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चार चीज़ें जो 2016 में बदल सकती हैं भारत को

चैतन्य मल्लापुर,

Literacy Day

 

इस नए साल में राष्ट्रीय पहचान योजना से संबंधित, इंटरनेट पर अधिक लोगों के साक्षर होने की और अधिक लोगों तक बिजली, विशेष रूप से वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से बिजली पहुंचने की उम्मीद है। वर्ष 2016 में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के अनावरण करने के लिए कई बातें है। यहां हम चार बातों पर चर्चा करेगें।

 

1. एक बिलियन लोगों तक आधार और गांवों में पहुंचेगी बैंकिंग

 

वर्ष 2016 में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) या आधार कार्ड से पहचान प्राप्त करने वाले भारतीयों की संख्या एक बिलियन हो जाएगी। 30 नवंबर 2015 तक 940 मिलियन से अधिक लोगों को आधार कार्ड प्राप्त कराया गया है। जून 2015 तक, यूआईडीएआई ने 6,427 करोड़ रुपए खर्च किया है।

 
आधार नामांकन, 2015
 

Source:Unique Identification Authority of India

 

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकों को स्वेच्छा से विभिन्न चीजों के लिए आधार कार्ड का उपयोग करने की अनुमति दी है : ग्रामीण रोजगार, बैंक खातों, पेंशन, रियायती दर पर भोजन और गैस । वर्ष 2016 में करीब 120 मिलियन परिवारों को सीधे उनके बैंक खातों में तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सब्सिडी प्राप्त होगा, इनमें से अधिकतर आधार कार्ड भुगतान ब्रिज, द्वारा सक्षम हैं जो बैंकों, गैस कंपनियों, यूआईडीएआई और उपभोक्ताओं के बीच एक अंतरफलक है।

 

विरल शाह, रिबूटिंग इंडिया के सह-लेखक एवं ‘आधार’ के निर्माताओं में से एक ने इंडियास्पेंड से बात करते हुए बताया कि, “मुझे उम्मीद है कि पैसे भेजने के लिए कई और अधिक योजनाओं को आधार भुगता ब्रिज को अपनाना होगा। (यह आधार संख्या के अनुसार रकम के बैंक  खातों और डाकघरों में हस्तांतरण की अंतरपरिचालन प्रक्रिया है।)”

 

शाह आगे बताते हैं कि माइक्रो एटीएम लेनदेन (जहां सामाजिक सुरक्षा भुगतान जन धन खातों में स्थानांतरित होते हैं एवं नकदी निकासी गांवों में बॉयोमीट्रिक प्रमाणीकरण आधार पर होते हैं) बड़े पैमाने पर उपर होगा।

 

वर्ष 2016 में आधार कार्ड मध्यम वर्ग के जीवन में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के एक मेजबान तर करने के लिए भी आधार हो जाएगा। इनमें ई-केवाईसी (ग्राहक पहचान स्थापित करने के लिए अपने ग्राहक को या बैंक आवश्यकतों को जानना) ई- साईन (डिजिटल हस्ताक्षर) और डिजिटल लॉकर्स (दस्तावेज़ों को सुरक्षित रखने के लिए नेट पर स्थान) शामिल हैं।

 

2. 2016 में दोगुने से अधिक करने के लिए अक्षय ऊर्जा स्थापना, विद्युतीकरण संतुलन की ओर कदम

 

2016 तक भारत अक्षय ऊर्जा के 12 गीगा वाट (जीडब्ल्यू) स्थापित करने के लिए योजना की है। साथ ही  2022 तक 175 गीगावॉट प्राप्त करने और मिलियन रोज़गार के अवसर पैदा करने के लक्ष्य भी तय किया है।

 

30 सितंबर, 2015 तक 12 गीगावॉट स्थापित सभी अक्षय ऊर्जा क्षमता के एक तिहाई के बराबर है और 2015 में स्थापित क्षमता दोगुने से अधिक हो जाएगा । जैसा कि Factchecker.in ने पहले भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत का अक्षय ऊर्जा कार्यक्रम , दुनिया के सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है और वर्ष 2022 तक

 
अक्षय ऊर्जा : संस्थापित क्षमता
 

Source: Central Electricity Authority, 1 and 2; Figures in MW

 

