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क्या होना चाहिए नीतिश का लक्ष्य – आर्थिक प्रगति, रोज़गार

चैतन्य मल्लापुर,

FBNK4620

 

भारत के गरीब राज्यों में से एक, बिहार की बागडोर एक बार फिर नीतिश कुमार के हाथों में आने के बाद उनकी सुनियोजित योजना स्पष्ट होनी चाहिए – आगे की आर्थिक प्रगति, विशेष रूप से रोजगार के अवसर , धन सृजन और बुनियादी ढांचा एवं शिक्षा के अवसर प्रदान करने वाले नीतियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

 

यह इंडियास्पेंड द्वारा किए गए विश्लेषण से निकला एक संकेत है जो तीन राजनीतिक रूप से शक्तिशाली प्रशासनिक प्रभाग ( पटना, तिरहुत और दरभंगा ) की पहचान करती है जो हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में महागठबंधन की जीत के लिए महत्वपूर्ण रहा है।

 

243 विधानसभा सीटों के लिए 53 फीसदी हिस्सेदारी इन तीन प्रभागों की है और महागठबंधन ने इन 130 सीटों में से 68 फीसदी ( 88 ) जीत हासिल की है।

 

101 मिलियन लोगों की आबादी वाले राज्य, बिहार में (38 जिलों के साथ ) नौ प्रशासनिक प्रभाग है – भागलपुर , दरभंगा, कोसी, मगध, मुंगेर, पटना, पूर्णिया, सारण और तिरहुत ।

 

178 सीटों के साथ महागठबंधन ने विधानसभा में स्पष्ट दो -तिहाई बहुमत हासिल किया है। महागठबंधन के सभी सहयोगी दलों ने विश्वसनीय प्रदर्शन किया है – 80 सीटों के साथ राष्ट्रीय जनता दल ( आरजेडी ) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। जनता दल ( यूनाइटेड ) ने 71 सीटों पर जीत हासिल की और कांग्रेस ने 27 सीटों पर कब्ज़ा किया है।

 

प्रभाग अनुसार सीटों का ब्रेकअप

Source: Election Commission

 

महागठबंधन के लिए निर्णायक प्रभाग पटना (28) , दरभंगा (33) , तिरहुत (27) और मगध (20) रहे हैं। महागठबंधन की पक्ष में आए कुल 178 सीटों में से इन चार प्रभागों का 61 फीसदी योगदान रहा है।

 

छह ज़िलों के साथ तिरहुत एवं पटना सबसे बड़े प्रभाग हैं। तिरहुत में कुल 50 सीटें हैं वहीं पटना के पास 43 सीटें हैं।

 

भाजपा और आरजेडी दोनों ही तिरहुत में सबसे बड़ी पार्टियों के रूप में उभरी है। गौरतलब है कि दोनों ने 18 सीटों पर जीत हासिल की है।

 

21 मिलियन की आबादी वाले तिरहुल प्रभाग, छह ज़िलों के साथ उत्तर बिहार में स्थित है। यह छह ज़िले पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण , मुजफ्फरपुर , सीतामढ़ी, शिवहर, और वैशाली हैं।

 

महागठबंधन द्वारा जीते इलाकों में  है उच्च शिक्षा एवं समृद्धि

 

तिरहुत में सबसे अधिक चीनी का उत्पादन किया जाता है। वर्ष 2013-14 में गन्ने की कुल फसल में तिरहुत का योगदान 76 फीसदी रहा है। राज्य के गन्ने की फसल में पश्चिम और पूर्वी चंपारण जिलों का 66 फीसदी योगदान रहा है।

 

तिरहुत और पटना प्रभाग भी राज्य के प्रमुख आर्थिक संचालक हैं। 2013-14 में सम्पूर्ण बिहार में कम से कम 3133, मध्यम छोटे और लघु उद्यम (एमएसएमई) रजिस्टर किए गए थे। इनमें से 26 फीसदी पटना एवं 17 फीसदी तिरहुत में किए गए हैं। यह बिहार में पंजीकृत सभी एमएसएमई का लगभग 2 फीसदी है।

 

