Home » Cover Story » दिल्ली में कांग्रेस के घाटे से भाजपा का लाभ, ना की एएपी को

दिल्ली में कांग्रेस के घाटे से भाजपा का लाभ, ना की एएपी को

प्रवीण चक्रवर्ती,

620Credit

 

इस तरह के शीर्षक आमतौर पर जिस शिविर में आपकी आस्था हो  उस अनुसार प्रशंसा या बदनामी की भावना उतपन्न करते हैं।

 

तो, चलिए  पहले  दावों और अस्वीकरणों की और देखते हैं- चुनावी नतीज़े कई जटिल कारकों का परिणाम होते हैं और उन्हें एक सरल गणितीय समीकरण तक सीमित कर देना साथ बेवकूफी और अभिमान की हद है ।

 

पिछले परिणामों का यह विश्लेषण भविष्य के रुझान का सूचक नहीं है, न ही यह चुनावी परिणामों के स्पष्ट निर्विवादित कारणों को तथ्य मान लेने का प्रयास है। यह चुनावी आंकड़ों और विश्लेषणों की प्रवृत्ति जो लोकमत के विपरीत भी हो सकती है , का उल्लेख मात्र है।

 

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच आम धारणा है कि कांग्रेस पार्टी की आगामी दिल्ली चुनावों में जो वोट हिस्सेदारी कम होने वाली है , इसका सीधा सीधा लाभ आम आदमी पार्टी (आप) को मिल सकता  है, और इसलिए यह एएपी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच एक ज़बरदस्त प्रतिस्पर्द्धा होगी ।

 

2013 के विधानसभा चुनावों से ले कर 2014  के लोकसभा चुनावों तक दिल्ली के  70 विधानसभा क्षेत्रों के माहौल के विश्लेषण से कुछ और ही पता चलता है ।

 

2013 से 2014 तक  कांग्रेस के सापेक्ष वोट प्रतिशत में 12 प्रतिशत अंक की गिरावट आई है जो कि भाजपा के  11-प्रतिशत और आप के एक-प्रतिशत अंक लाभ के साथ सहसम्बद्धित है । इस तरह के रुझानों के लिए विभिन्न कारण हो सकते हैं जैसे कि विधानसभा चुनाव और विभिन्न मतदाता व्यवहार और लोकसभा चुनाव जिसमे  भिन्न भिन्न वोटर व्यवहार और परिणामों  को आकर्षित किया।

 

जैसा कि हमने पहले भी बताया है, जो कुछ कारण कुछ भी हो , 2014 में कांग्रेस द्वारा खोए गए वोटों  में 92%  वोट का लाभ भाजपा को हुआ और केवल 8% ही एएपी को मिला । इस तरह का भारी बदलाव सिर्फ सरल आख्यानों के माध्यम से समझाया नहीं जा सकता है।

 

2013 के विधानसभा (बाएं) और 2014 के लोकसभा (दाएँ ) चुनावों के लिए दिल्ली में सापेक्ष वोट हिस्सेदारी %(प्रतिशत )

 

Relative Voteshare % In Delhi For 2013 Assembly (Left) And 2014 Lok Sabha (Right) Polls

 

image

Source: Election Commission

 

क्या कहीं कहीं ऐसा मामला भी है की  कुछ निश्चित निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा द्वारा  प्राप्त वोट शेयर इतना अधिक है कि  उसने सभी माप  बिगाड़ कर रख दिए हैं ? नहीं।

70 निर्वाचन क्षेत्रों में से कांग्रेस ने 68 में वोट प्रतिशत खो दिया है और उसे दो में फायदा हुआ है । भाजपा ने 64 में  वोट शेयर प्राप्त किए और छह में हार दिए । एएपी 39 में वोट शेयर खो दियाऔर 31 में प्राप्त किया है ।

 

तो, सबसे अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा भारी लाभ मिला है।

 

दिल्ली निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या जहां वोट हिस्सेदारी प्राप्त हुई /खोई  ( 2013 (विधानसभा) से 2014 (लोकसभा) चुनावों तक 

 

voteshare_gain
Source: Election Commission

 

2013 चुनाव से 2014 तक , 25 निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस ने अपना वोट प्रतिशत खो दिया है और भारतीय जनता पार्टी और आप के दोनों ने वोटों  में हिस्सेदारी का लाभ उठाया है । इन 25 निर्वाचन क्षेत्रों के विश्लेषण से पता चलता है कि  कैसे कांग्रेस के वोट पलट गए ।ई स्पष्ट होता है कि इन 25 निर्वाचन क्षेत्रों में से 15 में भाजपा को एएपी की तुलना में कांग्रेस के वोटों से अधिक फायदा हुआ है। एएपी को 9 निर्वाचन क्षेत्रों में अधिक फायदा हुआ है, और एक निर्वाचन क्षेत्र दोनों के बीच समान रूप से विभाजित हो गया था।

 

हम जैसे भी 2013 के विधानसभा चुनावों और 2014 के लोकसभा चुनाव के बीच दिल्ली के वोट शेयर का निरीक्षण परीक्षण करें यह स्पष्ट है कि कांग्रेस के ‘नुकसान’ से भाजपा  को एएपी  के मुकाबले अधिक फायदा हुआ है जैसा कि  काफी लोगों का मत भी है।

 

पुनः , इस के लिए विभिन्न स्पष्टीकरण हो सकते हैं  लेकिन महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या आप  2015 के विधानसभा चुनाव में इस झुकाव को उल्ट सकती है?

 

(प्रवीण चक्रवर्ती एक चुनावी आकड़ों  के विश्लेषक और इंडिया स्पेंड- भारत की पहली गैर लाभकारी, सांख्यिकी पत्रकारिता पहल – के संस्थापक ट्रस्टी हैं । यह लेख सौम्या तिवारी के साथ मिलकर लिखा गया है । )

 

_________________________________________________________________

 

“क्या आपको यह लेख पसंद आया ?” Indiaspend.org एक गैर लाभकारी संस्था है, और हम अपने इस जनहित पत्रकारिता प्रयासों की सफलता के लिए आप जैसे पाठकों पर निर्भर करते हैं। कृपया अपना अनुदान दें :

Views
1511
  1. Siva Reply

    January 16, 2015 at 1:04 am

    A more appropriate title would be – ‘In LokSabha elections, Congress’s loss was more of BJP’s gain than AAP’s’. Otherwise the readers are forced to interpret this article as an attempt to draw a conclusion based on very loose extrapolation, rather than reporting just an observation. If someone does want to draw a conclusion, then a more appropriate sample would the assembly elections in Delhi in Dec’ 13. In Delhi assembly elections of 2008, Congress’s vote share was 40.3% and BJP’s was 36.3%. In 2013 elections, the vote share was – Congress 24.6, BJP 33.1, and AAP 29.5%. Please see who benefited the most from the loss in Congress’s vote share.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *