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कैसे भारतीय शहरों से गायब हो रहें हैं पेड़

दीपा पद्मांबन,

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* पिछले 20 वर्षों में कोलकाता में पेड़ फैलाव 23.4 फीसदी से गिर कर 7.3 फीसदी हुआ है; निर्मित क्षेत्र में 190 फीसदी वृद्धि हुई है। वर्ष 2030 तक कोलकाता क्षेत्र का वनस्पति प्रवर्धन 3.37 फीसदी हो जाएगा।

 

* पिछले 20 वर्षों में अहमदाबाद में पेड़ फैलाव 46 फीसदी से गिर कर 24 फीसदी हुआ है; निर्मित क्षेत्र में 132 फीसदी वृद्धि हुई है। वर्ष 2030 तक कोलकाता क्षेत्र का वनस्पति प्रवर्धन 3 फीसदी हो जाएगा।

 

* पिछले 22 वर्षों में भोपाल में पेड़ फैलाव 66 फीसदी से गिर कर 22 फीसदी हुआ है। 2018 तक यह शहरी क्षेत्र का 11 फीसदी हो जाएगा।

 

* पिछले 20 वर्षों में हैदराबाद में पेड़ फैलाव 2.71 फीसदी से गिर कर 1.66 फीसदी हुआ है। 2024 तक यह शहरी क्षेत्र का 1.84 फीसदी हो जाएगा।

 

यह निष्कर्ष इंडियन इंसट्यूट ऑफ साइंस के एक अध्ययन में सामने आया है। इस अध्ययन में, चार भारतीय शहरों में शहरीकरण की दर देखने के लिए उपग्रह जनित सेंसर का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही दशकों पुरानी चित्रों की तुलना और अतीत और भविष्य के विकास के नमूनों की जांच की गई है।

 

टी वी रामचंद्रन, एनर्जी एंड वेटलैंड्स रिसर्च ग्रूप, सेंटर फॉर इकोलोजी साइंस के प्रोफेसर, और उनकी टीम ने “परिवर्तन के एजेंट” और “विकास के संचालक” जैसे कि सड़क नेटवर्क, रेलवे स्टेशनों, बस स्टॉप, शैक्षिक संस्थानों और उद्योगों; रक्षा प्रतिष्ठानों, आरक्षित वन, घाटी क्षेत्रों और पार्कों का अध्ययन किया है।

 

शोधकर्ताओं ने भूमि के उपयोग को चार समूहों में वर्गीकृत किया: शहरी या “निर्मित” जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं – आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों, पक्का सतहों और” निर्मित क्षेत्र के साथ मिश्रित पिक्सल” यानि निर्मित क्षेत्र जिसमें तीन श्रेणियों में से कोई एक क्षेत्र होते हैं – पानी जिसमें टैंक, झीलों, जलाशयों, और निकासी शामिल है ; वनस्पति जिसमें जंगल और वृक्षारोपण भी शामिल है; और अन्य जिसमें चट्टानों, खदान गड्ढ़े, निर्माण स्थलों पर खुले मैदान, कच्ची सड़के, फसल भूमि, पौधों की नर्सरी और खाली भूमि भी शामिल है।

 

यह बातें चारों शहरों में पाई गई हैं।

 

कोलकाता: कोलकाता की जनसंख्या, अब 14.1 मिलियन (या 141 लाख) है एवं अब देश का तीसरा सबसे बड़ी शहर है। शहरी निर्मित क्षेत्र, जैसा कि हमने कहा, 1990 से 2010 के बीच 190 फीसदी की वृद्धि हुई है।

 

वर्ष 1990 में, 2.2 फीसदी भूमि पर निर्माण किया गया है; 2010 में 8.6 फीसदी पर निर्माण हुआ है, जिसकी 2030 तक 51.27 फीसदी की वृद्धि की भविष्यवाणी की है।

 

कोलकाता में भूमि के उपयोग का ब्रेकअप

 

 

Kolkata

 

हैदराबाद: 2011 हैदराबाद की जनसंख्या 7.74 मिलियन (या 77.4 लाख) था और इसके साथ ही 2014 में 10 मिलियन (100 लाख) लोगों के साथ, हैदराबाद एक मेगा सिटी होने की ओर अग्रसर है। 1999 से 2009 के बीच निर्मित क्षेत्र में 400 फीसदी की वृद्धि हुई है।

 

1999 में, 2.55 फीसदी भूमि पर निर्माण हुआ है ; 2009 में 13.55 फीसदी पर हुआ है, 2030 तक 51.27 फीसदी वृद्धि की भविष्यवाणी की गई है।

 

हैदराबाद में भूमि के उपयोग का ब्रेकअप

 

 

Hyderabad

 

अहमदाबाद: वर्ष 2011 में 5.5 मिलियन (या 55 लाख) की आबादी के साथ, यह शहर जनसंख्या अनुसार देश का छठा सबसे बड़ा शहर एवं तीसरा सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला शहर है। 1990 से 2010 के बीच, अहमदाबाद के शहरी इलाकों में निर्मित क्षेत्रों में 132 फीसदी की वृद्धि हुई है।

 

1990 में, 7.03 फीसदी भूमि निर्मित हुई है; 2010 में 16.34 फीसदी हुई जोकि 2024 तक 38.3 फीसदी की वृद्धि की भविष्यवाणि की गई है।

 

अहमदाबाद में भूमि के उपयोग का ब्रेकअप

 

 

Ahmedabad

 

भोपाल: भारत की हरित शहरों में से एक है, और 1.6 मिलियन (या 16 लाख) लोगों के साथ, जनसंख्या अनुसार यह देश का 16 वां सबसे बड़ा शहर है। मौजूदा तारीख में, अन्य शहरों की तुलना में भोपाल की स्थिति बेहतर है, लेकिन संघनन प्रवृति स्पष्ट है: 1992 में, शहर का 66 फीसदी भाग में वनस्पति फैलाव था (1977 में, यह 92 फीसदी था); अब यह गिर कर 21 फीसदी हो गया है और नीचे गिर रहा है।

 

भोपाल में भूमि के उपयोग का ब्रेकअप

 

 

Bhopal

 

भारत का शहरीकरण अपने शहरों के संघनन का संचालक

 

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ोंके अनुसार, 2010 में समाप्त हुए दशक के दौरान भारत की शहरी आबादी में 26 फीसदी की वृद्धि हुई है, और 2010 से 2020 के बीच 62 फीसदी और 2020 से 2030 के बीच 108 फीसदी वृद्धि होने की संभावना है।

 

भारत में शहरी आबादी

 

 

भारत के सबसे तेजी से बढ़ता शहर पारंपरिक रूप से बैंगलोर है। हाल ही के इसके संघनन का कोई अनुमान नहीं है, लेकिन 2012 में किए गए इस अध्ययनके अनुसार, रामचंद्रन और उनके टीम ने पिछले चार दशकों को दौरान, वनस्पति में 66 फीसदी और जल निकायों 74 फीसदी की गिरावट के साथ, निर्मित क्षेत्रों में 584 फीसदी का वृद्धि पाया है।

 

बैंगलोर में शहरी निर्मित क्षेत्र में सबसे अधिक वृद्धि 1973 से 1992 के बीच हुआ है – 342.83 फीसदी। तब से हर दशक में वृद्धि होती रही है, 1992 से 2010 के बीच 100 फीसदी का औसत है: 1992 से 1999 के बीच 129,56 फीसदी; 1999 से 2002 के बीच 106.7 फीसदी; 2002 से 2006 के बीच 114,51 फीसदी; औऱ 2006 से 2010 तक 126,19 फीसदी।

 

बैंगलोर की आबादी 2001 में 6.5 मिलियन (या 65 लाख) से बढ़ कर 2011 में 9.6 मिलियन (या 96 लाख) हुआ है, एक दशक के दौरान 46.68 फीसदी की वृद्धि हुई है ; जनसंख्या घनत्व 2001 में प्रति वर्ग किलोमीटर 10,732 व्यक्तियों से बढ़ कर 2011 में प्रति वर्ग किलोमीटर 13,392 व्यक्ति हुआ है।

 

बैंगलोर में भूमि के उपयोग का ब्रेकअप

 

 

Bangalore

 

रामचंद्रन द्वारा 2013 का यह अध्ययन अनियोजित शहरीकरण के अनुमान को सूचीबद्ध करता है:

 

  • झीलों और हरियाली का नुकसान।

  • बाढ़: जैसा कि खुले मैदान, जल निकायों, झीलों, और वनस्पति, अवासीय लेआउट, सड़कों, और पार्किंग के लिए परिवर्तित हो रहे हैं। वर्षा के अवशोषण कम हो रहा है। प्राकृतिक नालों के अतिक्रमण, स्थलाकृति के परिवर्तन जैसे कि गगनचुंबी इमारतों के निर्माण, सामान्य बारिश के दौरान भी,बाढ़ का कारण बनता है।

  • भूजल स्तर में गिरावट।

  • गर्मी द्वीप: ऊर्जा की बढ़ती खपत, ऊर्जा निर्वहन का कारण बनता है जो उच्च सतह और वायुमंडलीय तापमान के साथ गर्मी द्वीपों का निर्माण करता है।

  • कार्बन फुटप्रिंट में वृद्धि: बिजली की उच्च खपत, भवन का निर्माण, अधिक वाहन और यातायात बाधाएं कार्बन उत्सर्जन में योगदान करते हैं – कचरे के कुप्रबंधन से स्थिति बिगड़ रही है।

(पद्मांबन बेंगलुरु स्थित पत्रकार है। इनकी सार्वजनिक स्वास्थ्य रिपोर्टिंग में विशेषज्ञता है।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 29 मार्च 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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