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2016-17 में भारत में 60 टैंकर्स ब्लड की कमी

चैतन्य मल्लापुर,
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मुंबई: आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक,  वर्ष 2016-17 में भारत में 1.9 मिलियन यूनिट रक्त ( 60 टैंकर्स के बराबर ) की कमी थी, जो 320,000 से अधिक हृदय सर्जरी या 49,000 अंग प्रत्यारोपण में सहायता कर सकता था।

 

यह 2015-16 में 1.1 मिलियन यूनिट या 35 टैंकर रक्त की कमी से ज्यादा है, जब भारत के पास अपने 12 मिलियन लक्ष्य से 9 फीसदी कम रक्त था, जैसा कि इंडियास्पेंड ने 3 सितंबर, 2016 की रिपोर्ट में बताया है।

 

वर्ष 2016-17 में भारत ने 11.1 मिलियन यूनिट रक्त एकत्र किए थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानदंडों के आधार पर 13 मिलियन यूनिट लक्ष्य का 85 फीसदी हिस्सा पूरा किया गया है, जैसा कि एक संसदीय प्रश्न पर स्वास्थ्य के जूनियर मंत्री अनुप्रिया पटेल के एक जवाब में बताया गया है।

 

विश्व रक्तदान दिवस हर साल 14 जून को मनाया जाता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, हर साल दुनिया भर में लगभग 112 मिलियन लोग रक्त दान करते हैं, जिनमें से 50 फीसदी कम और मध्यम आय वाले देशों में दान किए जाते हैं, जहां दुनिया की लगभग 80 फीसदी आबादी रहती है।

 

डब्ल्यूएचओ ने सिफारिश की है कि देश की आबादी के 1 फीसदी की रक्त आवश्यकता को इसके रक्त की जरूरतों के एक दायरे अनुमान के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके अनुसार, 23 मार्च, 2018 को लोकसभा को प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 1.9 मिलियन यूनिट रक्त की कमी थी।

 

एक यूनिट रक्त को 350 मिलीलीटर और 11,000 लीटर रखने का एक मानक मानते हुए यह 60 टैंकर्स के बराबर था।

 

रक्त आवश्यकताएं

Blood Requirements
Units Of Blood Required For Could Aid
Heart Surgery – 6 units 3,27,187 Heart Surgeries
Organ Transplant – 40 units 49,078 Transplants
Automobile Accident – 50 units 39,262 Accidents
Bone Marrow Transplant – 20 units 98,156 Transplants

Source: University of Pune

 

क्षेत्रीय विविधताएं

 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2016-17 में डब्ल्यूएचओ मानदंड के अनुसार इसकी आवश्यकता के मुकाबले चंडीगढ़ ने 74,408 और अधिक रक्त यूनिट एकत्र किया था, जबकि बिहार ने अपनी आवश्यकता से 985,015 यूनिट कम रक्त एकत्र किया था।

 

दिल्ली ने अपने लक्ष्य से 193 फीसदी और दादरा और नगर हवेली ने 142 फीसदी अधिक एकत्र किया।

 

दूसरी तरफ, बिहार ने 84 फीसदी की कमी दर्ज की,  जो देश में सबसे बद्तर है। इसके बाद भारत की सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य, उत्तर प्रदेश का स्थान रहा है। उत्तर प्रदेश के लिए यह आंकड़ा 61 फीसदी कमी का रहा है।

 

‘इंडियन सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन एंड इम्यूनोहाइमैटोलॉजी’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष युधिर सिंह ख्यालिया कहते हैं, “चंडीगढ़ स्वैच्छिक रक्तदान के मामले में पूरी तरह से एक अद्वितीय क्षेत्र है। यहां शैक्षिक संस्थानों के माध्यम से स्वैच्छिक रक्त दान का प्रचार आसानी से होता है। चंडीगढ़ ने दशकों से देश के रक्तदान आंदोलन का नेतृत्व किया है। और इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों में पर्याप्त बुनियादी ढांचे और कई दाता क्लबों को धन्यवाद देना चाहिए।”  ‘इंडियन सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन एंड इम्यूनोहाइमैटोलॉजी’ एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसका उद्देश्य देश में रक्त बैंकिंग की स्थिति में सुधार करना और लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रोत्साहित करना है।

 

बिहार और उत्तर प्रदेश में, इसके विपरीत, सरकारों में से कोई भी ठोस कदम नहीं उठाता है। खियालिया ने कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान की स्थिति में सुधार के लिए औपचारिक आंदोलन की आवश्यकता है।

 

2016-17 में, पूरे भारत में एकत्र किए गए रक्त

Source: Lok Sabha
Note: Values below 100% mean shortage of blood based on World Health Organization recommendation.

 

महाराष्ट्र ने 1.4 मिलियन यूनिट रक्त एकत्र किए, जो पूर्ण संख्या में देश में सबसे ज्यादा है। महाराष्ट्र में इसकी आवश्यकता से 20 फीसदी ज्यादा रक्त एकत्र किया गया। इसके बाद पश्चिम बंगाल (1 मिलियन इकाइयां) और कर्नाटक (960,049 इकाइयां) का स्थान रहा है।

 

कई राज्यों में रक्त की कमी रहती है, विशेष रुप से गर्मियों के महीनों में जब शैक्षिक संस्थान ( रक्त दान का एक प्रमुख स्रोत ) छुट्टियों या परीक्षाओं के लिए बंद होता है। मुंबई स्थित एनजीओ ‘थिंक फाउंडेशन’, जो रक्त दान के लिए लोगों को प्रेरित करता है, के उपाध्यक्ष विनय शेट्टी ने इंडियास्पेंड को बताया, “अभी मई-जून में रक्त की कमी है, हर जगह देश के हर शहर में कमी है।”

 

ब्लड बैंक

 

वर्तमान में, भारत में 2,903 रक्त बैंक पूरे देश में फैले हुए हैं, जिनमें से 1,043 सार्वजनिक हैं और 1,860 निजी हैं, जिनमें धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा संचालित भी शामिल हैं। महाराष्ट्र में सबसे अधिक, 328, रक्त बैंक हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश (294) और तमिलनाडु (291) का स्थान रहा है।

 

दूसरी तरफ, 17 राज्यों के 74 जिलों में एक भी रक्त बैंक नहीं है। असम में ऐसे 12 जिलों हैं, इसके बाद अरुणाचल प्रदेश और तेलंगाना, दोनों में 10 ऐसे जिले हैं।

 

रक्त बैंकों के बिना राज्यों में जिले

सरकार ने ग्रामीण इलाकों में सेवाएं प्रदान करने के लिए देश के 68 जिलों में रक्त बैंक स्थापित करने की योजना बनाई है, जैसा कि संसद के एक जवाब में बताया गया है।

 

चंडीगढ़ में, जिसने आवश्यकता के अनुसार उच्चतम रक्त संग्रह की सूचना दी है, वहां केवल चार रक्त बैंक हैं। दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश में  देश में रक्त बैंक की दूसरी सबसे बड़ी संख्या जरूर है लेकिन यहां इसकी आवश्कता से 61 फीसदी कम रक्त था।

 

शेट्टी ने चंडीगढ़ के मामले का हवाला देते हुए कहा, “कुछ ऐसे शहर हैं जो रक्तदान शिविर आयोजित करने में बहुत आगे हैं। वहां के आयोजक पहले से ही रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं और मरीजों को दाताओं की तलाश करने के लिए मजबूर नहीं करते हैं।”

 

‘नई नेशनल ब्लड पॉलिसी’ और ‘नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल’ का गठन चंडीगढ़ में कार्यकर्ताओं के एक समूह द्वारा किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप हुआ था, जो रक्तदान के रेग्युलेशन की मांग को लेकर अदालत में गए थे, और सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आवश्यक आदेश जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने दाताओं का भुगतान करने के अभ्यास पर प्रतिबंध लगाते हुए यह भी फैसला दिया कि रक्त दान स्वैच्छिक हो। फिर भी, 2016-17 में, भारत में 11.1 मिलियन रक्त एकत्र किए गए, 29 फीसदी स्वैच्छिक नहीं थे, जैसा कि सरकार के ‘ब्लड ट्रांसफ्यूजन सर्विसेज’ के 2016-17 के आंकड़ों से पता चलता है।

 

शेट्टी कहते हैं, “ज्यादातर जगहों पर कोई स्वैच्छिक रक्तदान नहीं है। यहां तक ​​कि चिकित्सा अभ्यास का मानना ​​है कि रक्त का आयोजन करने की ज़िम्मेदारी रोगी की है, न कि अस्पताल की। स्वैच्छिक रक्तदान बहुत सीमित और केवल सचेत रहने वाले शहरों में होता है।”

 

बर्बादी

 

22 दिसंबर, 2017 के एक अलग प्र्शन पर लोकसभा के जवाब के अनुसार, 2016-17 में 1.18 मिलियन यूनिट रक्त ( लगभग 38 टैंकरों ) 2016-17 में फेंक दिया गया था।

 

2016-17 में फेंका गया रक्त

इसके लिए “मलेरिया, सिफलिस, एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी जैसे संक्रमण वाले रक्त शामिल हैं; काम न होने के कारण आउट डेटेड हो जाना, विशेष रूप से प्लेटलेट्स के लिए, जिनके पास केवल 5 दिनों का शॉर्ट शेल्फ जीवन होता है; मलिनकिरण, हेमोलाइसिस, जीवाणु प्रदूषण के रूप में भंडारण के दौरान गिरावट; संग्रह और जमा करने के बाद गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करना जैसे कारण शामिल हैं।”

 

(मल्लापुर विश्लेषक हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़े हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 14 जून 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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