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लोकसभा के इतिहास में 2016 सर्वाधिक काव्यात्मक वर्ष

चार्ली मुलुनी,
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मूल कानून की श्रृंखला पर बहस और पारित होने के साथ 16 वीं लोकसभा, भारत के सबसे महत्वपूर्ण संसदीय सत्र में से रहा है लेकिन सदस्यों ने यह सुनिश्चित किया कि यह इतिहास का सबसे काव्यात्मक वर्ष भी रहे।

 

फरवरी और मई 2016 के बीच , संसद के सदस्यों (सांसदों) ने संसद के निचले सदन में 43 कविताएं सुनाई हैं जो कि 2014 और 2015 में सुनाई गई कविताओं को संयुक्त रुप से मिलाकर भी अधिक है। गौर हो कि यह आंकड़ा 2013 में सुनाई गई 42 कविताओं के पिछले रिकॉर्ड से भी अधिक है। यह जानकारी लोकसभा के बुद्धि और हास्य , काव्य और दोहा के तहत सूचीबद्ध आंकड़ों पर इंडियास्पेंड द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आई है।

 

उनचास कविताएं –  पढ़े गए सभी कविताओं का 64 फीसदी – भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों द्वारा पढ़े गए थे। डॉ रमेश पोखरियाल (भाजपा) ने 16 वीं लोकसभा में पांच कविताए पढ़ी हैं – जोकि किसी भी सदस्य द्वारा पढ़ी गई सबसे अधिक संख्या है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी), 14 कविताएं पढ़ने के साथ दूसरी सबसे काव्यात्मक पार्टी रही है जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) तीन कविताओं के साथ तीसरे स्थान पर रही है।

 

उदाहरण के लिए, भारतीय जनता पार्टी के कृष्ण राज, जो अब राज्य के एक मंत्री हैं, ने रेल बजट पर सामान्य चर्चा के दौरान 8 मार्च, 2016 को कहा था :

 

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“Let the time come, o heaven, we’ll show you;
How can we unveil now, what lurks in our hearts.
The goal has no strength to stay away from us;
The desire to sacrifice is in our hearts…”

 

14 मार्च को राज के सहयोगी भोला सिंह बजट चर्चा के दौरान दो कविताएं सुनाई :

 

Screen Shot 2016-08-24 at 3.10.48 PM

 

“There must have been some compulsions;
one does not turn disloyal for no reason.
You don’t remember (my) loyalty, I don’t remember (your) disloyalty,
Life and death are made of these two melodies
You don’t remember one,
I don’t remember the other.”

 

16 वीं लोकसभा ने प्रति सत्र 10 कविताएं सुनी हैं; 15 वीं लोकसभा में औसतन छह का आंकड़ा था।

 

2014 के बाद से, ‘ बुद्धि और हास्य , काव्य और दोहा’ के उद्हारण में प्रति वर्ष वृद्धि हुई है, 2015 में 28 फीसदी और 2016 के पहले पांच महीनों में 104 फीसदी से वृद्धि हुई है। संसदीय रिकॉर्ड से यहां एक उदाहरण है:

 

“While putting a Supplementary on the Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (MGNREGA) to Question No.62 during Question Hour on 3.12.2015 Shri Anurag Thakhur (BJP) said “Hon’ble Minister by playing on the back foot, hit a sixer like Dhoni; and in his reply, he has mentioned everything.”
“After hearing this, the Hon’ble Speaker while cooling down the tempers said Jyotiradityaji (Indian National Party, INP) and Anuragji: “You are youngsters, why are you giving trouble to the Minister? This is not a cricket ground. Both the children can go out and play.”
“On hearing this, there was laughter from all sides of the House.”

 

हंसी – और बाद में संभ्रमित कश्मीरियों द्वारा सोशल मीडिया पर किया गया पोस्ट – ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के ए नवनीत कृष्णन का भी अनुसरण किया है जैसा कि कश्मीर घाटी में स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने ने राज्यसभा में गीत गाया था:

 

 

(मुलुनी एक मल्टीमीडिया पत्रकार है और उन्होंने बर्मिंघम , ब्रिटेन के विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) की डिग्री ली है।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 25 अगस्त 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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