Home » Cover Story » कावेरी का पानी साझा करने के अलावा क्यों नहीं है कोई दूसरा विकल्प?

कावेरी का पानी साझा करने के अलावा क्यों नहीं है कोई दूसरा विकल्प?

प्रभु मल्लिकारुजनन,

kaveri_620

तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़ने के आदेश के खिलाफ 9 सितंबर, 2016 को प्रदर्शन करते एवं मांड्या में कृष्णाराजासागर बांध में प्रवेश करने की कोशिश करते किसानों पर लाठी चार्ज करते पुलिसकर्मी। दोनों राज्यों में पानी का कमी है और आंकड़ों से पता चलता है कि पानी शेयर करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।

 

तमिलनाडु और कर्नाटक के कावेरी बेसिन जलाशयों में आधा पानी भरा है। यह जानकारी दोनों राज्यों के जलाशय आंकड़ों पर इंडियास्पेंड द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आई है। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी सप्ताह पुराने आदेश में संशोधन किया है और अब कर्नाटक को 20 फीसदी कम पानी जारी करने की अनुमति दी है – अगले आठ दिनों के लिए प्रति सेकंड 12,000 घन फीट या प्रति दिन क्यूसेक जारी करने का आदेश दिया है।

 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दोनों राज्यों में 12 सितम्बर 2016 को हिंसा भड़क उठी है: दोनों राज्यों में पानी की कमी है (“सामान्य” मानसून का स्थानीय वर्षा की कमी का प्रच्छादन करने का साथ) और आंकड़ों से पता चलता है कि कावेरी का पानी साझा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। वर्षा में बदलाव बढ़ने की संभावना है, वैज्ञानिक स्थानीय और वैश्विक मौसम में परिवर्तन के हिस्से की रिकॉर्डिंग कर रहे हैं।

 

truck

बेंगलुरु में अलसूर झील के पास तमिलनाडु पंजीकरण वाले एक ट्रक को आग लगा दी गई। सुप्रीम कोर्ट के अपनी सप्ताह पुराने आदेश में संशोधन करते हुए कर्नाटक को 20 फीसदी कम पानी जारी करने की अनुमति दी है जिससे में 12 सितम्बर 2016 को दोनों राज्यों हिंसा भड़क उठी।

 

8 सितंबर, 2016 तक केन्द्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कुल मिलाकर, कर्नाटक के जलाशयों में 30 फीसदी कम पानी है जबकि तमिलनाडु में 49 फीसदी कम पानी है। लेकिन कर्नाटक में कावेरी बेसिन जलाशयों की क्षमता तमिलनाडु के , 2.75 अरब घन मीटर (बीसीएम) की तुलना में एक चौथाई कम है।

 

कर्नाटक और तमिलनाडु के कावेरी जलग्रहण क्षेत्र में मुख्य जलाशयों का जल स्तर (मांड्या जिले में कृष्णराजसागर (KRS) बांध, मैसूर, कोडागू और हेमावति हसन में हरंगी में काबिनी सहित; सलेम में मेत्तूर बांध और इरोड में भवानीसागर बांध सहित) मिलाकर सामान्य से 46 फीसदी कम है (10 साल के औसत के आधार पर) और 2015 की तुलना में 27 फीसदी कम है। यह जानकारी सीडब्ल्यूसी के आंकड़ों में सामने आई है।

 

तमिलनाडु में जलाशय स्तर


 

कर्नाटक में जलाशय स्तर

Source: Central Water Commission

 

तमिलनाडु के चार अन्य कावेरी बेसिन जलाशयों में स्थिति कुछ बेहतर नहीं है। थेनी जिले में वगाई अपनी क्षमता के 5 फीसदी पर था; केरल में परम्बिकुलम बांध (तमिलनाडु द्वारा संचालित) क्षमता के 41 फीसदी पर था; कोयंबटूर में अलियर बांध क्षमता के 9 फीसदी पर था; और भी कोयंबटूर में ही शोलायुर बांध क्षमता के 49 फीसदी पर था।

 

दो झगड़ते राज्यों के जलाशयों के पानी को न केवल किसानों के बीच साझा करनी चाहिए बल्कि पीने के पानी और पनबिजली के लिए शहरों में भी साझा की जानी चाहिए।

 

दोनों राज्यों में मानसून के मौसम के बाद की असंतुष्ट वर्षा भिन्नता का परिणाम है जो “सामान्य” घोषित मानसून द्वारा छिपा हुआ है।

 

कैसे ‘सामान्य’ वर्षा असामान्य स्थिति को छिपाता है

 

कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा मॉनिटरिंग सेंटर (केएसएनडीएमसी) और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून 2016 से 9 सितंबर 2016 के बीच कर्नाटक में 17 फीसदी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है (मौसम विज्ञान विभाग इसे “सामान्य” कमी के रूप में वर्गीकृत करता है लेकिन बारिश रुक-रुक कर हुई है और मानसून अनिश्चित रहा है) जबकि तमिलनाडु में सामान्य बारिश दर्ज की गई है।

 

कर्नाटक में जिला -वार संचयी वर्षा पैटर्न, जून 01,2016 – सितम्बर 09, 2016

Source: Karnataka State Natural Disaster Monitoring Centre

 

तमिलनाडु और पुडुचेरी में जिला -वार संचयी वर्षा पैटर्न, जून 01,2016 – सितम्बर 09, 2016

Source: India Meteorological Department, Chennai

 

9 सितंबर तक, तमिलनाडु में सामान्य 223 मिमी बारिश के खिलाफ 222 मिमी बारिश हुई है। कर्नाटक में इसी अवधि के दौरान सामान्य 718 मिमी के खिलाफ 594 मिमी बारिश हुई है।

 

कावेरी जलग्रहण क्षेत्र में आधे भरे जलाशयों के अलावा, राज्य स्तर पर कर्नाटक के लघु सिंचाई टैंकों का 42 फीसदी सूखा है और अगस्त में कर्नाटक के 90 फीसदी तालुकों में बारिश की कमी दर्ज की गई है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने सितंबर 2016 में विस्तार से बताया है।

 

दोनों राज्यों में स्थानीय वर्षा की कमी को मौसम संबंधी सूखे के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है (एक विशिष्ट अवधि के लिए वर्षा में कमी) लेकिन इसका परिणाम कृषि सूखे के रुप में हुई है (फसल ऊपज मौसम के दौरान जब वर्षा और मिट्टी की नमी अपर्याप्त हैं)।

 

परिणाम : दोनों राज्यों के कई जिलों में बुवाई में कमी और देरी।

 

उदाहरण के लिए , अगस्त में, मांड्या में “अत्यधिक” वर्षा प्राप्त होने के रुप में वर्गीकृत किया गया था। फिर भी, बुवाई सामान्य से एक चौथाई से भी कम होने की सूचना दर्ज की गई थी। इसका कारण यह है कि महीने के अंतिम दिन तक, मांड्या प्रतिदिन 1 मिमी बारिश दर्ज की गई (27 अगस्त और 30 अगस्त को छोड़कर), जबकि सामान्य रुप से रोज़ाना 2-3 मिमी बारिश होनी चाहिए। 31 अगस्त , 2016 को, मांड्या में 34 मिमी बारिश दर्ज की गई, जोकि महीने के औसत में वृद्धि है।

 

इसी तरह की प्रवृति मैसुरु, चमराजनगर रामनगर सहित कर्नाटक के अन्य कावेरी बेसिन जिलों में देखा गया है। कावेरी डेल्टा में तमिलनाडु के जिलों के लिए कोई भी सार्वजनिक आंकड़े उपलब्ध नहीं है।

 

