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कर्नाटक, उप्र, मप्र, बिहार में सांप्रदायिक संघर्षो की संख्या अधिक

अभीत सिघं सेठी,

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मो. अखलाक़ का परिवार। उत्तर प्रदेश के बिसहाड़ा ज़िले में रहने वाले अखलाक को गौ मांस खाने के अफवाह के कारण कुछ हिंदु लोगों ने पीट पीट कर मार डाला।

 

लोकसभा में पेश आकंड़ो के अनुसार, देश भर में वर्ष 2010 से 2014 के बीच हुए धार्मिक संघर्ष या संप्रदायिक घटनाओं के मामले मेंउत्तर प्रदेश का स्थान देश के टॉप पांच राज्यों में है।

 

पिछले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश में 703 धार्मिक संघर्ष या घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज की गई है। इन घटनाओं में कम से कम 176 लोगों की मौत एवं 2007 लोगों घायल हुए हैं। यह आकंड़े देश भर में सबसे अधिक है। भारत के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में, जहां करीब 200 मिलियन लोग रहते है,वर्ष 2015 के पहले छह महीने में ऐसी 68 घटनाएं दर्ज की गई हैं।

 

आबादी की दृष्टि से कर्नाटक में सांप्रदायिक घटनाओं की संख्या सबसे अधिक

 

वर्ष 2010 से 2014 के बीच, कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक में प्रति मिलियन आबादी पर, 5.8, सबसे अधिक धार्मिक संघर्ष हुई है। मध्य प्रदेश में यही आंकड़े 5.7 दर्ज की गई है जबकि उत्तर प्रदेश में ( जहां सबसे अधिक सांप्रदायिक घटनाओं की संख्या दर्ज की गई है ) आबादी की दृष्टि से , 3.5 के आंकड़ो के साथ छठे स्थान पर है।

 

2010 से 2014 के बीच कर्नाटक में प्रति मिलियन आबादी पर सांप्रदायिक हिंसा से लगभग 17 घायलों की संख्या दर्ज की गई है। गुजरात के लिए यही आंकड़े 16 जबकि 10 के आंकड़े के साथ उत्तर प्रदेश छठे स्थान पर है।

 

इसी अवधि के दौरान 0.9 प्रति मिलियन आबादी के आंकड़ो के साथ मध्य प्रदेश में सांप्रदायिक हिंसा से होने वाली मौतों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश के लिए यही आंकड़े 0.8 दर्ज की गई है।

 

संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश आगे

 

हाल ही में उत्तर प्रदेश के बिसहाड़ा गांव में भीड़ द्वारा की गई मो. अखलाक की हत्या, देश भर में सुर्खियों में हैं। गौ मांस खाने एवं घर में रखने की अफवाह पर भीड़ ने अखलाक को पीट-पीट कर मार डाला। इस घटना में मो. अखलाक का 22 साल का बेटा, दानिश भी बुरी तरह घायल हो गया है। फिलहाल दानिश गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती है।

 

अखलाक की घटना से पहले भी, एक मुस्लिम युवक को पाकिस्तानी आतंकी मान कर ( जिसकी अब तक पुष्टि नहीं हुई है ) पीटनेएवं एक 90 वर्ष के दलित की मंदिर में प्रवेश करने के कारण ज़िदा जला देने सहित कई अन्य धार्मिक संघर्ष की घटनाओं को दर्ज किया गया है।
 
उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक संघर्ष
 

Source: Lok Sabha; Link 1Link 2

 

वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक सांप्रदायिक संघर्ष के मामले दर्ज की गई है। आकंड़ों पर नज़र डालें तो हाल ही में मुज़फ्फरनगर में हुई धार्मिक संघर्ष सहित उत्तर प्रदेश में 247 घटनाएं दर्ज की गई है। मुज़फ्फनगर में हुए दंगों में कम से कम 59 लोगों की जान चली गई थी एवं 50,000 लोग बेघर हुए हैं।
 
सांप्रदायिक घटनाओं वाले टॉप पांच राज्य, 2010-2014
 

Source: Lok Sabha; Link 1Link 2

 

उत्तर प्रदेश के बाद दूसरा स्थान महाराष्ट्र का है। वर्ष 2010 से 2014 के बीच महाराष्ट्र में कुल 484 धार्मिक संघर्ष की रिपोर्ट दर्ज की गई है। घटनाओं में होने वाली मौत एवं घायलों की संख्या में भी महाराष्ट्र का स्थान दूसरे स्थान पर है। आंकड़ों पर नज़र डालें तो महाराष्ट्र में धार्मिक संघर्ष के कारण मरने वालों की संख्या 70 एवं घायलों की संख्या 1,462 दर्ज की गई है।
 
सांप्रदायिक घटनाओं से होने वाली मौत की संख्या, 2010-2014
 

Source: Lok Sabha; Link 1Link 2

 
सांप्रदायिक घटनाओं से होने वाली घायलों की संख्या, 2010-2014
 

Source: Lok Sabha; Link 1Link 2

 

सांप्रदायिक दंगों के मामले में पिछले साल बिहार का स्थान छठे स्थानपर था। 2014 में बिहार में 61 धार्मिक संघर्ष के मामले दर्ज की गई है।लेकिन जनवरी से जून तक अनंतिम आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 41 सांप्रदायिक घटनाओं एवं 169 घायलों की संख्या के साथ बिहार का स्थान तीसरे नंबर पर दर्ज की गई है।

 

14 मौत की आंकड़ो के साथ, इस वर्ष बिहार उत्तर प्रदेश से आगे हो गया है ( इस वर्ष जून तक उत्तर प्रदेश में 10 मौत दर्ज की गई है )। यह आंकड़े भारत में सांप्रदायिक हिंसा से होने वाली मौतों की संख्या के संबंध में सबसे अधिक है।

 

गौरतलब है कि बिहार में सांप्रदायिक घटनाओं में वृद्धि हुई है और इस महीने के आखिर में राज्य में विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं।

 

पिछले पांच वर्षों में भारत में 3,400 सांप्रदायिक घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं में 529 लोगों की मौत एवं 10,344 लोग घायल हुए हैं।

 
भारत में सांप्रदायिक घटनाएं
 

Source: Lok Sabha; Link 1Link 2

 

सेठी इंडियास्पेंड के साथ नीति विश्लेषक हैं

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 07 अक्टूबर 2015 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।
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