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उत्तर प्रदेश में प्रचंड मोदी-मत, 40 वर्षों में सबसे बेहतर प्रदर्शन

अभिषक वाघमारे,

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उत्तर प्रदेश की राजधानी, लखनऊ में मुख्यालय के सामने जश्न मनाते भाजपा कार्यकर्ता। वर्ष 1977 के बाद, किसी भी पार्टी की तुलना में भारतीय जनता पार्टी का पर्दशन सबसे बेहतर रहा है। 1977 में जनता पार्टी ने 425 सीटों में से 352 सीटों पर जीत हासिल की थी।

 

उत्तर प्रदेश में हुए चुनाव का परिणाम अभूतपूर्व रहा है। भारत के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य के इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) ने 403 सीटों में से 325 ( 77.4 फीसदी ) सीटों पर जीत हासिल की है। वर्ष 2012 की तुलना में 2017 में भाजपा के वोट शेयर में 25 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई है और अब यह आंकड़े 39.7 फीसदी तक पहुंचे हैं।

 

भाजपा ने लगभग 2014 के संसदीय चुनावों में अपने प्रदर्शन को दोहराया है, जब पार्टी ने 42.7 फीसदी वोट और लोकसभा के 80 में से 73 सीटों ( 90 फीसदी से ज्यादा ) पर जीत हासिल की थी। नोटबंदी के प्रभाव और संसदीय और विधानसभा चुनावों में मतदाताओं के अलग तरीके से व्यवहार करने की धारणा के बावजूद, भाजपा को उत्तर प्रदेश से दूर रखने के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) -कांग्रेस गठबंधन या बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) को अपने पक्ष में ऐतिहासिक वोट की जरूरत होगी, जैसा कि इंडियास्पेंड ने जनवरी 2017 में पहले ही बताया है।

 

यह प्रदर्शन ( वोट शेयर और कुल सीटों में से जीती गई सीटों के रुप में प्रतिशत ) वर्ष 1977 के बाद से सबसे बढ़िया रहा है। हम बता दें कि यह वह समय था, जब अपातकाल के बाद जनता पार्टी ने 425 सीटों में से  352 सीटों (82.8 फीसदी) पर जीत हासिल की और उत्तर प्रदेश के लोगों से 47.8 फीसदी मत हासिल किए थे।

 

भाजपा का प्रदर्शन लगभग वैसा ही रहा है, जैसा 1980 में कांग्रेस का रहा था, जब कांग्रेस ने 309 सीटों के साथ 3 9 .6 फीसदी मत हासिल किए थे, जबकि भाजपा 10.8 फीसदी वोटों के साथ 11 सीटें जीती थी। वर्ष 2017 में, भाजपा ने 312 सीटों पर जीत हासिल की है। जबकि 6.2 फीसदी वोटों के साथ कांग्रेस सात सीटें जीत पाई है।

 

सपा और बसपा ने वोट शेयर बरकरार, लेकिन जीत नहीं मिली

 

जैसा कि चार्ट में दिखाया गया है, 2017 के विधानसभा चुनावों में सपा और बसपा ने कम से कम 20 फीसदी के अपने मुख्य वोट शेयर को बनाए रखा है ( वर्ष 2012 में सपा का वोट शेयर 29 फीसदी और बसपा का 26 फीसदी रहा है ) लेकिन ये पार्टियां इन इन वोटों को जीत में बदल नहीं पाईं।

 

उत्तर प्रदेश में चुनावी प्रदर्शन: 2007-2017

Source: Election Commission of India data here and here

 

वर्ष 1993 में सपा के गठन के बाद विधानसभा चुनावों पर किए गए हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि, सपा और बसपा दोनों ही अपने वोट शेयरों को बढ़ाने में सफल रहे हैं। जबकि प्रमुख राष्ट्रीय दलों भाजपा और कांग्रेस के वोट शेयर कम हुए हैं।

 

वोट शेयर बनाए रखा, 2017 में राज्य पार्टियों के लिए जीती गई सीटों में कमी

Source: Election Commission of India data here and here

 

वर्ष 2017 में भाजपा का प्रदर्शन सबसे सर्वश्रेष्ठ रहा है, जबकि 1977 के बाद कांग्रेस का प्रदर्शन सबसे बद्तर रहा है। सपा और बसपा की स्थापना के बाद से इन पार्टियों का प्रदर्शन भी सबसे बद्तर रहा है।

 

वर्ष 1993-2002 की अवधि में एक सबसे बड़ी पार्टी होने और एक अवधि (1997-2002) के लिए सरकार बनाने के बाद, उत्तर प्रदेश में भाजपा सत्ता से बाहर रही । कांग्रेस का कभी 15 फीसदी वोट शेयर नहीं रह पाया, जैसा वर्ष 1993 में पार्टी के पास था।

 

वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव में बसपा का वोट शेयर 19.8 फीसदी से बढ़ कर वर्ष 2017 में 22.2 फीसदी हुआ है। वर्ष 2012 में 80 सीट जीतते हुए बसपा ने 26 फीसदी वोट शेयर प्राप्त किया था। वर्ष 2017 में बसपा को सिर्फ19 सीटें मिली हैं।

 

भाजपा का रिकवरी ग्राफ ऊपर, कांग्रेस लगातार पीछे

 

पिछले चार दशकों को देखा जाए तो वर्ष1980 में भाजपा ने विनम्रता से शुरुआत की थी। जैसा कि हमने कहा है, उत्तर प्रदेश के 11 फीसदी वोट शेयर के साथ 11 सीटों पर जीत हासिल की थी।

 

उत्तर प्रदेश की राजनीति में भारी उलट-फेर

Source: Election Commission of India data here and here

 

पिछले 30 वर्षों में उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा प्रमुख पार्टियां रही हैं और भाजपा और कांग्रेस की तुलना तीसरी मोर्चे से की गई थी।

 

पिछले 11 राज्य चुनावों में से तीन को छोड़कर, वर्ष 2007 में राज्य के आधे से ज्यादा वोट जीतने के साथ  गैर-कांग्रेस और गैर-भाजपा दलों ने संयुक्त रुप से हमेशा एक तिहाई से अधिक वोट प्राप्त किए हैं

 

वर्ष 1980 के बाद से चार दशकों में, उत्तर प्रदेश में पहले दशक में कांग्रेस का शासन रहा है। साथ ही भाजपा को एक खंडित जनादेश मिला, जिससे दूसरे दशक के दौरान 1989 और 1993 में क्षेत्रीय दलों को लाभ पहुंचा था। जिसके बाद 15 साल तक राज्य में क्षेत्रीय पार्टी का प्रभुत्व रहा ।

 

नोट: 2002 से पहले चुनाव के आंकड़े उत्तराखंड सहित अविभाजित उत्तर प्रदेश के लिए हैं।

 

(वाघमारे विश्लेषक हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़े हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी 11 मार्च 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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