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चार आधार पर टिका है भारत में कैशलेस लेन-देन का विस्तार

प्रथमेश मुले,

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भारत सरकार देशवासियों को कम नकद इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इंडियास्पेंड ने इस विस्तार के चार आधारों पर गौर किया है,पांच वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक बैंक स्थानान्तरण में पांच गुना वृद्धि ,एटीएम कार्ड और स्वाईप मशीनों का दोहरीकरण और चार वर्षों में क्रेडिट कार्ड में 50 फीसदी की वृद्धि।

 

प्रधानमंत्री द्वारा भारत के 86 फीसदी नोटों को अमान्य घोषित किए जाने को 32 दिनों से ज्यादा समय बीत चुका है। इस संबध में इंडियास्पेंड ने अपने विशेष कवरेज में व्यापक आर्थिक व्यवधान के संबंध में विस्तार से बताया है। साथ ही हमने यह भी बताया है कि किस प्रकार विमुद्रीकरण की कहानी काला धन को समाप्त करने से शुरु हुई और अब कैशलेस पर आ गई है।

 

 

डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, बैंक हस्तांतरण, इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग में गति आएगी। हालांकि, एक संस्था मैकिन्से की 2013 की रिपोर्ट के अनुसार, खुदरा लेन-देन के लिए नकदी का उपयोग 95 फीसदी था, जबकि 2016 में यह 68 फीसदी पाया गया है, जैसा कि बिजनेस स्टैंडर्ड ने एक ब्रोकरेज समूह सीएलएसए के हवाले से इस रिपोर्ट में बताया है।

 

हालांकि, जैसा कि हमने भी पाया है, सरकार की योजनाएं महत्वपूर्ण बाधाओं पर फोकस नहीं करती हैं, जो भविष्य विकास में परेशानी का कारण बन सकती हैं। यहां भारत के कैशलेस अर्थव्यवस्था विस्तार के चार संकेतक और संभवत: सामना करने वाली बाधाओं के संबंध में चर्चा की जा रही है।

 

1. इलेक्ट्रॉनिक बैंक स्थानान्तरण में पांच गुना वृद्धि, 2011-16- अक्टूबर 2016 के भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों से 2016 तक राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) प्रणाली के माध्यम से बैंक हस्तांतरण में पांच गुना वृद्धि हुई है। यह वृद्धि मूल्य में 4.5 गुना है। जबकि रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट प्रणाली (आरटीजीएस) का उपयोग कर स्थानान्तरण में संख्या में 70 फीसदी की वृद्धि हुई  और मूल्य में 50 फीसदी। आरटीजीएस, जिसमें 2 लाख रुपए की न्यूनतम आवश्यकता होती है, ‘वास्तविक समय ’ में या तुरंत स्थानान्तरण की अनुमति देता है। जबकि एनईएफटी, जिसमें न्यूनतम रकम की शर्त नहीं होती, तय समय के दौरान स्थानान्तरण किया जा सकता है। अक्टूबर 2016 में 1.19 बिलियन की एनईएफटी लेन-देन दर्ज की गई है, जबकि वर्ष 2011 में ये आंकड़े 199 मिलियन था। इसी अवधि के दौरान आरटीजीएस लेन-देन 511 मिलियन से बढ़ कर 864 मिलियन हुआ है। जैसा कि नाम से पता चलता है  इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण में इंटरनेट की आवश्यकता होती है।

 

 

Source: Reserve Bank of India

 

लेकिन … ग्रामीण क्षेत्रों में 833 मिलियन भारतीयों में से केवल 13 फीसदी (108 मिलियन) के पास इंटरनेट की पहुंच है। नोटबंदी की सबसे ज्यादा मार ग्रामीण इलाकों पर पड़ी है। कम से कम 73 फीसदी भारतीयों के पास इंटरनेट की पहुंच नहीं है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने 3 दिसंबर 2016 को विस्तार से बताया है। मार्च 2016 के दूरसंचार नियामक अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 342 मिलियन लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। शहरी भारत में  58 फीसदी इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं।

 

2. एटीएम और प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) टर्मिनल दोगुना, 2011-16: भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2016 में, 1.4 मिलियन पीओएस टर्मिनल (डेबिट और क्रेडिट कार्ड स्वाइप करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला मशीन ) और 200,000 एटीएम थे। पांच वर्षों में इनकी संख्या दोगुनी हुई है। पहले प्रति 12,000 भारतीयों के लिए एक एटीएम मशीन था जो कि अब प्रति 6500 लोगों पर एक हुआ है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2005 में प्रति 100,000 वयस्कों पर एटीएम की संख्या दो थी, जो 2014 में बढ़ कर 18 हुई है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने  26,000 से अधिक एटीएम खोले है। यह संख्या चार बैंकों (एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, एक्सिस और कोटक) द्वारा खोले गए एटीएम की तुलना में अधिक है। भारत का सबसे बड़ा बैंक, भारतीय स्टेट बैंक ने किसी भी अन्य बैंक की तुलना में सबसे ज्यादा पीओएस टर्मिनल का भी प्रसार किया है। सरकार ने अतिरिक्त 1 मिलियन पीओएस टर्मिनल को जोड़ने की की घोषणा की है।

 

 

Source: Reserve Bank of India

 

