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आबादी स्थिरता का जिम्मा उत्तरी राज्यों पर

सौम्या तिवारी,

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भारत की कुल आबादी 1.2 बिलियन है और हर रोज़ यह बढ़ती ही जा रही है। साल 2026 तक देश की बढ़ती जनसंख्या स्थिरहो जाएगी।

 

आज की तारीख में भारत विश्व का दूसरा सर्वाधिक आबादी वाला देश है। यदि बढ़ती आबादी पर जल्द रोक नहीं लगायी गयी तो अनुमान है कि साल 2050 तक हम विश्व के सर्वाधिक आबादी वाला देश, चीन के आकंड़ों को भी पार कर जाएंगे। अनुमान के मुताबिक साल 2050 तक भारत की आबादी 1.5 बिलियन हो जाएगी जबकि चीन के आकंड़े 1.4 तक पहुंचेंगे। वैश्विक आबादी (7 बिलियान ) का 38 फीसदी हिस्सा भारत और चीन मिलकर कर बनाता है।

 

विश्व जनसंख्या दिवस पर आईए एक तुलनात्मक नज़र डालते हैं भारत के टॉप दस राज्यों की आबादी के साथ-साथ दुनिया के उभरते देशों की जनसंख्या पर और जानने की कोशिश करते हैं कि किस प्रकार भविष्य में प्रजनन दर प्रभवित होगा।

 

increase_deskSources: For 2011 data: Census 2011 & World Bank; for 2025: National Commission on Population & United Nations Population Division

 

 

ब्राज़ील और मैक्सिको, जो समकक्ष देशों को हमने चुना है, की तुलना में उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र दोनों राज्यों की आबादी कम है। लेकिन यदि प्रजनन दर इसी प्रकार चलता रहा तो एक दश्क के भीतर आकंड़ों में बड़ा बदलाव दिख सकता है।

 

क्या होना चाहिए विकास दर

 

भारतीय राज्यों एवं चुने गए समकक्ष देश के बीच जनसंख्या वृद्धि दर की तुलनात्क समीक्षा नीचे दी गई है।

 

fertility_deskSources: National Population Stabilisation Fund, World Bank

 

 

सकल प्रजनन दर (टीएफआर) जनसंख्या वृद्धि को नापने का पैमाना है। टीएफआर का अर्थ है कि जीवनकाल में एक महिला औसतन कितनी संतानें पैदा करती है।आज की तारीख में भारत का टीएफआर प्रति महिला 2.5 शिशु है। यह आकंड़े साल 1950 के आकंड़ों केमुकाबले आधा है। साल 1950 में यह आकंड़े 5.9 दर्ज किए गए थे। लेकिन वर्तमान के आकंड़े भी जनसंख्या वृद्धि को स्थिर करने के लिए बहुत ज़्यादा है।  

 

देश में जनसंख्या को स्थिर करने के लिए टीएफआर दर प्रति महिला 2.1 शिशु होने की आवश्यकता है। जनसंख्या दर स्थिर करने का बड़ा जिम्मा उत्तरीराज्यों पर है। यदि देश का टीएफआर दर 2.1 तक पहुंचाना है तो उत्तर के राज्यों का टीएफआर दो या दो से कम तक लाना आवश्यक है।

 

अगले एक दश्क में भारत की स्थिति

 

अगले एक दश्क में विश्व के उभरते हुए देशों का विकास भारत के मुकाबले कम होगा।  

 

भारत के सर्वाधिक आबादी वाले राज्यो, खासकर उत्तरी राज्यों, में प्रजनन दर अधिक है। उत्तरी राज्यों के कारण देश की जनसंख्या बढ़ेगी।  

 

इसलिए ब्राज़ील के मुकाबले उत्तर प्रदेश, मैक्सिको की तुलना में महाराष्ट्र, इटली के मुकाबले गुजरात और टर्की की तुलना में मध्य प्रदेश की जनसंख्या अधिक हो जाएगी।  

 

हालांकि अगले दस सालों में देश के कुछ राज्य जहां प्रजनन दर कम है जैसे कि पश्चिम बंगाल और तमिल नाडु की जनसंख्या अपने समक्षक देशों के मुकाबले कम रहेगी। वितनाम के की तुलना में पश्चिम बंगाल की और थाईलैंड के मुकाबले लमिल नाडु की जनसंख्या अधिक है। लेकिन साल 2025 तक दोनों राज्यों की आबादी समक्षक देशों से कम हो जाएगी।  

 

जनसंख्या संदर्भ ब्यूरो ने एक अध्ययन में कहा है, “ भविष्य में भारत की आबादी का आकार काफी हद तक अत्यधिक जनसंख्या वाले उत्तरी राज्यों में प्रजनन गिरावट पर निर्भर करेगा। स्पष्ट रुप से हम परिवर्तन के तीसरे चरण में हैं, लेकिन क्या भारत प्रतिस्थापन प्रजनन के चौथे चरण में जाएगा या यह विकासशील देशों के उस समूह में शामिल होगा, यह अभी स्पष्ट कर पाना मुश्किल है। चौथे चरण में जाने के लिए भारत के बड़े और गरीब राज्यों की प्रजनन दर को एक औद्योगिक की तरह कम कर दो या उससे कम बच्चों तक सीमित करना होगा।  

 

(तिवारी इंडियास्पेंड के साथ नीति विश्लेषक हैं)

 

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