Home » Cover Story » जिंदगी की सांझ में भारतीय महिलाओं के लिए चिकित्सा सुविधा बेहद कम

जिंदगी की सांझ में भारतीय महिलाओं के लिए चिकित्सा सुविधा बेहद कम

देवानिक साहा,

hospital_620

 

जीवन के अंतिम दिनों में, महिलाओं के मुकाबले भारतीय पुरुषों (62.5 फीसदी से 37.5 फीसदी) को चिकित्सा सुविधा कुछ ज्यादा जल्दी और आसानी से मिलती है।

 

सत्यापित मौतों के सरकारी आंकड़ों में सामने आई है। मौत के कारण के लिए जारी मेडिकल प्रमाण पत्र  के अनुसार, 2014 में 10.6 लाख प्रमाणित मौतों में से 667,000 पुरुषों की मौत थी। जबकि मरने वाली महिलाओं की संख्या 400,000 थीं।

 

चिकित्सा पेशेवरों द्वारा प्रमाणित किए जाने वाले प्रति 1,000 पुरुषों की मौत पर 600 महिलाओं का आंकड़ा है।

 

वर्ष 2013 में, पांच में से चार मौतें चिकित्सा पेशेवरों द्वारा प्रमाणित नहीं किए गए थे, जैसा कि इंडियास्पेंड ने फरवरी 2016 में विस्तार से बताया है।

 

झारखंड में 128 में से सिर्फ 1 मौत प्रमाणित, भारत में यह न्यूनतम दर

 

झारखंड में होने वाले 128 मौतों में से केवल एक मौत ही चिकित्सा पेशेवर द्वारा प्रमाणित है। यह रिकॉर्ड भारत के किसी भी अन्य राज्य की तुलना में बद्तर है। ये आंकड़े प्रति व्यक्ति आय के अनुसार भारत के दूसरे सबसे गरीब राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव का संकेत भी है।

 

झारखंड 2000 में बिहार से विभाजित हुआ एक राज्य है जो वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी द्वारा शासित है। झारखंड में पंजीकृत 132,099 मौतों में से 1,028 यानी 0.8 फीसदी चिकित्सकीय प्रमाणित हैं। ये आंकड़े भारत के औसत से 19.7 फीसदी कम हैं, जहां 20.5 फीसदी मौतें प्रमाणित हैं। वर्ष 2014 में कम से कम 52.1 लाख मौतें पंजीकृत की गई हैं। लेकिन इसमें से 10.6 लाख मौतें ही प्रमाणित हैं। हालांकि, झारखंड में प्रमाणित मौतों के आंकड़े दोगुने हुए हैं।

 

2013 में जहां ये आंकड़े 458 थे, वहीं 2014 में यह बढ़ कर 1,028 हुए हैं। पूर्व योजना आयोग की इस जून 2014 की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड का 37 फीसदी तक आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहती है। झारखंड के 50 फीसदी जिलों में गरीबी स्तर 40 फीसदी से ऊपर है।

 

झारखंड राज्य बनने के 16 साल बाद भी वहां कोई नया अस्पताल खोला नहीं गया है। जबकि 2001 से 2011 के बीच, झारखंड की आबादी में 50 लाख से भी ज्यादा की वृद्धि हुई है, जैसा कि लाइव इंडिया टूडे ने सितंबर 2016 को बताया है। पिछले 15 वर्षों में न तो एक भी नई कॉलेज खोला गया है और न ही मौजूदा कॉलेजों का विस्तार किया गया है।

 

10 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों ने मेडिकल प्रमाणित मौतों में गिरावट की रिपोर्ट

 

दस राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों ने पिछले साल के मुकाबले वर्ष 2014 में चिकित्सा अधिकारियों द्वारा प्रमाणित मौतों की संख्या में गिरावट की रिपोर्ट की है। ये राज्य हैं अरुणाचल प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़, दादर और नागर हवेली, दमन और दीव, हिमाचल प्रदेश, केरल, मेघालय, पंजाब और पश्चिम बंगाल।

 

मेडिकल प्रमाणित मौतें, नीचे से पांच राज्य

 

 

Source: Medical Certification of Cause of Death Report 2014.

