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कर्नाटक में बेरोजगारी दर कम, महिला सशक्तिकरण में राज्य पीछे

भास्कर त्रिपाठी,

Women

 

नई दिल्ली: राष्ट्रीय आंकड़ों पर इंडियास्पेंड द्वारा किए गए विश्लेषण के मुताबिक, भारत के सबसे अच्छे आर्थिक और बाल स्वास्थ्य परिणामों में कर्नाटक का स्थान भी है। लेकिन महिला सशक्तिकरण के संबंध में यह राज्य देश के कुछ सबसे गरीब राज्यों से भी पीछे है।

 

हमने 15 सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य से संबंधित संकेतकों ( राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2005-06 (एनएफएचएस 3) और 2015-16 (एनएफएचएस 4), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय और श्रम और रोजगार मंत्रालय से स्रोत किए गए ) पर कर्नाटक के प्रदर्शन की तुलना नौ अन्य राज्यों के साथ की है। कुछ मुख्य बातें इस प्रकार रहे हैं ·

 

  • राज्यों में, कर्नाटक में देश की दूसरी सबसे कम बेरोजगारी दर है। कर्नाटक का स्थान केवल गुजरात से पीछे है। प्रति व्यक्ति आय के मामले में विश्लेषण के लिए गए 10 राज्यों में कर्नाटक का स्थान चौथे नंबर पर है।
  • कर्नाटक में शिशु मृत्यु दर 2005-06 में प्रति  1,000 जीवित जन्मों पर 43.2 मृत्यु से कम होकर 2015-16 में 26.9 हुआ है, जो 10 राज्यों में पांचवें स्थान पर है।
  • 2015-16 में, कर्नाटक में 49.3 फीसदी महिलाएं घरेलू निर्णय लेने में शामिल थीं। राज्य का प्रदर्शन केवल बिहार, तेलंगाना और मिजोरम से बेहतर रहा है।
  • 2015-16 में, कर्नाटक में 62.6 फीसदी बच्चों (12-23 महीने) ने हर तरह का टीकाकरण प्राप्त किया । 2005-06 में यह आंकड़े 55 फीसदी थे। इस संबंध में विश्लेषण के लिए लिए गए 10 राज्यों में कर्नाटक पांचवें स्थान पर है।

 

विश्लेषण के लिए, हमने दक्षिण भारतीय राज्यों तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल, गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को चुना।

 

विश्लेषण की अवधि (2005-06 से 2015-16) के लिए, भारतीय जनता पार्टी ने, पिछले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के सत्ता में आने से पहले तक सात साल तक कर्नाटक पर शासन किया था। अन्य नौ राज्यों में से छह (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गोवा और गुजरात ) में वर्तमान में भाजपा की सरकारें हैं। केरल में वाम डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार है, जबकि तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझागम और तेलुगू देशम पार्टी द्वारा शासित हैं।

 

कर्नाटक में बाल मृत्यु दर सबसे कम

 

2015-16 में, कर्नाटक की शिशु मृत्यु दर (आईएमआर- एक विशेष वर्ष में पैदा होने वाला बच्चा एक वर्ष की उम्र तक पहुंचने से पहले मरने वाले बच्चे ) प्रति जीवित 1,000 जीवित जन्मों पर 26.9 रहा है, जो  2005-06 के 43.2 से कम है। कर्नाटक का आईएमआर राष्ट्रीय औसत (40.7) से कम था और विश्लेषण के लिए विचार किए गए 10 राज्यों में से पांचवें स्थान पर था।

 

प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 31.5 मृत्यु के साथ, राज्य की पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर भी 10 राज्यों में पांचवें स्थान पर है- केरल, गोवा, तमिलनाडु और महाराष्ट्र से बदतर।

 

विश्लेषण के लिए चुने गए भारतीय राज्यों में बाल मृत्यु दर

Source: National Family Health Survey 2015-16; Figures in deaths per 1,000 live birth