आईएमडी आंकड़ों के अनुसार, हालांकि इरोड , सेलम, करूर, त्रिची और तंजावुर तमिलनाडु के कावेरी बेसिन जिलों में “सामान्य” बारिश हुई है  (सामान्य की तुलना में 0 से 12 फीसदी अतिरिक्त)।

 

शिवारामू एच एस, प्रोफेसर और कृषि मौसम विज्ञान विभाग के प्रमुख, कृषि विज्ञान, बेंगलुरू विश्वविद्यालय कहते हैं, “राज्य के (कर्नाटक) वर्षा कम नहीं हो रही है। लेकिन बारिश के दिनों की संख्या कम हो रही है। जिसके परिणाम-स्वरुप अपवाह बारिश (उच्च तीव्रता के साथ बारिश) होती है जो लंबे समय में अच्छा नहीं है। अपवाह बारिश के कारण कई पोषक तत्व बह जाते हैं, पानी के बहाव से लायी हुई मिट्टी या रेत बह जाती है और उपजाऊ मिट्टी बंजर हो जाती है।”

 

अप्रैल 2015 में इंडियास्पेंड द्वारा समीक्षा की गई क्लच ऑफ इंडियन एंड ग्लोबल स्टडीज़ के अनुसार, मध्य भारत में चरम वर्षा की घटनाएं, मानसून प्रणाली की कोर, बढ़ रही हैं और मध्यम वर्षा में गिरावट हो रही है। यह बदलाव दक्षिण भारत में भी स्पष्ट हैं।

 

शिवारामू कहते हैं, “वर्षा के पैटर्न में एक स्थानिक बाधा है। कावेरी बेसिन और कोडागू में, वर्षा लंबे समय में प्रति वर्ष लगभग 2 मिमी कम हो रही है। लेकिन बेंगलुरू, कोलार, चिक्कबल्लपुर और रामनगर में , प्रतिवर्ष वर्षा 1 मिमी से बढ़ रही है।”

 

बढ़ते बदलाव के साथ मुकाबला करने के अलावा दीर्घकालिक समाधान आसान नहीं है।

 

कर्नाटक के पश्चिम में बहने वाली नदियों से करीब 2,000 हजार मिलियन हर साल अरब सागर में मिलता है। यह दोनों राज्यों की पानी की जरूरतों से चार गुना अधिक है।

 

एक सी कामराज, अध्यक्ष, राष्ट्रीय जलमार्ग विकास प्रौद्योगिकी, “यदि सरकार लंबे समय में इसका उपयोग करने का रास्ता निकाल पाती है तो हम हर साल कावेरी के लिए लड़ने के लिए नहीं होगी।”

 

Clarification: Some readers have said that the Supreme Court’s modified order of September 12, 2016, has increased the water that Karnataka must release, since the duration has been extended until September 20, 2016. However, the SC’s order dated September 5, 2016, was to be revisited in a hearing on September 16, 2016. This hearing has now been postponed to September 20, 2016. It is thus not possible to estimate if Karnataka will release more water than it would have had to.

 

Correction: An earlier version of this story erroneously suggested that Vagai, Parambikulam, Aliyar and Sholayur were reservoirs in the Cauvery basin. This has now been corrected. We regret the error.

 

(मल्लिकारजुनन  बेंगलुरु स्थित स्वतंत्र पत्रकार और 101Reporters.com  की सदस्य हैं। 101Reporters.com  जमीनी स्तर पर पत्रकारों का एक अखिल भारतीय नेटवर्क है।))

 
यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 12 सितम्बर 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।
 

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। हमसे respond@indiaspend.org पर संपर्क किया जा सकता है। हम भाषा और व्याकरण के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार रखते हैं।

 
__________________________________________________________________

 

“क्या आपको यह लेख पसंद आया ?” Indiaspend.com एक गैर लाभकारी संस्था है, और हम अपने इस जनहित पत्रकारिता प्रयासों की सफलता के लिए आप जैसे पाठकों पर निर्भर करते हैं। कृपया अपना अनुदान दें :

 

Views
2537

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *