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उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार- महिलाओं के लिए बद्तर राज्य

देवानिक साहा,

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उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार, महिलाओं के सबसे बद्तर राज्य हैं। यह जानकारी सामाजिक संकेतकों और भारतीय राज्यों के जनसांख्यिकीय आंकड़ों पर इंडियास्पेंड द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आई है।

 

इन राज्यों में, महिलाओं की बच्चों के रुप में गर्भपात होने की संभावना सबसे अधिक है। इसके साथ ही इन राज्यों में महिलाओं की सबसे कम साक्षरता दर, जल्दी विवाह होना, गर्भवस्था के दौरान अधिक मृत्यु होना, अधिक बच्चों को धारण करना, महिलाओं के खिलाफ अधिक अपराध होना, और सबसे कम काम करने की संभावना है।

 

हमारे विश्लेषण की प्रतिक्रिया में, सोनालडे देसाई, नेश्नल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) में एक जनसांख्यिकीविद् और मैरीलैंड विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्रोफेसर, का कहना है, “जब उत्तर प्रदेश, बिहार और काफी हद तक राजस्थान की बात है तो हम एक पूर्ण तूफान के साथ काम कर रहे हैं। ऐतिहासिक रुप से  इन राज्यों में, मेरा मतलब सरकार और लोगों, दोनों से है, महिलाओं पर निवेश करने पर जोर देने की प्रवृत्ति नहीं रही है और आर्थिक विकास में पीछे रहा है और अपनी प्राथमिकताओं को कहीं और केंद्रित किया है। लेकिन मुझे लगता है कि राजस्थान इस लीक से बाहर आ रहा है और हमें वहां कुछ सुधार देखने को मिल सकता है।”

 

उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार में कम से कम 37.6 करोड़ लोग रहते हैं – जोकि अमेरिका और ब्रिटेन की संयुक्त आबादी से अधिक है।

 

यहां आठ संकेतक, हमने नमूना पंजीकरण सर्वेक्षण 2014 – जून 2016 में जारी किया गया था – 2011 की जनगणना और राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो से लिया है। व्यक्तिगत रूप से तीनों राज्य सभी संकेतकों में बद्तर प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं लेकिन संयुक्त रुप से इन राज्यों का नाम बद्तर राज्यों में शामिल है।

 

1. शादी के लिए महिलाओं की औसत आयु: पश्चिम बंगाल में महिलाओं की शादी सबसे कम उम्र में होती है, (19.3 वर्ष)। उसके बाद उत्तर प्रदेश और राजस्थान (दोनों के लिए 19.4 वर्ष) दोनों का स्थान है।

 

भारत में, 10 से 19 वर्ष की आयु के बीच सबसे अधिक विवाह (0.21 करोड़) उत्तर प्रदेश में हुआ है। इस संबंध में, दूसरा और तीसरा स्थान पश्चिम बंगाल (0.13 करोड़) और बिहार (0.125 करोड़) का स्थान है। राजस्थान में, चार में से एक लड़की की शादी 18 वर्ष की आयु से पहले होती है, जैसा की इंडियास्पेंड ने पहले विस्तार से यहां और यहां बताया है।

 

फ़्राँस्वा जेवियर बगनाउड सेंटर फॉर हेल्थ एंड ह्यूमन राइट्स, हार्वर्ड विश्वविद्यालय द्वारा 2013 में किए गए अध्ययन से पता चलता है कि शिक्षित होने से लड़कियों को जल्दी शादी का विरोध करने में सहायता मिलती है। शिक्षा का संबंध कम और स्वस्थ बच्चे और स्वस्थ माताओं से भी है, जैसा कि हम बाद में विस्तार से बताएंगे।

 

पश्चिम बंगाल में लड़कियों की शादी सबसे कम उम्र में

Source: Census 2011

 

2. मातृ मृत्यु दर (एमएमआर): यह महिलाओं की संख्या है जिनकी प्रति 100.000 जीवित जन्मों पर गर्भवस्था के दौरान या गर्भावस्था समाप्त होने के 42 दिनों के भीतर,गर्भावस्था संबंधी कारणों से मृत्यु होती है।

 

सभी भारतीय राज्यों में, 27.8 पर , उत्तर प्रदेश का एमएमआर सबसे अधिक है।  इसके बाद राजस्थान (23.9) और बिहार / झारखंड (21.4) का स्थान रहा है।

 

जून 2016 में, स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना की शुरुआत की थी जोकि जननी सुरक्षा योजना और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के समानांतर चलेंगे।

 

इसका उदेश्य, हर महीने  की नौ तारीख को एक विशेषज्ञ द्वारा 3 करोड़ गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव पूर्व देखभाल उपलब्ध कराना है। जहां सरकारी डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, वहां इस प्रयास से निजी डॉक्टर मिलेंगे।
 

उप्र का एमएमआर दर उच्च

Source: Census 2011

 

3. प्रजनन काल:  भारत में, उत्तर प्रदेश की महिलाओं की प्रजनन अवधि सबसे अधिक है: 10 वर्ष। जैसा कि,उच्च प्रजनन अवधि उच्च प्रजनन दर के साथ सहसंबंधित है, 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, किसी भी अन्य राज्य की तुलना में, उत्तर प्रदेश की महिलाएं सबसे अधिक बच्चे, 4.14, धारण करती हैं।

 

उत्तर प्रदेश की महिलाओं की प्रजनन अवधि के बाद दूसरा एवं तीसरा स्थान राजस्थान (9.2 वर्ष) और बिहार (9.1 वर्ष) का रहा है, और यह सभी 6.6 वर्ष के औसत भारतीय प्रजनन अवधि से अधिक हैं।

 

प्रजनन काल और उच्च प्रजनन दर के बीच सहसंबंध राजस्थान और बिहार के लिए भी सत्य प्रतीत होते हैं दोनों राज्यों से दर 3.99 और 3.97 हैं। औसत भारतीय प्रजनन दर 3.3 है।

 

शिक्षा के स्तर में वृद्धि के साथ औसत जन्मों में गिरावट आई है: भारत की महिलाएं जो स्नातक या अधिक पढ़ी हैं, उनके लिए औसत जन्म 1.9 है जबकि अशिक्षित महिलाओं के लिए यही आंकड़े 3.8 है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने मई 2016 में बताया है।

 

उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार में, महिला साक्षरता और शिक्षा स्तर, भारतीय मानक के नीचे है, जैसा कि हम आगे विस्तार से बताएंगे।
 

उप्र की महिलाओं की प्रजनन अवधि अधिक

Note: Reproductive span: The number of years between the first birth and last birth for a child bearing woman

 

उप्र की महिलाओं के करती हैं अधिक बच्चे धारण

Source: Census 2011

 

4. परिवार का औसत आकार, छह या उससे अधिक लोगों के घरों का प्रतिशत: उत्तर प्रदेश में परिवार का आकार सबसे बड़ा है, औसत रुप से परिवार में 5.6 लोग रहते हैं जो कि किसी अन्य राज्य की तुलना में उत्तर प्रदेश की महिलाओं का सबसे अधिक बच्चे धारण करने का संकेत है। इसका अर्थ यह भी है कि इनके कंधों पर घर के कामकाज का बोझ सबसे अधिक है।

 

परिवार के बड़े आकार के संबंध में उत्तर प्रदेश के बाद दूसरा एवं तीसरा स्थान राजस्थान (5.5) और झारखंड (5) का है।

 

इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के 44 फीसदी परिवारों में सदस्यों की संख्या छह से अधिक है। इस संबंध में दूसरा और तीसरा स्थान राजस्थान (38.8 फीसदी) और जम्मू-कश्मीर (34 फीसदी) का है।

 

जाति अनुसार औसत परिवार का आकार

Source: Sample Registration Survey, 2014

 

राज्य अनुसार छह से अधिक सदस्यों वाले पारिवार

Source: Sample Registration Survey, 2014

 

5. महिलाओं के खिलाफ अपराध: उत्तर प्रेदश में महिलाओं के खिलाफ कम से कम 38467 मामले दर्ज किए गए हैं – हरेक 15 मिनट में एक मामला – दूसरे एवं तीसरे स्थान पर पश्चिम बंगाल (38,299) और राजस्थान (31151) का स्थान रहा है।

 

हालांकि, यदि बाद अपराध दर की है तो – प्रति 1,00,000 महिला आबादी पर अपराध – दिल्ली (169.6) का दर सबसे अधिक है, इसके बाद  असम (123.4) और राजस्थान (91.4) का स्थान है।

 

