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ऋण तले दबे महाराष्ट्र के सामने फार्म संकट से निकलने के लिए व्यय ही एक रास्ता

प्राची सालवे,

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सकल घरेलू उत्पाद के अनुसार  भारत के सबसे अमीर राज्य के पास अपने निधिकरण के लिए एक बहुत खतरनाक तरीका है : पैसे उधार लेना, और उधार  चुकाने के लिए फिर से पैसा उधार लेना।

 

महाराष्ट्र का बकाया ऋण, इस हफ्ते जारी किए गए राज्य बजट अनुसार,  300,477 करोड़ रुपये ($ 48 बिलियन) है, जिसमे पिछले वर्ष की तुलना में 10.5% की वृद्धि हुई है।

 

यह ऋण पिछले पांच वर्षों में इस प्रकार से बढ़ा है:

 

महाराष्ट्र का ऋण स्टॉक, वित्त वर्ष 2011 – वित्त वर्ष 2015

 

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Source: Economic Survey 2014-15

 

इस ऋण ने, पैसा खर्च करने से महाराष्ट्र कभी नहीं रोका विशेष रूप से विवाद ग्रस्त क्षेत्रों में।

 

What Maharashtra’s Debt Can Buy

 

    • 121 monorail projects

 

    • 20 aircraft carriers

 

    • 12 metro-rail projects

 

    • 2,300 PSLV-XL satellite-launch rockets

 

    • Midday meals for 313 million students

 

Sources: View list here.

 

इस वर्ष, व्यथित किसानों द्वारा आत्महत्या के उपरिकेंद्र  सिंचाई- जो कई  विवादों से घिरा विषय है -पर फिर से महाराष्ट्र में ध्यान केंद्रित है। 1995 के बाद से 60,750 किसानों से अधिक ने आत्महत्या कर ली है, जैसा कि  इंडिया स्पेंड ने पहले भी अपनी रिपोर्ट में कहा  था।

 

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली नई सरकार ने वर्ष 2015-16 के लिए जल संसाधन विभाग को  7272 करोड़ रुपये आवंटित किए  है। योजना का   लक्ष्य अगले वित्तीय वर्ष के अंत तक 38 परियोजनाओं को पूरा करने और 69,000 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा पहुंचाना है। राज्य में लगभग 452  परियोजनाऐं  चल रही हैं और 270 ,कानूनी बाधाओं जैसी समस्याओं के कारण अटक गई हैं, 119 भूमि अधिग्रहण के मुद्दों की वजह से फंसी हुई हैं और 142 को उच्च लागत की वजह से स्थगित कर दिया गया है।

 

बजट में ,युवा लोगों के लिए शुष्क भूमि कृषि, बुनियादी ढांचे के तेज़ी से विकास, असमानता हटाना , शहरी क्षेत्रों के  विकास और रोजगार के अवसरों के सृजन पर बल दिया गया है।

 

वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने नई सरकार का पहला बजट पेश किया जिसमे  2015-16 में  राज्य का राजस्व घाटा 3757 करोड़ रुपये अनुमानित किया है।

 

2015-16  महाराष्ट्र बजट में शीर्ष 5 व्यय वर्ग

 

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Source: Maharashtra Budget 2015-16

 

अल्पसंख्यकों की विशेष सहायता योजनाओं  ( जिसके तहत वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है)  और आदिवासी विकास को  13,261 करोड़ रुपये का  उच्चतम आवंटन प्राप्त हुआ। इसका अधिकांश भाग उन योजनाओं को जाएगा जिनका  उद्देश्य ,अनुसूचित जातियों (रु 6,490 करोड़ रुपये) और आदिवासियों (रु 5,170 करोड़ रुपये),  जो आबादी का क्रमश: 11.8% और 9.4% हिस्सा हैं और विकास के ढेर में सबसे नीचे दबी  हुई हैं को  लाभांवित करना है।

 

सिंचाई के बाद सड़क विकास आता है ,5374 करोड़ रुपये  आवंटित हुए जिसमे से लगभग  60% परिव्यय (रु 3,213 करोड़ रुपये)  500 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य के लिए हैं।

 

सरकार ने भी वित्त पोषण परियोजनाओं के लिए पूँजी जुटाने का एक नया तरीका पेश किया है। जो परियोजनाएँ  एक वित्तीय वर्ष के भीतर समाप्त हो सकती हैं उन्हें 100% वित्त पोषण मिलेगा; जो  दो साल के भीतर पूरी की जा सकती हैं उन्हें  50% वित्त पोषण मिलेगा ।

 

“उन परियोजनाओं के लिए जिनमे दो साल से अधिक की आवश्यकता होगी , हम आस्थगित भुगतान या वार्षिक भृति प्रणाली बनाने और रियायती दरों पर बहुपक्षीय एजेंसियों से कम दरों पर ऋण लेने की  के बारे में सोच रहे हैं,” वित्त मंत्री ने कहा

 

भाजपा सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट है कि  वह इसे किसानों की चिंताओं को संबोधित करना चाहती है।

 

कृषि जिसमे राज्य की  56 मिलियन आबादी  में से  49 % लोग कार्यरत  हैं, की विकास दर, पिछले साल 4% के करीब थी और अक्सर होने वाले जलवायु परिवर्तन और किसानों की समृद्ध होने में असमर्थता ने सरकार को कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है।

 

सरकार ने कृषि के लिए,  5012 करोड़ रुपयेएक तरफ रखे थे जो पिछले वर्ष किए गए  2350 करोड़ रुपये के आवंटन से  लगभग दुगुने हैं । पीने के पानी और कृषि के लिए पानी ,अन्यथा जिसकी आपूर्ति अनियमित वर्षा  के कारणवश कम है, के लिए 1,000 करोड़ रुपये अलग से निर्धारित किए गए हैं।

 

सरकार ने 171 करोड़ रुपये के ऋण माफी की पेशकश भी की है जिससे आत्महत्या की आशंका वाले  विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में साहूकारों के चंगुल से लगभग 0.2 मिलियन किसान मुक्त हो जाएँगे।

 

4,000 करोड़ रुपये मौसम अनियमितता के नतीज़ों से निपटने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

 

स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए किए गए  4095 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ  400% से अधिक की वृद्धि हुई है। स्वास्थ्य के क्षेत्र को  2296 करोड़ रुपए ( पिछले वर्ष  370 करोड़ रुपये) मिला है , वहीं शिक्षा को 1802 करोड़ रुपए (पिछले वर्ष 405 करोड़ रुपये)मिला है।

 

स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए दी गई राशि को केन्द्र प्रायोजित योजनाओं पर खर्च किया जाएगा जैसे सर्व शिक्षा अभियान, या सार्वभौमिक शिक्षा (1,690.56 करोड़ रुपये), और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (196.48 करोड़ रुपये), जिन दोनों को ही केंद्रीय बजटीय कटौती का सामना करना पड़ा है।

 

1248 करोड़ रूपये मुख्य रूप से मुंबई, पुणे और नागपुर में मेट्रो रेल परियोजनाओं जैसी अवसंरचना योजनाओं पर खर्च किया जाएगा।

 

आय एवं व्यय, वित्त वर्ष 2015- वित्त वर्ष 2016 (करोड़ रू में)

 

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Source: Maharashtra Budget 2015-16

 

ऊपर दी गई तालिका के अनुसार 2014-15 के लिए संशोधित अनुमानों  में दिया गया राजस्व घाटा 2014-15 के बजट अनुमानों की तुलना में बढ़ गया है।

 

2015-16 के लिए बजट अनुमानों में बढ़ी हुई राजस्व आय पर राजस्व घाटा  73% से कम दिखा।

 

जहां तक ​​आय का सवाल है, सरकार ने , उपयोग या बिक्री के लिए क्षेत्र में माल प्रवेश के लिए एकत्र किए जाने वाले स्थानीय निकाय कर (एलबीटी) को खत्म करने के अपने चुनावी वादे को पूरा किया है। मुनगंटीवार ने कहा यह  उन्मूलन 1 अगस्त से प्रभावी होगा।

 

सरकार (मुंबई के  आलावा ) आर्थिक तंगी से जूझ रहे नगर निगमों के लिए 6,000 करोड़ रुपये प्रदान करेगी। इस कोष के लिए, सरकार अब वस्तुओं पर लगाए जाने वाले मूल्य वर्धित कर (वैट)  को  5% से 12.5% तक  बढ़ाने का विचार कर रही है।

 

बजट में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) में, फ्लोर स्पेस इंडेक्स पर उगाही अधिक कर के अन्य गैर-कर राजस्व प्राप्त करने की कोशिश की गई है। यही कारण है कि प्रतिवर्ष लगभग 1800 करोड़ रुपये से  राजस्व  4,000 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है।

 

छवि आभार: विकिमीडिया/शाखेर59

 
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