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10 में से 7 भारतीय किशोर लड़कियां होना चाहती हैं ग्रैजुएट

प्राची सालवे,
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मुंबई: 10 किशोर भारतीय लड़कियों में से सात स्नातक यानी ग्रैजुएशन स्तर की पढ़ाई पूरी करना चाहती हैं। चार में से तीन के पास खास करियर योजना है।  लगभग चार में से तीन 21 साल की उम्र से पहले शादी नहीं करना चाहती हैं। यह ‘नन्ही कली’ द्वारा हाल ही में आयोजित अध्ययन के कुछ निष्कर्ष हैं। नन्ही कली ‘नंदी फाउंडेशन’ की ओर से परियोजना है, जो किशोर उम्र की लड़कियों के लिए काम करती है।

 

25 फीसदी लड़कियों ने कहा कि वे पोस्ट ग्रैजुएशन करना चाहती हैं। 12 फीसदी ने कहा कि वे एक पेशेवर डिग्री प्राप्त करना चाहती हैं। इस सर्वेक्षण में पूरे देश के 28 राज्यों और सात शहरों में से 74,000 लड़कियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, 33 फीसदी किशोर लड़कियों ने कहा कि वे शिक्षक बनना चाहती हैं। 11.5 फीसदी ने दर्जी बनने की इच्छा जताई । 10.6 फीसदी लड़कियों ने कहा कि वे बड़े होने पर डॉक्टर बनना चाहती हैं।   हालांकि ये लड़कियां इतना करने की इच्छा रखती हैं, समाज और घर पर उनकी वर्तमान स्थिति में काफी बदलाव नहीं आया है, जैसा कि हम रिपोर्ट की इस श्रृंखला में बाद के आलेखों में देखेंगे- और सर्वेक्षण के दौरान ” न्यू एज स्किल” पर किए गए कामों को विस्तार से समझने की कोशिश करेंगे और उनके संघर्षो को भी देखेंगे।

 

सर्वेक्षण में 13 से 19 साल की लड़कियों से शैक्षिक और स्वास्थ्य की स्थिति, बुनियादी जीवन कौशल, एजेंसी और घर और आकांक्षाओं के भीतर और बाहर सशक्तिकरण सहित नौ विषयों पर सवाल पूछे गए थे।

 

तीन आलेखों की श्रृंखला के इस पहले भाग में, हम भारत की किशोर लड़कियों की आकांक्षाओं को देखेंगे, जिनमें से 63.2 मिलियन लड़कियां पहली बार वोट देंगी। साथ ही और उन कारकों का विश्लेषण करेंगे जो उनकी आकांक्षाओं को आकार देने में मदद करते हैं। दूसरे भाग में, हम देखेंगे कि उनकी शैक्षणिक स्थिति, सशक्तिकरण और ‘ न्यू एज स्किल ‘ पर उनके दृष्टिकोण ( जैसे कि स्मार्टफोन का उपयोग करना या अंग्रेजी में कंप्यूटर पर दस्तावेज लिखना ) पर चर्चा करेंगे । अंतिम भाग में, हम देश में स्वास्थ्य देखभाल के बीच उनकी स्वास्थ्य की स्थिति और स्वास्थ्य देखभाल की कमी का अध्ययन करेंगे। यह यह जान लेना जरूरी है कि इस देश में हर दूसरी किशोर लड़की एनीमिक है।  सर्वेक्षण में किशोर लड़कियों के घरों के जनसांख्यिकीय आंकड़ों को भी एकत्रित किया गया है। आम तौर पर, ग्रामीण लड़कियों की तुलना में  शहरी क्षेत्रों में अधिक लड़कियां ग्रैजुएशन स्तर की पढ़ाई करने, वेतन वाली नौकरी करने और 21 वर्ष की आयु के बाद विवाह करने की संभावना रखती हैं। अधिक संपत्ति वाले घरों में लड़कियों में ऐसी आकांक्षाएं ज्यादा नजर आईं। इसके अलावा, 13 से 15 वर्ष के आयु वर्ग की तुलना में 16 से 1 9 वर्ष की उम्र के समूहों में ऐसी आकांक्षाओं में वृद्धि होने की संभावना भी बढ़ी है।

इन बदलावों से पता चलता है कि तमाम तरह के जोखिम के साथ किशोर लड़कियों सपने ते देखती हैं।

 

नंदी फाउंडेशन के चीफ पॉलिसी ऑफिसर रोहिणी मुखर्जी ने इंडियास्पेंड से बातचीत में कहा, ” वे अपने ज्ञाऩ और कौशल पर कुछ करना चाहती हैं। हालांकि उनके पास संभावनाओं के बारे में बहुत जानकारी नहीं, लेकिन पहुंच की उनकी जो सीमा है,  उसे समझते हुए वे अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में इमानदार हैं।”

 

किशोर लड़कियां ही क्यों?

