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छह वर्षों में, 2016 में सेना में मरने वालो की संख्या सबसे अधिक

अभिषेक वाघमारे,

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बिहार के भोजपुर ज़िले में हवलदार अशोक कुमार सिंह के अंतिम संस्कार के दौरान तोपों की सलामी देते सेनाकर्मी। अशोक कुमार सिंह उन 18 सैनिकों में से हैं जो उत्तरी कश्मीर के उरी क्षेत्र में सेना के एक शिविर पर हुए आतंकवादी हमले में मारे गए हैं। इस वर्ष (सितंबर तक) जम्मू-कश्मीर में मुकाबला करते हुए मरने वाले सैनिकों की संख्या 64 है। 2010 के बाद यह आंकड़े सबसे अधिक हैं। गौर हो कि 2010 में यह संख्या 69 थी।

 

उत्तरी कश्मीर के उरी क्षेत्र में 18 सितंबर 2016 को हुए आंतकवादी हमले में 18 सैनिकों के शहीद होने के साथ इस वर्ष (18 सितंबर 2016 तक) जम्मू-कश्मीर में मुकाबला करते हुए मरने वाले सैनिकों की संख्या 64 हुई है। यह आंकड़े 2010 के बाद से सबसे अधिक हैं। गौर हो कि 2010 में यह संख्या 69 थी। यह जानकारी दक्षिण एशिया टेररिज्म पोर्टल (एसएटीपी) में सामने आई है।

 

एसएटीपी के आंकड़ो के अनुसार, इसके विपरीत, 2016 में नियंत्रण रेखा (जम्मू-कश्मीर में भारत और पाकिस्तान के बीच वास्तविक सीमा, एलसोसी) पर नागरिकों के मारे जाने की संख्या पिछले तीन दशकों में सबसे कम रही है। 1990 और 2007 के बीच, औसतन हर साल 800 नागरिकों की मौत हुई है।

 

छह वर्षों में सेना में मरने वाले सैनिकों की संख्या सबसे अधिक

Source: South Asia Terrorism Portal *Note: Upto September 18, 2016

 

एसएटीपी पोर्टल के अनुसार, पिछले तीन दशकों के दौरान, 1990 से 2010 के बीच 20 वर्ष का समय सबसे अधिक हिंसक रहा है जबकि 2011 के बाद की अवधि अपेक्षाकृत अधिक शांतिपूर्ण रहा है।

 

वर्ष 2012 सबसे अधिक शांतिपूर्ण साल रहा है। इस वर्ष 16 नागरिकों और 17 सैनिकों की मौत हुई थी। इसके बाद मरने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है।

 

2012 के बाद जनहानि

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Source: South Asia Terrorism Portal *Note: Upto September 18, 2016

 

सेना के एक बयान के अनुसार, इस वर्ष नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ के प्रयासों की श्रृंखला बंद हुई थी जिसमें पिछले तीन वर्षों में  “उल्लेखनीय वृद्धि” देखी गई थी।

 

बयान कहती है कि इस वर्ष सेना द्वारा 17 घुसपैठ के प्रयासों को बंद करने की क्रियाविधि में नियंत्रण रेखा पर कम से कम 31 आतंकवादी मारे गए हैं।

 

पिछले वर्ष की तुलना में घुसपैठ के प्रयासों में वृद्धि

Source: Indian Army *Note: Upto August 3, 2016

 

2014 और 2015 में, नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन सबसे अधिक हुआ है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने अगस्त  2015 और अप्रैल 2016 में विस्तार से बताया है।

 

प्यू ग्लोबल रिसर्च, अमेरिका स्थित वैश्विक अनुसंधान संगठन, द्वारा 19 सितंबर, 2016 को जारी शोध के अनुसार, भारतीय पाकिस्तान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीति से नाखुश हैं।

 

अगस्त 2016 को राजसभा के जवाब के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा और सड़क बुनियादी सुविधाओं के संबंध में, 97 फीसदी फ्लडलिट बाड़ और 63 फीसदी योजनाबद्ध सड़कों का काम पूरा हुआ है।

 

(वाघमारे इंडियास्पेंड के साथ विश्लेषक हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 20 सितंबर 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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