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डिजिटल लेनदेन हुआ धीमा, ‘डिजिटल इंडिया’ के सपने पर खतरा

अभिषेक वाघमारे,

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देशभर में डिजिटल लेनदेन के मूल्य में मामूली गिरावट दर्ज हुई है। 1.5 फीसदी की गिरावट के साथ आंकड़े नवंबर 2016 में 94 लाख करोड़ रुपए से (1.42 ट्रिलियन डॉलर) से गिरकर फरवरी 2017 में 92.6 लाख करोड़ रुपए (1.4 ट्रिलियन डॉलर) हुए हैं। यह जानकारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा जारी इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर प्रतिनिधि अस्थायी डेटा में सामने आई है।

 

इस डेटा में सभी बैंकों में सभी लेन-देन को शामिल नहीं किया गया हैं। लेकिन, चार प्रमुख बैंकों के लिए कार्ड भुगतान डेटा, पांच बैंकों के लिए मोबाइल बैंकिंग आंकड़े और प्रीपेड भुगतान तरीके (पीपीआई, यानी मोबाइल पेमेंट गेटवे जैसे कि पेटीएम और फ्री चार्ज) आठ गैर-बैंक जारीकर्ताओं के भुगतान डेटा को विश्लेषण के लिए प्रतिनिधि के रूप में माना गया है।

 

युनिफाइड पेमेंट इंटरफेस, आधार सक्षम भुगतान प्रणाली में सुधार, अन्य डिजिटल मोड में गिरावट

Source: Reserve Bank of India

 

42 फीसदी वृद्धि के साथ डिजिटल लेन-देन नवंबर 2016 में 67.2 करोड़ से बढ़ कर दिसंबर 2016 में 95.8 करोड़ हुआ है। लेकिन इसके बाद से दो महीने में 20 फीसदी की गिरावट के साथ फरवरी 2017 में 76.3 करोड़ हुआ है।

 

यह सरकार के 2017-18 में 2500  करोड़ डिजिटल लेन-देन के लक्ष्य को खतरे में डालता है, जो प्रति माह कम से कम 200 करोड़ रुपए को प्रभावित करेगा। फरवरी 2017 का 76.3 करोड़ लेनदेन का आंकड़ा मासिक जरूरत से 60 फीसदी कम है।

 

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने पहले आकलन ‘डिमोनेटाइजेशन, मैक्रोइकॉनॉमिक इंपैक्ट ऑफ डेमोनेटिसेशन- ए प्रिमिबल एसेसमेंट’ में बताया कि “नवंबर से जनवरी 2017 तक कुछ घटकों (डिजिटल भुगतानों) में आगे बढ़ने के साथ उस उच्च वृद्धि की निरंतरता मौद्रिक नीति का एक सकारात्मक नतीजा था। हालांकि, विकास की गति फरवरी 2017 में कुछ हद तक नरम हुई है। ”

 

11 में से 9 डिजिटल प्लेटफार्मों में गिरावट

 

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने (जिनकी विकास की कहानी ने 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को प्रचण्ड जीत दिलाई है ) विमुद्रीकरण की कहानी को काले धन और नकली मुद्रा से धीरे-धीरे कैशलेस अर्थव्यवस्था में बदला था, जैसा कि इंडियास्पेंड ने दिसंबर 2017 में विस्तार से बताया है।

 

विमुद्रीकरण के बाद केवल दो भुगतान प्लेटफार्म– एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (यूपीआई) और आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) में लेन-देन के मूल्य (रुपए में) और मात्रा ( संख्या ) में लगातार वृद्धि देखी गई है। अन्य सभी तरीकों में या तो लगातार चार महीनों की अवधि के दौरान एक या दो महीने में गिरावट देखी गई है।

 

यूपीआई सीधे व्यक्ति के बैंक खाते से मोबाइल एप्लिकेशन को जोड़ता है। एईपीएस एक आधार-लिखित बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली है, जिसका इस्तेमाल सरकारी योजनाओं के तहत प्रत्यक्ष नकदी हस्तांतरण के लिए किया जाता है।

 

दिसम्बर से फरवरी तक डिजिटल लेन-देन में गिरावट

Source: Reserve Bank of India, National Payments Corporation of India

Note: (1) Figures are negligible, so units have been changed.  (2) Card transactions of four banks. (3) PPI issued by 8 non-bank issuers for goods and services transactions only. (4) Mobile Banking figures are taken from 5 banks. The total volume & value of electronic payment systems does not include mobile banking.

 

‘इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट रिसर्च’ के इकोनॉमिक्स विभाग के प्रोफेसर राजेश्वरी सेनगुप्ता ने इंडियास्पेंड से बात करते हुए बताया, “डिजिटल नकद की जगह नहीं ले सकता है।  लेन-देन के बीच डिजिटल का हिस्सा लंबी अवधि में बढ़ सकता है, लेकिन नकद वहन करने योग्य है। ”

 

“डिजिटल लेनदेन एक व्यक्ति को स्मार्टफोन खरीदने और डेटा पर खर्च करने की मांग करता है, जिससे प्रति लेन-देन पर लागत लगती है। लोग स्वाभाविक रूप से नकद पसंद करते हैं, जहां लागत सरकार द्वारा वहन किया जाता है। “

 

नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (एनईएफटी) प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए ऑनलाइन बैंकिंग के उपयोग में जनवरी और फरवरी 2017 में लगातार कमी आई है। जबकि तत्काल भुगतान प्रणाली (आईएमपीएस) दिसंबर 2016 और जनवरी 2017 में बढ़ी, लेकिन फरवरी में गिरावट देखी गई।

 

आरबीआई के मूल्यांकन के अनुसार, “विमुद्रीकरण ने उत्प्रेरक की भूमिका निभाई, और नवंबर और दिसंबर 2016 में डिजिटल पेमेंट में तेजी आई । हालांकि नकदी की उपलब्धता में आसानी से फरवरी 2017 में डिजिटलीकरण के विकास की गति पर असर पड़ा है। ”

 

नवंबर 2016 और फरवरी 2017 के बीच चार प्रमुख बैंकों के लिए डेबिट और क्रेडिट कार्ड लेन-देन में थोड़ा अंतर दिखता है-नवम्बर 2016 में  20.5 करोड़ स्वाइप लेनदेन से 35,200 करोड़ रुपए और फरवरी 2017 में 21.2 करोड़ स्वाइप लेनदेन से 39,200 करोड़ रुपए।

 

एक्सिस बैंक के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक संग्राम सिंह का कहना है, “ जब चलन में नकदी, प्री- डिमनीटाइजेशन स्तर की तुलना में नीचे आकर सामान्य हो जाएगा, डिजिटल भुगतान की प्रवृति उच्च स्तर पर जाकर स्थिर हो जाएगा। पहले की तरह इसके विस्तार की प्रवृत्ति जारी रहेगी। ”

 

दिसंबर 2016 में 31.1 करोड़ स्वाइप में 52,000 करोड़ रुपये के लेन-देन के साथ कार्ड लेन-देन में सुधार हुआ है। यह आंकड़ा एक महीने के दौरान लेन-देन में 50 फीसदी और मूल्य में 48 फीसदी वृद्धि दर्शाता है।

 

लेकिन डेबिट और क्रेडिट कार्ड में वृद्धि की गति प्वांइट ऑफ सेल (पीओएस) टर्मिनल पर एक समान फोकस से मेल नहीं खाती है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर आर. गांधी ने फरवरी 2017 के भाषण में कहा, “…इस समय तक 80 करोड़ कार्ड जारी किए जाने की तुलना में पीओएस टर्मिनलों की संख्या वास्तव में पर्याप्त नहीं है। ”

 

गांधी ने बाद में अपने भाषण में कहा कि उच्च पूंजी और परिचालन खर्च ने पीओएस बुनियादी ढांचे के विस्तार को रोक दिया है।

 

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, लोगों के पास उपलब्ध नकद, जो नोटबंदी की घोषणा से ठीक पहले 17 लाख करोड़ रुपए से कम होकर  9 दिसंबर, 2016 को विमुद्रीकरण के बाद सबसे निचले स्तर  7.81 लाख करोड़ रुपये (118 बिलियन डॉलर) तक पहुंचा था। अब 3 मार्च, 2017 तक 11.74 लाख करोड़ रुपए (178 बिलियन डॉलर) तक आया है।

 

आरबीआई के उप-गवर्नर वीरिल आचार्य ने 6 मार्च, 2017 को मिंट के इस लेख में उद्धृत किया कि, “रिमोनेटिज़ेशन बहुत तेज गति से हो रहा है। हमारे पास कुछ रास्ता है। हम उम्मीद करते हैं कि दो से तीन महीने के भीतर हम प्रचलन में पूर्ण मुद्रा तक पहुंच जाएंगे। ”

 

प्रधान मंत्री ने दुनिया की सबसे बड़ी मुद्रा स्वैप कार्यक्रम की घोषणा की थी, जिससे 8 नवंबर, 2016 को 86 फीसदी भारतीय मुद्रा को अमान्य कर दिया गया था।

 

रिमोनेटिसेशन में तेजी, बाजार में नकद में वृद्धि

Source: Weekly Statistical Supplements, Reserve Bank of India; figures in Rs lakh crore

 

अभी लोगों के लोगों के पास मुद्रा का जो स्तर है, वह  नवंबर 2013 के 12 लाख करोड़ रुपए के स्तर से मेल खाता है।

 

(वाघमारे विश्लेषक हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़े हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 21 मार्च 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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