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कावेरी मुद्दे पर कर्नाटक के गुस्से का कारण – राज्य के 90% क्षेत्र में वर्षा की कमी

प्रभु मल्लिकारजुनन,

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कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा से सटे, बिलिगुंडलु के पास, जहां से कावेरी जल आधिकारिक तौर पर तमिलनाडु को सौंप दिया गया है, वहां के डाडीगनाडोड्डी गांव में सूखा झील। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सरकार को तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने के निर्णय के बाद  6 सितंबर, 2016 को मैसूर - मांड्या क्षेत्र के कुछ हिस्सों विरोध प्रदर्शन हुआ है।

 

सुप्रीम कोर्ट के कावेरी जल को तमिलनाडु के लिए छोड़ने के आदेश पर कर्नाटक के गुस्से और क्रोध – 09 सितंबर को राज्य बंद किया गया था - का मूल कारण राज्य में मानसून की विफलता है।

 

कावेरी जल ग्रहण में जलाशय आधे भरे हुए हैं। राज्य भर में लघु सिंचाई टैंकों का 42 फीसदी सूखा है और अगस्त में, कर्नाटक के 90 फीसदी तालुकों में बारिश की कमी दर्ज की गई है। कर्नाटक के जलाशयों का पानी अब कर्नाटक और तमिलनाडु में किसानों के बीच साझा किया जाना चाहिए और कर्नाटक में पीने के पानी के ज़रुरतों को भी पूरा करना होगा।

 

कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा मॉनिटरिंग सेंटर (केएसएनडीएमसी) के आंकड़ो के अनुसार, कुल मिलाकर 1 जून, 2016, और सितंबर 5, 2016 के बीच राज्य में सामान्य से 16 फीसदी कम बारिश हुई है।

 

जिला -वार संचयी वर्षा पैटर्न, 01 जून , 2016 – 26 अगस्त, 2016

Source: Karnataka State Natural Disaster Monitoring Centre

 

मौसम विज्ञान विभाग इसे "सामान्य" कमी के रूप में वर्गीकृत करता है लेकिन मानसून के दौरान बारिश रुक-रुक कर और अनिश्चित रही है।

 

लगातार दो सूखे के बाद भारत में सामान्य बारिश हुई है - – 100 साल के औसत से 2 फीसदी कम – लेकिन इस सामान्य अवस्था के भीतर, देश के एक-तिहाई से अधिक हिस्से में बारिश की कमी है। यह जानकारी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों में सामने आई है। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने पहले भी विस्तार से बताया है।

 

क्या है शब्दावली का अर्थ

अधिक बारिश : सामान्य से 20 फीसदी अधिक

सामान्य बारिश :  सामान्य से -20 फीसदी से +20 फीसदी

कम बारिश : सामान्य से -20 फीसदी से -40 फीसदी तक

न्यून बारिश : सामान्य से 40 फीसदी कम

Source: Weekly Weather Report, IMD

 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सरकार को तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने के निर्णय के बाद 6 सितंबर, 2016 को मैसूर - मांड्या क्षेत्र के कुछ हिस्सों विरोध प्रदर्शन हुआ है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर संशोधन की मांग की है।

 

अगस्त में कर्नाटक में 39 फीसदी कम बारिश

 

अगस्त में कर्नाटक के चार ज़ोन में - दक्षिण और उत्तरी आंतरिक, दक्षिणी मलनाड क्षेत्र और तट – 39 फीसदी से कम बारिश दर्ज की गई है।

 

जोन वार संचयी वर्षा पैटर्न, 2016

Source: Karnataka State Natural Disaster Monitoring Centre

 

मलनाड क्षेत्र जो कावेरी के जलग्रहण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, वहां अगस्त में 977 एमएम वर्षा हुई है। जबकि सामान्य रुप से 1369 एमएम बारिश होनी चाहिए थी यानि कि क्षेत्र में 29 फीसदी कम बारिश हुई है।

 

मानसून के दौरान स्थिति और खराब हुई है: अगस्त 2016 में, कर्नाटक में 176 तालुकों में से 101 में कम बारिश दर्ज की गई है (-20 से -59 फीसदी) जबकि 55 तालुकों में न्यून बारिश दर्ज हुई है (-60 से -99 फीसदी)

 

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Source: Karnataka State Natural Disaster Monitoring Centre. Click here to enlarge.

 

अगस्त की बारिश, कुछ फसल जैसे धान, रागी , मक्का और गन्ने की बुवाई के लिए महत्वपूर्ण है। दक्षिण पश्चिम मानसून के अंत होने में केवल चार सप्ताह बाकि होने के साथ किसान अब संघर्ष कर रहे हैं।

 

जलाशयों, कावेरी बेसिन के टैंक, राज्य भर में पानी की कमी

 

3 सितंबर तक केएसएनडीएमसी के आंकड़ों के अनुसार मांड्या जिले में कृष्णराजसागर (KRS) बांध, मैसूर में काबिनी, कोडागू में हरांगी और हसन में हेमावथी सहित कावेरी जलग्रहण क्षेत्र के जलाशयों का जल स्तर सामान्य से कम है (15 साल के औसत के आधार पर)। साथ ही 2015 के स्तरों की तुलना में भी कम है।

 

राज्य में 3598 लघु सिंचाई टैंकों में से 42 फीसदी सूखे हैं और 12 फीसदी टैंकों से अधिक में आधे से अधिक पानी नहीं है। यह जानकारी केएसएनडीएमसी के आंकड़ो में सामने आई है।

 

3 सितंबर को केआरएस में जल स्तर 17.96 था tmcft (हजार मिलियन क्यूबिक फीट) जबकि इसकी क्षमता 49.45 tmcft है। यह स्तर पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में भी कम है। इस समय तक सामान्य रुप से केआरएस पूरा भर जाता है।

 

10 दिनों में तमिलनाडु को 15,000 घन सेकेंड जारी करने का सुप्रीम कोर्ट के आदेश का मतलब है कि राज्य को 13.6 tmcft पानी छोड़ना होगा यानि कि कावेरी बेसिन जलाशयों में उपलब्ध पानी का 24 फीसदी पानी छोड़ना होगा।

 

उत्तरी कर्नाटक में कृष्णा बेसिन जलाशय के अलमट्टी बांध (जोकि भरा हुआ है) को छोड़ कर राज्य भर के अन्य नौ जलाशयों की स्थिति कुछ बेहतर नहीं है; घटाप्रभा बांध में अपनी क्षमता का 87 फीसदी पानी है; और नारायणपुरम बांध अपनी क्षमता का 96 फीसदी पानी उपलब्ध है।

 

मुख्य जलाशयों का स्तर

Source: Karnataka State Natural Disaster Monitoring Centre

 

यह आने वाले दिनों में कर्नाटक में पीने के पानी की स्थिति खराब हो सकती है। दूसरी ओर किसान प्रतिनिधियों का तर्क है कि यदि कर्नाटक अधिक पानी छोड़ता है तो इससे उनकी आजीविका दांव पर लग जाएगी।

 

कर्नाटक राज्य रैयत संघा के नेता और विधान सभा के सदस्य (विधायक) केएस पुट्टाननेइआ ने 101reporters.com से बात करते हुए कहा, “हमने (किसानों) पानी अधिक लगने के कारण 70 फीसदी क्षेत्रों में गन्ने की खेती को कम कर दिया है। और हमने धान की खेती करने का चुनाव किया है। यदि सरकार इसके लिए भी पानी नहीं छोड़ सकती है तो इस क्षेत्र के किसानों से लिए आजीविका के लिए क्या रह जाएगा।”

 

“दशकों से दोनों राज्यों की सरकार पानी के लिए लड़ रही है जो बारिश पर निर्भर है और जो अपूर्वानुमेय है। उन्हें इस समस्या का कुछ स्थायी समाधान खोजना चाहिए और कोई भी निर्णय लेने से पहले किसान नेता से परामर्श करना चाहिए।”

 

कावेरी गढ़ में सामान्य की एक चौथाई से भी कम बुवाई

 

कर्नाटक कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मांड्या में  जहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तीव्र है, वहां 22 अगस्त, 2016 तक सामान्य के 25 फीसदी से भी कम बुवाई हुई है।

 

एच शिवन्ना, कुलपति, कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, बेंगलुरू, कहते हैं,“अगस्त में राज्य भर में कम बारिश होने के साथ, वहां आनुपातिक उपज और कुल उत्पादन में कमी हो जाएगी। कावेरी बेसिन में, वे अब धान की रोपाई कर रहे हैं क्योंकि इसमें गन्ने की तुलना में कम पानी का उपयोग होता है। बुवाई में पहले ही देरी हो चुकी है और यदि अगले 10 दिनों में बारिश नहीं होती है तो राज्य के किसानों पर गंभीर रुप से प्रभाव पड़ेगा।”

 

(मल्लिकारजुनन  बेंगलुरु स्थित स्वतंत्र पत्रकार और 101Reporters.com  की सदस्य हैं। 101Reporters.com  जमीनी स्तर पर पत्रकारों का एक अखिल भारतीय नेटवर्क है।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 09 सितंबर 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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