 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य आंकड़ों के मुताबिक, 2015-16 में, कर्नाटक में 62.6 फीसदी बच्चों ( 12 से 23 महीने की उम्र ) ने सभी मूल टीकाकरण प्राप्त किए हैं। यह आंकड़े  2005-06 में 55 फीसदी थे।

 

सभी बुनियादी टीकाकरण प्राप्त करने के लिए, एक बच्चे को बीसीजी टीका की कम से कम एक खुराक प्राप्त मिलनी चाहिए, जो तपेदिक के खिलाफ सुरक्षा करता है। डीपीटी टीका की तीन खुराक, जो डिप्थीरिया, पेटसुसिस (हूपिंग खांसी) और टेटनस से बचाता है। पोलियो टीका की तीन खुराक जो पोलियो के खिलाफ सुरक्षा करता है। और खसरे की टीका की एक खुराक मिलनी चहिए।

 

विश्लेषण के लिए विचार किए गए 10 राज्यों में कर्नाटक पांचवें स्थान पर है।

 

चयनित भारतीय राज्यों में टीकाकरण कवरेज

महिला सशक्तिकरण पर कर्नाटक गरीब राज्यों से पीछे

 

 राष्ट्रीय आंकड़ों के मुताबिक कर्नाटक में 50 फीसदी से ज्यादा महिला घरेलू निर्णय लेने में शामिल नहीं थीं। इसमें किसी की अपनी स्वास्थ्य देखभाल, प्रमुख खरीद, दैनिक घरेलू खरीद और उसके परिवार या रिश्तेदारों से मिलने का निर्णय शामिल है।

 

49.3 फीसदी पर, कर्नाटक के आंकड़े (मूल्यांकन किए गए राज्यों में सबसे कम ) राष्ट्रीय औसत (59.2 फीसदी) से लगभग 10 प्रतिशत अंक कम है और केवल बिहार, तेलंगाना और मिजोरम के मुकाबले बेहतर है।

 

घरेलू निर्णय लेने में महिलाओं की हिस्सेदारी

2015-16 में, 58.1 फीसदी महिलाओं ने कहा कि, बताए गए सात कारणों पर पति द्वारा की जाने वाली उनकी पिटाई सही है। ये कारण हैं – उसे बताए बिना बाहर जाना, घर या बच्चों की उपेक्षा करना, उसके साथ बहस करना, सेक्स से इंकार करना, ठीक से खाना न बनाना, ससुराल वालों के लिए अनादर दिखाना या और पत्नि पर संदेह करना।

 

यह 51.7 फीसदी के राष्ट्रीय औसत से अधिक था, और उत्तर प्रदेश (51.3 फीसदी), बिहार (53.4 फीसदी) और राजस्थान (33.4 फीसदी) जैसे गरीब राज्यों से भी बदतर था।

 

इसी वर्ष, कर्नाटक में 57.5 फीसदी पुरुषों ने कहा कि ऐसा किया जाना सही है। यह आंकड़े 42.2 फीसदी के राष्ट्रीय औसत से अधिक है, और उत्तर प्रदेश (41.6 फीसदी), बिहार (38.1 फीसदी) और राजस्थान (30.4 फीसदी) जैसे गरीब राज्यों से भी बदतर है।

 

कर्नाटक में पति / पार्टनर द्वारा कभी-कभी भावनात्मक, शारीरिक या यौन हिंसा का सामना करने वाले विवाहित महिलाओं (15-49 वर्ष) का प्रतिशत 2005-06 में 21.5 था, जो एक दशक से 2015-16 तक, बढ़कर 24.4 फीसदी हुआ है। हालांकि यह राष्ट्रीय औसत (31 फीसदी) से कम है और यह गोवा, केरल, गुजरात और महाराष्ट्र में 10 राज्यों में से अधिक था।

 

चयनित भारतीय राज्यों में पति या पार्टनर द्वारा हिंसा का सामना करने वाली महिलाएं

श्रम और रोजगार मंत्रालय के पांचवें वार्षिक रोजगार-बेरोजगारी सर्वेक्षण 2015-16 के अनुसार, 2015-16 में, कर्नाटक में 32.7 फीसदी महिलाएं (15-64 वर्ष) श्रम बल का हिस्सा थीं, जो महिला श्रम बल के राष्ट्रीय औसत 23.7 फीसदी अधिक है। विश्लेषण के लिए विचार किए गए 10 राज्यों में कर्नाटक चौथे स्थान पर है और आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र से पीछे है।