 भारत में सबसे कम महिला श्रम बल की भागीदारी दर है। श्रम और रोजगार मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2015 में भारत के श्रम बल में 23.7 फीसदी महिलाओं की हिस्सेदारी थी। कम दर के कारणों में सामाजिक मानदंड, घरेलू कार्य, कौशल अंतर आदि शामिल हैं। सर्वेक्षण में कुछ ऐसी ही बातें सामने आईं हैं।

 

मुखर्जी कहती हैं, ”  लड़कियों के लिए किशोरावस्था को जीवन चक्र में एक बहुत ही महत्वपूर्ण काल के रूप में देखा जाता है,  क्योंकि इसी पर उसका भविष्य निरभर करता है कि वह देश की एक आदर्श नागरिक बन पाएगी या नहीं।”

 

टयूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंटट (यूएसएआईडी) द्वारा 2014 के अध्ययन के मुताबिक, स्कूल जाने वाली लड़कियों में 10 फीसदी की वृद्धि सुनिश्चित करने से सकल घरेलू उत्पाद (सकल घरेलू उत्पाद) की वृद्धि में तीन प्रतिशत अंक बढ़ सकते हैं।

 

इसके अलावा, स्कूल में बिताए गए प्रत्येक एक वर्ष से लड़कियों की आय 10 फीसदी-20 फीसदी बढ़ जाती है। माध्यमिक शिक्षा तक पर आमदनी बढ़ जाती है, यह 15 फीसदी से 25 फीसदी तक ऊपर जा सकती है।

 

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या निधि द्वारा इस 2014 के अध्ययन के अनुसार, पुरुषों की तुलना में चूंकि महिलाएं अपने परिवारों में अपनी आय के 90 फीसदी हिस्से का बांटती हैं, इसलिए महिलाओं की आय में वृद्धि ने कई तरह के लाभ साबित किए हैं। इससे पूरे परिवारों और समुदाय को गरीबी से बाहर निकालने में मदद मिलती है। मुखर्जी ने कहा, “दूसरी बात यह है कि, लड़कियों की बात लड़कों से अलग है। वह जब कल अपने बच्चों को जन्म देगी तो उसका व्यक्तिव उस बच्चे का स्वाथ्य निर्धारित करेगा। इसलिए, हमारे लिए, इस आयु वर्ग और जनसंख्या का यह वर्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब हमने पाया कि कोई डेटा नहीं है, और जब हमें पता चला कि ऐसा सर्वेक्षण नहीं किया गया है, तो हमने इसे करने का फैसला किया। “

 
10 किशोर भारतीय लड़कियों में से 7 ग्रैजुएशन की डिग्री या उच्चतर डिग्री प्राप्त करना चाहती हैं…
 

13 साल की 10 लड़कियों में से नौ स्कूल में हैं।  19 साल की उम्र में, 10 लड़कियों में से सात से कम वर्तमान में पढ़ रही हैं। सर्वेक्षण आंकड़ों से पता चला है कि कुल मिलाकर, हर पांचवीं किशोर भारतीय लड़की वर्तमान में अध्ययन नहीं कर रही हैं।

 

किशोर भारतीय लड़कियों का शैक्षिक स्तर

Source: Teen Age Girls (TAG) Report, Naandi Foundation

 

चार किशोर लड़कियों में से एक (25 फीसदी) ने कहा कि वे पोस्ट-ग्रैजुएशन के लिए अध्ययन करना चाहती हैं। 27 फीसदी ने ग्रैजुएशन स्तर की पढ़ाई की इच्छा जताई।12 फीसदी ने कहा कि वे एक पेशेवर डिग्री करना चाहती हैं और 20 फीसदी 12वीं कक्षा तक पढ़ने की बात कही।

 

कुल मिलाकर, 70 फीसदी लड़कियों ने कहा कि वे कम से कम स्नातक या नौकरी प्रवेश परीक्षा के लिए अध्ययन करना चाहती हैं। यह आंकड़ा 13 से 15 वर्ष के आयु वर्ग में 64 फीसदी था, और 16 से 19 वर्ष के आयु वर्ग में 76.5 फीसदी तक पहुंचा है।

 

किशोर लड़कियां जो कम से कम ग्रैजुएशन या किसी नौकरी के लिए प्रवेश परीक्षा देने तक पढ़ना चाहती हैं।

Source: Teen Age Girls (TAG) Report, Naandi Foundation

 

फिर भी, जैसा कि हमने कहा, 19 वर्ष की 65.5 फीसदी लड़कियां पढ़ाई कर रही हैं, जबकि 13 वर्ष की लड़कियों के लिए यह आंकड़े 92.3 फीसदी है।

