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टैक्स वृद्धि का प्रभाव क्यों नहीं होता धूम्रपान पर

चारु बाहरी,

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पिछले चार वर्षों में सिगरेट की बिक्री कम करने के उदेश्य से करों में चार गुना वृद्धि की गई है। इसी प्रतिक्रिया में मार्च 2015 में भारत की मुख्य सिगरेट कंपनी, आईटीसी लिमिटेड ने ब्रिस्टल ब्रांड के तहत सिगरेट का साइज 5एमएम छोटा कर दिया है।

 

5 एमएम की कटौती से ब्रिस्टल सिगरेट भारत के छह स्तरीय – सिगरेट कर प्रणाली का अच्छी प्रकार इस्तेमाल करते हुएसबसे कम कर वर्ग के लिए उपयुक्त हो जाता है। ब्रिस्टल की एक पैकेट सिगरेट की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया। सिगरेट के पैकट की कीमत उतनी है जितनी पहले थी।

 

ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (जीएटीएस ) 2010 के अनुसार भारत में धूम्रपान करने वालों में से सिगरेट पीने वालों की हिस्सेदारी 39 फीसदी है। लेकिन, जैसा की हमने लेख के पहले भाग में बताया है कि , सिगरेट पीने वालों को बीड़ी पीने वालों की तुलना में 210 गुना अधिक कर भुगतान करना पड़ता है।

 

जैसा की ब्लूमबर्ग की यह रिपोर्ट बताती है कि सिगरेट कंपनियां मानती हैं कि करों की वृद्धि के कारण सिगरेट की मांग पर प्रभाव पड़ा है लेकिन के जटिल कर ढ़ाचे के कारण कंपनियों पर खास प्रभाव पड़ता नज़र नहीं आता है। कर प्रणाली सिगरेट कंपनियों को लंबाई एवं फिल्टर के आधार पर वर्गीकरण करने की अनुमति देता है।

 

यह इस तरह की दक्षप्रयोग का ही प्रभाव है कि पिछले 19 वर्षों में करों में 1606 फीसदी ( छोटे गैर फिल्टर सिगरेट के लिए ) एवं 198 फीसदी ( छोटे फिल्टर सिगरेट के लिए ) की वृद्धि होने के बावजूद देश में सिगरेट पीने वालों की संख्या बढ़ती दर्ज की गई है।

 

पिछले 14 वर्षों में ( 1996 से 2010 ) भारत में सिगरेट पीने वालों की संख्या 25मिलियन से 46.4 मिलियन तक बढ़ी है एवं इसी अवधि के दौरान सिगरेट की प्रति व्यक्ति सालाना खपत में मामूली गिरावट, 101 से 96 , पाई गई है।

 

यह इसी का परिणाम है कि भारत में सिगरेट, स्वास्थ्य संकट का हिस्सा बन गया है। सिगरेट पीने वाले आसानी से सांस की बीमारियां, कैंसर, हृदय रोग जैसी बीमारियों का शिकार बनते हैं। वर्ष 2011 में देश में इन्हीं बीमारियों पर करीब 104,500 करोड़ रुपए ( 15.90 बिलियन डॉलर ) खर्च की गई है। यह आंकड़े उस वर्ष राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा सम्मलित रुप से स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च की गई आंकड़ों से भी अधिक हैं।

 

भारत में कीमत में वृद्धि से मांग में नहीं होती कमी

 

सिगरेट की कीमत में बढ़ोतरी = मांग में कमी

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह एक सामान्य समीकरण है जो धूम्रपान कम करने में सहायक हो सकता है।

 

अरुण थापा, भारत के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक्टिंग प्रतिनिधि, के अनुसार “तंबाकू को कम करने के लिए उसकी कीमतों में वृद्धि करना सबसे अच्छा उपाय है।”

 

वर्ष 1996 से 2013 के दौरान अमरिका में तंबाकू पर 320 फीसदी कर वृद्धि करने से सिगरेट की प्रति व्यक्ति सालाना खपत में 1820 से 893 सिगरेट की गिरावट दर्ज की गई है। साथ ही सिगरेट पीने वालों व्यस्कों की संख्या में एक तिहाई कमी भी देखी गई है।

 

भारत में वर्ष 1996 के बाद से छोटे गैर फिल्टर सिगरेटपर केंद्र उत्पाद शुल्क में 1606 फीसदी एवं छोटे फिल्टर सिगरेट पर 198 फीसदी की वृद्धि की गई है। भारत में अच्छी ब्रांड के 20 सिगरेट वाले एक पैकेट पर 60 फीसदी कर लगाया जाता है जबकि अमरिका में 43 फीसदी कर लगते हैं।

 

Average Cigarette Pack Price Breakdown: Brand Examples
Premium (Classic Refined Taste 20-pack) Mid-priced (Gold Flake King 10-pack) Economy (Four Square 10-pack)
Price (Rs) % Price (Rs) % Price (Rs) %
Wholesale 67.20 35.37 46.43 38.69 19.60 26.13
Retailer 19.00 10.00 16.67 13.89 7.50 10.00
Total Retained 86.20 45.37 63.10 52.58 27.10 36.13
Specific Excise 65.80 34.63 32.90 27.42 32.90 43.87
Ad valorem Excise 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00
VAT 38.00 20.00 24.00 20.00 15.00 20.00
Total Tax 103.80 54.63 56.90 47.42 47.90 63.87
End Price 190.00 100.00 120.00 100.00 75.00 100.00

Source: Euromonitor International; calculated from storecheck data, taxation and duty levies.

 

अमरिका में तंबाकू पर कर बढ़ाने से अधिक प्रभाव क्यों पड़ा? इसके दो कारण हो सकते हैं –

 

  • भारत में कर वृद्धि एवं आय वृद्धि वास्तविक रुप से मेल नहीं खाते हैं।
  •  

  • भारत का जटिल सिगरेट कर ढ़ांचा इसमें महत्वपूर्ण हेरफेर करने की अनुमति देता है।


 

भारत का पेचिदा सिगरेट कर ढ़ांचा

 

विश्व स्वास्थ्य  संगठन के अनुसार भारत में सिगरेट वर्ष 1990 के मुकाबले 2011 में 175फीसदी अधिक वहन करने योग्य हैं एवं वर्ष 2008 के बाद से 5 फीसदी अधिक तंबाकू खरीदने में समर्थ हैं। इसका कारण है कि सिगरेट कर की तुलना में वास्तविक आय तेजी से बढ़ रही है।

 

भारत में प्रत्येक सिगरेट पर शुल्क लगाया जाता है।सिगरेट पर छह स्तरीय ( 2014 तक सात स्तरीय ) कर संरचना के अनुसार सिगरेट की लंबाई एवं फिल्टरकी उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार परप्रति 1,000 सिगरेटपर कर लगाया जाता है।

 

Central Excise Rates On Cigarettes (in Rs per 1,000 sticks)
Type of cigarette by filter/length Rate in 1996-97 Rate pre-2014 budget Rate in 2014-15 budget % increase over pre-2014 rates Rate in 2015-16 budget % increase over 2014-15 rates
Non filter, < 65mm 75 (<60mm) 669 1150 71.9 1280 11.3
Non filter, 65-70mm 315 (60-70mm) 2027 2250 11.0 2335 3.8
Filter, <65mm 430 669 1150 71.9 1280 11.3
Filter, 65-70mm 1409 1650 17.1 1740 5.5
Filter, 70-75mm 800 2027 2250 11.0 2335 3.8
Filter, 75-85mm 1070 2725 3290 20.7 3375 2.6
Other 1350 (>85mm) 3290

Sources: CBEC 1, 2; World Lung Foundation

 

वर्तमान में उत्पाद शुल्क प्रति सिगरेट पर 1.28 रुपए से लेकर 3.37 रुपए तक लगाया जाता है। राज्य की ओर से मूल्य वर्धित कर (वैट) अतिरिक्त लगाया जाता है।

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ग्लोबल टोबैको एपिडिमिक 2015 की रिपोर्ट भारत की तंबाकू पर जटिल कर ढ़ांचे की आलोचना करता हैजिससे बेहतर प्रभाव ला पाना कठिन है।

 

कर के जठिल स्तर से सिगरेट निर्माताओं को कर वृद्धि के बावजूद कीमत बरकार रखने में सहायता मिलती है। इससे कर बढ़ाने के उदेश्य पर पूरी तरह पानी फिर जाता है।

 

उद्हारण के तौर पर, वर्ष 2014 में, हर स्तर पर उत्पाद शुल्क 11 फीसदी से 72 फीसदी बढ़ाई गई थी। साथ ही केरल, तमिलनाडु एवं असम में वैट भी बढ़ाए गए थे। परिणाम स्वरुप सिगरेट बाज़ार की प्रमुख कंपनी आईटीसी लीमिटेड ने अपने सस्ते ब्रांड, ब्रिस्टल सिगरेट की लंबाई छोटी करने का फैसला लिया। इससे कर बढ़ने के बावजूद सिगरेट की कीमत एवं बिक्री पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। विविध उत्पाद संविभाग के बावजूद,आईटीसी कंपनी ने इस साल मार्च 2014 के अंत तक सिगरेट से 84 फीसदी का मुनाफा कमाया है।

 

कभी-कभी सरकार उद्योग के पक्ष में सुधार लाने की कोशिश करती है। उद्हारण के तौर पर उप 65 एमएम कर श्रेणी वर्ष 2012 में लागू किया गया था। अगली स्तर की तुलना में 40 फीसदी कर विशेषक ने सिगरेट निर्माताओं को निम्न शुल्क स्तरीय की ओर जाने के लिए प्रेरित किया है।

 

वर्ष 2013 में छोटे एवं सस्ते सिगरेट की बिक्री में चार गुना अधिक वृद्धि दर्ज की गई है, बाज़ार के 4 फीसदी से 16 फीसदी तक –यह भारतीय धूम्रपान करने वालों की सीमित बजट का एक संकेतक है। यह भारत में सिगरेट का सबसे तेजी से बढ़ने वाला हिस्सा है।

 

दिसांता ओजह, ब्रांड मैनेजर , गोल्डन टोबैको लिमिटेड के अनुसार, “सस्ती सिगरेट की मांग काफी तेज़ी से बढ़ रही है जबकि सिगरेट की कुल मांग में हर वर्ष गिरावट दर्ज की जा रही है।”

 

एक दूसरा विचार यह भी है कि बजट में सिगरेट बिक्री बढ़ रही है क्योंकि कुछ बीड़ी पीने वाले लोग मूल्य श्रृंखला (वैल्यू चेन) को आगे बढ़ा रहे हैं।

 

प्रभात झा , ग्लोबल हेल्थ रिसर्च , टोरंटो विश्वविद्यालय के लिए केंद्र निदेशक, के अनुसार “सिगरेट निर्माताओं द्वारा बीड़ी पीने वाले लोगों को सफलतापूर्वक मूल्य श्रृंखला में आगे बढ़ाना ही सस्ती सिगरेट की अधिक खपत होने का कारण है।”

 

सस्ती सिगरेट की खपत को कम करने के उदेश्य से सरकार ने वर्ष 2014 में नीचे स्तर पर सबसे अधिक कर, 72 फीसदी की वृद्धि की थी।

 

रीजो जॉन, सहायक प्रोफेसर आईआईटी जोधपुर एवं स्वास्थ्य नीति और जीवन शैली व्यवहार के शोधकर्ता, के अनुसार “जैसा कि बाज़ार में सिगरेट की खपत अधिक हो रही है इसलिए छोटी सिगरेटों पर कर लगाने से सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बेहतर प्रभाव होगा।”

 

लेकिन भारत में धूम्रपान को असरदार तरीके से कम करने के लिए करों पर अच्छी-खासी वृद्धि करने की आवश्यकता है।

 

कर वृद्धि से दूसरे देशों में होता है प्रभाव

 

पड़ोसी देश बंग्लादेश विश्व के उन 33 देशों में से एक है जिसने विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह को मानते हुए सिगरेट की एक पैकेट पर 75 फीसदी तंबाकू कर की वृद्धि की है। श्रीलंका ने भी करीब 70 फीसदी की बढ़ोतरी की है।