 

गोवा में करीब 99.5 फीसदी मौतें प्रमाणित हैं। यह आंकड़ा देश के किसी भी राज्य की तुलना में ज्यादा है। इस संबंध में दूसरे स्थान पर लक्षद्वीप (98.3 फीसदी) और तीसरे स्थान पर पुडुचेरी (77.6 फीसदी) है। असम में प्रमाणित मौतों के आंकड़े वर्ष 2013 में 0.9 फीसदी थे, जबकि वर्ष 2014 में 21.9 फीसदी हैं।

 

मेडिकल प्रमाणित मौतें, टॉप पांच राज्य

 

मेडिकल प्रमाणित मौतें, टॉप पांच राज्य

 

Source: Medical Certification of Cause of Death Report 2014.

 

संचार प्रणाली की बीमारी में मौत की संख्या ज्यादा, और कैंसर से होने वाली मौतों में वृद्धि

 

किसी भी राज्य में संचार प्रणाली या दिल से संबंधित रोग से होने वाली मौंतों की संख्या अधिक है। इन बीमारियों से होने वाली मौतों में पुरुषों ( 31 फीसदी ) और महिलाओं ( 32 फीसदी ) का अनुपात बराबर है।

 

मौत के पांच मुख्य कारण

 

Source: Medical Certification of Cause of Death Report 2014.

 

संचार प्रणाली बीमारियों से होने वाली मौतों के आंकड़े वर्ष 1999 में 24 फीसदी थे, जो बढ़ कर वर्ष 2014 में 32 फीसदी हो गए। इस अवधि के दौरान इन आंकड़ों में आठ प्रतिशत वृद्धि हुई है।

 

दिल की बीमारी के बाद, क्रोनिक प्रतिरोधी फेफड़ों का रोग दूसरी सबसे आम बीमारी है। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने अक्टूबर 2016 में विस्तार से बताया है।

 

वर्ष 2013 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2010 से वर्ष 2013 के बीच भारत में 23 फीसदी मौतें दिल की बीमारी से हुई हैं। दिल की बीमारी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में 21 फीसदी और शहरी इलाकों में 29 फीसदी मौतें हुई हैं।

 

इसी बीच कैंसर से होने वाली मौतें 3.6 फीसदी से बढ़कर 5.4 फीसदी हुई हैं। जबकि संक्रामक और परजीवी रोगों के कारण होने वाली मौतें 14.7 फीसदी से कम होकर 12 फीसदी हुई है।

 

पिछले 15 वर्षों में कैंसर से मरने वालों के प्रतिशत में वृद्धि

 

Source: Medical Certification of Cause of Death Report 2014.

Note: Neoplasms mean abnormal tissue growth, of which cancer is the most common.

 

वर्ष 1990 से वर्ष 2013 के बीच स्तन कैंसर के मामले 166 फीसदी बढ़े हैं। जबकि प्रोस्टेट कैंसर के मामले  220 फीसदी ज्यादा हुए हैं। ओवेरियन कैंसर से होने वाली मौतों में 123 फीसदी और पुरुषों में मुंह के कैंसर से होने वाली मौतों में 134 फीसदी की वृद्धि हुई है। इंडियास्पेंड ने इस विषय में जून 2015 में विस्तार से बताया है।

 

भारत के सर्वाधिक आबादी वाले प्रदेश, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2014 में सबसे अधिक कैंसर पीड़ितों की संख्या होने का अनुमान किया गया है। इस संबंध में महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है। जबकि बिहार तीसरे पश्चिम बंगाल चौथे और आंध्र प्रदेश पांचवें स्थान पर है। इस संबंध में भी इंडियास्पेंड ने जून 2015 में विस्तार से बताया है।

 

(साहा एक स्वतंत्र पत्रकार हैं। वह ससेक्स विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज़ संकाय से वर्ष 2016-17 के लिए जेंडर एवं डिवलपमेंट के लिए एमए के अभ्यर्थी हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 29 नवम्बर 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। हमसे respond@indiaspend.org. पर संपर्क किया जा सकता है। हम भाषा और व्याकरण के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार रखते हैं।

__________________________________________________________________

 

क्या आपको यह लेख पसंद आया ?” Indiaspend.com एक गैर लाभकारी संस्था है, और हम अपने इस जनहित पत्रकारिता प्रयासों की सफलता के लिए आप जैसे पाठकों पर निर्भर करते हैं। कृपया अपना अनुदान दें : Rs 500; Rs 1,000, Rs 2,000.”

 

Views
2377

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *