Home » Cover Story » दिल्ली में बसों के कम इस्तेमाल से मास ट्रांजिट असफलताओं की ओर इशारा

दिल्ली में बसों के कम इस्तेमाल से मास ट्रांजिट असफलताओं की ओर इशारा

चैतन्य मल्लापुर,

Drivers

 

दिल्ली की दिन-ब-दिन बढ़ती वायु प्रदूषण का समाधान निकालने में जुटी सरकार ने सम-विषम फॉर्मूला के समर्थन में 6,000 और बसें निकालने का निर्णय लिया है।

 

हालांकि दिल्ली वालों को बसों में सफर करने के लिए राजी कराना आसान काम नहीं होगा।

 

पिछले वर्ष के मुकाबले, वर्ष 2014-15 में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) बसों पर सवारी करने वालों की संख्या में 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है एवं पिछले पांच वर्षों में बसों की संख्या में 24 फीसदी की गिरावट हुई है। वर्ष 2010-11 में जहां यह आंकड़े 6,204 थे वहीं 2014-15 में यह 4,712 दर्ज की गई है।

 

दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण 2014-15 के अनुसार हालांकि बसों और बसों पर सवार करने वालों की संख्या में गिरावट हुई है लेकिन पिछले 16 वर्षों में प्रति 1,000 लोगों पर 92 फीसदी वाहनों की वृद्धि हुई है।

 

दिल्ली की बसें, 7.8 किलोमीटर औसत के साथ, प्रतिदिन 3.9 मिलियन यात्रियों को ले जाने-ले आने का काम करती हैं।

 

 सात लाइनों वाली 187 किलोमीटर के नेटवर्क वाली दिल्ली मेट्रो से रोज़ाना 2.4 मिलियन यात्री सवारी करते हैं लेकिन मेट्रो और बसों के बीच , जन पारगमन स्पष्ट रूप से पर्याप्त नहीं है।

 

मेट्रो के तीसरे चरण पूरे होने एवं 117 किमी लाइन जुड़ने के बाद मेट्रो में सवारी करने वाले की संख्या में 4 मिलियन वृद्धि होने की उम्मीद की जा रही है।

 

एक तिहाई परिवार चलाते हैं साईकल लेकिन कारों की संख्या में वृद्धि होने से साईकल के इस्तेमाल में गिरावट

 

दिल्ली के परिवारों का करीब 31 फीसदी परिवार परिवहन के अपने प्राथमिक साधन के रूप में साईकल का इस्तेमाल करते हैं जिसे शहर की योजनाओं में नज़रअंदाज़ किया गया है।

 

दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण 2014-15 के अनुसार पिछले 10 सालों में साईकल इस्तेमाल करने वालों की संख्या में गिरावट हुई है। वर्ष 2001 में जहां यह आंकड़े 37.6 फीसदी थे वहीं 2011 में यह आंकड़े गिरकर 30.6 फीसदी हुए हैं। प्रति परिवार स्कूटर एवं मोटर साईकल के इस्तेमाल में वृद्धि दर्ज की गई है। 2001 में यह आंकड़े 28 फीसदी थे जबकि 2011 में यह बढ़कर 39 फीसदी दर्ज की गई है। कारों, जीपों और वैन के इस्तेमाल में भी वृद्धि दर्ज की गई है। 2001 में यह आंकड़े 13 फीसदी थे जबकि 2011 में 20.7 फीसदी दर्ज की गई है।

 

31 मार्च, 2015 तक दिल्ली में करीब 8.8 मिलियन मोटर वाहनों की संख्या दर्ज की गई है। यह संख्या पिछली साल की तुलना में 6 फीसदी अधिक दर्ज की गई है।

 

2014-15 में दो पहिया वाहनों ( मोटर साईकल एवं स्कूटरों ) की संख्या में 7 फीसदी एवं टैक्सियों में 6 फीसदी और कारों और जीपों में 6 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई है। ट्रैक्टरों एवं अन्य वाहनों की संख्या में गिरावट हुई है।

 
दिल्ली में वाहनों की संख्या
 

 