केपीएमजी की 2015 की रिपोर्ट के अनुसार पूरे भारत में 46 मिलियन एमएसएमई इकाइयां 106 मिलियन लोगो, ( औसतन प्रति उद्यम 2.3 लोग ) को रोज़गार प्रदान करती हैं।

 

अकेले 17 मिलियन की आबादी वाले प्रभाग पटना में 26 फीसदी इकाइयां हैं। वहीं तिरहुत के 17 फीसदी इकाइयां हैं। पटना राज्य की राजधानी होने के साथ सबसे बड़ा शहर एवं प्रभाग का मुख्यालय है ( पटना , नालंदा, भोजपुर, रोहतास , बक्सर, और कैमूर ज़िले हैं)।

 

इस प्रभाग में तीन जिले , रोहतास ( 73.4 %), पटना ( 70.7 %) और भोजपुर ( 70.5 %) में उच्च साक्षरता दर है।

 

पटना प्रभाग में दो ज़िले – बक्सर एवं भोजपुर – सबसे अधिक मूल्यवान कृषि प्रधान इलाके हैं जहां की कुल बुवाई क्षेत्र 70 फीसदी से ऊपर है। गौर हो कि राज्य का औसत बुआई क्षेत्र 60 फीसदी है।

 

पटना प्रभाग में महागठबंधन 65 फीसदी सीटों पर जीत हासिल करने में सक्षम रही है। इस संभाग में 15 सीटों के साथ आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी के रुप में उभरी है जबकि भाजपा के खाते में 12 एवं जनता दल ( यू ) के खाते में 11 सीटें आई हैं।

 

दरभंगा में 37 सीटों में से 33 सीटों पर महागठबंधन ने जीत हासिल की है। उत्तर बिहार में स्थित दरभंगा प्रभाग की आबादी 12 मिलियन है एवं तीन जिलों – दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर का संभागीय मुख्यालय है।

 

दरभंगा ज़िले की भूमि उपजाऊ है जबकि मधुबनी जिला अपनी प्राचीन शैली की पेंटिंग के लिए प्रसिद्ध है। हालांकि परिवहन के लिए बुनियादी सुविधाओं, संचार एवं बिजली की आपूर्ति के मामले में यह ज़िला पिछड़ा हुआ है।

 

आर्थिक संकेतक : बिहार बनाम अन्य गरीब राज्य

Source: Ministry of Labour & Employment; LokSabha; Economic Survey 2014-15; Niti Ayog; Note: Unemployment rate in (%), 2013-14; Per capita income in (Rs), 2013-14; Population below poverty line in (%), 2013.

 

18-29 आयु वर्ग में बिहार के युवाओं की बेरोज़गारी दर 17.5 फीसदी है। आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े आठ राज्यों ( इंपावर्ड एक्शन ग्रूप, ईएजी ) में बिहार तीसरे स्थान पर है।

 

बिहार की सालाना प्रति व्यक्ति आय ( रु 31,199 ), भारत के उनतीस राज्यों में सबसे कम है। जबकि देश के छोटे से राज्य गोवा ने उच्चतम प्रति व्यक्ति आय ( 2,24,138 रुपए ) दर्ज की है।

 

बिहार में प्रति व्यक्ति आय के मामले में व्यापक असमानता है। पटना ( 63,063 रु ), मुंगेर (करीब 22,051 रु ), औरबेगुसराय  ( 17,587 रु ) बिहार के तीन सबसे समृद्ध जिले हैं।

 

गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के मामले में बिहार तीसरे स्थान पर है ( गरीबी रेखा को ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति प्रति दिन 26 रुपये एवं शहरी क्षेत्रों में में प्रति व्यक्ति प्रति दिन और 31 रुपये पर रहने की क्षमता के रूप में परिभाषित किया गया है )। गौर हो की गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के मामले में पहले स्थान पर छत्तीसगढ़ ( 39.9 फीसदी ) और दूसरे पर झारखंड ( 36.9 फीसदी ) है। ग्रामीण बिहार में कम से कम 32 मिलियन लोग गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं।

 

( मल्लापुर इंडियास्पेंड के साथ नीति विश्लेषक हैं। )
 
यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 20 नवम्बर 2015 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।
 
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