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क्या बिहार में चलेगा भाजपा का जादू?

सौम्या तिवारी,

620 Amit Shah

पिछले सप्ताह, बिहार के छपरा ज़िले में भाजपा अध्यक्ष, अमित शाह जनसभा को संबोधित करते हुए। छवि – भाजपा

 

भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार 49 सीटों के लिए हुए बिहार चुनाव के पहले चरण में 57 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया है।

 

12 अक्टूबर से 5 नवंबर तक पांच चरणों में आयोजित होने वाली बिहार में विधानसभा चुनाव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा) के लिए मुख्यत: दो कराणवश महत्वपूर्ण होगा।

 

पहला कारण यह कि वर्ष 2014 में चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में से तीन राज्यों में हुई जीत का सिलसिला बरकरार रखने एवं पार्टी की राजनीतिक शक्ति को मजबूत रखने के लिहाज से बिहार चुनाव में भाजपा का जीत हासिल करना महत्वपूर्ण है। और दूसरा कारण यह कि राज्य विधानसभा की सीटों में अधिक हिस्सेदारी, पार्टी की राज्यसभा में अधिक सीट सुनिश्चित करेगी।

 

104 मिलियन लोगों वाला भारत का तीसरा सर्वाधिक आबादी वाला राज्य बिहार से राज्यसभा के लिए 16 सदस्य निर्वाचित होते हैं। राज्यसभा में सबसे अधिक सदस्य उत्तर प्रदेश ( 31 ) एवं महाराष्ट्र ( 19 ) से निर्वाचित होते हैं।

 

राज्यसभा में कुल 245 सदस्य होते हैं। इसमें से 48 सांसदों के साथ राज्यसभा का एक-पांचवा भाग भाजपा के पास है। महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने के लिए सरकार को राज्यसभा में बहुमत की ज़रुरत होती है जैसे कि विवादास्पद भूमि बिल जिसे वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

 

बिहार में भाजपा का ईमानदार वोट बैंक है लेकिन ध्रुवीकरण के युग में वोटों का अस्थिर होना एक महत्वपूर्ण कारक होगा।

 

अब तक घोषित पाँच जनमत सर्वेक्षणों में चार BJP- LJP- HAM – RLSP गठबंधन के पक्ष मेंपरिणाम दिखे हैं।

 
बिहार विधानसभा चुनाव के जनमत सर्वेक्षणों के परिणाम, 2015
 

 

कैसे महाराष्ट्र, हरियाणा, और झारखंड में हुई भाजपा की जीत और दिल्ली में हार

 

राज्यसभा सांसदों के मामले में दूसरा सबसे बड़ा राज्य, महाराष्ट्र में 2014 के संसदीय चुनावों के बाद, विधानसभा चुनाव सबसे पहले हुए। और इस चुनाव में 15 वर्ष लंबे कांग्रेस एवं इसके पार्टनर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शासन को समाप्त करते हुए भाजपा ने जीत हासिल की।

 
महाराष्ट्र 2014 – पिछले चुनाव की तुलना में प्रमुख दलों को मिला लाभ एवं घाटा
 

सीटों एवं वोट प्रतिशत, दोनों ही मामलों में भाजपा स्पष्ट रुप से विजेता रही थी।

 

महाराष्ट्र के साथ हरियाणा में भी चुनाव हुए थे। हरियाणा में भी भाजपा को 43 सीटों का फायदा हुआ था।

 
हरियाणा 2014 – पिछले चुनाव की तुलना में प्रमुख दलों को मिला लाभ एवं घाटा
 

 

इंडियास्पेंड ने भाजपा की जीत के कारणों का विश्लेषण किया है – सबसे बड़ा अंतर मोदी ही था।

 

2014 में जम्मू-कश्मीर में हुए चुनावों मतदाताओं की खासी उपस्थिति एवं भागीदीरी देखी गई थी। यहां पिछले चुनाव के मुकाबले भाजपा को 16 फीसदी सीटों के फायदे के साथ ही उच्च वोट शेयर भी मिला है।

 
जम्मू-कश्मीर 2014 – पिछले चुनाव की तुलना में प्रमुख दलों को मिला लाभ एवं घाटा
 

 

झारखंड में भी चुनाव, जम्मू कश्मीर के साथ ही हुए थे। यहां भी भाजपा ने मजबूत क्षेत्रीय दलों पर जीत दर्ज की।

 
झारखंड 2014 – पिछले चुनाव की तुलना में प्रमुख दलों को मिला लाभ एवं घाटा
 

 

2014 में मिले राष्ट्रीय जीत के बाद, 2015 में दिल्ली चुनाव में ही भाजपा फ्लॉप रही है। हालांकि पार्टी के वोट शेयर में कमी नहीं हुई है लेकिन आम आदमी पार्टी ( एएपी ) दूसरे पार्टी के मतदाताओं को अस्थिर करने एवं अपनी तरफ करने में सक्षम रहा है।

 
दिल्ली 2015 – पिछले चुनाव की तुलना में प्रमुख दलों को मिला लाभ एवं घाटा
 

 

2013 में दिल्ली के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के आने से भाजपा और कांग्रेस दोनों को काफी नुकसान उठाना पड़ा लेकिन यह केवल 28 सीटें ही जुटा पाई।

आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई जो अधिक दिनों तक नहीं चल पाई। 2015 में हुए पुन: चुनाव में 70 सीटों में से 67 सीट पर जीत पा कर एएपी पूर्ण बहुमत में आई।

 

 
( तिवारी इंडियास्पेंड के साथ नीति विश्लेषक हैं )
 
यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 13 अक्तूबर 2015 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 
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