 

33 countries that have imposed tobacco taxes representing more than 75% of the retail price of a pack of cigarettes
Asian countries (1): Bangladesh
American countries (1): Chile
African countries (2): Madagascar, Seychelles
European countries (23): Belgium, Bosnia and Herzegovina, Bulgaria, Croatia, Cyprus, Czech Republic, Estonia, Finland, France, Greece, Hungary, Ireland, Italy, Latvia, Lithuania, Montenegro, Poland, Romania, Serbia, Slovakia, Slovenia, Spain, UK and Northern Ireland
Middle Eastern countries (4): Israel, Jordan, Turkey, West Bank and Gaza
Oceanian countries (2): Kiribati, New Zealand

Source: WHO

 

भारतीय सरकार को भी सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहतर तरीके से सिगरेट करों को लागू करना चाहिए।

 

पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन की एक अध्ययन के अनुसार यदि सिगरेट पर 370 फीसदी करों की वृद्धि की जाती है तो इसकी खपत में कम से कम 54 फीसदी की कटौती हो सकती है एवं सरकारी आय में 115 फीसदी की वृद्धि हो सकती है।

 

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में सिगरेट करों का बेहतर परिणाम तभी देखने मिल सकता है जब इसके कर स्तरीय ढ़ांचे में बदलाव किए जाएं।

 

झा के अनुसार, “सिगरेट की बिक्री को कम करने एवं बीड़ी पीने वालों को सिगरेट की ओर स्विच करने के लिए सबसे अच्छा उपाय है कि सिगरेट की सभी लंबाई पर एक ही तरह की उच्च दर अपनाई जाए।”

 

सिगरेट पर कर बढ़ाने के बेहतर परिणाम भी तभी सामने आएंगे जब धम्रपान करने वालों के पास कोई सस्ता विकल्प मौजूद नहीं होगा : – जैसे अवैध सिगरेट एवं बीड़ी ( हालांकि आमतौर पर सिगरेट एवं बीड़ी पीने वाले लोग काफी अलग होते हैं। )।

 

अवैध सिगरेट के अंतर्गत तस्कर किए हुए विदेश या घरेलू स्तर पर निर्मित, कर में हेरफेर कर बनने वाले सिगरेट आते हैं।

 

सैयद महमूद अहमद , भारतीय तंबाकू संस्थान के निदेशक के अनुसार, “घरेलू स्तर पर, टैक्स की हेराफेरी करके निर्मित अवैध फिल्टर सिगरेट की कीमत मात्रएक रुपए होती है जोकि वैध सस्ती सिगरेट की कीमत का करीब एक तिहाई है।”

 

यूरोमोनिटर इंटरनेशनल के अनुसार अवैध सिगरेट के लिए भारत विश्व का पांचवा सबसे बड़ा बाज़ार है।

 

अहमद ने कहा कि, “बाज़ार में अवैध सिगरेट की हिस्सेदारी 20 फीसदी है एवंकरों के मूल्य के रुप मेंसरकारी खज़ाने की 7,000 करोड़ रुपए की कीमत है।”

 

राज्यों में भिन्न वैट दरों के कारण सिगरेट कर दरें भी बड़े पैमाने पर अलग होती हैं जिससे सिगरेट की अंतर-राज्य तस्करी को बढ़ावा मिलता है।

 

जॉन के मुताबकि सिगरेट उद्योग अवैध व्यापार को कम करने के लिए चाहती है कि सरकार शुल्क पुनर्गठित करे एवं स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए एक अधिक प्रभावी तरीके से सिगरेट एवं बीड़ी पर वर्दी मूल्य वर्धित करों ( वैट ) को लागू करे। सिगरेट की तस्करी कम करना भी लाभदायक सिद्ध होगी।

 

यह श्रृंखला यहीं समाप्त होती है। पहला भाग आप यहां पढ़ सकते हैं।
 
( बाहरी, माउंट आबू, राजस्थान स्थित स्वतंत्र लेखक एवं संपादक हैं )
 
यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 2 सितंबर 2015 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।
 
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