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क्या समझौते से आएगी नागालैंड में शंति

चैतन्य मल्लापुर,

620Naga

 

हाल ही में, 3 अगस्त 2015 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार एवं नागालैंड के उग्रवादी संगठन, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ( एनएससीएन, इसाक मुइवा समूह) के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया गया है। पिछले 68 सालों में सरकार एवं  एनएससीएन के बीच हुआ यह चौथा समझौता है।

 

हालांकि इस शांति समझौते का विस्तार विवरण अभी तक मौजूद नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि इस अहम समझौते के बाद उत्तर पूर्वी राज्यों में हालात को काबू करने में सरकार को काफी हद तक सफलता मिलेगी। सरकार एवं एनएससीएन के बीच हुए समझौते का प्रतिद्वंद्वी गुटो पर क्या प्रतिक्रिया हुई है यह भी अब तक स्पष्ट नहीं है। गौरतलब है कि 4 जून 2015 को एनएससीएन ( खापलंग ) द्वारा किए गए हमले में 18 भारतीय सैनिक मारे गए थे।

 

समझौते पर हुए हस्ताक्षर के वक्त मौजूद प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने नागा नेताओं की साहस एवं बुद्धि की सरहाना की। मोदी ने उनके सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।

 

एक नज़र डालते हैं सरकार एवं नागा विद्रोही संगठन के बीच हुए पूर्व समझौतों पर :

 

Year/ Accord / Events Agreement Outcome
In June 1947, a Nine-Point Agreement was signed between Governor of Assam and Naga National Council (NNC). Right of the Nagas to develop themselves according to their freely expressed wishes is recognised. The agreement does not last, as the NNC interpret it as their right to complete the process of independence after the interim period of 10 years, while the Government of India insists that it only confers the right to suggest administrative changes within the country’s constitution.
In August 1947, the NNC, under Angami Zapu Phizo, rebels, demanding a sovereign Naga state.
In March 1956, Phizo forms the Naga Federal Government (NFG) and a Naga Federal Army (NFA). In April 1956, The Indian government sends the army to crush the insurgency. Phizo escapes to (then) East Pakistan in December and, subsequently, in June 1960, to London.
In 1957, the Indian government accepts a proposal from the Naga People’s Convention (NPC), an organisation of Naga leaders, to merge Assam’s Tuensang Division with the Naga Hills district, now part of Nagaland. The Naga leaders believe that Nagas inhabiting contiguous areas should be allowed to join the proposed new state. This is not acceptable to the Indian government at that stage.
In 1963, Nagaland attains statehood.
In 1964, a ceasefire agreement is signed.
In 1975, the Shillong Accord is signed between the central government and Naga National Council (NNC). According to this agreement, those representing the underground organisations (said to be close to the NNC) agreed to accept the Indian constitution and surrender arms. It is agreed that representatives of underground organisations should have reasonable time to formulate other issues for discussion for final settlement.
In 1980, Thuingaleng Muivah, Isak Chisi Swu, S SKhaplang form the NSCN. NSCN splits, KholeKonyak and Khaplang form NSCN (K) in 1988.

Source: National Institute of Advanced Studies/The Indian Express

 

साल 1997 में सरकार एवं एनएससीएन ( आईएम ) के बीच संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किया गया था जिसे जून 2007 में अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया गया था।

 

एनएससीएन (आईएन ) के साथ संघर्ष विराम समझौते के तहत विद्रोही घटनाओं में कमी दर्जी की गई थी।

 

एनएससीएन के अन्य गुट – एनएससीएन ( खोले-किटोवी ), एनएससीएन ( रिफॉर्मेशन ) और एनएससीएन ( खापलांग ) हैं।  एनएससीएन रिफॉरमेशन एवं खोले-किटोवी के साथ संघर्ष विराम समझौता 27 अप्रैल 2016 तक मान्य है।

 

हालांकि संघर्ष विराम समझौते के बावजूद क्षेत्र में विद्रोही घटनाएं जारी है। इन घटनाओं का मुख्य कारण इस क्षेत्र का मूल रुप से देश की विद्रोह संवेदनशील क्षेत्रों में होना है। साथ ही एनएससीएन ( खापलांग ) संघर्ष विराम समझौते के लिए कभी राजी नहीं हुआ था।

 

नागालैंड – उत्तर पूर्वी क्षेत्र का तीसरा सबसे खतरनाक इलाका

 

गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार मणिपुर एवं असम के बाद उत्तर पूर्वी क्षेत्र का सबसे खतरनाक इलाका नागालैंड है। पिछले आठ सालों में नागालैंड में 1,271 उग्रवादी घटनाएं दर्ज की गई हैं जबकि मणिपुर के लिए यह आंकड़े 3,812 एवं असम के लिए 2,353 दर्ज किए गए हैं।

 

साल 2007 से जून 2015 तक नागालैंड में विद्रोही हमलों से होने वाली मौत की संख्या 393 दर्ज की गई है जबकि गिरफ्तारियों की संख्या 2,118 दर्ज की गई है। इस अवधि के दौरान 13 सुरक्षाकर्मियों की मारे जाने की खबर रिपोर्ट की गई है । साथ ही 158 नागरिकों की मौत एवं 629 अपहरण के मामले दर्ज किए गए हैं।

 

नागालैंड में विद्रोही घटनाएं

 

 

उत्तर पूर्वी राज्यों में दो मौत रोज़ाना

 

उत्तर पूर्वी क्षेत्र के सात राज्य – अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड एवं त्रिपुरा सात बहने या सेवन सिस्टरस के नाम से जानी जाती हैं। लेकिन कई सालों से सेवन सिस्टरस क्षेत्र लड़ाई के मैदान में तब्दील हो गया है।

 

उत्तर पूर्वी राज्यों में होने वाली नागरिगों की मौत में 54 फीसदी हिस्सेदारी केवल असम की है।

 

सिक्किम भी उत्तर पूर्वी क्षेत्र में ही आता है। उत्तर पूर्वी इलाके में सिक्किम आठवां राज्य है एवं विद्रोही घटनाओं से मुक्त है।

 

औसतन, उत्तरपूर्वीकेसातराज्योंमेंदोमौतेंरोज़ानाहोतीहैं : हरवर्षचरमपंथियों , नागरिकों और सुरक्षा बलों सहित इनराज्योंमें 569 लोग मौत की नींद सोते हैं।

 

साल 2007 से 30 जून 2015 के बीच इन राज्यों में 8,651 विद्रोही घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से 2,698 उग्रवादी थे। इस अवधि के दौरान 1,7819 गिरफ्तारियां दर्ज की गई जबकि 7,494 लोगों ने आत्मसमर्पण किया। मरने वाले नागरिकों की संख्या 1,832 दर्ज की गई जबकि 2,545 अपहरण के मामले दर्ज किए गए।

 

उत्तर पूर्वी राज्यों में आतंकी घटनाएं
 

 

मणिपुर को राहत नहीं

 

विभिन्न जनजातियों और समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हुए 15 हिंसक संगठनों के साथ मणिपुर की स्थिति सबसे खतरनाक है।

 

पिछले आठ सालों में मणिपुर से लगभग 1,192 उग्रवादियों को मार गिराया गया है जबकि 1,100 से अधिक को गिरफ्तार किया गया है।

 

आतंकवादियों द्वारा 18 भारतीय सैनकों की हत्या के प्रतिशोध में भारतीय सेना की 21 पैरा युनिट ने 9 जून को भारत- म्यांमार सीमा पर एक गुप्त सीमा पार से ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस ऑपरेशन में करीब 20 आतंकवादियों की मारे जाने की रिपोर्ट दर्ज की गई है।

 

माना जा रहा है कि मारे गए आतंकवादी मिश्रित समूह, कंगलेई यावोल कन्ना लुप ( केवाईकेएल ) समूह के नेतृत्व वाले मेइती आतंकवादी समूह के थे जबकि खुफिया एजेंसियों का इशारा एनएससीएन के खापलांग समूह की ओर है।

 

इंडियास्पेंड ने पहले ही अपनी खास रिपोर्ट में बताया है कि उत्तरी पूर्वी राज्य, भारतीय सैन्य सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है। पिछले आठ सालों में 300 से भी अधिक सेना, अर्धसैनिक एवं पुलिस अफसरों की हत्या हुई है।

 

तमाम करार एवं संघर्ष विराम समझौतों के बावजूद इन क्षेत्रों में विद्रोही घटनाएं जारी हैं। यहां तक कि 1997 में हुए सरकार एवं एनएससीएन ( आईएम ) के बीच हुए संघर्ष विराम समझौते के बाद भी कई विद्रोही घटनाएं होती ही रही हैं।

 

( मल्लापुर इंडियास्पेंड के साथ नीति विश्लेषक हैं )

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 5 अगस्त 2015 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

Image credit: Press Information Bureau

 

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