Home » Cover Story » डिजिटल असमानता शहरी भारत के लिए चेतावनी

डिजिटल असमानता शहरी भारत के लिए चेतावनी

देवानिक साहा,

internet_620

 

हाल ही में हुए अध्ययन से प्राप्त संकेत कि, भारत के इंटरनेट उपयोग कम है और मोबाइल- फोन कनेक्शन की संख्या में परिलक्षित नहीं होना एवं विकास मजबूत हो रहे हैं, शहरी क्षेत्रों में डिजिटल असमानता की ओर इशारा करती है।

 

पूणे में, 5.92 लाख लोगों के साथ तेजी से बढ़ रहा महानगर एवं सूचना प्रौद्योगिकी द्वारा बड़े हिस्से में संचालित इसकी अर्थव्यवस्था, किए गए अध्ययन में पाया गया है कि:

 

* कम आय वाले इलाकों में किए गए सर्वेक्षण में 82 फीसदी लोग इंटरनेट का उपयोग नहीं करते हैं।

 

* 56 फीसदी परिवारों में इंटरनेट उपयोगकर्ताएं हैं ही नहीं।

 

* 41 फीसदी गैर-उपयोगकर्ताओं ने इंटरनेट के बारे में नहीं सुना है।

 

* 16 से 25 वर्ष की आयु वर्ग के बीच 43 फीसदी लोग इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं।

 

कुछ इसी तरह के परिणाम बैंग्लुरु और दिल्ली जैसे समृद्ध शहरों के भी है। गरीब शहरों के परिणाम और बद्तर हैं।

 

प्यू रिसर्च सेंटर, एक अमेरिकी शोध संस्थान द्वारा इस सर्वेक्षण के अनुसार, हालांकि भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और वर्तमान में भारत एशिया-प्रशांत का सबसे तेजी से बढ़ता स्मार्टफोन बाजार है लेकिन 67 फीसदी वैश्विक औसत की तुलना में भारत में वयस्क आबादी का केवल 22 फीसदी ही इंटरनेट का उपयोग करता है।

 

आंकड़ों से पता चलता है कि भारत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में पीछे हैं एवं अन्य देशों के बीच नाइजीरिया, केन्या, घाना और इंडोनेशिया, से भी बुरा प्रदर्शन है।

 

वैश्विक इंटरनेट उपयोगकर्ता

 

 

फिर भी, पूर्ण संख्या में, भारत ने अमरिका को पीछे छोड़ दिया है एवं दिसंबर 2015 में 402 मिलियन (4020 लाख) सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के साथ दुनिया के दूसरे सबसे बड़ा इंटरनेट बाजार बन गया है। पुणे के अध्ययन से पता चला है कि यह आंकड़े स्पष्ट रूप से बड़ी विविधता छुपाते हैं।

 

भारत के नंबर दो आईटी शहर में कैसे डिजिटल डिवाइड हुआ बाहर (अप्रचलित)

 

संचार और विकास अध्ययन केंद्र, पुणे (गैर लाभकारी संस्था) द्वारा कम आय एवं सामाजिक रूप से बहिष्कृत लोगों पर किए गए एक अध्ययन, “टूवॉर्डस डिजिटल इनक्लूज़न: बैरियर टू इंटरनेट एक्सेस फॉर इकोनोमिकली एवं सोशली एक्सक्लूडेड कम्यूनीटीज़”, डिजिटल असमानता की दुर्लभ अनुभवजन्य साक्ष्य उपलब्ध कराता है।

 

पिछले दो दशकों में पुणे तेजी से बढ़ा है एवं वर्तमान में भारत का आठवां सबसे बड़ी शहरी संकुलन है।

 

“2014 में, भारत में इंटरनेट”, इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार शहर में कम से कम 3.6 मिलियन (36 लाख) इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं (34 फीसदी वर्ष पर वर्ष वृद्धि)।

 

घरों के अनुसार इंटरनेट की पहुंच

 

 

