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एनडीए के तहत सांप्रदायिक घटनाओं में 28 फीसदी वृद्धि, लेकिन यूपीए सरकार के उच्च स्तर से कम

चैतन्य मल्लापुर,

 

मुंबई: भारतीय जनता पार्टी की अगुआई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के तहत सांप्रदायिक हिंसा में पिछले तीन वर्षों से 2017 तक 28 फीसदी की वृद्धि हुई है- 2017 में 822 घटनाएं दर्ज की गई थीं , लेकिन यह 2008 में दर्ज 943 मामलों से कम है, जो एक दशक में सबसे बड़ी संख्या है। यह जानकारी गृह मंत्रालय के आंकड़ों पर इंडियास्पेंड द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आई है।

 

पिछले एक दशक में, सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य, उत्तर प्रदेश (यूपी) में सबसे ज्यादा घटनाएं, 1,488 दर्ज की गई हैं। 26 जनवरी, 2018 को, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कासगंज में सांप्रदायिक हिंसा की घटना दर्ज की गई थी, जिसमें, एक 22 वर्षीय युवा ( चंदन गुप्ता ) की गोली मार करल हत्या कर दी गई थी। इसमें हिंसा के सिलसिले में कम से कम 44 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिससे गणतंत्र दिवस पर एक अनधिकृत मार्च निकला था, जैसा कि इंडियन एक्सप्रेस ने 27 जनवरी, 2018 की रिपोर्ट में बताया है।

 

उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक घटनाओं में 47 फीसदी की वृद्धि हुई है। यह आंकड़े 2014 में 133 से बढ़कर 2017 में 195 हुआ है। वर्ष 2013 में सबसे ज्यादा ऐसी घटनाएं दर्ज की गई है, करीब 247। पिछले दशक में किसी भी अन्य राज्य की तुलना में उत्तर प्रदेश के लिए आंकड़े सबसे ज्यादा रहे हैं।

 

दुनिया भर में धर्म से जुड़ी सामाजिक लड़ाई के लिए 2015 में सीरिया, नाइजीरिया और इराक के बाद भारत चौथे स्थान पर था। ‘हफिंगटन पोस्ट’ की 14 अप्रैल 2017 की रिपोर्ट में ऐसा बताया गया है।

 

2008 से 2017 के बीच एक दशक के दौरान कम से कम 7,484 सांप्रदायिक घटनाएं दर्ज की गई हैं, यानी प्रति दिन दो के आंकड़े के साथ 1,100 लोगों की मौत हुई है, जैसा कि लोकसभा के लिए जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है।

 

सांप्रदायिक घटनाएं और मारे गए लोग, 2008-2017

सबसे ज्यादा घटनाएं ( 943 ) जैसा कि हमने कहा है, 2008 में, कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दौरान दर्ज किए गए थे, जिसमें 167 लोगों की मौत हुई थी। सबसे कम घटनाएं (580) 2011 में दर्ज की गई थीं।

 

उत्तर प्रदेश के बाद, सबसे ज्यादा सांप्रदायिक घटनाएं, महाराष्ट्र (940),  कर्नाटक (880), मध्य प्रदेश (862) और गुजरात (605)में दर्ज हुई हैं।

 

अधिक सांप्रदायिक घटनाओं वाले पांच राज्य, 2008-2017

Source: Lok Sabha replies on February 8, 2018, August 8, 2017, December 2, 2014, May 7, 2013, and August 10, 2010

 

पिछले दशक के दौरान पांच राज्यों में 64 फीसदी सांप्रदायिक घटनाएं हुईं है। चुनाव होने वाले राज्य कर्नाटक में, सांप्रदायिक घटनाओं में 37 फीसदी वृद्धि देखी गई है। कर्नाटक में यह आंकड़े 2014 में 73 से बढ़ कर 2017 में 100 हुए हैं।

 

सांप्रदायिक घटनाओं के कारण, उत्तर प्रदेश ने सबसे ज्यादा मौतों की सूचना दी है ( 321, या 1,115 मौतों में से 28 फीसदी )। इसके बाद मध्य प्रदेश (135), महाराष्ट्र (140), राजस्थान (84) और कर्नाटक (70) का स्थान  है।

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सांप्रदायिक घटनाओं में अधिकतम लोगों होने वाली मौत वाले पांच राज्य, 2008-2017

Source: Lok Sabha replies on February 8, 2018, August 8, 2017, December 2, 2014, May 7, 2013, and August 10, 2010

 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सांप्रदायिक रूप से कट्टर माना जाता है। लोग धार्मिक खांचों में विभाजित हैं। अगस्त और सितंबर 2013 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मुज़फ्फरनगर भारी सांप्रदायिक दंगों का साक्षी रहा है। इन दंगों में 60 लोग मारे गए और 40,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए।

 

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, 2010 और 2015 के बीच, मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक हिंसा में पांच गुना वृद्धि हुई है। इंडियास्पेंड की 28 फरवरी, 2017 की रिपोर्ट में इसके बारे में विस्तार से बताया गया है।

 

(मल्लापुर विश्लेषक हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़े हैं। )

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 9 फरवरी, 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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