया गया है। इसने 2014 के बाद से मतदाता सूची में 5 फीसदी का विस्तार किया है। भारत की युवा आबादी कैसे वोट करती है,स्पष्ट रूप से पांच साल पूरे करने वाले बीजेपी के लिए आगामी 2019 के आम चुनावों में निर्णायक कारकों में से एक होगा। 2014 के आम चुनावों में भी यही स्थिति थी, जब 2.4 करोड़ नए मतदाता देश के मतदाताओं में शामिल हो गए थे।

 

मई, 2014 में पिछले आम चुनाव के बाद, इंडियास्पेंड ने विश्लेषण किया था कि किस तरह से सबसे अधिक युवा लोगों ने मतदान किया था। हमने पाया था कि पांच राज्यों में युवा मतदाताओं के उच्चतम अनुपात के साथ युवाओं ने बीजेपी को सत्ता में पहुंचाया था।

 

 इस चुनाव में शिक्षा और नौकरियों से संबंधित मुद्दों पर युवाओं के केंद्रित होने की संभावना है। भारत में, इन क्षेत्रों में अधिक संसाधनों और ध्यान देने की जरूरत हैं: इंडियास्पेंड द्वारा एक पूर्व-बजट विश्लेषण में उच्च शिक्षा और कौशल विकास योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन के लिए अधिक धन की आवश्यकता महसूस की गई है। 2000 के बाद से, उच्च शिक्षा पर भारत का खर्च सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.73 फीसदी -0.87 फीसदी रहा है और यह 2015 में 0.62 फीसदी तक गिर गया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के लिए नामांकन लक्ष्य से 64 फीसदी कम पाया गया है, जैसा कि FactChecker.in ने जनवरी 2019 की रिपोर्ट में बताया है।

 

युवा वोट बैंक के लिए रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा होगा और यहां तक ​​कि नौकरियों पर नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अभाव में, राजनीतिक दल अपने घोषणापत्र में इसे अनदेखा नहीं कर सकते हैं।

 

रोजगार आंकड़ों पर राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) की लीक रिपोर्ट से पता चला है कि बेरोजगारी 6.1 फीसदी तक 45 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। सरकार ने माना था कि आयकर रिटर्न में वृद्धि और भविष्य निधि खातों में छलांग से नौकरियों में बढ़ोतरी हुई है।

 

‘युवा’ भारतीय कौन है?
 

 एनएसएसओ की 2017 यूथ इन इंडिया ’की रिपोर्ट के अनुसार, 2010 में भारत की जनसंख्या में युवाओं की हिस्सेदारी अधिकतम पहुंच गई थी, करीब 35.11 फीसदी। रिपोर्ट के अनुसार, यह 1971 (30.6 फीसदी) के 4.2 प्रतिशत अंकों की वृद्धि के साथ 16.8 करोड़ से 42.3 करोड़ तक की अनुमानित वृद्धि थी।

 

किशोरावस्था से लेकर मध्यम आयु तक की जनसंख्या को ‘युवा’ के रूप में परिभाषित किया गया है। लेकिन परिभाषाएं विभिन्न एजेंसियों में भिन्न हो सकती हैं। संयुक्त राष्ट्र की शोध रिपोर्ट में आमतौर पर युवाओं के रूप में 15 से 24 वर्ष आयु वर्ग को वर्गीकृत किया गया है। भारत में राष्ट्रीय युवा नीति-2003 ने 13 से 35 वर्ष की आयु को युवाओं के रूप में परिभाषित किया है।

 

बाद में, राष्ट्रीय युवा नीति-2014 ने इस आयु वर्ग को 15-29 वर्ष के रूप में फिर से परिभाषित किया। श्रम बल भागीदारी के आंकड़ों के लिए एनएसएसओ 68वें दौर में 15-29 वर्षों पर तय हुआ। 2017 में युवाओं पर जारी हुए नवीनतम एनएसएसओ रिपोर्ट में, ब्रैकेट 15-34 वर्ष की आयु तक चला गया। बाद की रिपोर्टों और नीतिगत उल्लंघनों में ‘युवाओं’ की परिभाषाओं के बदलने से वर्ष और आयु-समूहों के आंकड़ों की तुलना करना मुश्किल है। चूंकि रोज़गार के आंकड़ों की नवीनतम रिपोर्ट को आधिकारिक तौर पर जारी किया जाना है, हमारे विश्लेषण के प्रयोजनों के लिए, हम एनएसएसओ के 2017 के यूथ इन इंडिया ’रिपोर्ट के डेटा का उपयोग करते हैं। 2011-12 के आंकड़ों का हवाला देते हुए, इस रिपोर्ट ने ग्रामीण भारत में 15-29 आयु वर्ग के पुरुषों और 18 फीसदी महिलाओं को श्रम शक्ति में रखा। शहरी क्षेत्रों में, पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 56 फीसदी और महिलाओं के लिए 13 फीसदी था।