इस अध्ययन में, पुणे में डिजिटल असमानताओं के संबंध में यह छह मुख्य बिंदु सामने आई है:

 

1. 42 फीसदी पुरुषों की तुलना में 84 फीसदी महिलाएं नहीं करती हैं इंटरनेट का इस्तेमाल

 

कुल इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में केवल 26 फीसदी महिलाएं थी एवं सर्वेक्षण की गई सभी महिलाओं में से 84 फीसदी महिलाएं इंटरनेट का उपयोग नहीं करती हैं। जबकि पुरुषों के लिए यह आंकड़े 42 फीसदी हैं।

 

सीसीडीएस के अध्ययन के अनुसार लिंग डिजिटल असमानता बढ़ने के पीछे कई पारंपरिक विश्वास हैं। उद्हारण के लिए:

 

  • घरों में, मुख्य रुप से पुरुषों के पास स्मार्ट फोन होते हैं, जबकि महिलाओं के पास सामान्य, बुनियादी फोन, बिना किसी विशेष फीचर वाला फोन होता है जो इंटरनेट अनुप्रयोगों की सीमित अनुमति देते हैं।
  • माता-पिता का मानना है कि लड़कियों को मोबाइल फोन की जरूरत नहीं है, क्योंकि लड़कों के मुकाबले लड़कियां घरों में अधिक रहती हैं। यह भी एक आम धारणा है कि महिलाओं को मोबाईल फोन उपलब्ध कराने से अवांछित रोमांटिक संपर्क और “शोषण” को बढ़ावा मिलेगा।

मैकिन्से के इस अध्ययन के अनुसार, महिलाओं को इंटरनेट उपयोग करने के लिए बढ़ावा देने से श्रम-शक्ति में उनकी भागीदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

 

हाल ही में, गुजरात के कई गांवों में लड़कियों और एकल महिलाओं के लिए मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जो कि बड़े पैमाने पर पितृसत्तात्मक मानदंडों को लैंगिक समानता निरोधक होने की पुष्टि करता है।

 

इंटरनेट की पहुंच में लैंगिक असमानता

 

 

2. बेहतर शिक्षा से इंटरनेट उपयोग की संभावना बढ़ती है

 

कम से कम 56 फीसदी परिवार, हर परिवार में कम से कम एक व्यक्ति कक्षा 10वीं की शिक्षा के साथ, वर्तमान में “कनेक्टेड” हैं, यानि कि कम से कम एक इंटरनेट उपयोगकर्ता है जबकि 14 फीसदी समान शिक्षा स्तर वाले ऐसे परिवार हैं जहां एक भी इंटरनेट उपयोगकर्ता नहीं है।

 

शिक्षा अनुसार डिजिटल असमानता, कक्षा 10

 


 

जैसा कि नीचे दिए गए चार्ट में दिखाया गया है, शिक्षा स्तर बढ़ने के साथ गैर- इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या कम हो जाती है। उनमें से जो कभी स्कूल नहीं गए हैं या प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की है, केवल 3 फीसदी लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं जबकि स्नातक और उससे उपर की शिक्षा प्राप्त करने वाले 83 फीसदी लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं।

 

शिक्षा स्तर के अनुसार डिजिटल असमानता

 

 

3. अमीर परिवारों में इंटरनेट उपयोग की संभावना अधिक होती है।

 

पहले धन पंचमक (सबसे गरीब) केवल 29.4 फीसदी परिवार ही इंटरनेट से जुड़े थे, जबकि पांचवें पंचमक (सबसे अमीर) में 62.8 फीसदी परिवार इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे थे।

 

धन पंचमक (परिवार) के अनुसार डिजिटल असमानता

 

 

धन पंचमक (उपयोगकर्ता) के अनुसार डिजिटल असमानता

 

 

4. इंटरनेट से जुड़ने वाले अधिक लोग हैं युवा।

 

सभी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में से 53.5 फीसदी 16 से 20 वर्ष के आयु वर्ग के बीच थे। यह प्रतिशत उम्र से साथ घटता जाता है, जैसा नीचे दिए गए चार्ट में दिखाया गया है।

 

आयु वर्ग के अनुसार डिजिटल असमानता

 

 

5. पहुंच की वृद्धि में व्यवसाय निभाता है महत्वपूर्ण भूमिका

 

46.5 फीसदी इंटरनेट उपयोगकर्ता छात्र थे, जबकि 26.2 फीसदी सेवा क्षेत्र में थे, यह व्यवसाय और पहुँच के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी की स्थापना करता है।

 

व्यवसाय अनुसार डीजिटल असमानता

 

 

6. स्मार्टफोन होने से इंटरनेट उपयोग की संभावना बढ़ जाती है।

 

स्मार्टफोन के साथ, कम से कम 77 फीसदी परिवारों में इंटरनेट की पहुंच है जबकि बिना स्मार्टफोन वाले केवल 30 फीसदी घरों में ही इंटरनेट इस्तेमाल किया जाता है।

 

गूगल इंडिया की हाल ही के इस रिपोर्ट में कहा गया है कि, “स्मार्टफोन उपयोगकर्ता भारत के इंटरनेट विकास का नेतृत्व कर रहे हैं।” इंटरनेट पहुंच और स्मार्टफोन के स्वामित्व के बीच सीधा संबंध प्यू सर्वेक्षण में देखा गया है।

 

प्यू रिसर्च द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार केवल 17 फीसदी भारतीय वयस्कों के पास स्मार्टफोन है। कम आय वाले परिवारों में केवल 7 फीसदी वयस्कों के पास स्मार्टफोन है; अमीर परिवारों के लिए यह आंकड़ा 22 फीसदी है।

 

स्मार्टफोन स्वामित्व के अनुसार डिजिटल असमानता

 

 

Other key findings:

 

  • कम से कम 27.5 फीसदी उपयोगकर्ताओं ने इंटरनेट की समझ की कमी होने की बात कही है एवं ऑनलाइन न होने का प्रमुख कारण इसका इस्तेमाल नहीं समझना है।
  • महिलाओं की तुलना में पुरुष आठ गुना अधिक इंटरनेट का इस्तेमाल करते है।
  • कम से कम 21 फीसदी गैर-उपयोगकर्ता यह मानते हैं कि महिलाओं के इंटरनेट का उपयोग सही नहीं है, यह आंकड़े इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए 32 फीसदी है।
  • कम से कम 35 फीसदी पुरुष उपयोगकर्ता एवं 24 फीसदी महिला उपयोगकर्ता मानते हैं कि इंटरनेट से उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है और उनके व्यक्तित्व को बढ़ाया है।
  • केवल 8 फीसदी उपयोगकर्ताओं ने बताया कि सरकारी लाभ के संबंध में जानने में इंटरनेट को उपयोगी पाया है।

सीसीडीसी फील्ड रिसर्च, छह कम आय बस्तियों में, अम्बेडकर नगर, जनता वसहत, लक्ष्मी नगर, और पुणे नगर निगम क्षेत्रों में पाटिल एस्टेट और आनंद नगर, पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम में महात्मा फुले नगर में 1,634 परिवारों, 5,999 नागरिकों पर किया गया है।

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 9 मार्च 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

(साहा नई दिल्ली स्थित क स्वतंत्र पत्रकार हैं)

 

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। हमसे respond@indiaspend.orgपर संपर्क किया जा सकता है। हम भाषा और व्याकरण के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार रखते हैं।

__________________________________________________________________

 

“क्या आपको यह लेख पसंद आया ?” Indiaspend.com एक गैर लाभकारी संस्था है, और हम अपने इस जनहित पत्रकारिता प्रयासों की सफलता के लिए आप जैसे पाठकों पर निर्भर करते हैं। कृपया अपना अनुदान दें Rs 500; Rs 1,000, Rs 2,000.

 

Views
3512

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *