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तीन वर्षों में आदतन अपराधियों की गिरफ्तारी में 31% वृद्धि

सिल्वियो ग्रोकचेट्टी,

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19 जनवरी 2016 को हरियाणा के गुड़गांव में प्रेस के सामने जैन मंदिर से मूर्तियों की चोरी के मामले में गिरफ्तार आरोपियों को पेश करते पुलिस अधिकारी। 2012 की तुलना में 2015 में, भारतीय दंड संहिता के तहत 3.6 मिलियन से अधिक हुई गिरफ्तारियों में 69,427 से ज्यादा ऐसे लोग थे, जो पहले भी गिरफ्तार हो चुके थे।यह संख्या 2012 की तुलना में 11 फीसदी (366580) अधिक है।

 

क्या हमारा समाज लगातार अपराध की ओर बढ़ रहा है? राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी आंकड़ों में यह चिंता झलकती है। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले चार वर्षों से 2015 तक, ऐसे लोगों की गिरफ्तारी में 31 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जो आदतन अपराधी थे, यानी अपराध के किसी न किसी मामले में पहले भी गिरफ्तार हो चुके थे।

 

2012 की तुलना में 2015 में, भारतीय दंड संहिता के तहत 36 लाख लोगों की गिरफ्तारियां हुईं। इस कुल संख्या में अपराध दुहराने वाले अपराधियों की गिरफ्तारी की संख्या 69,427 ज्यादा है। यह संख्या 2012 की तुलना में 11 फीसदी (366580) ज्यादा है।

 

यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो 2015 में भारत के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में किसी न किसी मामले को लेकर लाख से ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए। यह आंकड़ा अन्य दूसरे राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा है। वहीं मध्यप्रदेश (आबादी के मामले में छठा राज्य) अपराध को लेकर हुई गिरफ्तारियों में दूसरे नंबर पर, महाराष्ट्र (आबादी के मामले में दूसरा राज्य) तीसरे नंबर पर, केरल (आबादी के मामले में 12 वें स्थान पर) चौथे नंबर पर है। आबादी के मामले में सातवें स्थान पर रहने वाला तमिलनाडु अपराधों को लेकर हुई गिरफ्तारियों में पाचवें स्थान पर है।

 

राज्य अनुसार 2015 में हुई गिरफ्तारियां

Source: National Crime Records Bureau

 

पिछले चार वर्षों से 2015 तक, अपराधों और उससे जुड़ी गिरफ्तारियों को लेकर देखा जाए तो नागालैंड का आंकड़ा चौंकाता है। नागालैंड में 89 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है। अपराध में बढ़ोतरी को लेकर मेघालय भी सुर्खियों में है। यहां गुनाह के खिलाफ गिरफ्तारी का ग्राफ 72 फीसदी बढ़ा है। दिल्ली भी पीछे नहीं है। यहां भी 72 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। 57 फीसदी बढ़ोतरी के साथ असम चौथे नंबर पर है।

 

अपराध की किसी रिपोर्ट पर बंदी बनाने के मामले आंध्र प्रदेश में कम हुए हैं। ऐसे मामले वहां 40 फीसदी कम हुए हैं। कुछ इसी तरह त्रिपुरा  में भी 37 फीसदी मामले कम हुए हैं और मणिपुर में 32 फीसदी।  32 फीसदी की कमी के साथ इस मामले में झारखंड राज्य चौथे स्थान पर है।

 

भारत का दूसरा सर्वाधिक आबादी वाला राज्य बिहार में पिछले चार वर्षों से 2015 तक अपराध दोहराने वाले लोगों की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। वहां 34,000 से ज्यादा ऐसे लोग गिरफ्तार हुए जो बार-बार अपराध करते थे। प्रतिशत में देखें तो 4,594 फीसदी या 47 गुना अधिक। इस संबंध में अरुणाचल प्रदेश 1,263 फीसदी के साथ दूसरे नंबर पर, 498 फीसदी के साथ पांडुचेरी तीसरे नंबर पर, 330 फीसदी बढ़ोतरी के साथ केरल चौथे नंबर पर और असम 330 फीसदी बढ़ोतरी के साथ असम पांचवे स्थान पर है।

 

अपराध दोहराने के संबंध में सबसे अधिक गिरावट ओडिशा  में दर्ज की गई है। लगभग 98 फीसदी। दूसरे स्थान पर गोवा है। यहां 82 फीसदी मामले कम पाए गए। तीसरे स्थान पर जम्मू-कश्मीर है। यहां 78 फीसदी की गिरावट।  चौथे स्थान पर कर्नाटक है। आंकड़ों के अनुसार यहां 68 फीसदी मामले कम पाए गए और 60 फीसदी कम मामलों के साथ उत्तराखंड पांचवे नंबर पर है।

 

आंकड़े बताते हैं कि  2015 में, मध्य प्रदेश में, 47,579 गिरफ्तारियों के साथ, अपराध दोहराने वाले लोगों के जेल जाने की संख्या सबसे अधिक रही है। इस संबंध में तमिलनाडु 40,985 की संख्या के साथ दूसरे नंबर पर, 34550 की संख्या के साथ बिहार तीसरे नंबर पर, 24,132 की संख्या आंध्र प्रदेश  में दर्ज हुई और यह राज्य चौथे नंबर पर है और पश्चिम बंगाल 14,676 की संख्या के साथ पांचवे स्थान पर रहा है।

 

(ग्रोकचेट्टी एक मल्टीमीडिया पत्रकार हैं और एडिनबर्ग के नेपियर विश्वविद्यालय से स्नातक हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 27 सितम्बर 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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