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अगले 5 सालों में बिहार के लिए सात-सूत्री एजेंडा

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243 सीटों के लिए हुई बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने हैं। बिहार की जनता ने एक बार फिर नीतिश कुमार की अगुआई वाली महागठबंधन पर भरोसा जताया है। 178 सीटों के साथ महागठबंधन की जीत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 7 सूत्री एजेंडा पर आधारित है। नीतिश कुमार ने अपनी घोषणा पत्र में बिहार में 2.70 लाख करोड़ रुपए ( 40.8 बिलियन डॉलर ) निवेश करने का वादा किया है। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य को 1.25 लाख करोड़ रुपए ( 18.9 बिलियन डॉलर ) का पैकेज देने का वादा किया है।

 

इंडियास्पेंड ने अपने पूर्व-चुनावी श्रृंखला में बिहार के विकास का विश्लेषण किया है।

 

नीतिश का बिहार के लिए एजेंडा काफी सरल है – पहला आधारभूत संरचना और दूसरा शिक्षा एवं कौशल विकास।

 

एजेंडे का मुख्य फोकस बिजली, सड़क और पानी है। इसके अलावा युवाओं को रोजगार, शिक्षा, कौशल विकास और महिलाओं के सशक्तिकरण जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल की गई है।

 

 

सड़क संयोजकता एवं ठोस जल निकासी व्यवस्था

(नियोजित बजट 78,000 करोड़ रुपये)

 

योजनागत व्यय का सबसे बड़ा हिस्सा सड़कों के लिए रखा गया है । देश की कुल आबादी का 8.6 फीसदी हिस्सा बिहार में रहता है जबकि देश के कुल राज्य राजमार्गों का केवल 4.9 फीसदी ही बिहार में है।

 

एजेंडे में हर गांव को सड़क से जोड़ने का वादा किया गया है। एजेंडे के अनुसार प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। जहां तक प्रधानंत्री सड़क योजना पहुंचेगी उसके आगे राज्य सरकार कार्य करेगी। जो गांव इससे दूर होंगे उनको सड़कों से जोड़ा जाएगा।

 

लोक सभा के आंकड़ों के अनुसार प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत 2014-15 में बिहार के लिए केंद्र की ओर से 1,548 कोरोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

 

सभी के लिए अनवरत बिजली

(नियोजित बजट 55,600 करोड़ रुपये)

 

11 वीं पंचवर्षीय योजना ( 2007-12 ) के तहत बिहार में कुल 2,139,709 परिवारों तक बिजली पहुंचाई गयी है। गौरतलब है कि योजना के तहत 3,828,477 परिवारों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था।

 

एजेंडे के मुताबिक शेष सभी गांवों एवं बस्तियों में बिजली का कनेक्शन होगा एवं दो साल के भीतर हर घर में बिजली पहुंचाई जाएगी।

 

2011 की जनगणना के अनुसार, प्रकाश के मुख्य श्रोत के रुप में बिहार में केवल 3.09 मिलियन परिवारों ( 6.10 फीसदी ) तक बिजली की पहुंच है।

 

सभी के लिए स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता
(नियोजित बजट 47,700 करोड़ रुपये)

 

बिहार में केवल 10 फीसदी घरों ( 9.4 मिलियन ) में , घर के भीतर पीने के पानी का श्रोत उपलब्ध है एवं केवल 0.7 फीसदी लोगों के पास नलके का पीने का पानी की सुविधा है ( 0.8 मिलियन )।

 

नीतिश की 17.9 मिलियन ग्रामीण परिवारों एवं 1.6 मिलियन शहरी परिवारों को पानी की पाइपलाइनों के साथ जोड़ने की योजना है – 5 वर्षों में 19.5 मिलियन परिवार।

 

हर घर में शौचालय
( नियोजित बजट 28,700 करोड़ रुपए )

 

नीतिश के एजेंडे में हर घर में शौचालय निर्माण करने की बात भी कही गई है। अगले पांच वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में 16.4 मिलियन शौचालय एवं शहरी इलाकों के लिए 0.75 मिलियन शौचालय यानि कि कुल 17.2 मिलियन शौचालय निर्माण करने का वादा किया गया है।

 

2011 की जनगणना के अनुसार , बिहार में कम से कम 14.5 मिलियन घरों में शौचालय नहीं है एवं 11.8 मिलियन घरों में बाथरुम नहीं है।

 

युवाओं को रोजगार और कौशल विकास
(नियोजित बजट 49,800 करोड़ रुपये)

 

सड़कों के बाद सबसे अधिक राशि युवाओं और कौशल विकास के लिए आवंटित की गई है। हालांकि बिहार में युवा लोगों का अनुपात सबसे कम है, 17.5 फीसदी के आंकड़ों के साथ राज्य में बेरोज़गारी (15 से 29 वर्ष के आयु वर्ग ) काफी अधिक है। गौरतलब है कि इस संबंध में राष्ट्रीय औसत 13 फीसदी है। एजेंडा में युवाओं के लिए ठोस योजनाएं शामिल की गई हैं :-

 

* 20-25 साल के बीच के युवाओं के लिए स्वयं सहायता भत्ता – इसके तहत नौ माह तक एक हजार रुपये दिया जायेगा। इस तरह से दो बार स्वयं सहायता भत्ता मिलेगा। स्वयं सहायता भत्ता से युवा रोजगार तलाशेंगे।

 

* 12वीं पास छात्रों के लिए क्रेडिट कार्ड सुविधा – इसके तहत छात्र बैंक से ब्याज दर पर तीन फीसदी की सिब्सडी के साथ 4 लाख रुपए का ऋण ले सकते हैं।

 

* 500 करोड़ रुपये का उद्यमिता विकास के लिये फंड का प्रावधान किया गया है। जो युवा अपना उद्योग लगाना चाहते हैं, उनको इसका लाभ दिया जायेगा।

 

* बुनियादी कम्प्यूटर शिक्षा, भाषा प्रशिक्षण और कौशल विकास के लिए बिहार के सभी 38 ज़िलों में 15 लाख युवाओं के लिए रोजगार केन्द्र।

 

उच्च शिक्षा के लिए बेहतर पहुंच
(नियोजित बजट 10,300 करोड़ रुपए)

 

वर्तमान में बिहार में 22 कार्यशील विश्वविद्यालय हैं। इनमें से 21 परंपरागत विश्वविद्यालय और एक खुला विश्वविद्यालय है।

 

2013 में करीब 278 सरकारी कॉलेज एवं 387 स्थानीय निकाय कॉलेज थे। वर्तमान में, बिहार में केवल 10 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं।

 

एजेंडा में हरेक मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग कॉलेज के साथ पांच मेडिकल कॉलेज निर्माण करने का वादा किया गया है।

 

हर जिले में एक इंजीनियरिंग कॉलेज, महिलाओं के लिए एक सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) संस्था, एक पाली कलाओं और एक पैरा मेडिकल संस्था बनाने का वादा भ किया गया है।

 

सरकारी नौकरियों में आरक्षण के माध्यम से महिलाओं का सशक्तिकरण

 

महिलाओं को एक विशेष पैकेज देने की बात भी की गई है। एजेंडे के मुताबिक राज्य की सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 फीसदी आरक्षण का वादा किया गया है। पुलिस उप – निरीक्षक और कांस्टेबल पदों में महिलाओं के लिए मौजूदा 35 फीसदी आरक्षण में वृद्धि करने की भरोसा भी दिया गया है।

 

( सालवे एवं तिवारी इंडियास्पेंड के साथ नीति विश्लेषक हैं। )

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 09 नवंबर 2015 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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