लेकिन….एटीएम के लिए वैश्विक औसत भारत का 2.5 गुना है, ब्राजील में प्रति व्यक्ति  पीओएस टर्मिनल 39 गुना है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में, एटीएम का वैश्विक औसत प्रति 100,000 लोगों 44 था। एक संस्था, अर्न्स्ट एंड यंग के वर्ष 2015 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 में ब्राजील में, जिसकी आबादी भारत से 84 फीसदी कम है,  पीओएस टर्मिनल कम से कम 39 गुना ज्यादा था। पीओएस टर्मिनल की संख्या 32,995 थी। चीन और रूस में पीओएस मशीन दर प्रति दस लाख लोगों पर 4,000 था। जापान, अमरीका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में प्रति 100,000 लोगों पर 100 से अधिक एटीएम था।

 

3. पांच वर्षों में डेबिट कार्ड में 170 फीसदी वृद्धि; क्रेडिट कार्ड में 50 फीसदी वृद्धि: भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2011 में क्रेडिट कार्ड 17.7 मिलियन से बढ़ कर अगस्त 2016 में 26.4 मिलियन हुआ है। इसी अवधि के दौरान डेबिट कार्ड 263 मिलियन से बढ़ कर 712 मिलियन हुआ है।

 

 

Source: Reserve Bank of India

 

लेकिन … 35 उच्च आय वाले देशों में 53 फीसदी वयस्क के पास क्रेडिट कार्ड है, 2.1 फीसदी भारतीय करते हैं का क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल। संख्या में वृद्धि के बावजूद 1.2 बिलियन के इस देश में इस्तेमाल की यह दर 26 मिलियन 2.1 फीसदी है। विश्व बैंक के इस आंकड़ों के अनुसार, 35 अमीर देशों का एक समूह ‘आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन’ (ओईसीडी) के देशों में 53 फीसदी वयस्कों के पास क्रेडिट कार्ड है। इकोनॉमिक टाइम्स की वर्ष 2013 की यह रिपोर्ट कहती है कि चार में से एक ग्राहक को बकाया राशि न देने पर दोषी और 10 मिलियन क्रेडिट कार्ड रद्द किए जाने के साथ भारत में क्रेडिट कार्ड विकास, वर्ष 2008 में आर्थिक मंदी के बाद धीमा हुआ है। भारत में डेबिट कार्ड मुख्य रूप से एटीएम से नकदी निकासी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। केवल शहरी क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल कैशलेस भुगतान के लिए किया जाता है, जैसा कि मार्च 2016 के सरकारी आंकड़े पुष्टि करते हैं। वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान, एटीएम के माध्यम से 25 लाख करोड़ रुपए निकाले गए हैं। यह आंकड़े पीओएस लेनदेन (3.9 करोड़ लाख रुपए) की तुलना में 5.4 गुना अधिक है।

 

4. मोबाइल फोन बैंकिंग लेन-देन तिगुना, मूल्य अनुसार 25 फीसदी, वर्ष 2012-16: मोबाइल फोन संचालित लेन-देन वर्ष 2012 में 4,185 बिलियन रुपए से बढ़कर अक्टूबर 2016 में 5,243 बिलियन रुपए हुए हैं। याद रहे, यहां 600 मिलियन सक्रिय मोबाइल फोन हैं।  हालांकि, वर्ष 2012 से 2016 के बीच मोबाइल बैंकिंग लेनदेन 2.2 गुना वृद्धि हुई है । 44.6 मिलियन से 1.4 बिलियन। लेकिन लगातार दो वर्षों में इनमें गिरावट भी हुई है। वर्ष 2015 में 308 मिलियम का लेन-देन हुआ और वर्ष 2016 अक्टूबर तक 449 मिलियम का लेन-देन देखा गया ।

 

भारत में मोबाइल बैंकिंग लेनदेन, 2012-16

Source: Reserve Bank of India

 

लेकिन … केवल 154 मिलियन भारतीयों के पास है ब्रॉडबैंड, बांग्लादेश, चीन की तुलना में यहां धीमी गति है। अधिकांश बैंकिंग एप्प के लिए स्मार्टफोन की जरुरत होती है। एक संस्था, प्यू रिसर्च, की और से वर्ष 2016 सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में 17 फीसदी से अधिक वयस्कों के पास स्मार्टफोन नहीं है। मार्च 2016 की ट्राई की रिपोर्ट के अनुसार,  930 मिलियन मोबाइल फोन उपभोक्ताओं में से केवल 154 मिलियन ग्राहकों (16.5 फीसदी) के पास ब्रॉडबैंड कनेक्शन है। इससे मोबाइल बैंकिंग की उपयोग सीमित होती है। एक और बाधा मोबाइल फोन में पेज लोड होने का औसत समय भी है। एक वैश्विक सामग्री वितरण नेटवर्क सेवा प्रदाता ‘अकामाई टेक्नोलॉजी’ द्वारा वर्ष 2016 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पेज लोड होने का औसत समय 5.5 सेकंड है जबकि चीन में 2.6 सेकंड, श्रीलंका में 4.5 औऱ बांग्लादेश में 4.9 सेकेंड है।

 

(मुले 101Reporters.com से जुड़े हैं और दिल्ली में रहते हैं। 101Reporters.com जमीनी स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों का राष्ट्रीय नेटवर्क है।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 10 दिसंबर 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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