 

सबसे युवा मतदाताओं वाले पांच राज्य
 

 जिन पांच भारतीय राज्यों में नए मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है, वे भी उन राज्यों में शामिल हैं, जिनकी लोकसभा में अधिकतम सीटें हैं और जनसंख्या के लिहाज से वे उच्च स्थान पर हैं। राज्य की आबादी के अनुपात में लोकसभा सीटें राज्यों को दी जाती हैं और बड़ी आबादी वाले राज्यों को इसमें वरीयता मिलती, जैसा कि इंडियास्पेंड ने यहां और यहां रिपोर्ट किया है।

 

टॉप पांच राज्य, जहां अधिकतम नए मतदाता जोड़े गए हैं

Top Five States That Added Maximum New Voters
State 2014 Electoral Roll 2018 Electoral Roll New Voters Lok Sabha Seats
Bihar 63,800,160 69,934,100 6133940 40
West Bengal 62,833,113 68,335,671 5502558 42
Rajasthan 42994657 47,339,902 4345245 25
Maharashtra 80798823 84,969,764 4170941 48
Uttar Pradesh 138810557 142,784,587 3974030 80
Total In Top Five States 389237310 413,364,024 24126714 235

Source: Election Commission of India, Lok Sabha

 

सभी लोकसभा सदस्यों में से, 43 फीसदी शीर्ष पांच राज्यों में से चुने जाएंगे, जिसमें सबसे अधिक नए मतदाता शामिल हैं: बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश। इन पांच राज्यों में से चार में ( पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को वोट दिया गया ) पिछले लोकसभा चुनावों में सत्ताधारी बीजेपी टॉप पार्टी थी।

 

लोकसभा सीट-शेयर और वोट-शेयर: अधिकतम नए मतदाता वाले राज्य

Source: Election Commission of India

 

नोट: पार्टियों के वोट शेयर 100 में नहीं जुड़ते हैं, क्योंकि सूची में केवल सीट जीतने वाली पार्टियां शामिल होती हैं। 2014 की अपनी बड़ी जीत के बाद, बीजेपी ने महाराष्ट्र राज्य चुनाव भी जीता। जनता दल (यूनाइटेड) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बीच गठबंधन ने 2015 में बिहार में विधानसभा चुनाव जीता था, लेकिन यह एक अल्पकालिक साझेदारी थी। राजद के बाहर चले जाने के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जद (यू) द्वारा राज्य का शासन जारी रखा गया। बिहार के राजनीतिक दलों ने 2019 में जल्द ही होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए महागठबंधन (पार्टियों का महागठबंधन) के लिए संभावित जोड़-तोड़ की गणना शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश में, बीजेपी ने 2014 लोकसभा में 43 फीसदी वोट शेयर और 71 सीटों के साथ जीत हासिल की और 2017 में राज्य चुनाव जीता। अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी, और मायावती के नेतृत्व में बहुजन समाज पार्टी 2019 के आम चुनावों के लिए राज्य में भाजपा से लड़ने के लिए एक गठबंधन किया गया। बीजेपी ने 2014 में राजस्थान की सभी 25 लोकसभा सीटें जीतीं, लेकिन दिसंबर 2018 में राज्य विधानसभा चुनावों में कांग्रेस से हार गई।

 

पश्चिम बंगाल में, भाजपा 2014 के आम विधानसभा चुनावों में 17 फीसदी वोट शेयर हासिल करने में कामयाब रही, हालांकि पार्टी ने केवल दो सीटें जीतीं। अब 2019 के राष्ट्रीय चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के साथ लड़ाई है।

