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उग्रवाद प्रभावित मणिपुर है भारत में बच्चे के जन्म के लिए सबसे सुरक्षित राज्य

प्राची सालवे एवं संजना पंडित,

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26 जनवरी, 2009 को भारत के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में, गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान बच्चों का प्रदर्शन

 

  • विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, मिज़ोरम की साक्षरता दर 91 फीसदी हो जो ब्राज़िल के बराबर है।

  • आठ पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे कम साक्षरता दर अरुणाचल प्रदेश का है। 2011 में यहां साक्षरता दर 65.4 फीसदी दर्ज की गई थी। राष्ट्रीय स्तर पर, यह केवल बिहार के साक्षरता दर, 61.8 फीसदी से ऊपर है।

  • भारत में सबसे अधिक महिलाओं के खिलाफ अपराध दर असम में दर्ज किया गया है।

 

तीन लेख की इस श्रृंखला के पहले भाग में हमने पूर्वोतर राज्यों के आर्थिक संकेतक पर चर्चा की है एवं दूसरे भाग में बुनियादी ढांचे का विश्लेषण किया है।

 

तीसरे भाग में हम सामाजिक संकेतकों जैसे कि साक्षरता, शिशु मृत्यु दर, स्कूल में नामांकन, और महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध पर चर्चा करेंगे।

 

2011 की जनगणना के अनुसार, पूर्वोत्तर में मिज़ोरम में उच्चतम साक्षरता दर, 91.3 फीसदी, है। 2001 में यहां साक्षरता दर 88.8 फीसदी दर्ज की गई थी।

 

पूर्वोत्तर में साक्षरता दर, 2011

 

 

मिज़ोरम भारत का तीसरा सबसे अधिक साक्षर राज्य है। 93.91 फीसदी एवं  91.8 फीसदी के साथ केरल और लक्षद्वीप दूसरे एवं तीसरे स्थान पर है।   महिला साक्षरता के संबंध में भी मिज़ोरम, पूर्वोत्तर में पहले स्थान पर है- एवं भारत में भी पहले स्थान पर ही है। (84.7 फीसदी के साथ दूसरे नंबर पर गोवा है)। गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), दूरदराज के क्षेत्रों में चर्च स्कूलों, और गांव परिषदों के प्रयासों से मिज़ोरम में महिला साक्षरता दर 89.3 फीसदी दर्ज किया गया है। महिला साक्षरता के संबंध में 82.7 फीसदी के आंकड़ों के साथ पूर्वोत्तर में दूसरे स्थान एवं भारत में पांचवें स्थान पर त्रिपुरा है।

 

जनगणना के अनुसार 2011 में 87.2 फीसदी के आंकड़ों के साथ त्रिपुरा पूर्वोत्तर के समग्र साक्षरता सूची में दूसरे स्थान पर था। हालांकि भारतीय सांख्यिकी संस्थान की देखरेख में एक 2012 सरकारी सर्वेक्षण का हवाला देते हुए एनडीटीवी की रिपोर्ट कहती है कि 94.6 फीसदी के आंकड़ों के साथ साक्षरता के संबंध में त्रिपुरा ने केरल को पीछे छोड़ दिया है।

 

आठ पूर्वोत्तर राज्यों में, 65.4 फीसदी के साथ सबसे कम साक्षरता दर अरुणाचल प्रदेश में दर्ज की गई है। यह आंकड़े भारत में दूसरा सबसे कम है।

 
अरुणाचल प्रदेश की लगभग 77 फीसदी आबादी ग्रामीण है, जहां साक्षरता दर 59.9 फीसदी है। यहां पूर्वोत्तर में सबसे कम महिला साक्षरता दर है : 57.7 फीसदी।   आठ पूर्वोत्तर राज्यों में असम में दूसरा सबसे कम साक्षरता दर, 72.2 फीसदी है।

 