 

चयनित राज्यों की महिला श्रम बल भागीदारी, 2015-16

कर्नाटक की 10 महिलाओं में से सात साक्षर  

 

2015-16 में, कर्नाटक की महिला साक्षरता दर (71.7 फीसदी) 10 राज्यों में छठे स्थान पर थी, जो आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से बेहतर थी। राज्य, देश भर में 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 23 वें स्थान पर है।

 

 इस बीच, राज्य में 45.4 फीसदी महिलाओं ने 10 साल से ज्यादा की शिक्षा प्राप्त की है। इस संबंध में राज्य केरल, गोवा और तमिलनाडु से पीछे रहा है, जैसा कि एनएफएचएस -4 के आंकड़ों से पता चलता है।  2015-16 में, कर्नाटक में 85.1 फीसदी पुरुष साक्षर थे और  55.2 फीसदी ने 10 या अधिक वर्षों की शिक्षा पूरी की, जैसा कि आंकड़ों से पता चलता है।

 

चयनित भारतीय राज्यों में पुरुष और महिलाओं की साक्षरता और शिक्षा स्तर

Source: National Family Health Survey 2015-16

 

कुल मिलाकर, कर्नाटक में  6-17 साल के बीच की उम्र के 87.9 फीसदी बच्चे 2015-16 में स्कूल जा रहे थे। एक दशक पहले ये आंकड़े 73.3 फीसदी थे। इस संबंध में कर्नाटक 10 राज्यों में से चौथे स्थान पर है।

 

चयनित भारतीय राज्यों में स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या

पीने के पानी और घरेलू शौचालयों तक पहुंच के मामले में कर्नाटक गरीब राज्यों से पीछे

 

2015-16 में, कर्नाटक में 89.3 फीसदी परिवारों को पीने के पानी के एक बेहतर स्रोत तक पहुंच थी, जिनमें पाइप कनेक्शन, सार्वजनिक नल, ट्यूबवेल या बोरहेल, संरक्षित डगवेल और स्प्रिंग्स, वर्षा जल या सामुदायिक रिवर्स ऑस्मोसिस प्लांट शामिल हैं। विश्लेषण किए गए 10 राज्यों में कर्नाटक सातवें स्थान पर है।

 

इस बीच, कर्नाटक में 65.8 फीसदी परिवारों में शौचालयों की सुविधा थी और विश्लेषण के लिए 10 राज्यों में से इस मामले में कर्नाटक पांचवें स्थान पर है। 2005-06 में यह आंकड़ा 46.5 फीसदी था।

 

पीने के पानी और शौचालय सुविधा वाले परिवार

Source: National Family Health Survey, 2015-16

 

कर्नाटक में भारत की दूसरी सबसे कम बेरोजगारी दर

 

श्रम और रोजगार मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 1.5 फीसदी पर, कर्नाटक की बेरोजगारी दर 2015-16 में भारत की दूसरी सबसे कम थी। यह आंकड़े  केवल गुजरात से नीचे था। इस संबंध में राष्ट्रीय औसत 5 फीसदी था।

 

चयनित भारतीय राज्यों की बेरोजगारी दरें, 2015-16

2014-15 ( जिसके लिए नवीनतम राज्यवार डेटा उपलब्ध थे ) में राज्य की प्रति व्यक्ति आय 125,832 रुपये थी, जो कि उस साल 86,454 रुपये के राष्ट्रीय औसत से अधिक है। मूल्यांकन किए गए 10 राज्यों में कर्नाटक चौथे स्थान पर है।

 

चयनित भारतीय राज्यों की प्रति व्यक्ति आय, 2014-15

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(त्रिपाठी प्रमुख संवाददाता हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़े हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 11 मई, 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

 

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