Home » Cover Story » संसदीय क्षेत्र अनुसार भारत में कुपोषण को देखना क्यों है जरूरी ?

संसदीय क्षेत्र अनुसार भारत में कुपोषण को देखना क्यों है जरूरी ?

स्वागता यदवार और कार्तिक माधवपेड्डी,
Views
1665

Parliament_620
 

नई दिल्ली: एक नई तकनीक भारत में संसदीय निर्वाचन क्षेत्र अनुसार कुपोषण को माप सकती है, जहां दुनिया भर में कुपोषित बच्चों की सबसे बड़ी संख्या है। यह जानकारी एक नए अध्ययन में सामने आई है।

 

विश्लेषण  543 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में से 72 के टॉप दो क्विंटाइल (20 फीसदी) में बाल कुपोषण संकेतक की व्यापकता तो दर्शाता है- स्टंटिंग, उम्र के अनुसार कम वजन, वेस्टिंग और एनीमिया। इनमें से 12 निर्वाचन क्षेत्र झारखंड में, 19 मध्य प्रदेश में, 10 कर्नाटक में, आठ उत्तर प्रदेश और छह राजस्थान में हैं।

 

जनवरी 2019 में ‘इकोनोमिक एंड पॉलिटिकल जर्नल’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, कई भारतीय संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में कुपोषण के कई चेहरे हैं, जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाना चाहिए।

 

वर्तमान में, चूंकि लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों और जिलों की सीमाएं ओवरलैप नहीं होती हैं, इसलिए निर्वाचन क्षेत्रों के प्रदर्शन को मापा नहीं जा सकता,क्योंकि कुपोषण के आंकड़ों को जिले द्वारा मापा जाता है। कुपोषण सीखने, रोजगार और आर्थिक विकास को धीमा करता है। फिर भी, 4.66 करोड़ स्टंड बच्चों वाले देश में ( दुनिया का एक तिहाई बोझ, जो 2030 तक भारत को 4.6 करोड़ ) कुपोषण लगभग कभी चुनावी मुद्दा नहीं रहा है।

 

 एक ई-मेल साक्षात्कार में, हार्वर्ड विश्वविद्यालय में जनसंख्या स्वास्थ्य और भूगोल के प्रोफेसर और अध्ययन के सह-लेखक एसवी सुब्रमण्यन ने कहा, “हम राजनीतिक निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर डेटा एकत्र करने के महत्व और नियमित रूप से सर्वेक्षण और जनगणना में राजनीतिक निर्वाचन क्षेत्र की पहचान के बारे में चर्चा शुरू करना चाहते थे। नीति निर्माताओं के लिए उन क्षेत्रों में संकेतक को मापने की तुलना में शोध परिणामों को और अधिक प्रासंगिक बनाने के लिए क्या बेहतर तरीका है, जहां नीति निर्माता सीधे जिम्मेदार हैं?” स्टंड ( आयु के अनुसार कम कद ), कम वजन ( आयु के अनुसार कम वजन ), वेस्टेड ( कद के अनुसार कम कद ) एनीमिक (कम हीमोग्लोबिन) बच्चों का राष्ट्रीय औसत क्रमशः 35.9 फीसदी, 33.5 फीसदी, 20.7 फीसदी और 56.8 फीसदी हैं। मतलब लगभग पांच वर्ष से कम आयु के एक तिहाई बच्चे स्टंड और कम वजन वाले हैं, पांचवे वेस्टेड होते हैं और आधे से ज्यादा एनीमिक होते हैं।

 

देश भर में संसदीय क्षेत्रों में, पांच से कम आयु के स्टंड बच्चों का अनुपात 15 फीसदी से 63.6 फीसदी तक था। कम वजन के बच्चों का अनुपात 11.1 फीसदी से 60.9 फीसदी तक,  वेस्टेड बच्चों का अनुपात 5.9 फीसदी से 39.6 फीसदी तक और एनीमिक बच्चों का अनुपात 17.8 फीसदी से 83.6 फीसदी तक है।

 

 कुपोषण के कई प्रकार देखे गए थे, विशेष रूप से झारखंड और मध्य प्रदेश में, जो प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से भारत का छठा और पांचवां सबसे गरीब राज्य है, और इसे “सर्वोच्च प्राथमिकता” के साथ संबोधित किया जाना चाहिए, जैसा कि अध्ययन के लेखकों ने कहा है। इन्होंने कुपोषण डेटा ( केवल जिले अनुसार उपलब्ध ) की गणना करने के लिए नए तरीके विकसित किए हैं – संसदीय क्षेत्र के अनुसार- जो जिला सीमाओं पर ओवरलैप नहीं करता है।

 

हाई-प्रोफाइल निर्वाचन क्षेत्र का कैसा है प्रदर्शन?
 

 आठ कैबिनेट सहयोगियों के निर्वाचन क्षेत्रों की तुलना में उत्तर प्रदेश के वाराणसी यानी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र में कुपोषण के संकेतक खराब हैं। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए, वाराणसी में स्टंटिंग प्रसार 43.1 फीसदी है,जो राष्ट्रीय औसत 35.9 फीसदी से अधिक है और नीचे से 124वें रैंकिंग पर है।

 

हालांकि ये संकेतक 2014 में चुने गए सांसदों के प्रदर्शन को सीधे नहीं दर्शाते हैं, क्योंकि वे नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण पर आधारित हैं ( जो 2015-16 में आयोजित किया गया था, और पोषण संकेतकों को बदलने में सालों लग जाते हैं ) वे निर्वाचन क्षेत्र की पोषण स्थिति को प्रकट करते हैं।

 

 मोदी 2014 में पहली बार वाराणसी से चुने गए थे, लेकिन निर्वाचन क्षेत्र भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ 2009 से है। लोकसभा में मोदी के आठ कैबिनेट मंत्रियों में से अधिकांश के उत्तर भारत में निर्वाचन क्षेत्र हैं, खासकर उत्तर प्रदेश में, मध्य प्रदेश और राजस्थान में।

 

अन्य दलों में, लोकसभा में विपक्ष के नेता के कर्नाटक में गुलबर्गा निर्वाचन क्षेत्र, कांग्रेस पार्टी के मल्लिकार्जुन खड़गे ने 49.7 फीसदी प्रसार के साथ 18 हाई-प्रोफाइल निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे खराब प्रदर्शन किया है (इंडियास्पेंड द्वारा विश्लेषण किया गया जो कि हार्वेस्ट पेपर पर आधारित है ) यानी हर दो बच्चों में से एक स्टंट है।

 

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उत्तर प्रदेश के अमेठी निर्वाचन क्षेत्र और मध्य प्रदेश में उनके कांग्रेस पार्टी के सहयोगी ज्योतिरादित्य सिंधिया के गुना स्टंटिंग के मामले में नीचे से दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं, या जिनसे हमने तुलना की, उनमें से केवल गुलबर्गा से ऊपर है।

 

खड़गे को 2009 से, गांधी को 2004 से और सिंधिया को 2002 से उसी सीट से चुना जाता रहा है।

 

केरल में तिरुवनंतपुरम (18.5 फीसदी), कांग्रेस पार्टी के लोकसभा क्षेत्र के सांसद शशि थरूर और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के असदुद्दीन ओवैसी के तेलंगाना के हैदराबाद (20.6 फीसदी) क्षेत्र, 18 हाई-प्रोफाइल के बीच स्टंट करके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले हैं। थरूर 2009 से तिरुवनंतपुरम और हैदराबाद से ओवैसी 2004 से चुने जाते रहे हैं।

 

Gulbarga, Amethi, Guna And Varanasi Worst Performers On Stunting
Parliamentary Constituency Member of Parliament Political Party Stunting Prevalence (In %)
Gulbarga Mallikarjun Kharge Indian National Congress 49.7
Amethi Rahul Gandhi Indian National Congress 43.6
Guna Jyotiraditya Madhavrao Scindia Indian National Congress 43.2
Varanasi Narendra Modi Bharatiya Janata Party 43.1
Gwalior Narendra Singh Tomar Bharatiya Janata Party 43
Vidisha Sushma Swaraj Bharatiya Janata Party 40.4
Lucknow Rajnath Singh Bharatiya Janata Party 40.3
Azamgarh Mulayam Singh Samajwadi Party 40.1
Rae Bareli Sonia Gandhi Indian National Congress 37.7
Jaipur Rural Rajyavardhan Rathore Bharatiya Janata Party 35.7
Ghaziabad V K Singh Bharatiya Janata Party 35.5
Chhindwara Kamal Nath Indian National Congress 34
Bangalore (North) Sadanand Gowda Bharatiya Janata Party 29.6
Nagpur Nitin Gadkari Bharatiya Janata Party 28.3
Arunachal Pradesh West Kiren Rijiju Bharatiya Janata Party 26.6
Baramati Supriya Sule Nationalist Congress Party 24.3
Hyderabad Asaduddin Owaisi All India Majlis-E-Ittehadul Muslimeen 20.6
Thiruvananthapuram Shashi Tharoor Indian National Congress 18.5

Source:State of Nutrition Among Children, Lok Sabha

 
कुपोषण के अनुसार सबसे अच्छा और सबसे खराब निर्वाचन क्षेत्र

 

इंडियास्पेंड ने हार्वर्ड अध्ययन के निष्कर्षों का इस्तेमाल किया और प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए सांसदों पर डेटा जोड़ा, और नीचे दिए गए नक्शे पर उन्हें देखा।

 

स्टंटिंग: मध्य और उत्तरी भारत में संसदीय निर्वाचन क्षेत्र ( विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड, एक साथ लगभग 40 करोड़ या 31 फीसी भारतीयों के घर हैं ) में पांच साल से कम उम्र के स्टंट बच्चों का अनुपात सबसे ज्यादा है।

 

स्टंट बच्चों के उच्चतम अनुपात के साथ सभी निर्वाचन क्षेत्र उत्तर प्रदेश में हैं। इसमें मार्च 2019 में कांग्रेस में शामिल होने के लिए बीजेपी छोड़ने वाली साध्वी सावित्री बाई फुले का बहराइच (63.6 फीसदी), बीजेपी के दद्दन मिश्र की श्रावस्ती (61.3 फीसदी) और बीजेपी के बृजभूषण शरण सिंह का कैसरगंज (59.7 फीसदी) शामिल है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल के संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में स्टंटिंग का सबसे कम बोझ है। केरल में आंकड़े सबसे कम हैं। रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन के प्रेमचंद्रन के कोल्लम (15 फीसदी) और आईएनसी के के सी वेणुगोपाल और सुरेश कोडिकुन्निल के अलाप्पुझा और मवेलिक्कारा (15.4 फीसदी)।

 

संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के अनुसार स्टंटिंग प्रसार

Source: State of Nutrition Among Children
Note:
1. Shapefile for the map sourced from DataMeet, based on Election Commission of India data.
2. List of Lok Sabha members and their political parties has been extracted from the Lok Sabha website on March 20, 2019.

 

कम वजन: कम वजन के लिए उम्र का प्रसार स्टंटिंग के समान प्रवृत्ति का अनुसरण करता है। कम वजन वाले बच्चों का ज्यादा अनुपात झारखंड में बीजेपी के लक्ष्मण गिलुवा के संसदीय क्षेत्र सिंहभूम (60.9 फीसदी), पश्चिम बंगाल में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के मृगांका महतो का पुरुलिया (54.1 फीसदी) और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव के बदायूं (52.7 फीसदी) में है।

 

पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिज़ोरम और त्रिपुरा में कम वजन वाले बच्चों का अनुपात कम हैं।

 

 पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती के जम्मू और कश्मीर के अनंतनाग राजनीतिक क्षेत्र में (11.1 फीसदी), केरल कांग्रेस के जोस के मणि (जो तब से उच्च सदन में नामित किए गए हैं) के कोट्टायम (12.3 फीसदी) और आईएनसी के थोचोम मीना के इनर मणिपुर (12.5 फीसदी) में कम वजन वाले बच्चों का अनुपात सबसे कम है।

 

संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के अनुसार कम वजन का प्रसार

Source: State of Nutrition Among Children
Note:
1. Shapefile for the map sourced from DataMeet, based on Election Commission of India data.
2. List of Lok Sabha members and their political parties has been extracted from the Lok Sabha website on March 20, 2019.

 

वेस्टिंग: वेस्टिंग का प्रसार मध्य और पश्चिमी भारत में सबसे अधिक है, खासकर मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और झारखंड में। वेस्टिंग बच्चों के ज्यादा अनुपात वाले निर्वाचन क्षेत्र में झारखंड़ में बीजेपी के बिद्युत बरन महतो का जमशेदपुर (39.6 फीसदी), बीजेपी के अशोक महादेवराव नेते का गढ़चिरौली और बीजेपी के खारिया मुंडा का खूंटी (36.7 फीसदी) शामिल है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में वेस्टेड बच्चों का अनुपात सबसे कम है, जबकि आईएनसी के ठोकोम मीन्या के भीतरी मणिपुर (5.9 फीसदी), आईएनसी के थांगसो बाईट के आउटर मणिपुर (6.8 फीसदी) और आईएनसी के सी एल रौला के मिजोरम (7.3 फीसदी) में वेस्टिंग का सबसे कम प्रसार है।

 

संसदीय निर्वाचन क्षेत्र अनुसार वेस्टिंग का प्रसार

Source: State of Nutrition Among Children
Note:
1. Shapefile for the map sourced from DataMeet, based on Election Commission of India data.
2. List of Lok Sabha members and their political parties has been extracted from the Lok Sabha website on March 20, 2019.

 

एनीमिया: मध्य प्रदेश, दक्षिणी राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में एनीमिक बच्चों का अनुपात सबसे अधिक है। एनीमिक बच्चों के साथ वाले क्षेत्रों में सबसे बड़ा अनुपात झारखंड में बीजेपी के लक्ष्मण गिलुवा के सिंहभूम (82.7 फीसदी), राजस्थान में बीजेपी के मंशंकर निनामा के बांसवाड़ा (80.3 फीसदी) और मध्य प्रदेश में बीजेपी के सुभाष पटेल के खरगोन (80.1 फीसदी) में है। तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, छत्तीसगढ़, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिज़ोरम और त्रिपुरा में एनीमिया का प्रसार सबसे कम है। रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन के प्रेमचंद्रन के कोल्लम (17.8 फीसदी),  नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के तोखेहो येप्थोमी के नागालैंड (20 फीसदी) और ओडिशा में बीजू जनता दल के प्रसन्न कुमार पटसानी के भुवनेश्वर (20 फीसदी) में सबसे कम प्रसार है।

 

निर्वाचन क्षेत्र अनुसार एनीमिया का प्रसार

Source: State of Nutrition Among Children
Note:
1. Shapefile for the map sourced from DataMeet, based on Election Commission of India data.
2. List of Lok Sabha members and their political parties has been extracted from the Lok Sabha website on March 20, 2019.

 
निर्वाचन क्षेत्र के अनुसार कुपोषण को मापना क्यों है जरुरी ?
 

 1993 में सरकार ने संसद-सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना की शुरुआत की, जो संसद के प्रत्येक सदस्य को उनके संसदीय क्षेत्र में विकास परियोजनाओं के लिए 5 करोड़ रुपये देता है। 26 वर्षों से 2016 तक, कुल  सांसदों को 31,833 करोड़ रुपये मिले हैं।  हार्वर्ड पेपर के अनुसार संसद-सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना  के धन का उपयोग स्वास्थ्य उद्देश्यों के लिए स्थानीय अस्पतालों, एम्बुलेंस, श्रवण, आउटडोर जिम, आदि के लिए उपकरणों की खरीद के लिए करते हैं।

 

अध्ययन के लेखकों के अनुसार, निर्वाचन क्षेत्र द्वारा कुपोषण के आंकड़ों को मापने से न केवल सांसदों को सूचित विकल्प बनाने में मदद मिल सकती है, बल्कि मतदाताओं को अधिक जानकारी प्रदान की जा सकती है, जिससे राजनीतिक विचारों के लिए धन का उपयोग होने की संभावना कम हो जाएगी।

 

सुब्रमण्यन ने कहा, “हमें उम्मीद है कि मतदाता, अधिवक्ता और साथी नीति निर्माता सांसदों को अपने घटक के स्वास्थ्य के लिए जवाबदेह ठहराने के लिए इस डेटा का उपयोग करेंगे। हमारी कार्यप्रणाली असीम रूप से कई जनसंख्या संकेतकों के लिए हमारे अध्ययन को दोहराने के लिए एक ढांचा प्रदान करती है, उदाहरण के लिए धन, साक्षरता, अपराध, जीवन प्रत्याशा, आदि।”

 

कुपोषण डेटा और राजनीतिक जवाबदेही
 

 अध्ययन से जुड़े लेखकों का कहना है कि, जैसा कि हार्वर्ड के शोधकर्ताओं ने कुपोषण के आंकड़ों के साथ किया था, भविष्य में इसी तरह के अध्ययन संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों और जनसंख्या संकेतकों, मतदान व्यवहार, अनुमोदन रेटिंग, कार्यकाल की अवधि, राजनीतिक राजवंशों और अन्य प्रदर्शन संकेतकों के बीच संबंधों का विश्लेषण कर सकते हैं।

 

नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के फेलो राहुल वर्मा ने कहा, ” राजनीतिक निर्वाचन क्षेत्र के आंकड़ों में शोध की काफी संभावनाएं हैं। उदाहरण के लिए, यह हमें चुनावी पैटर्न और विकास संकेतकों के बीच संबंधों को देखने की अनुमति देगा।”

 

 क्या यह जानकारी राजनीतिक जवाबदेही में सुधार कर सकती है या मतदाता जागरूकता बढ़ा सकती है, यह स्पष्ट नहीं है, जैसा कि वर्मा कहते हैं। वर्मा हार्वर्ड अध्ययन से जुड़े नहीं थे फिर भी उन्होंने कहा,”हालांकि, इस तरह के अनुसंधान का स्वागत है और भले ही परिणाम या कार्यप्रणाली सही न हो, लेकिन इस डेटा का विश्लेषण करना सार्थक है।”

 

विकास संकेतकों पर राजनीतिक निर्वाचन क्षेत्र के डेटा से जवाबदेही में सुधार हो सकता है, लेकिन यह तब बेहतर है अगर ये डेटा बाल विकास जैसे एक संकेतक की तुलना में विकास कार्यक्रमों के प्रदर्शन पर विचार करें, जिसे बदलने में समय लगता है, जैसा कि इंटरनेश्नल फूड एंड रिसर्च इंस्ट्यूट के साथ सीनियर रिसर्च फेलो पूर्णिमा मेनन ने कहा है।

 

मेनन कहती हैं, “उदाहरण के लिए, स्वास्थ्य और आईसीडीएस (एकीकृत बाल विकास सेवा) सेवाएं, स्कूल नामांकन और सेवाओं की गुणवत्ता उनके निर्वाचन क्षेत्र में कैसे काम करती है, ये समय के फ्रेम में अधिक कार्रवाई योग्य हैं जो सांसद और विधायक सत्ता में हैं और उनके पास अधिक साधन उपलब्ध हैं इनमें से कुछ को बदलें। ”

 

इस रिपोर्ट में नेहा अब्राहम ने सहयोग किया है।

 

(यदवार प्रमुख संवाददाता हैं और माधवपेड्डी न्यूज एडिटर हैं। दोनों इंडियास्पेंड के साथ जुड़े हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 22 मार्च, 2019 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। हमसे respond@indiaspend.org पर संपर्क किया जा सकता है। हम भाषा और व्याकरण के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार रखते हैं।

 
“क्या आपको यह लेख पसंद आया ?” Indiaspend.com एक गैर लाभकारी संस्था है, और हम अपने इस जनहित पत्रकारिता प्रयासों की सफलता के लिए आप जैसे पाठकों पर निर्भर करते हैं। कृपया अपना अनुदान दें :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

code