 

निवास स्थान के आधार पर भी भिन्नताएं भी देखी गईं। ग्रामीण क्षेत्रों में 61.2 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि वे कम से कम ग्रैजुएशन या नौकरी प्रवेश परीक्षा तक पढ़ाई करना चाहती हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों के लिए यह आंकड़े 81 फीसदी हैं।

 

निवास स्थान के अनुसार किशोर लड़कियां, जो कम से कम ग्रैजुएशन या नौकरी प्रवेश परीक्षा तक पढ़ना चाहती हैं।

Source: Teen Age Girls (TAG) Report, Naandi Foundation

 

उच्च घरेलू संपत्ति वाले लड़कियों की उच्च शिक्षा के लिए इच्छुक होने की संभावना अधिक थीं। घरों को धन क्विंटाइल में विभाजित किया जाता है – उपभोक्ता वस्तुओं के स्वामित्व पर उनके स्कोर और घरेलू विशेषताओं, जैसे स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता के आधार पर पांच बराबर भागों में बांटा गया है।

 

इस सर्वेक्षण के लिए, शीर्ष दो क्विंटाइल ( या टॉप 40 फीसदी ) परिवारों को ‘उच्च संपत्ति क्विंटाइल’ के रूप में देखा गया था, जबकि नीचे 60 फीसदी परिवारों को ‘कम संपत्ति क्विंटाइल’ के रूप में जोड़ा गया था। जबकि उच्च संपत्ति क्विंटाइल में 81 फीसदी लड़कियां ने कहा कि वे कम से कम ग्रैजुएशन स्तर की पढ़ाई करना चाहती हैं, लेकिन यह आंकड़ा कम संपत्ति क्विंटाइल में 61 फीसदी तक गिर गया, जैसा कि आंकड़ों से पता चलता है।

 

घरेलू संपत्ति के आधार पर किशोर लड़कियां, जो कम से कम ग्रैजुएशन या नौकरी प्रवेश परीक्षा तक पढ़ना चाहती हैं

Source: Teen Age Girls (TAG) Report, Naandi Foundation

 

राज्यों में बिहार ( जहां राज्य सरकार ने स्कूलों में लड़कियों के नामांकन में सुधार के लिए 2016 में लड़कियों के छात्रों के लिए साइकिल उपलब्ध कराई थी ) में ऐसी किशोर उम्र की लड़कियों का सबसे कम प्रतिशत था, जो ग्रैजुएशन (52 फीसदी) पूरा करने की इच्छा रखते हैं। इसके बाद झारखंड (58 फीसदी) और उत्तर प्रदेश (62 फीसदी)। इस संबंध में,  90 फीसदी किशोर लड़कियों के साथ जम्मू-कश्मीर का  सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है।

 

4 किशोर भारतीय लड़कियों में से 3 वेतन वाले काम करना चाहती हैं
 

 जब उनसे कैरियर या नौकरी की इच्छा के बारे में पूछा गया  तो 33 फीसदी लड़कियों ने कहा कि वे एक शिक्षक बनना चाहती हैं। 11.5 फीसदी ने कहा कि वे दर्जी बनना चाहती हैं। 10.6 फीसदी लड़कियां ने कहा कि वे डॉक्टर बनना चाहती हैं और 6 फीसदी ने नर्स बनने की इच्छा जताई। अन्य 8 फीसदी ने कहा कि वे पुलिस या सशस्त्र बलों में शामिल होना चाहती हैं।

 

किशोर भारतीय लड़कियों में कैरियर आकांक्षाएं

Source: Teen Age Girls (TAG) Report, Naandi Foundation

 

मुखर्जी ने कहा, “हमारे पास” आप क्या बनना चाहती हैं “से संबंधित प्रश्न थे और उसमें, उनके सामान्य जवाब शिक्षक और डॉक्टर थे। वे वास्तविकता को फोकस में डाल रहे हैं, क्योंकि उन्होंने एक शिक्षक के रूप में रोल मॉडल देखा है। उसने वास्तव में अन्य नौकरियों से जुड़ीं महिलाओं को नहीं देखा है। तो यहां मुझे इस बात का भलोसा हुआ कि वे सब जवाब देते हुए गंभीर थे। ” कुल मिलाकर, 74 फीसदी लड़कियों के मन में विशिष्ट करियर आकांक्षाएं थीं। हालांकि 13 से 15 साल के आयु वर्ग के आंकड़े, 16 से 19 वर्ष के आयु वर्ग (75.5 फीसदी बनाम 73 फीसदी) के आंकड़ों में थोड़ा ही अंतर था, शहरी क्षेत्रों में अधिक लड़कियों की करियर आकांक्षाएं थी, जैसा कि आंकड़ों से पता चलता है।

