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6 वर्षों में इंटरनेट शटडाउन से देश को 21,336 करोड़ रुपये का नुकसान

श्रीहरि पलियथ,
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मुंबई: 2017 तक छह वर्षों में लगभग 16,315 घंटे इंटरनेट शट डाउन से भारत को 3.04 बिलियन डॉलर (21,336 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है। यह लागत भारत के स्वच्छ भारत मिशन के लिए 2018-19 के बजट के अनुमान का 1.2 गुना है। यह जानकारी एक वैचारिक संस्था, ‘इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (आईसीआरआईईआर) की अप्रैल 2018 की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

 

भारत में 12,615 घंटों के मोबाइल इंटरनेट शटडाउन की कीमत अर्थव्यवस्था में लगभग 2.37 बिलियन डॉलर (16,590 करोड़ रुपये) रही है। जबकि भारत में 3,700 घंटों के मोबाइल और फिक्स्ड लाइन इंटरनेट शटडाउन ने 2012 और 2017 के बीच अर्थव्यवस्था में 678.4 मिलियन डॉलर (4,746 करोड़ रुपये) का नुकसान पहुंचाया है, जैसा की रिपोर्ट में कहा गया है। यह रिपोर्ट इस तरह के शटडाउन के आर्थिक प्रभाव का विश्लेषण करती है।

 

रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, भारत के मोबाइल यातायात में 10 फीसदी की वृद्धि औसतन भारत के सकल घरेलू उत्पाद ( जीडीपी ) में 1.6 फीसदी की वृद्धि करती है। भारत के इंटरनेट यातायात ( फिक्स्ड लाइन और मोबाइल ) में 10 फीसदी की वृद्धि प्रति व्यक्ति जीडीपी में 3.1 फीसदी की वृद्धि करेगी।

 

2015-16 में इंटरनेट शटडाउन से 968 मिलियन डॉलर (6,485 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है। यह नुकसान सर्वेक्षित 19 देशों और 22 शटडाउन के परिणाम के बीच सबसे बड़ा है । यह युद्ध से ग्रस्त इराक के बराबर है। इस संबंध में  इंडियास्पेंड ने 26 अक्टूबर, 2016 की रिपोर्ट में बताया है।

 

अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह वर्षों में, 2016 तक भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ता में 324 फीसदी की वृद्धि हुई है। ये आंकड़े 92 मिलियन से 390 मिलियन तक हुए हैं। वहीं, इसी अवधि के दौरान, चीन में 60 फीसदी की वृद्धि हो कर 750 मिलियन, जापान में 20 फीसदी से बढ़कर 120 मिलियन, अमेरिका में 14 फीसदी की वृद्धि से 250 मिलियन और ब्राजील में 63 फीसदी बढ़ कर 130 मिलियन हुआ है। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने 14 अगस्त, 2018 की रिपोर्ट में बताया है।

 

जम्मू-कश्मीर में सबसे ज्यादा इंटरनेट शटडाउन

 

पिछले पांच वर्षं में, 2017 तक, जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट 60 बार बंद हुआ है, जो कि किसी भी अन्य राज्य की तुलना में सबसे ज्यादा है। 2012 की तुलना में साल 2017 में, राज्य में मोबाइल और मोबाइल और फिक्स्ड लाइन इंटरनेट शटडाउन 10 गुना बढ़ कर 32 हुआ है। जबकि इसी अवधि के दौरान, भारत भर में शट डाउन 22 गुना बढ़ कर 70 हुआ है।

 

इस अवधि के दौरान जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट शटडाउन 7,776 घंटों तक चला, जो पश्चिम बंगाल के लगभग तीन गुना ज्यादा है। पश्चिम बंगाल का स्थान दूसरा रहा है। कुल मिला कर देश भर में, जैसा कि हमने कहा था, इंटरनेट 167315 घंटों के लिए बंद रहा है।

 

राज्य अनुसार इंटरनेट शटडाउन के उदाहरण, (2012-2017)

Source: The Anatomy Of An Internet Blackout: Measuring The Economic Impact Of Internet Shutdowns In India, ICRIER (April, 2018)

 