दिल्ली की सड़कों पर चलने वाले वाहनों में 64 फीसदी हिस्सेदारी दो पहिया वाहनों की है जबकि कारों एवं जीपों जैसे वाहनों की हिस्सेदारी 32 फीसदी एवं माल वाहनों की 1.8 फीसदी दर्ज की गई है।

 

दिल्ली की सड़कों पर चलने वाले कई वाहन पंजीकृत नहीं हैं

 

दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण कुछ विरोधाभास की ओर संकेत देते हैं परिवहन प्राधिकारी में पंजीकृत वाहनों से अधिक गाड़ियां दिल्ली की सड़कों पर चलती हैं। इसका मतलब है कि सड़कों पर चलने वाले कई वाहनों का पंजीकरण नहीं कराया जाता है।

 

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार अब दिल्ली के परिवहन विभाग द्वारा सड़क पर वाहनों की वास्तविक संख्या की गणना के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

 

जैसा कि हमने इस श्रृंखला के पहले भाग में बताया है कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने शहर में सम-विषम नंबर प्लेट फॉर्मूला तैयार किया है। इस फर्मूला से दिल्ली की सड़कों से करबी 9 मिलियन वाहन कम होने की उम्मीद है।

 

सरकार ने अब स्वीकार किया है कि यदि सड़कों पर कई मिलियन वाहन नहीं चल सकते तो बसों पारगमन अंतराल को भरने के लिए नई बसों की आवश्यकता होगी।

 

दिल्ली शहर के 578 मार्गों एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ( एनसीआर) के 18 मार्गों पर राज्य सरकार द्वारा संचालित डीटीसी की 4712 बसें दौड़ती हैं।

 
बसों का आकार एवं यात्री ले जाने की क्षमता
 

 
दिल्ली परिवहन निगम का प्रदर्शन
 

 

दिल्ली के बस सेवाओं के भाग के रुप में 457 बस मार्गों पर 1406 निजी बसें भी दौड़ती है।

 

वैश्विक मानकों की तुलना में दिल्ली की कार स्वामित्व कम, सड़कों पर होगी अधिक भीड़भाड़

 

इन आंकड़ों से  दिल्ली वालों के लिए कारों और दोपहिया वाहनों के लिए आत्मीयता स्पष्ट रुप से दिखती है लेकिन भारत में वाहन स्वामित्व वैश्विक मानकों से कम है ।

 

भारत में प्रति 1,000 लोगों पर कारों का स्वामित्व 19.5 है जबकि यह आंकड़े जापान के लिए 459, यूरोपीय संघ 454 , रूस 270 और ब्राजील के लिए 145 है।

 

इसी तरह, भारत के शहर दो-तीन पहिया वाहन से भरे हुए दिखाई दे सकते हैं लेकिन भारत में प्रति 1,000 लोगों पर 76 दो / तीन पहिया वाहनों के आंकड़े अन्य देशों की तुलना में कम है। गौर हो कि यही आंकड़े चीन के लिए 283 , इंडोनेशिया के लिए 281 और जापान के लिए 97 है।

 
भारत में वाहन स्वामित्व एवं विश्व भर में चुने हुए क्षेत्र, 2013
 

 

वर्ष 2000 से भारत में कार स्वामित्व में प्रत्येक वर्ष औसतन 19 फीसदी की वृद्धि हुई है, 2013 में एक अनुमान के अनुसार यह आंकड़े बढ़ कर 22.5 मिलियन हो सकते हैं।

 

श्रृंखला समाप्त। पहला भाग आप यहां पढ़ सकते हैं।

 

( मल्लापुर इंडियास्पेंड के साथ नीति विश्लेषक हैं। )

 

यह लेख मूलत: अंग्रेज़ी में 19 दिसंबर 2015 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 
_________________________________________________________________

 

“क्या आपको यह लेख पसंद आया ?” Indiaspend.com एक गैर लाभकारी संस्था है, और हम अपने इस जनहित पत्रकारिता प्रयासों की सफलता के लिए आप जैसे पाठकों पर निर्भर करते हैं। कृपया अपना अनुदान दें :

 

Views
3258

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *