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उप्र, राजस्थान में अनुसूचित जाति पर सबसे अधिक अत्याचार

चैतन्य मल्लापुर,

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  • अनुसूचित जाति की महिलाओं के खिलाफ सबसे अधिक होने वाले अपराध यौन उत्पीड़न एवं बलात्कार है।

     

  • भारत के 29 राज्यों में गोवा जनसंख्या की दृष्टि से 26वें स्थान पर है लेकिन अनुसूचित जाति के खिलाफ सबसे अधिक अपराध दर है।

     

  • समग्र संख्या में देखा जाए तो भारत के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य, उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के खिलाफ सबसे अधिक अपराध होते हैं।

 

यह कुछ मुख्य बिंदु हैं को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ( एनसीआरबी ) द्वारा जारी क्राइम इन इंडिया 2014 रिपोर्ट में सामने आई है।

 

रिपोर्ट के अनुसार गोवा में प्रति एक लाख अनुसूचित जाति के लोगों पर 67 लोग अपराध का शिकार बनते हैं। गौरतलब है कि राज्य में 66 फीसदी हिन्दू, 25 फीसदी ईसाई और 8 फीसदी मुसलमान हैं। अनुसूचित जाति के खिलाफ होने वाले अपराध में गोवा के बाद राजस्थान ( 66 ) एवं आंध्र प्रदेश ( 49 ) का स्थान है।

 

गोवा में अनुसूचित जाति के खिलाफ सबसे अधिक अपराध दर

Source: Census 2011; National Crime Records Bureau; Note: State of Andhra Pradesh excludes Telangana-Andhra Pradesh Population; *Crimes per one lakh SC individuals; The actual population of SCs per lakh in Goa is 0.25 which is rounded to 0.3 as per NCRB.

 

अनुसूचित जाति के खिलाफ सबसे अधिक होने वाले अपराध महिलाओं की लज्जा भंग करना है ( आईपीसी धारा 354 )।

 

धारा को और आगे यौन उत्पीड़न (धारा 354A आईपीसी), महिला की इज्जत के साथ खेलने के ज़बरदस्ती करना या फिर उसके कपड़े उतारना ( धारा 354B आईपीसी ), किसी महिला के प्राइवेट ऐक्ट की तस्वीर लेना और उसे लोगों में फैलाना ( धारा 354C आईपीसी ), किसी महिला का जबरन पीछा करना या कॉन्टैक्ट करने की कोशिश करना ( धारा 364D आईपीसी ) एवं अन्य  में वर्गीकृत किया गया है।

 

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, अनुसूचित जाति के खिलाफ कम से कम 47,064 अपराधिक मामले दर्ज की गई है। पिछले पांच वर्षों में अपराधिक मामलों में 44 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2010 में जहां यह आंकड़े 32,712 दर्ज की गई थी जबकि 2014 में यह आंकड़े बढ़कर 47,064  हुए हैं।

 

पिछले पांच वर्षों में अनुसूचित जाति के खिलाफ अपराध

Source: National Crime Records Bureau

 

हाल ही में अनुसूचित जातियों में सबसे नीची जाति, दलित के खिलाफ अपराध में मामले काफी सुर्खियों में रहे हैं।

 

हाल ही में कर्नाटक में एक युवा दलित लेखक पर जानलेवा हमला किया गया था। लेखक को जाति व्यवस्था के खिलाफ लिखने पर उसके हाथ काट देने की धमकी भी दी गई थी।

 

पिछले साल अक्टूबर में हरियाणा में, उंची जाति के राजपूतों ने अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए दो दलित बच्चों को ज़िंदा जला दिया था।

 

देश के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य, उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के खिलाफ सबसे अधिक अपराधिक मामले (8,075) दर्ज की गई है। इस संबंध में दूसरा स्थान राजस्थान (8,028), तीसरा बिहार (7,893), चौथा मध्यप्रदेश (4,151) एवं पांचवा आंध्रप्रदेश (4,114) का है।

 

टॉप पांच राज्य – अनुसूचित जातियों के खिलाफ कुल अपराध

Source: Census 2011; National Crime Records Bureau; Note: State of Andhra Pradesh excludes Telangana-Andhra Pradesh Population; *Crimes per one lakh SC individuals

 

देश भर में अनुसूचित जाति के खिलाफ हुए अपराध में से 69 फीसदी मामले इन टॉ पांच राज्यों में दर्ज की गई है।

 

अनुसूचित जातियों के खिलाफ हुए अपराधिक मामलों में से सबसे अधिक मामले महिलाओं की लज्जा भंग करना (2,742), बलात्कार (2,388), गंभीर रुप से शारीरिक हानि  (2,267), दंगे (932) एवं अपहराण (884) के ही मामले हैं।

 

कुल 794 मामलों के दर्ज होने के साथ हत्या छठा सबसे अधिक होने वाला अपराध है।

 

2014 में हुए अनुसूचित जातियों के खिलाफ बड़े अपराध

Source: National Crime Records Bureau; Note: Top five crimes include SC/ST (Prevention of Atrocities) Act and Crimes Against SCs (in which SC/ST POA Act not applied) under IPC.

 

2014 में अनुसूचित जातियों के खिलाफ हुए 47,064 अपराधों में 40,300 मामले भारतीय दंड संहिता और अत्याचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है।

 

( मल्लापुर इंडियास्पेंड के साथ नीति विश्लेषक हैं )

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 26 अक्टूबर 2015 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

 


 

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