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लड़कियों को शिक्षित करने से हो सकती है देश की आबादी कम

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यदि एक लड़की 12 साल या अधिक ( 18 वर्ष तक ) शिक्षा प्राप्त करती है तो उसमें किशोर गर्भावस्था, बच्चों के बीच कम अंतर और अपने जीवनकाल में दो से अधिक बच्चे होने की संभावना कम होती है। यह जानकारी हालिया राष्ट्रीय स्वास्थ्य आंकड़ों में सामने आई है।

 

12 साल या अधिक शिक्षा प्राप्त महिला को औसतन 24.7 साल के करीब पहला बच्चा हुआ, जो कि 25-49 वर्ष के बीच महिलाओं के लिए पहली गर्भावस्था (21) की औसत आयु से 3.7 वर्ष अधिक है, जैसा कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण, 2015-16 (एनएफएचएस -4) की रिपोर्ट में बताया गया है।

 

बिना स्कूली शिक्षा प्राप्त महिला को औसतन 20 वर्ष की आयु में पहला बच्चा हुआ।

 

भारत की आबादी का लगभग एक-तिहाई या 33.6 फीसदी किशोर गर्भधारण से पैदा होता है; बच्चे को जन्म देने की उम्र बढ़ने से वर्ष 2050 तक भारत की आबादी 1.7 बिलियन तक पहुंने के अनुमान में एक-चौथाई कटौती हो सकती है। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने 12 जनवरी, 2018 की रिपोर्ट में बताया है।

 

45-49 वर्ष की आयु ( जहां एक महिला के प्रजनन क्षमता का अंत माना जाता है)  वर्ग में पैदा हुए बच्चों की औसत संख्या के आधार पर ) यदि महिलाएं 12 वर्ष या अधिक की शिक्षा प्राप्त करती हैं तो उन्हें औसत 2.01 बच्चे होते हैं, जबकि सभी महिलाओं के लिए यह आंकड़े 2.2 और बिन शिक्षा प्राप्त महिलाओं के लिए आंकड़े 3.82 हैं।

 

एनएफएचएस -4 की रिपोर्ट कहती है, “पहले बच्चे के जन्म में विलंब करने और जन्म के बीच का अंतराल बढ़ाते हुए कई देशों ने प्रजनन को कम करने में अहम भूमिका निभाई है। ”

 

15-49 वर्ष की आयु के बीच, महिलाओं के लिए कुल प्रजनन दर ( जीवनकाल में होने वाले बच्चों की संख्या ) 12 वर्ष से अधिक की शिक्षा प्राप्त महिलाओं के लिए 1.71 पर कम है जबकि बिन स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाओं के लिए आंकड़े 3.06 और सभी महिलाओं के लिए आंकड़े 2.2 है।

 

पारिवारिक नियोजन पर काम करने वाली संस्था ‘पॉप्युलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ की कार्यकारी निदेशक पूनम मुत्तरेजा कहती हैं, “शिक्षा सबसे अच्छी गर्भनिरोधक गोली है”।

 

मुत्तरेजा कहती हैं, “विश्व स्तर पर इसका पर्याप्त साक्ष्य है कि महिलाओं को शिक्षित करने से देश की प्रजनन दर कम हो सकती है। इससे यह बात साफ है कि महिलाओं को शिक्षित करना एक अच्छी जनसंख्या नियंत्रण रणनीति हो सकती है।”

 

25-49 आयु वर्ग महिलाओं में स्कूल शिक्षा अनुसार पहले बच्चे के जन्म की औसत आयु

Source: National Family Health Survey, 2015-16

 

शिक्षा अनुसार प्रजनन दर

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Source: National Family Health Survey, 2015-16
*Mean number of children ever born to women aged 40-49

 

12 वर्ष या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त केवल 4 फीसदी महिलाओं में किशोर गर्भधारण है, जबकि सभी महिलाओं के लिए यह आंकड़े 8 फीसदी और बिन स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाओं के लिए आंकड़े 20 फीसदी हैं। कम उम्र में गर्भधारण करना गर्भावस्था और प्रसव के दौरान जटिलताओं के जोखिम में वृद्धि और नवजात मृत्यु दर की उच्च दर से जुड़ा हुआ है।

 

शिक्षित माताओं से जन्म लेने वाले बच्चों के जीवित रहने की संभावना ज्यादा होती है। ऐसी माताएं जिन्हें स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं है, उनसे जन्म लिए पांच वर्ष की आयु के तहत बच्चों की मृत्यु दर ( पांच वर्ष की आयु के तहत प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर होने वाली मृत्यु की संख्या ) 67.5 है, जबकि 12 वर्ष या इससे ज्यादा शिक्षा प्राप्त से जन्म लिए बच्चों के लिए यह आंकड़े करीब आधे, 26.5 हैं, जैसा कि इंडियास्पेंड ने 16 जनवरी, 2018 की रिपोर्ट में बताया है।

 

12 वर्ष या अधिक शिक्षा प्राप्त महिलाएं दूसरे बच्चे के जन्म के लिए तीन वर्ष का इंतजार करती हैं जबकि बिन स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाओं के लिए यह अवधि 31.3 महीने है।

 

24 महीनों से कम उम्र के जन्म के अंतराल में नवजात शिशुओं और उनकी मां को नुकसान हो सकता है, जैसे कि समय से पहले जन्म होना, जन्म के समय कम वजन होना और मृत्यु भी हो सकती है।

 

15 से 49 आयु वर्ष की केवल 21.5 फीसदी महिलाओं ने 12 वर्ष या अधिक शिक्षा प्राप्त की है जबकि पुरुषों के लिए यह आंकड़े 29.6 फीसदी है।

 

2017 में, पांच में से केवल एक किशोर ( 14 से 18 वर्ष ) ने आठ साल की स्कूली शिक्षा प्राप्त की है और 18 तक 28 फीसदी पुरुषों की तुलना में 32 फीसदी महिलाओं ने स्कूलों में दाखिला नहीं लिया है, जैसा कि शिक्षा रिपोर्ट के नवीनतम वार्षिक सर्वेक्षण में बताया गया है। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने 17 जनवरी, 2018 की रिपोर्ट में बताया है।

 

(यदवार प्रमुख संवाददाता हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़ी हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 22 जनवरी 2018 में indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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