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दिल्ली की नई सरकार के लिए सात प्रमुख कार्य

देवानिक साहा,

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आम आदमी पार्टी (आप)  –  दो साल से भी कम समय से नंबर दो पर जगह बनाने वाली पार्टी  – ने फेरी दिल्ली की सत्ता पर झाडू।  यह एक स्पष्ट सेकेट है कि  इनसे अधीर मतदाताओं को बहुत सी उम्मीदें हैं।

 

यदि इन अपेक्षाओं को जल्दी से पूरा नहीं किया गया तो मोहभंग भी  जल्दी ही होने की संभावना है। हालाँकि दिल्ली देश में सबसे अच्छी  आधारिक संरचना  के साथ भारत का सबसे अमीर शहरी क्षेत्र है, लेकिन  दुनिया के  दूसरी सबसे अधिक आबादी वाले  शहर में अपनी ही गम्भीर  मुश्किल समस्याएं हैं।

 

यह वह सात मुद्दे हैं जिनका  नई एएपी सरकार को तत्काल समाधान करना होगा – अगर वह फिर से दूसरी बार मोहभंग का कारण नहीं बनना चाहती

 

  1. स्वास्थ देखभाल (हेल्थकेयर) : दिल्ली की आबादी के 60% की एक महीने की आय 13,500 रुपये से कम है और यह स्पष्ट है कि वे महंगे निजी अस्पतालों का खर्च नहीं उठा सकते। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के अस्पतालों में उपलब्ध बिस्तरों की संख्या में गत तीन वर्षों में क्रमश: 8% और 47% की गिरावट आई है। दूसरी ओर, निजी अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता में पिछले पांच साल में 36% की वृद्धि हुई है।

दिल्ली में अस्पताल में बिस्तरों की संख्या, 2009-2013  (हजार में)

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Source: Delhi Statistical Abstract 2014

 

  1. बेरोजगारी: बढ़ती बेरोजगारी दिल्ली के मतदाताओं के बीच एक बड़ी चिंता का विषय है। इंडिया स्पेंड ने अपनी रिपोर्ट में पहले भी कहा था कि महिला बेरोजगारी, छह वर्षों में दोगुनी हो गई है हालाँकि यह इस बात का प्रतीक भी हो सकता है कि परिवारों की समृद्धि के कारण महिलाओं ने कार्यबल से कदम पीछे हटा लिए हों( कार्य करना छोड़ दिया हो )। रोजगार कार्यालयों की संख्या पिछले तीन वर्षों में स्थिर बनी हुई है, लेकिन पंजीकरण की संख्या में  71% की वृद्धि हुई है, 2009 में 93,000 से 2013 में यह 159,000 तक बढ़ी है । यह एक संकेत है – कई बेरोजगार हैं जो  रोजगार कार्यालय में नाम दर्ज करने की चिंता नहीं करते है – कि नई सरकार को अधिक नौकरियां पैदा करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

दिल्ली में रोजगार कार्यालयों में पंजीकरण, 2009-2013

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Source: Delhi Statistical Abstract 2014

 

  1. महिलाओं के खिलाफ अपराध: दिल्ली के लिए प्रसिद्ध है कि वहाँ महिलाएँ असुरक्षित है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) 2013 की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में 147 प्रति लाख महिलाओं की दर के साथ  महिलाओं के खिलाफ अपराध की सबसे ज्यादा घटनाएं दर्ज हैं  इसके बाद असम, त्रिपुरा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश का नाम आता है। नई सरकार के सामने इस अपराध दर को कम करने और दिल्ली को महिलाओं के लिए एक सुरक्षित शहर बनाने का एक कठिन कार्य पहले से तय  है।

अमेरिका/ संघ शासित क्षेत्रोंमें  महिलाओं के खिलाफ अपराधों की उच्चतम दर, 2013 ( घटनाएँ  प्रति लाख महिलाऐं )

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Source: Delhi Statistical Abstract 2014

 

  1. पानी: दिल्ली में पानी प्रमुख चुनाव मुद्दों में से एक रहा है। इंडिया स्पेंड ने पहले अपनी रिपोर्ट में बताया था कि  कैसे  दिल्ली के परिवारों में  24.8%(लगभग 3.25 मिलियन लोगों को)  पाइप द्वारा पानी की सुविधा नहीं है और औसतन प्रत्येक व्यक्ति को 3.82 लीटर प्रति  दिन पानी मिलता है ; विश्व स्वास्थ्य संगठन ने द्वारा सुझाए कम से कम 40 लीटर की तुलना से करीब  36 लीटर कम । हालाँकि मीटर के जरिए कनेक्शनों की संख्या में पिछले पांच वर्षों में 12% की वृद्धि हुई है, वहीं मीटर के बिना  कनेक्शन की संख्या में  31% वृद्धि हुई है, 2009-10 में 0.36 मिलियन से  2013-14 में 0,47 मिलियन तक।

 

दिल्ली में पानी कनेक्शन, वित्तीय वर्ष 2010-2014 (हजार में)

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Source: Delhi Statistical Abstract 2014

 

  1. शिक्षा: सरकारी स्कूलों की संख्या में पिछले पांच वर्षों में 8% की वृद्धि हुई है, 2009 में 4,993 से 2014 में 5,401 तक, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता भारत भर में रिपोर्ट की गई निम्नस्तर गुणवत्ता से भिन्न नही है। जैसा कि इस रिपोर्ट में  उल्लेखित है, दिल्ली के सरकारी स्कूलों में छात्र कितना सीखते हैं उनके परिणामों पर कोई विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध नहीं  हैं। नई सरकार को सिर्फ स्कूलों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित न कर के  शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने पर काम करना चाहिए।

 दिल्ली में स्कूलों की संख्या, वित्तीय वर्ष 2010-2014

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Source: Delhi Statistical Abstract 2014

 

  1. बिजली: देश भर के विभिन्न बिजली बोर्डों से प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली के उपभोक्ताओं को देश भर में सबसे उच्चतम बिजली दर देनी पड़ती है। दिल्ली को विभिन्न मौसम की स्थितियां झेलनी होती हैं जिनके अनुरूप बिजली की मांग में वृद्धि होती है ।  दिल्ली की बिजली कंपनियों को अन्य राज्यों से 86%  यानि  कुल 35 अरब इकाइयों में से 30 अरब यूनिट तक , बिजली  खरीदनी पड़ती है जो बिजली की अधिक लागत का प्रमुख कारण है।

प्रमुख महानगरों में बिजली स्लैब दर (रुपए में / इकाई)

 

Source: Power company websites and electricity bills

 

  1. प्रदूषण: विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है हालांकि लाखों जीवन दांव पर हैं लेकिन मतदाताओं के लिए यह  प्रमुख चिंता का विषय नहीं है।  लेकिन जिस तरह दिल्ली एक गैस चैम्बर सदृश हो गई है, कोई भी नई सरकार शहर की -बिगड़ती हवा की गुणवत्ता की अनदेखी नहीं  कर सकती जो और जहां 1200 नए वाहन और  8.3 मिलियन पंजीकृत वाहनों  के साथ  रोज़ वाहनों  की संख्या आसमान छू रही है यह स्थिति बड़ से बदतर होती जा रही है ।जगह जगह निगरानी के लिए उपकरणोंकी स्थापना एक बुनियादी आवश्यकता है।   हवा की गुणवत्ता, विशेष रूप से सूक्ष्म और विषाक्त कण जिन्हे  पीएम 2.5 कहा जाता है और जो श्वसन और हृदय की बीमारियों का  एक  कारण हैं पर कोई सटीक, वास्तविक समय आंकड़े दिल्ली के लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है ।

 

छवि आभार: AamAadmiParty.org
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