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केरल की नई चाल: एग्री ऋणों पर ब्याज का भुगतान

इंडियास्पेंड टीम,

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केरल सरकार कृषि संकट से निपटने के लिए एक अनूठे प्रयोग की योजना बना रही है। वर्ष 2015-16 बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री के.एम. मणि ने घोषणा कृ कि सरकार किसानों द्वारा लिए गए उस ऋण पर देय पूरे ब्याज का भुगतान करेगी , जहाँ  किसान ने मूल राशि का समय पर भुगतान कर दिया हो।

 

मंत्री ने इस योजना के लिए अगले साल में 125 करोड़ रुपये अलग से निर्धारित किया है।  “मुझे यह विश्वास है कि इस से राज्य में  कृषि ऋण के प्रवाह में  अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये की वृद्धि होगी,” मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा।

 

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) की दिसंबर 2014 में जारी एक रिपोर्ट जिसका शीर्षक था भारत में कृषि परिवारों की स्थिति के महत्वपूर्ण संकेतक में कहा  गया है कि  केरल एक ऐसा राज्य था जहां प्रति कृषि परिवार उच्चतम औसतन बकाया ऋण था।

 

भारत  में कृषि परिवारों की स्थिति,  2013

 

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Source: NSSO; Loan amount in Rs.

 

राष्ट्रीय औसत 57.8% की तुलना में  केरल में कृषि परिवारों  के रूप में वर्गीकृत केवल 27% ग्रामीण परिवार थे  केरल में कुल 5,137,700 ग्रामीण परिवारों की में से केवल 1,404,300 परिवार,  कृषि परिवार थे। (इसका अर्थ है कि  केरल में केवल 5.5 मिलियन लोग ही कृषि पर निर्भर हैं।)

 

भारत में कृषि और ग्रामीण परिवार , 2013

 

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Source: NSSO

 

केरल के उपरांत 34.7% कृषि परिवार के रूप में वर्गीकृत ग्रामीण परिवार के साथ तमिलनाडु है जो पूर्व आंध्र प्रदेश (41.5%), पश्चिम बंगाल (45%) और पंजाब (51.1%) से भी आगे है। पूरे भारत में कुल प्रतिशत 57.8% है।

 

कितना कृषि क्रेडिट केरल में बकाया है? यहाँ केरल राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (केएससीएआरडी बैंक) के आंकड़ों पर एक नजर डालते है:

 

केएससीएआरडी बैंक पर बकाया ऋण, वित्त वर्ष 2007-वित्त वर्ष 2011 (करोड़ रुपए)

 

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Source: KSCARD Bank

 

इस बीच, 2013 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के एक अध्ययन में पाया गया केरल में केंद्रीय क्रेडिट निकायों के ऋण का सकल स्तर  वर्ष 2009-10 से वर्ष  2011-12 के बीच  34,401 करोड़ रुपए ($ 5.5बिलियन) था । इसमें से केवल रुपये 6926 करोड़ रुपए ($ 1.12बिलियन) कृषि ऋण के लिए था।

 

केरल जहाँ 33 लाख की आबादी है, वह  शिक्षा, स्वास्थ्य और लिंग अनुपात जैसे सभी सामाजिक संकेतकों पर आगे है।  राष्ट्रीय दर 73% के मुकाबले शिक्षा दर 90.86% है, लिंग अनुपात (प्रति 1,000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या ) 943 के राष्ट्रीय औसत की तुलना में 1058 है।

 

केरल में, शिशु मृत्यु दर, प्रति 1000 जीवित जन्मों पर शिशु मृत्यु अनुमान,  राष्ट्रीय औसत 40 की तुलना में केवल 12 है।

 

केरल में मातृ मृत्यु दर अनुपात,   जन्म देने वाली प्रति 10,000 महिलाओं में से  15-49 आयु वर्ग में मरने वाली महिलाओं की संख्या राष्ट्रीय औसत 167 की तुलना में 61 है।

 

प्रश्न यह है कि – क्या  कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) का प्रयोग केरल में काम करेगा? और क्या उसे पहली संप्रग सरकार के विवादास्पद  520,000 करोड़ रुपये ($ 8.39बिलियन) के कृषि ऋण-माफी योजना की बजाय देश भर में दोहराया जा सकता है?

 

छवि आभार: फ़्लिकर / ऐनी रॉबर्ट्स
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