नागालैंड में प्राइमरी स्कूल ड्रॉप आउट दर राष्ट्रीय औसत से चार गुना अधिक है

 

नागालैंड में प्राथमिक विद्यालय (कक्षा 1 से 4) ड्रॉप आउट दर सबसे अधिक, 19.4 फीसदी है जोकि राष्ट्रीय औसत से चार गुना अधिक।

 
पूर्वोत्तर भारत का औसत वार्षिक ड्रॉप आउट दर, 2013-14
 
 

नागालैंड में उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8) एवं और माध्यमिक (कक्षा 9 से 10) विद्यालयों में ड्रॉप आउट दर 17.7 फीसदी और 35.1 फीसदी के साथ सबसे अधिक है।   नगालैंड में प्राथमिक से उच्च प्राथमिक स्तर संक्रमण (1) दर सबसे कम है। नागालैंड के लिए यह आंकड़े 2013-14 में 78.7 फीसदी दर्ज किया गया है (उत्तर प्रदेश के बराबर) जो कि राष्ट्रीय औसत, 89.7 फीसदी, से कम है।

 

नागालैंड के केवल 41 फीसदी स्कूलों में ही बिजली है। यह आंकड़े राष्ट्रीय औसत, 60 फीसदी से कम है। भारत में, नागालैंड में स्कूलों की दूसरी सबसे कम प्रतिशत है और पूर्वोत्तर में पीने का पानी 78.2 फीसदी है। मेघालय में पीने के पानी के साथ सबसे कम स्कूलों का प्रतिशत, 63 फीसदी, (दोनों राष्ट्रीय स्तर एवं पूर्वोत्तर में) है। यदि बात पीने के पानी की है तो कुछ राज्य जैसे कि बिहार और झारखंड का प्रदर्शन इन राज्यों से बेहतर है। बिहार और झारखंड के लिए यह आंकड़े 92.7 फीसदी एवं 91.9 फीसदी हैं।

 

मणिपुर में केवल 31 फीसदी स्कूलों में बिजली है। भारत में, असम में बिजली के साथ स्कूलों का प्रतिशत सबसे कम, 22.4 फीसदी है।

 

वर्ष 2014-15 में, मेघालय में केवल 64 फीसदी स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालयों की व्यवस्था है। यह आंकड़े राष्ट्रीय औसत, 93.08 फीसदी, से कम हैं।

 
पूर्वोत्तर भारत में पीने का पानी एवं शौचालयों के साथ स्कूल, 2014-15
 
   
मेघालय में केवल 64 फीसदी स्कूलों में पीने का पानी है, जो कि पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे कम है।   देश में असम में लड़कों के लिए शौचालयों के साथ स्कूलों की संख्या सबसे कम है। असम के लिए ऐसे स्कूलों के लिए आंकड़े 54.8 फीसदी है। और लड़कों के लिए शौचालयों के साथ यह आंकड़े 74.9 फीसदी है, जोकि भारत में दूसरा सबसे कम है।  
 
महिलाओं के साथ अपराध में वृद्धि, विशेष रुप से असम में  
 

2011 की जनगणना के अनुसार, आठ राज्यों में असम में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या सबसे अधिक है। असम में यह आंकड़े 19,139 दर्ज की गई है। राज्य में 15.2 मिलियन महिलाएं हैं।

   
पूर्वोत्तर भारत में महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अपराध, 2014

 

 

(*Crime rate is the number of crimes committed against every 100,000 women/children)

 

भारत की जनसंख्या के 3.8 फीसदी के साथ, पूर्वोत्तर में देश का 7 फीसदी अपराध दर दर्ज किया गया है।

 

2013 राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, देश भर में सबसे अधिक जांच के मामले लंबित वाला दूसरा राज्य असम हैं। असम के लिए यह आंकड़े 58.8 फीसदी दर्ज किए गए हैं। भारत में, मणिपुर में ऐसे अपराधों की दर सबसे अधिक है जिसकी जांच नहीं की गई है। मणिपुर के लिए यह आंकड़े 87.2 फीसदी दर्ज की गई है।

 

पूर्वोत्तर में, महिलाओं के खिलाफ अपराध के संबंध में त्रिपुरा दूसरे स्थान पर है। त्रिपुरा के लिए यह आंकड़े 1,615 हैं लेकिन वर्ष 2013 में 13.8 फीसदी मामले अब भी जांच की प्रतिक्षा में थे।

 

मिज़ोरम में बच्चों के खिलाफ अपराध के सबसे मामले दर्ज की गई है, 48; 45.8 के साथ सिक्किम दूसरे स्थान पर है।

 

मणिपुर के अलावा पूर्वोत्तर में शिशु मृत्यु दर सबसे अधिक

 

विश्व बैंक के अनुसार, 2013 में, असम में सबसे बुरी शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 54 मृत्यु दर्ज की गई थी। यह आंकड़े अफ्रिका के बुरुंडी देश के बराबर।

 

पूर्वोत्तर में कुल शिशु मृत्यु दर, 2013
 

 

2013-14 की बच्चों की रैपिड सर्वे (आरएसओसी ) की रिपोर्ट के अनुसार असम के लगभग 41 फीसदी बच्चे अविकसित (उम्र के अनुसार सामान्य से कम कद) हैं, राष्ट्रीय औसत 38.7 फीसदी है, 9.7 फीसदी बच्चे कमज़ोर हैं (कम कद और कम वज़न) एवं 22.2 फीसदी कम वज़न के हैं (उम्र के अनुसार कम वज़न)।

 

पूरे उत्तर-पूर्वी राज्यों में शिशु मृत्यु दर में भिन्नता है।

 

विश्व बैंक और भारत सरकार के अनुसार  उग्रवाद प्रभावित, मणिपुर- अक्सर एक विफल राज्य में रुप में जाना जाने वाला – देश की सबसे कम शिशु मृत्यु दर के साथ (अंडमान और निकोबार द्वीप के बराबर एवं ओमान और बहामा के बराबर) बच्चे को जन्म देने के लिए सबसे सुरक्षित स्थान है।

 

मणिपुर में शिशु मृत्यु दर कम करने के कारण 1) बेहतर चिकित्सा सुविधाएं (मणिपुर में चिकित्सक – जनसंख्या अनुपात 1: 1000 है जबकि राष्ट्र के लिए यह आंकड़े 1:1700 है एवं और प्रशिक्षित नर्स अनुपात 1: 600 वहीं राष्ट्र के लिए यह आंकड़े 1:638 है) एवं 2) सांख्यिकीय रुप से स्वीकार किया गया महिलाओं का सशक्तिकरण है।

 

इसके विपरीत मेघालय में शिशु मृत्यु दर अधिक है, प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 47 मृत्यु, राज्यस्थान के लिए भी यह आंकड़े इतने ही हैं ; राज्य के 42.9 फीसदी बच्चे अविकसित हैं, 13.1 फीसदी बच्चे कमज़ोर एवं 30.9 फीसदी सामान्य से कम वज़न के हैं।

 

(1) संक्रमण दर दिए गए वर्ष में उच्च स्तर शिक्षा की पहली ग्रेड में दाखिला लेने वाले लोगों (नए दाखिला) की संख्या है जो कि पहले वर्ष की निचले स्तर की शिक्षा की अंतिम ग्रेड नामांकित विद्यार्थियों की संख्या के प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया गया है।

 

यह श्रृंखला समाप्त होती है। पहला और दूसरा भाग आप यहां पढ़ सकते हैं।

 

(सालवे इंडियास्पेंड के साथ नीति विश्लेषक है। पंडित इंडियास्पेंड के साथ इंटर्न हैं एवं सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई की छात्रा हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 03 फरवरी 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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