 

 पहले ‘पास्ट-द-पोस्ट-सिस्टम’ में जहां सबसे अधिक वोट शेयर वाले उम्मीदवार (या पार्टी) सीट जीतते हैं, कुछ सौ वोटों का उतार-चढ़ाव कभी-कभी चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है। बिहार जैसे राज्यों में 13 फीसदी नए मतदाताओं की ताकत के साथ, युवा मतदाता चुनावी नतीजे तय कर सकते हैं। कारण यहां है: लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) का राज्य में केवल 7 फीसदी वोट शेयर है, लेकिन उसने छह सीटें जीतीं। जबकि जनता दल (यूनाइटेड) और आरजेडी ने लोकसभा में कम सीटें (क्रमशः 2 और 4 सीटें) जीती थीं, उनके वोट शेयर एलजेपी की तुलना में बहुत अधिक थे। इंडियास्पेंड के नवंबर 2015 की रिपोर्ट के अनुसार, जेडी (यू) के पास 16 फीसदी और आरजेडी के 21 फीसदी वोट शेयर थे, जिसे वे राज्य विधानसभा चुनावों में सीट-शेयर में बदलने में कामयाब रहे। सबसे ज्यादा युवा मतदाता जोड़ने वाले राज्यक्यों पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण हैं?

 

हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि राजनीतिक दल, शीर्ष पांच राज्यों में ध्यान केंद्रित करके, जिन्होंने नए मतदाताओं की संख्या को सबसे अधिक जोड़ा है, संभावित रूप से लोकसभा में अधिक सीटें जीतने की संभावना बढ़ा सकते हैं। ये राज्य भारत में सबसे अधिक आबादी वाले हैं और कोई भी पार्टी यहां अधिक सीटें जीतकर केंद्र में सरकार बना सकती है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने मई 2016 की रिपोर्ट में बताया था। कुल लोकसभा सीटों में से, 211 (37 फीसदी) शीर्ष दस राज्यों से आती हैं, जिन्होंने 2014 के आखिरी आम चुनाव के बाद से मतदाता सूची में नए मतदाताओं का उच्चतम अनुपात जोड़ा है।

 

सबसे ज्यादा अनुपात में नए मतदाता जोड़ने वाले राज्य

States That Added New Voters In Largest Proportion
States Proportion of New Voters in 2018 (In %) Lok Sabha Seats
Assam 13 14
Rajasthan 10 25
Bihar 10 40
West Bengal 9 42
NCT OF Delhi 9 7
Gujarat 8 26
Karnataka 8 28
Jharkhand 7 14
Uttarakhand 7 5
Haryana 7 10
All India Average Increase 5
Total Lok Sabha Seats From States With New Voters 211

 

Source: Election Commission of India, Lok Sabha

नोट: केंद्रशासित प्रदेशों और छोटे राज्यों, जो लोकसभा में एक या दो सदस्य भेजते हैं, को इस विश्लेषण के लिए विचार नहीं किया गया है।
 

 कौशल विकास, उच्च शिक्षा के अवसर और नौकरियां युवा आबादी के उच्चतम शेयरों वाले राज्यों से प्राथमिकता के मुद्दे होंगे। पार्टियों ने अपने गठबंधनों में वोट शेयर-सीट पर साझा गणना का काम शुरू कर दिया है, और उधर युवा मतदाता राजनीतिक पार्टियों द्वारा जारी किए जाने वाले पूर्ण घोषणापत्र का इंतजार कर रहे हैं।

 
(तिवारी मुंबई के ‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज’ में ‘स्कूल ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज’ के पीएचडी स्कॉलर हैं, और इंडियास्पेंड से जुड़े हैं।)
 
यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 15 फरवरी, 2019 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।
 

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। हमसे respond@indiaspend.org पर संपर्क किया जा सकता है। हम भाषा और व्याकरण के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार रखते हैं।

 
“क्या आपको यह लेख पसंद आया ?” Indiaspend.com एक गैर लाभकारी संस्था है, और हम अपने इस जनहित पत्रकारिता प्रयासों की सफलता के लिए आप जैसे पाठकों पर निर्भर करते हैं। कृपया अपना अनुदान दें :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

code