नवीकरणीय ऊर्जा में से स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। पिछले 18 वर्षों में 65 फीसदी की वृद्धि हुई है, 2.6 गीगावॉट से 4.3 गीगावॉट तक पहुंची है।

 

नवीकरणीय ऊर्जा से बिजली के बिना रह रहे भारतीयों की संख्या को कम करने के प्रयास में मदद मिलेगी (वर्तमान में 300 मिलियन की संख्या ) और ग्रह की तीसरी सबसे बड़ी प्रदूषक के रूप में अपनी स्थिति के साथ ऊर्जा के लिए भारत की जरूरत को संतुलित करने में मदद मिलेगी। भारत के सभी गांवों को विद्युतीकरण करने का लक्ष्य 2017 तक तय किया गया है। आप प्रगति को यहां ट्रैक कर सकते हैं :

 

 

3. 410 जिलों में सरकार का 100% साक्षरता का लक्ष्य लेकिन लाखों रहेंगे निरक्षर

 

सांसदों के आदर्श गांव कार्यक्रम के तहत मार्च 2016 तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 410 जिलों में 100 फीसदी साक्षरता हासिल करने का संकल्प किया है।

 
साक्षरता दर, 1951-2011
 

Source: Census 2011

 

भारत की साक्षरता दर 1951 में 18 फीसदी से बढ़ कर 2011 में 74 फीसदी तक पहुंचा है, लेकिन अन्य ब्रिक्स देशों के मुकाबले यह अब भी कम है (जहां साक्षरता दर 90 फीसदी के पार पहुंच गया है)। इंडियास्पेंड ने इस संबंध में पहले ही अपनी रिपोर्ट में बताया है।

 

4. अमरिकियों के मुकाबले अधिक भारतीय होंगे ऑनलाइन

 

इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) और आईएमआरबी इंटरनेशनल की ‘इंटरनेट इन इंडिया 2015’ की इस रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2015 तक कम से कम 402 मिलियन भारतीयों के ऑनलाइन होने की उम्मीद थी जोकि पिछले साल की तुलना में 49 फीसदी अधिक है, अमरिका से आगे बढ़ता हुआ एवं चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ऑनलाइन यूजर बेस बनने की संभावना थी।

जून 2016 तक, 462 मिलियन भारतीयों के ऑनलाइन होने की संभावना है, जो साल-दर साल 36 फीसदी की वृद्धि है। इनमें से 371 मिलियन भारतीयों के मोबाइल फोन के ज़रिए इंटरनेट इस्तेमाल करने की संभावना है।

 

वर्तमान में, भारत में 71 फीसदी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं पुरुष हैं एवं 29 फीसदी महिलाएं हैं। इंटरनेट इस्तेमाल  पुरुषों के लिए 50 फीसदी और महिला उपयोगकर्ताओं के लिए 46 फीसदी से बढ़ रहा है ।

 
भारतीय इंटरनेट उपभोक्ताएं
 

Source: LokSabha; (*exclude internet access through wireless phones)

 

हालांकि यह संख्या प्रभावशाली दिखाई देते हैं, भारत की इंटरनेट की पहुंच (नेट का उपयोग करने वाले भारतीयों का प्रतिशत) कम है। इस अध्ययन – “इंडिया ऑन द गो : मोबाइल इंटरनेट वर्ज़न 2017” के अनुसार 2014 में यह आंकड़े 19 फीसदी था। यदि अन्य देशों के आंकड़ों को देखें तो ऑस्ट्रेलिया  के लिए 90 फीसदी , संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए 87 फीसदी,  जापान के लिए 86 फीसदी,  ब्राजील के लिए 53 फीसदी और चीन के लिए 46 फीसदी हैं।

 

भारतीय सरकार ने दिसंबर 2016 तक 250,000 ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड के साथ जोड़ने की योजना की है। वर्तमान में, 500 गांवों में इंटरनेट केबल बिछाने का कम पूरा हो गया है।

 

(मल्लापुर इंडियास्पेंड के साथ नीति विश्लेषक हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 2 जनवरी 2016 को प्रकाशित हुआ है।

 

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