 

जहां ग्रामीण इलाकों में 72 फीसदी किशोर लड़कियों में करियर की आकांक्षाएं थीं, वहीं शहरी इलाकों के लिए यह आंकड़े 80 फीसदी थे।

 

घर के स्थान के अनुसार किशोर लड़कियां, जो कम से कम ग्रैजुएशन या नौकरी प्रवेश परीक्षा तक पढ़ना चाहती हैं।

Source: Teen Age Girls (TAG) Report, Naandi Foundation

 

इसी तरह, जबकि कम संपत्ति वाले 70 फीसदी किशोर लड़कियों में कैरियर आकांक्षाएं थीं,  वहीं उच्च संपत्ति क्विंटाइल परिवारों के लिए आंकड़े 81 फीसदी थे।

 

परिवार की संपत्ति के अनुसार कैरियर अकांक्षा वाली किशोर लड़कियां

Source: Teen Age Girls (TAG) Report, Naandi Foundation

 

राज्यों में गुजरात ने सबसे खराब प्रदर्शन किया। केवल 61 फीसदी लड़कियों ने कैरियर आकांक्षाएं व्यक्त की। इसके बाद ओडिशा (63.5 फीसदी) और बिहार (67.8 फीसदी) का स्थान रहा है।  94 फीसदी लड़कियों के साथ, सिक्किम ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है।

 

4 में से 3 किशोर लड़कियां 21 वर्ष की आयु से पहले विवाह नहीं करना चाहती  

 
सर्वेक्षण में शामिल की गई 74,000 लड़कियों में से 95.8 फीसदी लड़कियां अविवाहित थीं, जैसा कि आंकड़ों से पता चलता है।

 

जबकि 26.7 फीसदी लड़कियों ने कहा कि वे 20 साल की उम्र से पहले शादी करना चाहती हैं, 51 फीसदी किशोर लड़कियों ने 21-25 साल के बीच विवाह करने की इच्छा जताई,10.2 फीसदी ने 26-30 साल और 12.1 फीसदी ने कहा कि वे 31 साल बाद या इसके बाद शादी करना चाहती हैं।

 

कुल मिलाकर, 73.3 फीसदी किशोर लड़कियों ने कहा कि वे 21 साल से पहले शादी नहीं करना चाहती हैं। उम्र का ये एक ऐसा पड़ाव है,जब वे उच्च शैक्षिक स्तर प्राप्त करके वेतन वाली नौकरी शुरु कर सकती हैं।

 

लड़कियों की उम्र के साथ यह आंकड़ा बढ़ गया। 13 से 15 साल के आयु वर्ग में, 69.8 फीसदी किशोर लड़कियों ने कहा कि वे 21 साल या बाद में शादी करना चाहते हैं, जबकि 16 से 19 साल के आयु वर्ग में यह आंकड़ा 76.9 फीसदी पाया गया है।

 

आयु अनुसार किशोर लड़कियों की 21 वर्ष बाद में विवाह की अकांक्षाएं

Source: Teen Age Girls (TAG) Report, Naandi Foundation

 

ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 67.7 फीसदी था, जबकि शहरी इलाकों में यह 86.3 फीसदी तक पहुंच गया था।

 

निवास स्थान के अनुसार किशोर लड़कियों की 21 वर्ष  बाद में विवाह की अकांक्षाएं

Source: Teen Age Girls (TAG) Report, Naandi Foundation

 

जबकि कम संपत्ति क्विंटाइल परिवारों में 65.4 फीसदी लड़की 21 साल या उससे अधिक उम्र में शादी करना चाहती थी, उच्च संपत्ति क्विंटाइल परिवारों में यह आंकड़े 84.8 फीसदी थे।

 

परिवार की संपत्ति अनुसार किशोर लड़कियों की 21 वर्ष  बाद में विवाह की अकांक्षाएं

Source: Teen Age Girls (TAG) Report, Naandi Foundation

 

राज्यों में, जबकि बिहार का प्रदर्शन सबसे बद्तर रहा। केवल 54.7 फीसदी कहा कि वे 21 साल या उससे अधिक उम्र में शादी करना चाहते हैं। वहीं सिक्किम की सबसे किशोर लड़कियां थीं जो ऐसा करने की कामना करती थीं। यहां आंकड़े 100 फीसदी थे।

 

यह भारत की किशोर लड़कियों पर तीन आलेखों वाली श्रृंखला का पहला भाग है।

 
( सालवे प्रोग्राम मैनेजर हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़ी हैं। )
 
यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 25 अक्टूबर 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।
 

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