उत्तर प्रदेश का अपराध दर 38.4 है जबकि बिहार का दर 31.3 है, यह दरें कम प्रतीत होती हैं क्योंकि संभवत: यहां मामलों की रिपोर्टिंग कम होती है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने यहां और यहां बताया है।

 

भारत में हर घंटे महिलाओं के खिलाफ 26 अपराधिक मामले दर्ज होते हैं या हर दो मिनट पर एक शिकायत दर्ज की जाती है। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने सितंबर 2015 में विस्तार से बताया है।

 

महिलाओं के खिलाफ उच्च अपराधिक दर वाले राज्य, 2014

Source: National Criminal Records Bureau

 

6. साक्षरता दर: भारत में महिलाओं की सबसे कम साक्षरता दर बिहार में है: 2011 की जनगणना के अनुसार, 51 फीसदी बिहार की महिलाएं अशिक्षित हैं। इस संबंध में दूसरे, तीसरे एवं चौथे स्थान पर राजस्थान (52.1 फीसदी) , झारखंड (55.4 फीसदी) और उत्तर प्रदेश (56.4 फीसदी) हैं।

 

भारत में महिलाओं की सबसे कम शिक्षा दर वाले राज्य

Source: Census 2011

 

7. महिला श्रम – शक्ति की भागीदारी दर: बिहार में सबसे महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर सबसे कम है। राज्य में प्रति 1000 महिलाओं पर 90 महिलाएं कार्यरत हैं। उत्तर प्रदेश का महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर 253 है जबकि राजस्थान का 453 जोकि उत्तर प्रदेश, बिहार और 331 के राष्ट्रीय औसत की तुलना में अधिक है।

 

यदि भारत में पुरुषों के बराबर ही महिलाएं काम करती हैं तो भारत की 2 ट्रिलियन डॉलर (134 लाख करोड़ रुपए) के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 27 फीसदी की वृद्धि होगी, जैसा कि इंडियास्पेंड ने मार्च 2016 में बताया है।

 

बिहार में महिला श्रम भागीदारी दर सबसे कम

Source: Ministry of Statistics & Programme Implementation

 

8. बाल लिंग अनुपात (सीएसआर): 834 पर , भारत में हरियाणा का सबसे खराब बाल लिंग अनुपात है। हरियाणा के बाद दूसरा एवं तीसरा स्थान पंजाब (846) और जम्मू-कश्मीर (862) का स्थान रहा है।

 

सबसे खराब बाल लिंग अनुपात के मामले में 888 के आंकड़े के साथ राजस्थान पांचवें स्थान पर है।

 

सबसे खराब सीएसआर वाले पांच राज्यों में उत्तर प्रदेश नहीं है लेकिन 902 के आंकड़ों से साथ यह 918 के राष्ट्रीय औसत से यह कम है। 935 के अनुपात के साथ बिहार का प्रदर्शन बेहतर है।

 

हरियाणा में शिशु लिंग अनुपात सबसे कम

Source: Ministry of Health & Family Welfare

 

उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान के अलावा, आंकड़ों के करीब से देखने से पता चलता है कि, जम्मू-कश्मीर (जम्मू-कश्मीर) के लिए महिला- मुक्ति के दो संकेतक बिगड़ रहे हैं।

 

उदाहरण के लिए, परिवार का औसत आकार, छह लोगों या अधिक लोगों वाले परिवारों का प्रतिशत, बाल लिंग अनुपात, साक्षरता दर और महिला श्रम- शक्ति की भागीदारी दर के संबंध में जम्मू-कश्मीर का स्थान बद्तर पांच राज्य में है। इनमें से शिशु लिंग अनुपात और महिला श्रम भागीदारी दर 2001 के बाद से और बद्तर हुई है जबकि अन्य संकेतकों में सुधार हुआ है।

 

राजस्थान के अलावा, जम्मू-कश्मीर एकमात्र ऐसा राज्य है जिसने पिछले दस वर्षों में (2011) सीएसआर में गिरावट देखी है; सीएसआर 941 से गिर कर 862 हुआ है, जिसका अर्थ है कि कम लड़कियों का जन्म हुआ है। जैसा कि, 2001 के बाद से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में सुधार हुआ है, इसका मतलब यही हुआ कि लड़कियों का गर्भपात कराया जा रहा है।

 

(साहा नई दिल्ली स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 9 जुलाई 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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