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जावड़ेकर के लिए चुनौती-विश्वविद्यालयों को विश्वस्तरीय बनाना

चारु बाहरी,

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नए शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने एक मंत्रालय का प्रभार लिया है, जो प्रधानमंत्री की विश्व स्तरीय भारतीय विश्वविद्यालयों को देखने की इच्छा में बाधा प्रतीत हो रहा था, और मंत्रालय का पहला कदम राष्ट्रीय विश्वविद्यायोंल को विश्व स्तर का बनाना हो सकता है।

 

भारतीय विश्वविद्यालयों के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय की नई अभ्यास, भारत रैंकिंग 2016 – छात्रों के लिए एक गाइड – में विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय रैंकिंग अभ्यास में इस्तेमाल की गई तीन प्रमुख मानदंड का अभाव है, जैसे कि टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग, जो 2004 के बाद से संकलित दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की एक सूची है।

 

राष्ट्रीय संस्थागत फ्रेमवर्क रैंकिंग में सूचीबद्ध भारतीय रैंकिंग मानदंड में डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित, संस्थागत आय और भारतीय विश्वविद्यालयों की वैश्विक प्रतिष्ठा की जानकारी का अभाव है, इंडियास्पेंड के विश्लेषण के मुताबिक जो सामान्य रुप में, फैक्लटी- छात्र, स्त्री-पुरुष और अंतरराष्ट्रीय स्थानीय छात्र अनुपात में कम होता है।

 

टाइम्स ‘ रैंकिंग के अनुसार, विश्व स्तर पर सबसे अच्छा विश्वविद्यालय कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी या कैलटेक है। भारत का सर्वश्रेष्ठ, भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बैंगलोर का स्थान 251 और 300 के बीच है – पहले 200 स्थान के बाद विश्वविद्यालयों बंधे हैं – जो कि टॉप 300 में एकमात्र भारतीय उच्च शिक्षा संस्था है। टाइम्स ‘ के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों की सूची में चीन ही केवल ऐसी ब्रिक्स अर्थव्यवस्था है जिसके तीन विश्वविद्यालयों का नाम शामिल है – पीकिंग विश्वविद्यालय , 42 वें स्थान पर , हांगकांग विश्वविद्यालय , 44 रैंक  और सिंघुआ विश्वविद्यालय, 47 स्थान पर है।

 

अगले पांच वर्षों में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 सार्वजनिक और निजी संस्थानों को विश्व स्तरीय शिक्षण और अनुसंधान संस्थान बनाना चाहते हैं, जिससे “आम भारतीयों को सस्ती विश्व स्तरीय डिग्री पाठ्यक्रमों तक पहुंच की अनुमति होगी”, लेकिन यह ऐसे देश के लिए अपर्याप्त है जहां 2014-15 उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण के अनुसार, 3.33 करोड़ छात्रों ने 716 विश्वविद्यालयों और 38,056 कॉलेजों में दाखिला लिया है।

 

विश्व और भारत की टॉप विश्वविद्यालय – एक तुलना

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भारत की टॉप 10 विश्वविद्यालय

 

 
भारत रैंकिंग 2016 में क्या है कमी?

 

डॉक्टरेट से सम्मानित : भारत रैंकिंग में  सम्मानित डॉक्टरेट की संख्या को नजरअंदाज किया गया है, जोकि यह इंगित करने का एक महत्वपूर्ण मानदंड है – डॉक्टरेट- स्नातक की अनुपात डॉक्टरेट से सम्मानित करने वाली अकादमिक स्टाफ अनुपात – कि “शिक्षाविदों की अगली पीढ़ी का पोषण करने के लिए है संस्था कैसे प्रतिबद्ध है” और टाइम्स हायर एजुकेशन मापदंड के अनुसार, “उच्चतम स्तर पर शिक्षण के प्रावधान जो स्नातकों के लिए आकर्षक और उन्हें विकसित करने में प्रभावी है।”

 

फुकरान कमर, महासचिव, भारतीय विश्वविद्यालय संघ कहते हैं, “देश में डॉक्टरेट की संख्या और गुणवत्ता भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। डॉक्टरेट, चल रहे अनुसंधान की गुणवत्ता और स्तर को संचालित करती है जो नवाचार और आर्थिक विकास को बढाता है।”

 

2013 में, भारत में मास्टरस और डॉक्टरेट कार्यक्रमों में 20425 और 22849 नामांकन किया था, जो कि सभी उच्च शिक्षा में नामांकन का 0.67 फीसदी है, कमर के अनुसार यह आदर्शत: 5 फीसदी होनी चाहिए। इनमें से कुछ नामंकन इंजीनियरिंग / टेक्नोलॉजी (5.9 फीसदी) , चिकित्सा / स्वास्थ्य विज्ञान (2 फीसदी) और कृषि विज्ञान / प्रौद्योगिकी (2 फीसदी) में हुए हैं, कमर कहते हैं, “विषय जो आम तौर पर अनुप्रयुक्त अनुसंधान के साथ जुड़े हैं और इसलिए दो आगे तकनीकी उन्नति पर जाते हैं। ” अधिकांश नामंकन शुद्ध विज्ञान (32 फीसदी) और कला / सामाजिक विज्ञान / मानविकी (35 फीसदी) में हुए हैं।

 

आय: भारत रैंकिंग ढांचे से, विश्वविद्यालयों के लिए किसी भी प्रकार की आय अनुपस्थित है। टाइम्स हायर एजुकेशन, “बुनियादी ढांचे और छात्रों और कर्मचारियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की एक व्यापक अर्थ” प्रदान करने के लिए संस्थागत आय पर विचार करता है; अनुसंधान आय, “विश्व स्तरीय अनुसंधान के विकास के लिए महत्वपूर्ण”; और “अनुसंधान के  भुगतान के लिए कारोबार की सीमा और वाणिज्यिक बाजार में धन को आकर्षित करने के लिए विश्वविद्यालय की क्षमता” अधिकृत करने के लिए उद्योग इनकम।

 

भारत रैंकिंग, वास्तविक सुविधाओं का आकलन कर सीखने के संसाधनों का मूल्यांकन करती है, एक ऐसे देश में निश्चित उपाय जहां कॉलेज केवल कागज़ पर हैं। हालांकि, संस्थागत आय, फैक्लटी पारिश्रमिक के लिए उपलब्ध संसाधनों के अतिरिक्त संकेत दे सकता है, जो परिणामस्वरूप, संकाय और शोध की गुणवत्ता निर्धारित करता है।

 

राजन सक्सेना, कुलपति, नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज कहते हैं, “अनुसंधान आय का आकलन भारत में अनुसंधान अनुदान की “कठोर वास्तविकता” को दिखाएगा।” सक्सेना आगे कहते हैं, “वैश्विक स्तर पर सरकारें अनुसंधान के लिए सबसे बड़े अनुदान निर्माताएं रहे हैं, लेकिन भारत में सरकार की राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच भेदभाव करने की आदत है। जहाँ भी क्षमता और प्रतिभा मौजूद, वहां अनुसंधान अनुदान दिया जाना चाहिए।”

 

इसी तरह, उद्योग आय का आकलन भारतीय शैक्षिक अनुसंधान लक्ष्य और उद्योग की जरूरतों के बीच असमानता दिखा सकते हैं।

 

सक्सेना कहते हैं, “भारतीय विश्वविद्यालयों में चल रहे अधिकांश अनुसंधान सैद्धांतिक और प्रकृति में वृद्धिशील है, जबकि उद्योग एक मौलिक अलग तरह के देख रहे मुद्दों के आधार पर अनुसंधान के परिणाम चाहता है।”

 

विष्णु पी पाल, स्कूल ऑफ नैचुरल साइंस, महिंद्रा इकोले सेंट्रल, हैदराबाद में महिंद्रा समूह के इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर, कहते हैं, “विकसित देशों में, उद्योग, विश्वविद्यालयों में भविष्य में संभावित इस्तेमाल के लिए नए विचारों के लिए देखते हैं। भारतीय उद्योग की मांग अधिक है; यह समस्या विशेष अनुसंधान की ओर देखती है जो किसी डिवाइस या प्रक्रिया के एक प्रोटोटाइप के रुप में समाप्त होता है ताकि उत्पाद विकास जल्दी बन सके।”

 

पाल कहते हैं, भारतीय विश्वविद्यालयों में अधिकांश अनुसंधान डॉक्टरेट छात्रों के द्वारा उनकी थीसिस के लिए होता है।

 

वैश्विक प्रतिष्ठा : वैश्विक प्रतिष्ठा सर्वेक्षण परिणाम टाइम्स सर्वेक्षण के शिक्षण स्कोर का 50 फीसदी और अनुसंधान के स्कोर का 60 फीसदी बनाता है। संस्थागत प्रतिष्ठा का मूल्यांकन करने के लिए भारत रैंकिंग में भारत में सभी प्रकार के हितधारकों का संलग्न है। विशेषकज्ञों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है। भारतीय विश्वविद्यालयों को विदेशों में उत्कृष्टता के लिए जाना जाना चाहिए।

 

भारत रैंकिंग 2016 में कमजोर स्पॉट मापा गया

 

भारत रैंकिंग में 2016 और टाइम्स ‘ की रैंकिंग दोनों में तीन मानदंडों को लिया गया है, लेकिन यह वे क्षेत्र हैं जहां भारतीय उच्च शिक्षा को कम लिया गया है।

 

फैकल्टी – छात्र अनुपात : भारत की अग्रणी विश्वविद्यालय, आईआईएससी, कर्मचारी -छात्र अनुपात दुनिया के सबसे अच्छे अनुपात के साथ तुलनीय है, 1: 8.2 बनाम कैलटेक 1: 6.9। हालांकि, भारतीय संस्थानों के क्रम में नीचे खराब प्रदर्शन किया है। उदाहरण के लिए, दिल्ली विश्वविद्यालय, भारत में छठे स्थान पर और टाइम्स में 601 से 800 रैंक बैंड में है, और फैक्लटी – छात्र अनुपात 1:22.9 है।
 

फैक्लटी – छात्र अनुपात

 

कमर कहते हैं, “उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए भारत की औसत छात्र – शिक्षक अनुपात 27 के आस-पास है, जो मंजूर शिक्षकों के पदों पर आधारित है।” अधिकृत शिक्षकों के पदों के आधार पर यह अनुपात लगभग दोगुना होगा। वह कहते हैं, “गुणवत्ता फैक्लटी को आकर्षित करने और विश्वविद्यालयों में 10 की औसत से अनुपात को बढ़ावा देने के लिए भारत को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक निवेश करने की जरूरत है।”

 

वैश्विक छात्र : अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण, अंतरराष्ट्रीय – घरेलू छात्र अनुपात, अंतरराष्ट्रीय -घरेलू कर्मचारियों का अनुपात, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग (अनुसंधान प्रकाशनों के लिए) का  टाइम्स संयोजन है। कैलटेक इस श्रेणी में 64, आईआईएससी 16.2 प्राप्त किया है। कैलटेक में 27 फीसदी अंतरराष्ट्रीय छात्र हैं जबकि आईआईएससी में 1 फीसदी हैं।
 

अंतरराष्ट्रीय छात्रों का प्रतिशत

 

राजीव डासाने , डीन, अंतरराष्ट्रीय संबंध, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), बॉम्बे, कहते हैं, “छात्रों और फैक्लटी दोनों के मामले में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय पदचिह्न विश्वविद्यालयों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया भर से नए विचारों और विभिन्न कार्य संस्कृति लाता है। इसे सुगम बनाने के लिए, हम भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद) और भारतीय दूतावासों के साथ संलग्न हैं। हम विज़िटिंग और सहायक संकाय योजनाओं के ज़रिए अधिक अंतरराष्ट्रीय संकाय लाने की कोशिश कर रहे हैं।”

 

महिला – पुरुष छात्र अनुपात: कैलटेक में 33 फीसदी महिला छात्राएं हैं जबकि आईआईएससी में 19 फीसदी महिला छात्राएं हैं। उच्च शिक्षा पर संबंधित अखिल भारतीय सर्वेक्षण के अनुसार, हालांकि 2007 से 2014 के बीच उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के नामांकन 38.6 फीसदी से बढ़कर 46 फीसदी हुआ है  लेकिन कुछ ही महिलाएं इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रमों के लिए नांमकन करती हैं, स्नातक स्तर पर 29 फीसदी और स्नातकोत्तर स्तर पर 37 फीसदी।

 

महिलाएं-पुरष छात्र अनुपात

 

 

डासाने कहते हैं, “शैक्षणिक संस्थान, जैसे कि आईआईटी में उच्च महिला- पुरुष छात्र अनुपात महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रौद्योगिकी और शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उच्च योग्य महिला इंजीनियरों की आवश्यकता है।” आईआईटी बंबई में मास्टर और डॉक्टरेट कार्यक्रमों के लिए अधिक महिलाओं ने दाखिला लिया है। इसी तरह की प्रवृति स्नातक स्तर पर दिख रहा है।

 

(बाहरी माउंट आबू, राजस्थान स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 13 जुलाई 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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