दक्षिण एशियाई देशों के लोगों ने मई 2017 और अप्रैल 2018 के बीच कम से कम 97 इंटरनेट शट डाउन का अनुभव किया है। ‘संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह के शट डाउन प्रेस स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति पर एक बैरोमीटर हैं।  भारत में अकेले ऐसे 82 मामले हैं, जैसा कि इंडियन एक्सप्रेस ने 14 मई, 2018 की रिपोर्ट में बताया है।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारों ने इंटरनेट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास का समर्थन किया है, लेकिन सेंसरशिप, अवरोध और शटडाउन, इसके उपयोग में कठोर नीति है।

 

जून 2018 को समाप्त होने वाले 18 महीनों में सोशल मीडिया पर 1,662 यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर या पोस्ट अवरुद्ध किए गए थे, जैसा कि इंडियास्पेंड ने 14 अगस्त, 2018 की रिपोर्ट में बताया है। आईसीआरआईआरई रिपोर्ट कहती है, “हालांकि शटडाउन और जीवन और संपत्ति के नुकसान के बीच संबंधों का कोई मजबूत दस्तावेज प्रमाण नहीं है, लेकिन प्रबंधकों ने अजीब तरीके से साझा किया कि कैसे शटडाउन ने हिंसा और नागरिक संघर्षों को नियंत्रित करने में मदद की है।”

 

7 फरवरी, 2018 को संसदीय प्रतिक्रिया में गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2015 से 2017 तक पथराव की कम से कम 4,799 घटनाएं हुई हैं, जैसा कि इंडियास्पेंड ने 18 मई, 2018 की रिपोर्ट में बताया है।

 

2016 से कश्मीर में और 2017 से पश्चिम बंगाल में, शटडाउन की विस्तारित अवधि ने अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है।

 

गुजरात में इंटरनेट शटडाउन की आर्थिक लागत सबसे अधिक

 

जम्मू-कश्मीर में 7,776 घंटे की तुलना में 2012-17 के बीच 10 मामलों में गुजरात को 724 घंटे के इंटरनेट शट डाउन का सामना करना पड़ा है। प्रधान मंत्री का यह गृह राज्य आर्थिक रूप से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। 2015 के मोबाइल शट डाउन ने राज्य को करीब 1.12 बिलियन डॉलर (7,844 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है, जो 1.84 लाख करोड़ रुपये के मौजूदा राज्य बजट का लगभग 4.3 फीसदी है।

 

19 सितंबर, 2015 को सूरत में पाटीदार समुदाय के नेता हार्दिक पटेल की हिरासत के बाद, गुजरात सरकार ने अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, राजकोट और मेहसाणा सहित प्रमुख शहरों में मोबाइल इंटरनेट और एसएमएस सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया था, जैसा कि बिजनेस स्टैंडर्ड ने 19 सितंबर, 2015 की रिपोर्ट में बताया है।

 

18 अप्रैल, 2016 को नेटबैंकिंग लेनदेन 90 फीसदी से अधिक गिरा, 1,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा गुजरात के बैंकों देखा, क्योंकि मोबाइल इंटरनेट और एसएमएस शटडाउन ने नेट और मोबाइल बैंकिंग जैसी कई सेवाओं को प्रभावित किया, जैसा कि टाइम्स ऑफ इंडिया ने 19 अप्रैल, 2016 की रिपोर्ट में बताया है।

 

राज्य अनुसार इंटरनेट शटडाउन का अनुमानित आर्थिक कीमत (2012- 2017)

Source: The Anatomy Of An Internet Blackout: Measuring The Economic Impact Of Internet Shutdowns In India, ICRIER (April 2018)

Note: The total number of shutdowns in this figure is higher than that in the figure above, as some instances of shutdown in Jammu & Kashmir and Haryana were separated to account for differences in location of shutdown across network types during the same instance of a shutdown.

 

आईसीआरआईआरई रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में पर दूसरा सबसे ज्यादा आर्थिक प्रभाव पड़ा है। करीब 610.24 मिलियन डॉलर (4,273 करोड़ रुपये)। हरियाणा और पूर्वोत्तर के लिए आर्थिक लागत  429.2 मिलियन डॉलर (3,005.6 करोड़ रुपये) और 148.8 मिलियन डॉलर (1,042 करोड़ रुपये) थी।

 

(पालियथ विश्लेषक है और इंडियास्पेंड के साथ जुड़े हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 28 अगस्त, 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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